The JPSC GS Paper 2 Exam 2026, conducted on 19 April 2026 by the Jharkhand Public Service Commission, has drawn significant attention from aspirants eager to assess their performance. Candidates are now looking for accurate answers and detailed explanations to cross-check their responses and estimate their scores.
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Also Check: JPSC GS Paper 1 2026 Answers with Detailed Explanation
JPSC GS Paper 2 2026 Answer Key with Detailed Explanation (19 April)
- झारखंड की राजकीय मछली कौन सी घोषित की गई है?
(A) देशी मांगूर (B) केवई (C) झींगा (D) कतला
उत्तर: (A) देशी मांगूर
व्याख्या: झारखंड सरकार ने देशी मांगूर (Clarias batrachus) को राज्य की राजकीय मछली घोषित किया है। यह मछली झारखंड की नदियों और तालाबों में प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। यह एक कैटफिश प्रजाति है जो औषधीय गुणों से भरपूर मानी जाती है। इसे स्थानीय आदिवासी समुदायों में भोजन और आजीविका के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Clarias batrachus है और यह मीठे पानी की मछली है।
- झारखंड बजट 2025-26 के अनुसार वाल्मीकि योजना प्रति माह आर्थिक सहायता कितनी देती है?
(A) रू. 2000 (B) रू. 3000 (C) रू. 4000 (D) रू. 5000
उत्तर: (C) रू. 4000
व्याख्या: झारखंड सरकार द्वारा वाल्मीकि योजना के अंतर्गत सफाई कर्मचारियों को प्रतिमाह ₹4000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह योजना सफाई कर्मचारियों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के उद्देश्य से शुरू की गई है। झारखंड बजट 2025-26 में इस राशि को बनाए रखा गया है। इस योजना से हाथ से मैला उठाने वाले कर्मचारियों को मुक्त कराने और उनके पुनर्वास का भी लक्ष्य है।
- ‘प्रेम में पेड़ होना’ पुस्तक के लेखक कौन हैं?
(A) जसिंता केरकेट्टा (B) शिव खेहर (C) दयामनी बारला (D) नंदा पांडे
उत्तर: (A) जसिंता केरकेट्टा
व्याख्या: ‘प्रेम में पेड़ होना’ पुस्तक की लेखिका जसिंता केरकेट्टा हैं, जो झारखंड की एक प्रसिद्ध आदिवासी कवयित्री और पत्रकार हैं। वे उराँव जनजाति से संबंधित हैं और अपनी कविताओं में आदिवासी जीवन, प्रकृति, विस्थापन और संघर्ष को प्रमुखता से उठाती हैं। उन्होंने हिंदी और नागपुरी भाषा में कई रचनाएं की हैं। उनकी कविताएं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हैं।
- भगवान बिरसा मुंडा एक्सीलेंस अवार्ड 2024 किन्हें दिया गया?
(A) डॉ. अर्पणा शर्मा (B) अनिल जैन (C) पुष्कर महतो (D) कार्तिक सेन
उत्तर: (C) पुष्कर महतो
व्याख्या: भगवान बिरसा मुंडा एक्सीलेंस अवार्ड 2024 पुष्कर महतो को प्रदान किया गया। यह पुरस्कार झारखंड में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है। भगवान बिरसा मुंडा झारखंड के महान आदिवासी नायक थे जिनकी जयंती 15 नवंबर को झारखंड स्थापना दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह पुरस्कार उनकी स्मृति में प्रेरणास्वरूप दिया जाता है।
- झारखंड बजट मुख्यतः किसमें खर्च होता है?
(A) ऊर्जा (B) पेंशन (C) सामाजिक कल्याण (D) शिक्षा
उत्तर: (C) सामाजिक कल्याण
व्याख्या: झारखंड राज्य के बजट का सर्वाधिक व्यय सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में किया जाता है। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्गों और महिलाओं के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं शामिल हैं। झारखंड एक जनजातीय बहुल राज्य होने के कारण सामाजिक सुरक्षा और कल्याण कार्यक्रमों पर विशेष जोर दिया जाता है। शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी महत्वपूर्ण व्यय होता है।
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- झारखंड की पहली महिला डीजीपी कौन बनीं?
(A) प्रिया दुबे (B) तदाशा मिश्रा (C) रीष्मा रमेशन (D) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (B) तदाशा मिश्रा
व्याख्या: तदाशा मिश्रा झारखंड की पहली महिला पुलिस महानिदेशक (DGP) बनीं। यह झारखंड के पुलिस इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। उनकी नियुक्ति ने राज्य में महिला सशक्तिकरण और पुलिस सेवा में महिलाओं की भूमिका को नई दिशा दी। वे एक वरिष्ठ IPS अधिकारी हैं जिन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।
- 2024 के मध्य तक झारखंड में कितने पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है?
(A) 46 (B) 27 (C) 38 (D) 51
उत्तर: (C) 38
व्याख्या: 2024 के मध्य तक झारखंड में 38 पंचायतों को टीबी (क्षय रोग) मुक्त घोषित किया जा चुका था। केंद्र सरकार के ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान के तहत राज्यों में टीबी उन्मूलन की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। झारखंड सरकार ने इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से जागरूकता और उपचार अभियान चलाए हैं। लक्ष्य है कि 2025 तक भारत को टीबी मुक्त किया जाए।
- मानकी मुंडा छात्रवृत्ति योजना किस वर्ष लागू हुई?
(A) 2022 (B) 2023 (C) 2024 (D) 2025
उत्तर: (C) 2024
व्याख्या: मानकी मुंडा छात्रवृत्ति योजना वर्ष 2024 में झारखंड सरकार द्वारा लागू की गई। यह योजना आदिवासी छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने हेतु शुरू की गई है। मानकी-मुंडा झारखंड की परंपरागत आदिवासी प्रशासनिक व्यवस्था के प्रमुख पदनाम हैं। इस योजना के नाम से ही स्पष्ट है कि यह आदिवासी समुदाय की शैक्षणिक उन्नति को समर्पित है।
- पलाश ब्रांड किसको मशक्त करने के लिए है?
(A) किसानों को (B) आदिवासी युवा (C) ग्रामीण और आदिवासी महिलाएं (D) बालिकाओं को
उत्तर: (C) ग्रामीण और आदिवासी महिलाएं
व्याख्या: पलाश ब्रांड झारखंड सरकार द्वारा ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (SHG) द्वारा निर्मित उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए शुरू किया गया है। झारखंड राज्य आजीविका प्रोत्साहन सोसाइटी (JSLPS) द्वारा यह ब्रांड संचालित किया जाता है। इसके तहत हस्तशिल्प, खाद्य उत्पाद, वनोपज आधारित सामग्री आदि बेची जाती हैं। इससे महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिला है।
- तेजस्विनी योजना को विश्व बैंक द्वारा कब स्वीकृति दी गई थी?
(A) 21 जून, 2016 (B) 20 मई, 2015 (C) 16 अप्रैल, 2017 (D) 21 सितंबर, 2018
उत्तर: (A) 21 जून, 2016
व्याख्या: तेजस्विनी योजना झारखंड की किशोरी बालिकाओं और युवा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई योजना है। इसे विश्व बैंक ने 21 जून 2016 को स्वीकृति प्रदान की थी। इस योजना के तहत 14-24 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं को शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य और आर्थिक अवसर प्रदान किए जाते हैं। यह मुख्यतः झारखंड के 17 जिलों में लागू की गई थी।
- आर्या योजना का क्या उद्देश्य है?
(A) महिलाओं को सशक्त करना (B) बालिका संरक्षण (C) युवाओं को कृषि की ओर आकर्षित करना (D) छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति
उत्तर: (C) युवाओं को कृषि की ओर आकर्षित करना
व्याख्या: ARYA (Attracting and Retaining Youth in Agriculture) योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में युवाओं को आकर्षित करना और उन्हें कृषि से जोड़े रखना है। झारखंड में इस योजना के तहत युवा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) की एक महत्वपूर्ण योजना है। इसका उद्देश्य कृषि में युवा पीढ़ी की रुचि बनाए रखना है।
- झारखंड में ‘फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान’ कब शुरू की गई?
(A) जुलाई 2021 (B) सितंबर 2022 (C) अगस्त 2021 (D) सितंबर 2020
उत्तर: (B) सितंबर 2022
व्याख्या: फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान झारखंड सरकार द्वारा उन महिलाओं के लिए शुरू किया गया जो हड़िया-दारू (पारंपरिक शराब) की बिक्री से जुड़ी थीं। इस योजना के तहत उन्हें वैकल्पिक आजीविका प्रदान की जाती है। फूलो मुर्मू और झानो मुर्मू झारखंड के स्वतंत्रता संग्राम की महान वीरांगनाएं थीं जिनके नाम पर यह योजना है। इसे सितंबर 2022 में झारखंड में आधिकारिक रूप से प्रारंभ किया गया।
- झारखंड में कितने औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण कार्यरत हैं?
(A) 5 (B) 4 (C) 3 (D) 2
उत्तर: (A) 5
व्याख्या: झारखंड में वर्तमान में 5 औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (Industrial Area Development Authorities – IADA) कार्यरत हैं। ये प्राधिकरण राज्य में औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे के निर्माण और निवेश आकर्षित करने के लिए काम करते हैं। प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में बोकारो, जमशेदपुर, रांची, धनबाद और आदित्यपुर शामिल हैं। JIADA (Jharkhand Industrial Area Development Authority) इनकी प्रमुख नियामक संस्था है।
- झारखंड में पहली औद्योगिक नीति की घोषणा कब हुई थी?
(A) 2000 (B) 2001 (C) 2002 (D) 2003
उत्तर: (B) 2001
व्याख्या: झारखंड राज्य के गठन (15 नवंबर 2000) के बाद वर्ष 2001 में पहली औद्योगिक नीति घोषित की गई। इस नीति का उद्देश्य राज्य के प्रचुर खनिज और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए औद्योगिक विकास को गति देना था। इसमें निवेश प्रोत्साहन, रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया गया था। बाद में 2012 और 2021 में नई औद्योगिक नीतियां भी लाई गईं।
- किस पंचवर्षीय योजना में बोकारो इस्पात कारखाने की स्थापना हुई?
(A) पहली (B) दूसरी (C) तीसरी (D) चौथी
उत्तर: (C) तीसरी
व्याख्या: बोकारो इस्पात संयंत्र की स्थापना तीसरी पंचवर्षीय योजना (1961-66) के दौरान की गई थी। यह सोवियत संघ की तकनीकी और वित्तीय सहायता से स्थापित किया गया था। इसका औपचारिक उद्घाटन 1972 में हुआ। बोकारो स्टील सिटी झारखंड के बोकारो जिले में स्थित है और यह भारत का सबसे बड़ा एकीकृत इस्पात संयंत्रों में से एक है। यह SAIL (Steel Authority of India Limited) के अंतर्गत आता है।
- हिंडाल्को एल्युमीनियम उद्योग कहाँ है?
(A) जमशेदपुर (B) सिंदरी (C) मुरी, राँची (D) धनबाद, पू. सिंहभूम
उत्तर: (C) मुरी, राँची
व्याख्या: हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड का एल्युमीनियम संयंत्र झारखंड के रांची जिले के मुरी में स्थित है। यह भारत के प्रमुख एल्युमीनियम उत्पादकों में से एक है। मुरी में बॉक्साइट के प्रसंस्करण से एल्युमिना और फिर एल्युमीनियम का उत्पादन किया जाता है। आदित्य बिरला समूह की यह कंपनी झारखंड के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (टिस्को) की स्थापना कब हुई थी?
(A) 1907 (B) 1905 (C) 1909 (D) 1908
उत्तर: (A) 1907
व्याख्या: टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO, अब Tata Steel) की स्थापना 1907 में जमशेदजी नुसरवानजी टाटा के सपने को साकार करते हुए उनके पुत्र दोरबजी टाटा ने की थी। यह एशिया का पहला एकीकृत इस्पात संयंत्र था। जमशेदपुर (झारखंड) में स्थापित यह संयंत्र 1911 में उत्पादन शुरू हुआ। इस शहर का नाम ही जमशेदपुर (टाटानगर) जमशेदजी टाटा के नाम पर पड़ा।
- झारखंड राज्य में पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास नीति किस वर्ष अधिसूचित की गई थी?
(A) 2005 (B) 2008 (C) 2010 (D) 2012
उत्तर: (B) 2008
व्याख्या: झारखंड राज्य में पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास नीति 2008 में अधिसूचित की गई थी। यह नीति औद्योगिक और विकास परियोजनाओं के कारण विस्थापित होने वाले व्यक्तियों और परिवारों के पुनर्वास के लिए बनाई गई। झारखंड में खनन और औद्योगिक परियोजनाओं के कारण बड़े पैमाने पर आदिवासी और अन्य वर्गों का विस्थापन हुआ है, जिसके समाधान के लिए यह नीति महत्वपूर्ण है।
- झारखंड में उर्वरक कारखाना कहाँ स्थित है?
(A) बोकारो (B) जमशेदपुर (C) सिंदरी (D) राँची
उत्तर: (C) सिंदरी
व्याख्या: झारखंड का प्रसिद्ध उर्वरक कारखाना सिंदरी (धनबाद जिले) में स्थित है। यह फर्टिलाइजर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) का संयंत्र था जिसकी स्थापना 1951 में हुई थी। यह भारत के पहले बड़े उर्वरक कारखानों में से एक था। आर्थिक कारणों से यह कारखाना बंद पड़ा था लेकिन इसे पुनः चालू करने के प्रयास हुए हैं। सिंदरी का कारखाना हिंदुस्तान उर्वरक और रसायन लिमिटेड द्वारा पुनर्स्थापित किया जा रहा है।
- झारखंड औद्योगिक नीति 2012 के अनुसार ‘PPP mode’ का क्या अर्थ है?
(A) प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (B) पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (C) पीपल प्राइवेट पार्टनरशिप (D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (B) पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप
व्याख्या: PPP का पूर्ण रूप Public Private Partnership (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) है। झारखंड औद्योगिक नीति 2012 में इस मॉडल को औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास के लिए अपनाया गया। इसमें सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर परियोजनाओं में निवेश और संचालन करते हैं। यह मॉडल सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डे, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास में विश्वव्यापी रूप से प्रचलित है।
- पुनर्वास अनुदान राशि (तत्काल) कितनी है?
(A) ₹2 लाख (B) ₹2.5 लाख (C) ₹3 लाख (D) ₹1.5 लाख
उत्तर: (A) ₹2 लाख
व्याख्या: झारखंड की पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत तत्काल पुनर्वास अनुदान राशि ₹2 लाख निर्धारित की गई है। यह राशि विस्थापित परिवारों को तत्काल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए दी जाती है। इसके अतिरिक्त दीर्घकालिक पुनर्वास के लिए अन्य सहायता भी प्रदान की जाती है। झारखंड में खनन और औद्योगिक परियोजनाओं से विस्थापित परिवारों को यह लाभ दिया जाता है।
- पुनर्वास नीति के अंतर्गत जिला स्तर पर पुनर्वास समिति का अध्यक्ष कौन होता है?
(A) पुलिस अधीक्षक (B) जिला दंडाधिकारी (C) ग्राम प्रधान (D) मुख्य सचिव
उत्तर: (B) जिला दंडाधिकारी
व्याख्या: झारखंड की पुनर्वास नीति के अंतर्गत जिला स्तरीय पुनर्वास समिति का अध्यक्ष जिला दंडाधिकारी (Deputy Commissioner/District Magistrate) होता है। जिला दंडाधिकारी जिले का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी होता है और वह विस्थापितों के पुनर्वास से संबंधित निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस समिति में अन्य विभागों के अधिकारी और जन प्रतिनिधि भी होते हैं।
- झारखंड में विस्थापन और पुनर्वास के मामलों में ‘आर्थिक क्षेत्र’ का गठन करने का क्या उद्देश्य है?
(A) औद्योगिक निवेश को हतोत्साहित करना (B) औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करना (C) कृषि योग्य भूमि का अधिग्रहण करना (D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (B) औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करना
व्याख्या: झारखंड में विस्थापन और पुनर्वास के संदर्भ में ‘आर्थिक क्षेत्र’ (Economic Zone) के गठन का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करना है। इन क्षेत्रों में उद्योगों को विशेष सुविधाएं और छूट प्रदान की जाती हैं ताकि निवेश आकर्षित हो सके। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और विस्थापितों का उचित पुनर्वास हो। यह राज्य के संतुलित विकास के लिए आवश्यक है।
- झारखंड के किस खिलाड़ी को 2024 में अर्जुन पुरस्कार मिला?
(A) दीपक मंडल (B) सलीमा टेटे (C) माइकल किंडो (D) असुंता लकड़ा
उत्तर: (B) सलीमा टेटे
व्याख्या: झारखंड की हॉकी खिलाड़ी सलीमा टेटे को 2024 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वे भारतीय महिला हॉकी टीम की स्टार मिडफील्डर हैं और झारखंड के सिमडेगा जिले से आती हैं। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय हॉकी में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। अर्जुन पुरस्कार भारत सरकार द्वारा खिलाड़ियों को दिया जाने वाला प्रतिष्ठित पुरस्कार है।
- शहीद निर्मल महतो स्टेडियम कहाँ है?
(A) बोकारो (B) रामगढ़ (C) दुमका (D) जमशेदपुर
उत्तर: (D) जमशेदपुर
व्याख्या: शहीद निर्मल महतो स्टेडियम जमशेदपुर (झारखंड) में स्थित है। निर्मल महतो झारखंड आंदोलन के एक महत्वपूर्ण नेता थे जिन्होंने अलग झारखंड राज्य की स्थापना के लिए संघर्ष किया। उनकी स्मृति में इस स्टेडियम का नाम रखा गया है। जमशेदपुर का यह स्टेडियम खेल प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण है।
- चौथी दक्षिण एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 का शुभंकर क्या था?
(A) मोर (B) दलमा (C) किला (D) कोयल
उत्तर: (B) दलमा
व्याख्या: चौथी दक्षिण एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 का शुभंकर ‘दलमा’ था, जो झारखंड के दलमा वन्यजीव अभयारण्य के नाम पर रखा गया। यह प्रतियोगिता झारखंड में आयोजित की गई थी। दलमा अभयारण्य झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में स्थित है और हाथियों के लिए प्रसिद्ध है। यह नाम झारखंड की प्राकृतिक धरोहर का प्रतिनिधित्व करता है।
- रूपा रानी तिर्की और लवली चौबे का संबंध किस खेल से है?
(A) वुशु (B) लॉन बॉल (C) पेंटाथलॉन (D) तीरंदाजी
उत्तर: (B) लॉन बॉल
व्याख्या: रूपा रानी तिर्की और लवली चौबे झारखंड की प्रसिद्ध लॉन बॉल खिलाड़ी हैं। लॉन बॉल एक आउटडोर खेल है जिसमें घास के मैदान पर गेंद को लक्ष्य के पास पहुंचाना होता है। इन दोनों खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है। 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय महिला लॉन बॉल टीम ने गोल्ड मेडल जीता था जिसमें ये शामिल थीं।
- उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेल में झारखंड ने कुल कितने पदक जीते?
(A) 7 (B) 18 (C) 25 (D) 13
उत्तर: (C) 25
व्याख्या: 38वें राष्ट्रीय खेल 2025 में देहरादून, उत्तराखंड में आयोजित हुए जिसमें झारखंड ने कुल 25 पदक जीते। झारखंड के खिलाड़ियों ने तीरंदाजी, हॉकी, कुश्ती, एथलेटिक्स और अन्य खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। झारखंड ने स्वर्ण, रजत और कांस्य पदकों का यह संग्रह किया। राज्य में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों का यह परिणाम है।
- कोपेन की जलवायु विभाजन योजना के अनुसार झारखंड में कौन सा जलवायु प्रदेश उपलब्ध है?
(A) As और Amw (B) Cwg और Aw (C) BShw और BWhw (D) E और Et
उत्तर: (B) Cwg और Aw
व्याख्या: कोपेन की जलवायु वर्गीकरण प्रणाली के अनुसार झारखंड में दो प्रकार की जलवायु पाई जाती है — Cwg (मानसूनी जलवायु, शुष्क सर्दी के साथ) और Aw (उष्णकटिबंधीय आर्द्र और शुष्क जलवायु)। Cwg जलवायु में गर्मी में अधिकतम वर्षा और सर्दियों में शुष्कता होती है। Aw जलवायु में वर्षा ऋतु और शुष्क ऋतु स्पष्ट रूप से अलग होती हैं। झारखंड की अधिकांश भूमि इन्हीं जलवायु क्षेत्रों में आती है।
- निम्न में से कौन उष्ण जलस्रोत झारखंड में मौजूद है?
(A) चावल पानी (B) तेतुलिया (C) धूनीपानी (D) बबेहा
उत्तर: (B) तेतुलिया
व्याख्या: तेतुलिया झारखंड के प्रसिद्ध उष्ण जलस्रोतों (Hot Springs) में से एक है। झारखंड में कई उष्ण जलस्रोत पाए जाते हैं जो भूगर्भीय ऊष्मा के कारण होते हैं। सूरजकुंड (हजारीबाग), तेतुलिया और अन्य उष्ण जलस्रोत पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इन जलस्रोतों का पानी गर्म होने के कारण इनका औषधीय महत्व भी माना जाता है। झारखंड की भूगर्भीय संरचना इन जलस्रोतों के निर्माण के लिए उत्तरदायी है।
- झारखंड के भौगर्भिक इतिहास में कौन शांत काल के नाम से जाना जाता है?
(A) इयोसीन, ओलिगोसीन, मायोसीन काल (B) ट्रियासिक, जुरैशिक, क्रिटेशियस काल (C) कैम्ब्रियन, ओडोंविसियन, सिल्यूरियन काल (D) प्लायोसीन, प्लीस्टोसीन, होलोसीन काल
उत्तर: (D) प्लायोसीन, प्लीस्टोसीन, होलोसीन काल
व्याख्या: झारखंड के भौगर्भिक इतिहास में प्लायोसीन, प्लीस्टोसीन और होलोसीन काल को शांत काल (Calm Period) के रूप में जाना जाता है। इस काल में झारखंड क्षेत्र में कोई विशेष भूगर्भीय हलचल नहीं हुई। छोटानागपुर पठार प्राचीन कैम्ब्रियन-पूर्व काल की चट्टानों से निर्मित है। इस पठार की भौगर्भिक स्थिरता ने इसे खनिज संसाधनों से समृद्ध बनाया है।
- दामोदर नदी घाटी के निर्माण काल के संबंध में सही विकल्प बताइए।
(A) कैम्ब्रियन काल (B) डिवोनियन से परमियन काल (C) जुरैशिक काल (D) ओलिगोसीन काल
उत्तर: (B) डिवोनियन से परमियन काल
व्याख्या: दामोदर नदी घाटी का निर्माण मुख्यतः डिवोनियन से परमियन काल के बीच हुआ। यह घाटी एक भ्रंश घाटी (Rift Valley) है जो टेक्टोनिक गतिविधियों के कारण बनी। दामोदर नदी घाटी कोयला भंडारों के लिए प्रसिद्ध है जो कार्बोनिफेरस और पर्मियन काल के गोंडवाना समूह की चट्टानों में पाए जाते हैं। यह क्षेत्र DVC (Damodar Valley Corporation) परियोजना के लिए महत्वपूर्ण है।
- निम्न अनुसंधान संस्थानों की स्थापना काल क्रम के अनुसार सही अनुक्रम बताइए।
- i) भारतीय लाख अनुसंधान मंस्थान, राँची ii) केन्द्रीय ईंधन अनुसंधान संस्थान, जलगोड़ा iii) केन्द्रीय खनन अनुसंधान केन्द्र, धनबाद
(A) (i), (ii), (iii) (B) (ii), (iii), (i) (C) (iii), (i), (ii) (D) (ii), (i), (iii)
उत्तर: (D) (ii), (i), (iii)
व्याख्या: स्थापना क्रम के अनुसार — केन्द्रीय ईंधन अनुसंधान संस्थान (CFRI), जलगोड़ा की स्थापना सबसे पहले 1946 में हुई। भारतीय लाख अनुसंधान संस्थान (ILRI), रांची की स्थापना 1924 में हुई थी, जो वास्तव में सबसे पुरानी है। केंद्रीय खनन अनुसंधान संस्थान (CMRI), धनबाद की स्थापना 1956 में हुई। परीक्षा की दृष्टि से अधिकृत उत्तर (D) है।
- झारखंड क्षेत्र में विश्वविद्यालयों की स्थापना काल क्रम के अनुसार सही क्रम बताइए।
- i) रांची विश्वविद्यालय, रांची ii) बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची iii) निलम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय, डालटेनगंज iv) सिद्धो-कान्हू विश्वविद्यालय, दुमका
(A) (i), (ii), (iv), (iii) (B) (i), (ii), (iii), (iv) (C) (iv), (i), (ii), (iii) (D) (ii), (iii), (iv), (i)
उत्तर: (B) (i), (ii), (iii), (iv)
व्याख्या: स्थापना क्रम के अनुसार — रांची विश्वविद्यालय 1960 में, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय 1981 में, निलम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय 2009 में, और सिद्धो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका 1992 में स्थापित हुआ। परीक्षा के दृष्टिकोण से अधिकृत उत्तर (B) है जो अनुमानित कालक्रम को दर्शाता है।
- झारखंड क्षेत्र में स्थापना काल के अनुसार उद्धृत महाविद्यालयों का सही क्रम क्या है?
- i) GLA महाविद्यालय, डालटेनगंज ii) संत कोलम्बस महाविद्यालय, हजारीबाग iii) राँची कॉलेज, राँची iv) संत जोवियर्स महाविद्यालय, राँची
(A) (i), (ii), (iii), (iv) (B) (ii), (iii), (iv), (i) (C) (iii), (iv), (i), (ii) (D) (iv), (i), (ii), (iii)
उत्तर: (B) (ii), (iii), (iv), (i)
व्याख्या: स्थापना कालक्रम के अनुसार — संत कोलम्बस महाविद्यालय, हजारीबाग (1899) सबसे पुराना है। इसके बाद रांची कॉलेज, रांची (1926), फिर संत जोवियर्स महाविद्यालय, रांची (1944), और सबसे अंत में GLA महाविद्यालय, डालटेनगंज की स्थापना हुई। इस क्रम से (B) सही उत्तर है।
- वर्तमान में झारखंड में वन की प्रतिशत सीमा क्या है?
(A) 10 से 20 प्रतिशत (B) 20 से 30 प्रतिशत (C) 30 से 40 प्रतिशत (D) 40 से 50 प्रतिशत
उत्तर: (B) 20 से 30 प्रतिशत
व्याख्या: झारखंड में वर्तमान में कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 29-33 प्रतिशत वनाच्छादित है। भारत वन स्थिति रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में वन क्षेत्र 20 से 30 प्रतिशत के बीच है। झारखंड में घने वन, मध्यम घने वन और खुले वन तीनों प्रकार पाए जाते हैं। वन क्षेत्र की दृष्टि से झारखंड छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और उड़ीसा के बाद आता है।
- झारखंड में सर्वाधिक वन क्षेत्र कौन सा है?
(A) आरक्षित वन (B) सुरक्षित वन (C) अवर्गीकृत वन (D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (C) अवर्गीकृत वन
व्याख्या: झारखंड में वन क्षेत्र के अंतर्गत अवर्गीकृत वन (Unclassified Forest) का क्षेत्रफल सर्वाधिक है। आरक्षित वन (Reserved Forest) और सुरक्षित वन (Protected Forest) की तुलना में अवर्गीकृत वन अधिक विस्तृत हैं। अवर्गीकृत वन वे होते हैं जो किसी भी श्रेणी में आधिकारिक रूप से वर्गीकृत नहीं हैं। इनका प्रबंधन राज्य सरकार करती है और इन पर स्थानीय समुदायों के पारंपरिक अधिकार भी होते हैं।
- बिहार विभाजन के बाद निम्न में से किन दो जनजातियों को झारखंड में विलय कर दिया गया?
(A) गोंड और बैगा (B) बिरजिया और बथुड़ी (C) सबर और हिल खड़िया (D) माल पहाड़िया और सबर
उत्तर: (A) गोंड और बैगा
व्याख्या: बिहार के विभाजन और झारखंड राज्य के निर्माण (2000) के बाद गोंड और बैगा जनजातियों को झारखंड की अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल किया गया। गोंड जनजाति मध्य भारत की एक प्रमुख जनजाति है जो झारखंड के कुछ हिस्सों में भी निवास करती है। बैगा जनजाति भी मध्य और पूर्वी भारत में पाई जाती है। इन जनजातियों को विशेष आदिम जनजाति (PVTG) की श्रेणी में रखा गया है।
- सिंहभूम किस खनिज का अग्रणी उत्पादक है?
(A) अभ्रक (B) कोयला (C) लौह अयस्क (D) मैंगनीज
उत्तर: (C) लौह अयस्क
व्याख्या: सिंहभूम (झारखंड) लौह अयस्क का भारत में प्रमुख उत्पादक जिला है। पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम दोनों जिलों में लौह अयस्क के विशाल भंडार पाए जाते हैं। सिंहभूम की चट्टानें अत्यंत प्राचीन (Archaean) हैं और लौह अयस्क से समृद्ध हैं। टाटा स्टील (जमशेदपुर) और अन्य इस्पात उद्योगों को यहीं से लौह अयस्क की आपूर्ति होती है।
- झारखंड का प्रथम और तैरता हुआ सौर ऊर्जा संयंत्र कहाँ अवस्थित है?
(A) रांची (B) धनबाद (C) जमशेदपुर (D) दुमका
उत्तर: (D) दुमका
व्याख्या: झारखंड का पहला और तैरता हुआ (Floating) सौर ऊर्जा संयंत्र दुमका जिले में स्थित है। यह जल निकाय के ऊपर तैरते हुए सौर पैनलों से निर्मित है। फ्लोटिंग सोलर प्लांट भूमि की कमी वाले क्षेत्रों में जल निकायों का उपयोग कर सौर ऊर्जा उत्पादन का बेहतर विकल्प है। यह न केवल ऊर्जा उत्पन्न करता है बल्कि जल वाष्पीकरण को भी कम करता है।
- दामोदर घाटी निगम परियोजना अंतर्गत सर्वप्रथम किस बांध का निर्माण किया गया था?
(A) मैथन बांध (B) तेनुघाट बांध (C) कोनार बांध (D) तिलैया बांध
उत्तर: (A) मैथन बांध
व्याख्या: दामोदर घाटी निगम (DVC) परियोजना के अंतर्गत सर्वप्रथम मैथन बांध का निर्माण किया गया था। DVC की स्थापना 1948 में हुई और इसे अमेरिका के Tennessee Valley Authority (TVA) की तर्ज पर बनाया गया। मैथन बांध झारखंड के धनबाद जिले में बराकर नदी पर स्थित है। इसका निर्माण 1950 के दशक में हुआ। DVC की परियोजनाओं ने झारखंड और पश्चिम बंगाल में बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और बिजली उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- दामोदर घाटी परियोजना की संकल्पना प्रशासन के मस्तिष्क में कब अंकुरित हुई?
(A) 1940 (B) 1943 (C) 1947 (D) 1956
उत्तर: (C) 1947
व्याख्या: दामोदर घाटी परियोजना की संकल्पना 1943-44 में आई थी जब अंग्रेज इंजीनियर W. L. Voorduin ने एक व्यापक योजना तैयार की। परंतु इसे प्रशासनिक और कानूनी रूप से 1947 में आकार मिला। DVC अधिनियम 1948 में पारित किया गया। इस परियोजना का उद्देश्य दामोदर नदी की बाढ़ को नियंत्रित करना, सिंचाई, जल विद्युत उत्पादन और नदी का जल परिवहन में उपयोग करना था।
- एकीकृत बिहार/झारखंड में उग्रवाद की शुरुआत हुई थी — किस जिले से?
(A) जहानाबाद (B) अरवल (C) पूर्णिया (D) पीपरा
उत्तर: (A) जहानाबाद
व्याख्या: एकीकृत बिहार/झारखंड में नक्सल उग्रवाद की शुरुआत जहानाबाद जिले से मानी जाती है। 1960-70 के दशक में नक्सलवादी आंदोलन बिहार के कुछ जिलों से शुरू होकर झारखंड क्षेत्र में फैला। जहानाबाद में जातीय और वर्गीय संघर्ष ने उग्रवाद को पनपने का माहौल दिया। बाद में यह आंदोलन झारखंड के जंगलों में फैल गया और लाल गलियारे (Red Corridor) का हिस्सा बना।
- झारखंड को निम्न तीन भूकम्पीय क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है, कौन विकल्प सही है?
(A) 1) दामोदर घाटी क्षेत्र – अति अल्प प्रभावित क्षेत्र, 2) उत्तरी झारखंड – अल्प प्रभावित, 3) दक्षिणी झारखंड – मध्यम प्रभावित (B) 1) दामोदर घाटी क्षेत्र – अल्प प्रभावित, 2) उत्तरी झारखंड – मध्यम प्रभावित, 3) दक्षिणी झारखंड – अति अल्प प्रभावित (C) 1) दामोदर घाटी क्षेत्र – मध्यम प्रभावित, 2) उत्तरी झारखंड – अति अल्प प्रभावित, 3) दक्षिणी झारखंड – अल्प प्रभावित (D) 1) दामोदर घाटी क्षेत्र – अल्प प्रभावित, 2) उत्तरी झारखंड – अति अल्प प्रभावित, 3) दक्षिणी झारखंड – मध्यम प्रभावित
उत्तर: (D)
व्याख्या: झारखंड को तीन भूकंपीय क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। दामोदर घाटी क्षेत्र अल्प प्रभावित है क्योंकि यहां खनन गतिविधियों से कभी-कभी हल्के भूकंप आते हैं। उत्तरी झारखंड अति अल्प प्रभावित है। दक्षिणी झारखंड (सिंहभूम क्षेत्र) मध्यम प्रभावित है। झारखंड का अधिकांश क्षेत्र BIS के अनुसार Seismic Zone II और III में आता है। प्राचीन क्रिस्टलीय चट्टानों के कारण यहां भूकंप का खतरा अपेक्षाकृत कम है।
- मृदा प्रबंधन के लिए सही क्रिया कलाप बताइए।
(A) मृदा प्रबंधन में निम्न क्रियाओं में ध्यान दें: 1) मृदा ताप 2) मृदा आद्रता 3) मृदा हवा (B) मृदा प्रबंधन में निम्न क्रियाओं में ध्यान दें: 1) मृदा अम्लता 2) मृदा उत्पादकता 3) मृदा अपरदन (C) मृदा प्रबंधन में निम्न क्रियाओं में ध्यान दें: 1) गहन जुताई 2) एक फसली स्थिति बनाए रखना 3) अत्याधिक खाद देना (D) मृदा प्रबंधन के लिए निम्न क्रियाओं में ध्यान अपेक्षित है: 1) परती रखना 2) फसल अपशिष्ट जलाना 3) मृदा उपचार
उत्तर: (B)
व्याख्या: मृदा प्रबंधन में मुख्यतः मृदा अम्लता (pH), मृदा उत्पादकता और मृदा अपरदन पर ध्यान देना आवश्यक है। मृदा की अम्लता को नियंत्रित करके उसकी उर्वरता बढ़ाई जा सकती है। मृदा उत्पादकता बनाए रखने के लिए जैव खाद, हरी खाद और फसल चक्र अपनाना जरूरी है। मृदा अपरदन रोकने के लिए वृक्षारोपण और बाँध निर्माण किए जाते हैं। विकल्प (C) और (D) में दी गई गतिविधियां मृदा के लिए हानिकारक हैं।
- झारखंड के किस जिले में अपेक्षाकृत अधिक मृदाक्षरण होता है?
(A) पश्चिम सिंहभूम (B) सराइकेला (C) धनबाद (D) कोडरमा
उत्तर: (C) धनबाद
व्याख्या: धनबाद जिले में अत्यधिक खनन गतिविधियों, वन कटाई और कोयला खनन के कारण मृदाक्षरण (Soil Erosion) सर्वाधिक होता है। धनबाद कोयला खनन के लिए प्रसिद्ध है और खनन से भूमि की ऊपरी उर्वर परत हट जाती है जिससे मृदाक्षरण बढ़ता है। इसके अलावा, धनबाद में झरिया कोयला क्षेत्र में भूमिगत आग की समस्या भी मृदा को प्रभावित करती है।
- झारखंड में विगत पाँच वर्षों से परती भूमि की सही स्थिति क्या है?
(A) परती भूमि का प्रतिशत बढ़ रहा है। (B) परती भूमि का प्रतिशत घट रहा है। (C) परती भूमि का प्रतिशत अपरिवर्तित है। (D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (A) परती भूमि का प्रतिशत बढ़ रहा है।
व्याख्या: झारखंड में पिछले पांच वर्षों में परती भूमि (Fallow Land) का प्रतिशत बढ़ता जा रहा है। इसके प्रमुख कारण हैं — कृषि से ग्रामीण युवाओं का पलायन, सिंचाई सुविधाओं की कमी, भूमि विवाद और जलवायु परिवर्तन। झारखंड में वर्षा आधारित खेती अधिक है, जिसके कारण सूखे वर्षों में परती भूमि की मात्रा बढ़ जाती है। सरकार इसे कम करने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है।
- केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 2019-2021 की रिपोर्ट में जैविक ऑक्सीजन माँग के आधार पर निम्न में से कौन नदी सर्वाधिक प्रदूषित है?
(A) स्वर्णरेखा नदी (B) खरकई नदी (C) दामोदर नदी (D) जुमार नदी
उत्तर: (A) स्वर्णरेखा नदी
व्याख्या: CPCB की 2019-2021 रिपोर्ट के अनुसार जैविक ऑक्सीजन माँग (BOD) के आधार पर झारखंड में स्वर्णरेखा नदी सर्वाधिक प्रदूषित पाई गई। स्वर्णरेखा नदी रांची के पास से निकलती है और उद्योगों व शहरी कचरे के कारण यह अत्यधिक प्रदूषित हो गई है। BOD जल में कार्बनिक पदार्थों को विघटित करने के लिए जीवाणुओं द्वारा उपयोग की जाने वाली ऑक्सीजन की मात्रा है। अधिक BOD का अर्थ है अधिक प्रदूषण।
- झारखंड में किस फल का उत्पादन क्षेत्रफल अपेक्षाकृत अधिक है?
(A) अमरूद (B) केला (C) आम (D) कटहल
उत्तर: (C) आम
व्याख्या: झारखंड में आम का उत्पादन क्षेत्रफल सर्वाधिक है। राज्य के संथाल परगना, पलामू और हजारीबाग जिलों में आम के बागान बड़े पैमाने पर हैं। झारखंड का ‘मल्दा आम’ और ‘गुलाबी आम’ काफी प्रसिद्ध हैं। झारखंड में उगाए जाने वाले अन्य प्रमुख फलों में लीची, अमरूद, कटहल और केला भी शामिल हैं। झारखंड सरकार फल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को सहायता प्रदान करती है।
- 2011 की जनगणनानुसार झारखंड में नगरीकरण दर के सही आँकड़े को चिन्हित करें।
(A) 20.05 प्रतिशत (B) 21.06 प्रतिशत (C) 24.05 प्रतिशत (D) 25.06 प्रतिशत
उत्तर: (C) 24.05 प्रतिशत
व्याख्या: 2011 की जनगणना के अनुसार झारखंड में नगरीकरण दर 24.05 प्रतिशत थी, जो राष्ट्रीय औसत (31.16%) से कम है। झारखंड मुख्यतः ग्रामीण राज्य है जहां अधिकांश जनसंख्या गांवों में निवास करती है। प्रमुख नगरीय केंद्रों में रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो और देवघर शामिल हैं। उद्योगों के विकास के साथ नगरीकरण की दर धीरे-धीरे बढ़ रही है।
- क्रमश: 2011 और 2022 जनगणनानुसार झारखंड की साक्षरता वृद्धि के सही आँकड़े को चिन्हित करें।
(A) 64.41 प्रतिशत और 70.00 प्रतिशत (B) 66.41 प्रतिशत और 79.3 प्रतिशत (C) 69.30 प्रतिशत और 85.00 प्रतिशत (D) 79.00 प्रतिशत और 85.00 प्रतिशत
उत्तर: (A) 64.41 प्रतिशत और 70.00 प्रतिशत
व्याख्या: 2011 की जनगणना के अनुसार झारखंड की साक्षरता दर 64.41 प्रतिशत थी जो राष्ट्रीय औसत (74%) से कम थी। 2022 की जनगणना (NFHS-5 और अन्य सर्वेक्षणों के अनुमान) के अनुसार यह लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंची है। झारखंड में महिला और पुरुष साक्षरता दर में अभी भी अंतर है। राज्य सरकार साक्षरता बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से प्रयास कर रही है।
- झारखंड में 2011 की गणनानुसार सही साक्षरता दर चिन्हित करें।
(A) 64.41 प्रतिशत (B) 65.40 प्रतिशत (C) 66.41 प्रतिशत (D) 69.41 प्रतिशत
उत्तर: (A) 64.41 प्रतिशत
व्याख्या: 2011 की जनगणना के अनुसार झारखंड की कुल साक्षरता दर 64.41 प्रतिशत थी। इसमें पुरुष साक्षरता 74.84 प्रतिशत और महिला साक्षरता 53.56 प्रतिशत थी। झारखंड की साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत 74.04% से काफी कम है। साक्षरता में पुरुष और महिला के बीच लगभग 21 प्रतिशत का अंतर था जो चिंताजनक है। सरकार ने इसे सुधारने के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और अन्य कार्यक्रम चलाए हैं।
- क्रमश: 1901 एवं 2011 जनगणना काल में झारखंड की जनजातीय जनसंख्या वृद्धि संबंधी कौन सा आँकड़ा सही है?
(A) 10.09 लाख और 90.50 लाख (B) 18.29 लाख और 86.45 लाख (C) 15.19 लाख और 87.46 लाख (D) 16.15 लाख और 96.45 लाख
उत्तर: (C) 15.19 लाख और 87.46 लाख
व्याख्या: 1901 की जनगणना के अनुसार झारखंड क्षेत्र में जनजातीय जनसंख्या लगभग 15.19 लाख थी जो 2011 में बढ़कर 87.46 लाख हो गई। यह वृद्धि जनसंख्या वृद्धि दर, सीमाओं में परिवर्तन और जनगणना पद्धति में बदलाव के कारण हुई। 2011 की जनगणना के अनुसार झारखंड की कुल जनसंख्या का लगभग 26.2% आदिवासी हैं। झारखंड में 32 मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजातियां हैं।
- क्रमश: 1901 एवं 2011 जनगणना काल में झारखंड की जनसंख्या वृद्धि संबंधी कौन सा आँकड़ा सही है?
(A) 60.68 लाख और 329.88 लाख (B) 50.56 लाख और 330.09 लाख (C) 56.52 लाख और 390.10 लाख (D) 15.00 लाख और 395.20 लाख
उत्तर: (A) 60.68 लाख और 329.88 लाख
व्याख्या: 1901 की जनगणना के अनुसार झारखंड क्षेत्र की कुल जनसंख्या लगभग 60.68 लाख थी जो 2011 में बढ़कर 329.88 लाख (3.29 करोड़) हो गई। यह वृद्धि 110 वर्षों में लगभग 5 गुना है। 2011 में झारखंड की जनसंख्या घनत्व 414 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था। झारखंड की जनसंख्या वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से थोड़ी अधिक रही है।
- झारखंड में ‘मुख्यमंत्री जन वन योजना’ संकल्पना की शुरुआत कब की गयी?
(A) 2012-13 (B) 2015-16 (C) 2021-22 (D) 2024-25
उत्तर: (B) 2015-16
व्याख्या: झारखंड में ‘मुख्यमंत्री जन वन योजना’ की शुरुआत 2015-16 में की गई। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में वृक्षारोपण को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों को वन प्रबंधन में भागीदार बनाना है। इसके तहत किसानों और ग्रामीणों को अपनी भूमि पर पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहन और आर्थिक सहायता दी जाती है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की आजीविका में भी सुधार होता है।
- झारखंड में कितने राष्ट्रीय उद्यान हैं?
(A) 1 (B) 2 (C) 3 (D) 4
उत्तर: (A) 1
व्याख्या: झारखंड में केवल एक राष्ट्रीय उद्यान है — बेतला राष्ट्रीय उद्यान (Betla National Park)। यह पलामू जिले में स्थित है और 1986 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला। बेतला पलामू टाइगर रिजर्व का हिस्सा है जो प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत आता है। यहां बाघ, हाथी, तेंदुआ, गौर और विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीव पाए जाते हैं। इसका क्षेत्रफल 233.73 वर्ग किलोमीटर है।
- झारखंड में कितने अभयारण्य हैं?
(A) 9 (B) 10 (C) 11 (D) 12
उत्तर: (C) 11
व्याख्या: झारखंड में वर्तमान में 11 वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries) हैं। प्रमुख अभयारण्यों में दलमा (पूर्वी सिंहभूम), उधवा झील पक्षी अभयारण्य (साहिबगंज), पारसनाथ (गिरिडीह), हजारीबाग, महुआडांर (लातेहार), पलामू, तोपचांची, कोडरमा, लावालोंग, गौतम बुद्ध और सिंहभूम शामिल हैं। ये अभयारण्य झारखंड की जैव विविधता को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- झारखंड में वन का प्रकार चिन्हित करें।
(A) उष्ण कटिबंधीय वन (B) उपोष्ण कटिबंधीय वन (C) शीतोष्ण कटिबंधीय वन (D) अल्पाइन शीतोष्ण कटिबंधीय वन
उत्तर: (A) उष्ण कटिबंधीय वन
व्याख्या: झारखंड में उष्ण कटिबंधीय (Tropical) वन पाए जाते हैं। भौगोलिक स्थिति और जलवायु के अनुसार झारखंड में मुख्यतः उष्ण कटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन (Tropical Moist Deciduous Forests) और उष्ण कटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन (Tropical Dry Deciduous Forests) पाए जाते हैं। साल (Shorea robusta) यहां का सबसे प्रमुख वृक्ष है। अन्य वृक्षों में महुआ, पलाश, आसन, बांस और तेंदू प्रमुख हैं।
- ‘नागपुरी फाग शतक’ का लेखक कौन है?
(A) दृकपाल देवघरिया (B) घासीराम (C) उपेन्द्रनाथ (D) शीतल प्रसाद
उत्तर: (B) घासीराम
व्याख्या: ‘नागपुरी फाग शतक’ नागपुरी भाषा की एक प्रमुख साहित्यिक रचना है जिसके लेखक घासीराम हैं। नागपुरी भाषा झारखंड की प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं में से एक है जो मुख्यतः छोटानागपुर क्षेत्र में बोली जाती है। फाग होली के अवसर पर गाए जाने वाले लोकगीत हैं। इस रचना में फाग शैली के 100 गीत संकलित हैं जो नागपुरी साहित्य की महत्वपूर्ण धरोहर हैं।
- निम्नलिखित में से किस जनजातीय समुदाय के देवताओं में ‘धर्मेश’ नामक देवता शामिल है?
(A) उराँव (B) संथाल (C) मुण्डा (D) चेरो
उत्तर: (A) उराँव
व्याख्या: ‘धर्मेश’ या ‘धर्मी’ उराँव जनजाति के सर्वोच्च देवता हैं। उराँव जनजाति का मानना है कि धर्मेश सृष्टिकर्ता और सर्वशक्तिमान ईश्वर हैं। उराँव झारखंड की दूसरी सबसे बड़ी जनजाति है और मुख्यतः रांची, गुमला, लोहरदगा और सिमडेगा जिलों में निवास करती है। उराँव की भाषा ‘कुड़ुख’ है जो द्रविड़ भाषा परिवार से संबंधित है।
- 1983 में झारखंड मुक्ति मोर्चा कितने गुटों में बंट गया था?
(A) चार (B) दो (C) तीन (D) पाँच
उत्तर: (B) दो
व्याख्या: 1983 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) दो गुटों में विभाजित हो गया था। एक गुट शिबू सोरेन के नेतृत्व में था और दूसरा गुट ए.के. राय के नेतृत्व में। JMM की स्थापना 1972 में शिबू सोरेन, बिनोद बिहारी महतो और ए.के. राय ने मिलकर की थी। इस विभाजन ने झारखंड आंदोलन को कमजोर किया लेकिन आंदोलन जारी रहा और अंततः 2000 में झारखंड राज्य बना।
- ‘आदिवासी पंचशील’ का प्रवर्तक निम्नलिखित में से कौन थे?
(A) लाल बहादुर शास्त्री (B) इंदिरा गाँधी (C) दीन दयाल उपाध्याय (D) जबाहरलाल नेहरू
उत्तर: (D) जवाहरलाल नेहरू
व्याख्या: ‘आदिवासी पंचशील’ के प्रवर्तक भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे। उन्होंने 1958 में आदिवासी नीति के पाँच सिद्धांत (पंचशील) प्रतिपादित किए। ये सिद्धांत थे — आदिवासियों के अपनी गति से विकास का अधिकार, उनकी परंपराओं का सम्मान, उनकी भूमि की सुरक्षा, आदिवासी लोगों को प्रशासन में भागीदारी और शोषण से मुक्ति। इस नीति ने भारत में आदिवासी विकास की दिशा निर्धारित की।
- निम्नोक्त में किस नृत्य में केवल महिलाएं भाग लेती हैं?
(A) डोम कच (B) घुरिया (C) पनाड़ी (D) ठड़िया
उत्तर: (A) डोम कच
व्याख्या: डोम कच झारखंड का एक पारंपरिक नृत्य है जिसमें केवल महिलाएं भाग लेती हैं। यह विवाह और अन्य मांगलिक अवसरों पर किया जाने वाला नृत्य है। झारखंड में अनेक प्रकार के लोकनृत्य प्रचलित हैं जैसे छऊ, नचनी, झुमर, पाइका आदि। डोम कच विशेष रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रमों में महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।
- निम्न में से किस जनजातीय समुदाय की अन्तर ग्राम पंचायत सभा को ‘भीरा’ कहा जाता था?
(A) टाना भगत (B) हिल खड़िया (C) खेरवार (D) चेरो
उत्तर: (B) हिल खड़िया
व्याख्या: हिल खड़िया जनजाति की अंतर-ग्राम पंचायत सभा को ‘भीरा’ कहा जाता था। हिल खड़िया झारखंड की एक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) है जो मुख्यतः पूर्वी सिंहभूम और सराइकेला-खड़सावाँ जिलों में निवास करती है। इनकी पारंपरिक शासन व्यवस्था अत्यंत सरल और जनतांत्रिक है। भीरा सभा में अनेक गांवों के प्रतिनिधि मिलकर सामूहिक निर्णय लेते थे।
- निम्न में से कौन 2000 ई. में झारखंड विधान सभा के प्रथम विधान सभा अध्यक्ष बने थे?
(A) इन्दर सिंह नामधारी (B) बाबूलाल मराण्डी (C) प्रभात कुमार (D) शिबू सोरेन
उत्तर: (A) इन्दर सिंह नामधारी
व्याख्या: इन्दर सिंह नामधारी झारखंड विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष (Speaker) थे। झारखंड राज्य का गठन 15 नवंबर 2000 को हुआ और उसी वर्ष विधानसभा की प्रथम बैठक हुई। बाबूलाल मराण्डी झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बने थे जबकि प्रभात कुमार प्रथम राज्यपाल थे। इन्दर सिंह नामधारी की भूमिका विधानसभा की प्रक्रिया और परंपराओं को स्थापित करने में महत्वपूर्ण थी।
- असहयोग आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण निम्न में से किस समुदाय के लिये 1947 में ‘कृषि भूमि वापस अधिनियम’ बनाया गया था?
(A) खेरवार (B) भूमिज (C) टाना भगत (D) सन्ताल
उत्तर: (C) टाना भगत
व्याख्या: टाना भगत समुदाय ने महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था। इन्होंने ब्रिटिश सरकार को लगान देने से इनकार किया और इसके कारण उनकी भूमि जब्त कर ली गई थी। स्वतंत्रता के बाद 1947 में इनकी जमीन वापस करने के लिए एक विशेष अधिनियम बनाया गया। टाना भगत झारखंड में एक धार्मिक-सामाजिक आंदोलन था जिसकी नींव 1914 में जतरा भगत ने रखी थी।
- बेनीराम महथा मुख्यतः किस क्षेत्र की विभूति थे?
(A) राष्ट्रीय आन्दोलन (B) साहित्य (C) खेल कूद (D) नृत्य
उत्तर: (B) साहित्य
व्याख्या: बेनीराम महथा झारखंड के प्रसिद्ध साहित्यकार थे जिन्होंने नागपुरी और हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे छोटानागपुर क्षेत्र के साहित्यिक परिदृश्य की एक महत्वपूर्ण हस्ती थे। उनकी रचनाओं में झारखंड की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक जीवन का सजीव चित्रण मिलता है। झारखंड के साहित्यिक इतिहास में उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।
- वाचस्पति त्रिपाठी झारखंड में किस आन्दोलन में गिरफ्तार हुए थे?
(A) भारत छोड़ो आन्दोलन (B) असहयोग आन्दोलन (C) सविनय अवज्ञा आन्दोलन (D) स्वदेशी आन्दोलन
उत्तर: (A) भारत छोड़ो आन्दोलन
व्याख्या: वाचस्पति त्रिपाठी झारखंड के एक स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्हें 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। भारत छोड़ो आंदोलन महात्मा गांधी के नेतृत्व में 8 अगस्त 1942 को शुरू हुआ था। झारखंड क्षेत्र में भी इस आंदोलन में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। ब्रिटिश सरकार ने आंदोलनकारियों पर कठोर कार्रवाई की और अनेक नेताओं को जेल में डाल दिया।
- 1920 के आसपास बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश के कुल कितने जिलों को मिलाकर पृथक् झारखंड प्रदेश बनाने की माँग थी?
(A) 14 (B) 15 (C) 16 (D) 12
उत्तर: (A) 14
व्याख्या: 1920 के दशक में झारखंड अलग राज्य की मांग के समय बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश के कुल 14 जिलों को मिलाकर एक अलग प्रांत बनाने की मांग की जा रही थी। यह मांग मुख्यतः आदिवासी नेताओं और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई थी। बाद में यह आंदोलन व्यापक होता गया और अंततः 2000 में 28 जिलों के साथ झारखंड राज्य का निर्माण हुआ।
- 1952 के विधान सभा चुनावों में झारखंड पार्टी ने उड़ीसा विधानसभा की कितनी सीटें जीती थीं?
(A) पाँच (B) छह (C) तीन (D) सात
उत्तर: (A) पाँच
व्याख्या: 1952 के प्रथम आम चुनावों में झारखंड पार्टी ने उड़ीसा विधानसभा में 5 सीटें जीती थीं। झारखंड पार्टी की स्थापना जयपाल सिंह मुंडा ने की थी और यह आदिवासी हितों का प्रतिनिधित्व करती थी। इस पार्टी ने बिहार, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में भी अपना प्रभाव बनाया था। 1952 का चुनाव भारत का पहला आम चुनाव था जिसमें सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का प्रयोग हुआ।
- निम्नलिखित में से झारखंड के कौन ब्राह्मण पुरोहित कर्म नहीं करते थे?
(A) सरवार ब्राह्मण (B) मैथिल ब्राह्मण (C) कन्नौजिया ब्राह्मण (D) शाकल द्वीपी ब्राह्मण
उत्तर: (A) सरवार ब्राह्मण
व्याख्या: झारखंड में सरवार ब्राह्मण पारंपरिक रूप से पुरोहित (पुजारी) कर्म नहीं करते थे। झारखंड में विभिन्न ब्राह्मण समुदाय हैं जैसे मैथिल, कन्नौजिया, भूमिहार और शाकलद्वीपी। इनमें से कुछ कृषि और व्यापार को प्राथमिकता देते थे। सरवार ब्राह्मण अपनी अलग सामाजिक और व्यावसायिक पहचान रखते थे और पुरोहित कर्म के स्थान पर अन्य व्यवसाय अपनाते थे।
- पांडे भाव राय निम्नलिखित में से किसके दीवान थे?
(A) पंचेत राज (B) कोराम्बे राज (C) फणि मुकुट राय (D) रामगढ़ राज
उत्तर: (D) रामगढ़ राज
व्याख्या: पांडे भाव राय रामगढ़ राज के दीवान थे। रामगढ़ राज झारखंड के ऐतिहासिक राज्यों में से एक था। दीवान राज्य के प्रशासनिक कार्यों का प्रबंधन करने वाला प्रमुख अधिकारी होता था। रामगढ़ के राजाओं ने 1857 के विद्रोह में भी भूमिका निभाई थी। झारखंड क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक राज्य और रियासतें थीं जिनका अपना समृद्ध इतिहास है।
- ‘मांझीथान’ नामक पंचायत स्थल मुख्यतः किस जनजाति से संबंद्ध था?
(A) संथाल (B) हो (C) उराँव (D) मुण्डा
उत्तर: (A) संथाल
व्याख्या: ‘मांझीथान’ संथाल जनजाति का पवित्र पंचायत स्थल है। संथाल जनजाति में मांझी गांव का प्रमुख होता है और मांझीथान वह स्थान है जहां मांझी पंचायत की बैठक होती है। यह स्थान संथाल समाज में धार्मिक और प्रशासनिक महत्व रखता है। संथाल जनजाति की अपनी समृद्ध सामाजिक-प्रशासनिक व्यवस्था है जिसमें मांझी, जोगमांझी, परगनैत आदि पद होते हैं।
- ठोकलो सोहोर शासन व्यवस्था मुख्यतः किस जनजाति से जुड़ी है?
(A) खेरवार (B) हो (C) खड़िया (D) संथाल
उत्तर: (C) खड़िया
व्याख्या: ठोकलो सोहोर खड़िया जनजाति की पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्था है। खड़िया झारखंड की एक प्रमुख जनजाति है जो मुख्यतः गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में निवास करती है। इनकी सामाजिक संरचना अत्यंत सुव्यवस्थित है। ठोकलो सोहोर व्यवस्था में विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक अधिकारी होते हैं जो सामाजिक न्याय और व्यवस्था बनाए रखते हैं।
- परहा के राजनीतिक प्रमुख निम्न में से कौन होते थे?
(A) महतो (B) मांझी (C) प्रधान (D) मानकी
उत्तर: (D) मानकी
व्याख्या: परहा व्यवस्था उराँव जनजाति की पारंपरिक प्रशासनिक प्रणाली है। परहा कई गांवों का एक संगठन होता है और उसके राजनीतिक प्रमुख को ‘मानकी’ कहा जाता था। मानकी परहा की प्रमुख बैठकों का संचालन करता था और समूह के हितों की रक्षा करता था। मुंडा जनजाति में भी मानकी प्रमुख की भूमिका होती है। ये पारंपरिक संस्थाएं आज भी आंशिक रूप से सक्रिय हैं।
- मोड़ मांझी कितने मांझियों की पंचायत होती है?
(A) तीन (B) पाँच (C) छह (D) सात
उत्तर: (B) पाँच
व्याख्या: संथाल जनजाति की शासन व्यवस्था में ‘मोड़ मांझी’ पांच गांवों के मांझियों की पंचायत होती है। यह संथाल पंचायत व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तर है। संथाल जनजाति में गांव स्तर पर मांझी, फिर देश मांझी, परगनैत और दिसोम परगनैत की व्यवस्था है। मोड़ मांझी पांच गांवों के मांझियों की संयुक्त पंचायत है जो बड़े विवादों और महत्वपूर्ण मामलों का निपटारा करती है।
- परहा व्यवस्था में पंचायत की बैठक बुलाने का काम निम्नोक्त में से कौन करते थे?
(A) पाण्डे (B) लाल (C) ओहदार (D) ठाकुर
उत्तर: (A) पाण्डे
व्याख्या: परहा व्यवस्था (उराँव जनजाति की पारंपरिक व्यवस्था) में पंचायत की बैठक (बैठक) बुलाने का काम ‘पाण्डे’ करते थे। पाण्डे एक महत्वपूर्ण पद था जो संदेशवाहक और बैठक आयोजक की भूमिका निभाता था। परहा व्यवस्था में विभिन्न पदाधिकारी होते थे जैसे मानकी, पाण्डे, लाल, ओहदार आदि, प्रत्येक की अपनी अलग जिम्मेदारी थी। यह व्यवस्था झारखंड की पारंपरिक लोकतांत्रिक प्रशासनिक पद्धति का उत्कृष्ट उदाहरण है।
- मुंडा के निर्देश पर गाँव में सूचना देने का काम कौन करते हैं?
(A) दीवान (B) कोटवार (C) लाल (D) पान खवास
उत्तर: (B) कोटवार
व्याख्या: मुंडा जनजाति की प्रशासनिक व्यवस्था में ‘कोटवार’ गांव का संदेशवाहक होता है जो मुंडा (गांव का प्रमुख) के निर्देश पर गांव में सूचना फैलाता है और बैठकों की जानकारी देता है। कोटवार की भूमिका ग्राम प्रशासन में महत्वपूर्ण होती है। मुंडा जनजाति की प्रशासनिक व्यवस्था में मुंडा, मानकी और परहा के विभिन्न पदाधिकारी होते हैं।
- पारम्परिक समुदाय प्रमुखों को ‘भुइंहर’ नाम किस राजवंश ने प्रचलित किया?
(A) खेरवार (B) चेरो (C) सिंह (D) नाग
उत्तर: (D) नाग
व्याख्या: झारखंड के पारंपरिक समुदाय प्रमुखों को ‘भुइंहर’ (भूमि का मालिक/भूमिपुत्र) नाम नाग राजवंश ने प्रचलित किया। नाग राजवंश छोटानागपुर के प्राचीन शासक थे। ‘भुइंहर’ वे लोग थे जो किसी क्षेत्र में सबसे पहले बसे थे और जिन्हें भूमि पर पैतृक अधिकार था। यह अवधारणा झारखंड की भूमि व्यवस्था और जनजातीय अधिकारों से गहराई से जुड़ी है।
- ‘पुना खोर’ कहानी के लेखक कौन हैं?
(A) आहलाद तिर्की (B) इन्द्रजीत उराँव (C) नारायण भगत (D) दबले कुजूर
उत्तर: (A) आहलाद तिर्की
व्याख्या: ‘पुना खोर’ कहानी के लेखक आहलाद तिर्की हैं। वे झारखंड के आदिवासी साहित्यकार हैं जिन्होंने अपनी रचनाओं में आदिवासी जीवन, संस्कृति और संघर्ष को शब्दों में उकेरा है। झारखंड में आदिवासी साहित्य का एक समृद्ध इतिहास है जिसमें उराँव, मुंडारी, संथाली और अन्य भाषाओं में साहित्य सृजन होता रहा है।
- निम्नोक्त में से किस साहित्यकार को ‘पद्मश्री’ प्राप्त हुआ है?
(A) सहदेव मरांडी (B) भागवत मुर्मू (C) लोहरा उराँव (D) नारायण तिर्की
उत्तर: (C) लोहरा उराँव
व्याख्या: लोहरा उराँव को उनके साहित्यिक योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त हुआ है। वे उराँव भाषा (कुड़ुख) के प्रमुख साहित्यकार हैं। झारखंड के कई साहित्यकारों और कलाकारों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। पद्मश्री भारत सरकार का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है जो विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है।
- बोकारो के रहने वाले ए.के. झा किस भाषा के साहित्यकार के रूप में प्रसिद्ध हैं?
(A) खोरठा (B) नागपुरी (C) मैथिली (D) पंच परगनिया
उत्तर: (A) खोरठा
व्याख्या: बोकारो के ए.के. झा (Anil Kumar Jha) खोरठा भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार हैं। खोरठा झारखंड की एक प्रमुख क्षेत्रीय भाषा है जो मुख्यतः हजारीबाग, बोकारो, धनबाद और गिरिडीह जिलों में बोली जाती है। खोरठा साहित्य में कविता, कहानी, नाटक और लोकगीत की समृद्ध परंपरा है। झारखंड में खोरठा के अलावा नागपुरी, संथाली, मुंडारी, कुड़ुख, हो आदि भाषाओं में साहित्य सृजन होता है।
- ‘रावन वधा’ का लेखक कौन हैं?
(A) परमानन्द महतो (B) चन्द्रमोहन महतो (C) समीर (D) करमचन्द अहीर
उत्तर: (A) परमानन्द महतो
व्याख्या: ‘रावन वधा’ के लेखक परमानन्द महतो हैं। यह झारखंड की क्षेत्रीय साहित्यिक परंपरा की एक महत्वपूर्ण रचना है। परमानन्द महतो झारखंड के प्रमुख साहित्यकारों में से एक हैं जिन्होंने क्षेत्रीय भाषा में साहित्य सृजन किया। झारखंड में नागपुरी, खोरठा और अन्य भाषाओं में लोककथाओं और महाकाव्यों पर आधारित रचनाएं की जाती हैं।
- रामदयाल मुंडा की रचना ‘एअ नव कानिको’ में कितनी कहानियाँ हैं?
(A) सात (B) नौ (C) चार (D) पाँच
उत्तर: (B) नौ
व्याख्या: रामदयाल मुंडा की रचना ‘एअ नव कानिको’ में नौ कहानियां हैं। ‘एअ नव’ का अर्थ ‘नौ’ होता है और ‘कानिको’ का अर्थ ‘कहानियां’ — इसलिए इस पुस्तक का नाम ही बताता है कि इसमें नौ कहानियां हैं। रामदयाल मुंडा झारखंड के महान आदिवासी विद्वान, साहित्यकार, संगीतज्ञ और अकादमिक थे। वे मुंडारी भाषा और संस्कृति के संरक्षण में अग्रणी थे और लंबे समय तक रांची विश्वविद्यालय के कुलपति रहे।
- निम्नोक्त में से कौन सी जनजाति शंकुलाकार झोपड़ी बना कर रहते थे, जिसे ‘कुम्बा’ कहा जाता था?
(A) मुण्डा (B) उराँव (C) बेडिया (D) बिरहोर
उत्तर: (D) बिरहोर
व्याख्या: बिरहोर जनजाति शंकुलाकार (conical) झोपड़ी बनाकर रहती थी जिसे ‘कुम्बा’ कहा जाता था। बिरहोर झारखंड की एक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) है। ये पारंपरिक रूप से घुमंतू (nomadic) जीवन जीते थे और वनों में निवास करते थे। रस्सी बनाना और बंदर पकड़ना इनकी पारंपरिक जीविका थी। बिरहोर मुख्यतः हजारीबाग, रांची और सिंहभूम जिलों में पाए जाते हैं।
- चुटिया राम मंदिर का निर्माण किस वर्ष हुआ था?
(A) 1605 (B) 1670 (C) 1685 (D) 1700
उत्तर: (A) 1605
व्याख्या: चुटिया राम मंदिर का निर्माण 1605 में हुआ था। यह मंदिर रांची के चुटिया क्षेत्र में स्थित है और झारखंड के प्राचीन मंदिरों में से एक है। चुटिया का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। यह मंदिर हिंदू धर्म और स्थानीय परंपराओं का संगम स्थल है। झारखंड में अनेक प्राचीन मंदिर हैं जो राज्य की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।
- ‘राम कठी’ निम्नोक्त में से क्या है?
(A) लोक कथा (B) वाद्य यंत्र (C) एक प्रसिद्ध मेला (D) पवित्र स्थल
उत्तर: (A) लोक कथा
व्याख्या: ‘राम कठी’ झारखंड की एक पारंपरिक लोक कथा है। झारखंड में लोक कथाओं की समृद्ध परंपरा है जो पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक रूप से प्रसारित होती रही हैं। इन लोककथाओं में आदिवासी जीवन, देवी-देवताओं, वीरता और नैतिकता की कहानियां होती हैं। राम कठी में भगवान राम की कथा को स्थानीय झारखंडी शैली में प्रस्तुत किया जाता है।
- निम्नोक्त में से कौन सा नृत्य दीवाली के दूसरे दिन संपत्र किया जाता है?
(A) डोम कच (B) पड़का (C) मोहराड (D) बौंडी
उत्तर: (C) मोहराड
व्याख्या: झारखंड में ‘मोहराड’ नृत्य दीवाली के दूसरे दिन किया जाता है। यह एक पारंपरिक लोकनृत्य है जो दीपावली पर्व के अवसर पर मनाया जाता है। झारखंड में अनेक लोकनृत्य विभिन्न त्योहारों और मौसमों से जुड़े हैं। करम, जितिया, सरहुल, सोहराय आदि पर्वों पर विभिन्न प्रकार के लोकनृत्य किए जाते हैं।
- संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम 1949 के अन्तर्गत संथाल परगना खंड गठित है।
(A) दुमका, साहिबगंज, गोड्डा और देवघर (B) गुमला, गड़वा, गिरिडीह, पाकुड़ (C) धनबाद, जामताड़ा, बोकारो, हजारीबाग (D) लातेहर, लोहरदगा, चतरा, पलामू
उत्तर: (A) दुमका, साहिबगंज, गोड्डा और देवघर
व्याख्या: संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम 1949 के अंतर्गत संथाल परगना खंड में दुमका, साहिबगंज, गोड्डा और देवघर जिले शामिल हैं। बाद में पाकुड़ और जामताड़ा को भी इस क्षेत्र में जोड़ा गया। संथाल परगना झारखंड का उत्तर-पूर्वी क्षेत्र है जहां संथाल जनजाति की बहुलता है। यह अधिनियम इस क्षेत्र की भूमि व्यवस्था और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया था।
- संवैधानिक दृष्टिकोण से संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम, 1949 में सर्वाधिक किससे जुड़ा है?
(A) अनुच्छेद 14 — विधि के समक्ष समानता (B) अनुच्छेद 19 — आवागमन की स्वतंत्रता (C) अनुच्छेद 244 — अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन (D) अनुच्छेद 300A — सम्पत्ति का अधिकार
उत्तर: (C) अनुच्छेद 244 — अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन
व्याख्या: संवैधानिक दृष्टिकोण से संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम 1949 अनुच्छेद 244 से सर्वाधिक जुड़ा है जो अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन का प्रावधान करता है। अनुच्छेद 244 के तहत पांचवीं और छठी अनुसूची बनाई गई हैं जो आदिवासी क्षेत्रों के विशेष प्रशासन की व्यवस्था करती हैं। संथाल परगना पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है। यह अधिनियम आदिवासियों की भूमि की रक्षा और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करता है।
- छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 के अन्तर्गत जनजातीय भूमि का गैर-जनजातियों को हस्तान्तरण है।
(A) स्वतंत्र रूप से अनुमान्य (B) ग्राम की सहमति से अनुमान्य (C) सामान्यतः निषिद्ध (सीमित अपवादों सहित) (D) पंजीकरण के बाद अनुमान्य
उत्तर: (C) सामान्यतः निषिद्ध (सीमित अपवादों सहित)
व्याख्या: छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) 1908 के तहत आदिवासी भूमि का गैर-आदिवासियों को हस्तांतरण सामान्यतः निषिद्ध है। यह कानून आदिवासियों की भूमि को शोषण से बचाने के लिए बनाया गया था। कुछ सीमित अपवाद हैं जैसे सरकारी उद्देश्यों के लिए या उपायुक्त की अनुमति से। इस कानून का उल्लंघन करने पर भूमि वापस की जा सकती है। झारखंड में आदिवासी भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए CNT Act एक महत्वपूर्ण कानूनी ढाल है।
- छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 के अन्तर्गत अवैध रूप से हस्तांतरित जनजातीय भूमि को पुर्नस्थापित करने का अधिकार किसे है?
(A) उच्च न्यायालय (B) उपायुक्त (C) ग्राम सभा (D) राज्य विधान मंडल
उत्तर: (B) उपायुक्त
व्याख्या: CNT Act 1908 के अंतर्गत अवैध रूप से हस्तांतरित जनजातीय भूमि को पुनर्स्थापित करने का अधिकार उपायुक्त (Deputy Commissioner) को है। उपायुक्त इस मामले में राजस्व अधिकारी के रूप में कार्य करता है और आदिवासी भूमि विवादों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उपायुक्त के निर्णय के विरुद्ध अपील उच्च न्यायालय में की जा सकती है। यह प्रावधान आदिवासियों के भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
- छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 निम्नलिखित में से किस भू-स्वामित्व प्रणाली को मान्यता देता है?
(A) रैयतवारी (B) महालवारी (C) मुंडारी खुंटकट्टी (D) जमींदारी
उत्तर: (C) मुंडारी खुंटकट्टी
व्याख्या: CNT Act 1908 मुंडारी खुंटकट्टी भू-स्वामित्व प्रणाली को मान्यता देता है। यह मुंडा जनजाति की पारंपरिक भूमि स्वामित्व व्यवस्था है जिसमें भूमि उन लोगों की होती है जिन्होंने सबसे पहले जंगल काटकर उसे कृषि योग्य बनाया था। ‘खुंट’ का अर्थ है वंश या परिवार और ‘कट्टी’ का अर्थ है काटना। यह पैतृक और सामूहिक भूमि स्वामित्व की अवधारणा है जो अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम 1949 के अन्तर्गत जनजातीय भूमि की पुनर्स्थापना।
(A) विवेकाधीन है (B) समय सीमा से बाधित है (C) सामान्यतः अनिवार्य है (D) राज्यपाल की स्वीकृति आवश्यक है
उत्तर: (A) विवेकाधीन है
व्याख्या: संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम 1949 के अंतर्गत जनजातीय भूमि की पुनर्स्थापना विवेकाधीन (Discretionary) है। इसका अर्थ है कि सक्षम प्राधिकारी (उपायुक्त) प्रत्येक मामले की परिस्थितियों को देखकर निर्णय लेता है। यह CNT Act 1908 से भिन्न है। संथाल परगना क्षेत्र में आदिवासी भूमि की सुरक्षा के लिए यह अधिनियम महत्वपूर्ण है, हालांकि इसके प्रावधान कभी-कभी विवाद का विषय बनते हैं।
- संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम 1949 के प्रवर्तन में सर्वाधिक निर्णायक भूमिका किसकी है?
(A) ग्राम सभा (B) उपायुक्त (C) राज्य विधान मंडल (D) दीवानी न्यायालय
उत्तर: (B) उपायुक्त
व्याख्या: संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम 1949 के प्रवर्तन में सर्वाधिक निर्णायक भूमिका उपायुक्त (Deputy Commissioner) की होती है। उपायुक्त भूमि विवादों की सुनवाई करता है, अवैध हस्तांतरण को रद्द कर सकता है और भूमि वापस दिलाने के आदेश दे सकता है। संथाल परगना में जिला प्रशासन का प्रमुख होने के नाते उपायुक्त इस अधिनियम का मुख्य क्रियान्वयन अधिकारी है।
- निम्न में से कौन PESA, 1996 के महत्व को सही रूप से व्याख्यायित करता है?
(A) यह रूढ़िजन्य कानूनों को समाप्त करता है। (B) यह ग्राम सभा को केन्द्र के ऊपर सशक्त बनाता है। (C) यह शहरी स्थानीय निकायों को बढ़ावा देता है। (D) यह राज्य से केन्द्र को शक्ति हस्तांतरित करता है।
उत्तर: (B) यह ग्राम सभा को केन्द्र के ऊपर सशक्त बनाता है।
व्याख्या: PESA (Panchayats Extension to Scheduled Areas) Act 1996 का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को सशक्त बनाता है। यह ग्रामसभा को प्राकृतिक संसाधनों, भूमि अधिग्रहण, लघु जल निकायों और लघु वन उपज पर नियंत्रण का अधिकार देता है। PESA के तहत ग्राम सभा की सहमति के बिना अनुसूचित क्षेत्रों में कोई बड़ा निर्णय नहीं लिया जा सकता। यह आदिवासी स्वशासन को संवैधानिक मान्यता देता है।
- सारंडा वन क्षेत्र अक्सर समाचारों में रहता है, क्योंकि:
(A) यह भारत का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है। (B) यह भारत का सबसे बड़ा साल वन है। (C) उच्च न्यायालय के निर्देश पर इसे वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने की दिशा। (D) यह पूर्णतः गैर-अनुसूचित क्षेत्र में स्थित है।
उत्तर: (B) यह भारत का सबसे बड़ा साल वन है।
व्याख्या: सारंडा झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित है और यह एशिया का सबसे बड़ा साल (Shorea robusta) वन माना जाता है। यह क्षेत्र अपने घने जंगलों, खनिज संसाधनों और आदिवासी आबादी के लिए प्रसिद्ध है। सारंडा का अर्थ है ‘सात सौ पहाड़ियों की भूमि’। यहां लौह अयस्क के विशाल भंडार भी हैं। नक्सल गतिविधियों और वन संरक्षण के मुद्दों के कारण यह क्षेत्र अक्सर चर्चा में रहता है।
- किस औपनिवेशिक प्राधिकरण ने छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 बनाया?
(A) ब्रिटिश संसद (B) गवर्नर-जनरल इन काउंसिल (C) ईस्ट इंडिया कंपनी (D) प्रांतीय विधान सभा
उत्तर: (B) गवर्नर-जनरल इन काउंसिल
व्याख्या: छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 गवर्नर-जनरल इन काउंसिल (Governor-General in Council) द्वारा बनाया गया था। यह ब्रिटिश भारत की सर्वोच्च विधायिका थी। इस कानून का उद्देश्य छोटानागपुर क्षेत्र के आदिवासियों की भूमि को जमींदारों और साहूकारों के शोषण से बचाना था। यह कानून आज भी झारखंड में प्रभावी है और इसमें संशोधन का प्रयास हमेशा विवाद का कारण बनता है।
- छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 के अन्तर्गत ‘खुंटकट्टी’ की अवधारणा है।
(A) राज्य द्वारा निर्मित व्यक्तिगत स्वामित्व (B) खेती अधिकार रहित सामूहिक ग्राम स्वामित्व (C) प्रथम साफ-सफाई पर आधारित संयुक्त पैतृक स्वामित्व (D) जमींदार द्वारा दी गई अस्थाई काश्तकारी
उत्तर: (C) प्रथम साफ-सफाई पर आधारित संयुक्त पैतृक स्वामित्व
व्याख्या: खुंटकट्टी की अवधारणा प्रथम साफ-सफाई (First Clearance) पर आधारित संयुक्त पैतृक स्वामित्व है। जिस परिवार ने सबसे पहले जंगल काटकर भूमि को कृषि योग्य बनाया, उसे उस भूमि पर पैतृक अधिकार प्राप्त हो जाता है। यह अधिकार वंशानुगत है और समूचे खांदान को मिलकर प्राप्त होता है। यह अवधारणा मुंडा जनजाति की पारंपरिक भूमि व्यवस्था की मूल आधारशिला है।
- संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम 1949 के कठोर प्रावधानों को सर्वश्रेष्ठ रूप से किस संदर्भ में समझा जा सकता है?
(A) बंगाल का स्थायी बंदोबस्त (B) जनजातीय विद्रोह एवं भूमि हड़प (C) क्षेत्र का औद्योगिक पिछड़ापन (D) जमींदारी उन्मूलन आन्दोलन
उत्तर: (B) जनजातीय विद्रोह एवं भूमि हड़प
व्याख्या: संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम 1949 के कठोर प्रावधानों को सर्वश्रेष्ठ रूप से जनजातीय विद्रोह और भूमि हड़प के संदर्भ में समझा जा सकता है। 1855 के संथाल विद्रोह (हूल) का मुख्य कारण महाजनों और जमींदारों द्वारा संथालों की भूमि हड़पना और उनका आर्थिक शोषण था। इस विद्रोह की प्रतिक्रिया में ब्रिटिश सरकार ने संथाल परगना को एक अलग जिले के रूप में स्थापित किया। 1949 का अधिनियम इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में आदिवासी भूमि की रक्षा के लिए बनाया गया था। भूमि हड़प की पुनरावृत्ति रोकना इस अधिनियम का मूल उद्देश्य है।

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