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Do you agree with the statement that crime against women in India is increasing?

Q6. Do you agree with the statement that crime against women in India is increasing?

Role

Violence against women is a major public problem in the country , recently , a steady increase is being seen in the number of crimes against women ; Especially extremely serious cases like gang rape. These incidents have shaken the conscience of the people. One wonders how this can be possible in a society moving towards higher education , economic and technological development.

Main part

Nature of violence against women –

  •         Domestic violence like dowry related violence , wife beating , sexual abuse , abuse of widows and elderly women
  •         Criminal violence such as rape , kidnapping , murder
  •         forcing wife/daughter-in-law to commit female foeticide , molestation of women , denying women share in property , forcing minor widow to commit Sati , son-daughter-in-law And more dowry harassment , cyber harassment etc.

Some statistics related to violence against women in India

According to the National Crime Records Bureau (NCRB) report , 3.29 lakh cases of violence against women were registered in the year 2015 , 3.38 lakh cases in the year 2016 , 3.60 lakh cases in the year 2017 and 3,71,503 cases in the year 2020 . At the same time , in the year 2021 , this figure increased to 4,28,278 , out of which most of them i.e. 31.8 percent were due to violence done by husband or relative , 7.40 percent were due to rape , 17.66 percent were due to kidnapping , 20.8 percent were done with the intention of humiliating women. Cases of violence are included.

Major causes of violence against women

  •         Unequal distribution of power and resources between men and women.
  •         Patriarchal mentality.
  •         Lack of gender awareness.
  •         , politically and economically compared to men .
  •         Society’s tacit approval of sexual violence.
  •         vulnerable to sexual violence due to excessive dependence on men .
  •         Lack of efficient implementation of laws.
  •         Stereotypes related to gender roles.

If we observe all the cases of violence against women, we will find that generally the victims of violence are women –

  •         Who are helpless and depressed ; Who have a bad self-image ; Those who suffer from self-devaluation or those who have become emotionally weak due to the violence perpetrated by perpetrators.
  •         Those who live in stressful family situations.
  •         Those who lack social maturity or social interpersonal skills , due to which they have to face behavioral problems.
  •         Those whose husband or in-laws have a distorted personality and whose husband often drinks alcohol.

 

Measures to prevent violence against women

  •         Along with strengthening the laws made for the safety of women, they should be strictly implemented.
  •         Women’s representation should be promoted by the government at all levels.
  •         Fast track court should be established.
  •         Institutions that raise voice against crimes against women should be strengthened.
  •         Along with the number of women police stations, the number of women police officers should be increased and arrangements like helpline number , establishment of forensic lab , installation of CCTV and panic buttons in public transport should be made.
  •         All women should be educated so that they become aware of their rights and become self-reliant.

Conclusion

At present, the government has made provisions for some important laws to protect women from the increasing crimes against women , in which rape has been considered a very heinous crime under Section 376 of the Indian Penal Code. Besides, provision has been made under Dowry Prohibition Act 1961 and 1986 , apart from this, under Section 494 of IPC, marrying while the husband or wife is alive is a punishable offence.

 Q6. क्या आप सहमत हैं कि भारत में महिलाओं के प्रति अपराध में वृद्धि हो रही है ? (8m)

भूमिका

महिलाओं के खिलाफ हिंसा देश में एक प्रमुख सार्वजनिक समस्या है,हाल ही में, महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है; विशेषकर सामूहिक बलात्कार जैसे अत्यंत गंभीर मामले। इन घटनाओं ने लोगों की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। किसी को आश्चर्य होता है कि उच्च शिक्षा, आर्थिक और तकनीकी विकास की ओर बढ़ रहे समाज में यह कैसे संभव हो सकता है।  

मुख्य भाग

महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की प्रकृति-

  •         घरेलू हिंसा जैसे- दहेज संबंधी हिंसा, पत्नी को पीटना, लैंगिक दुर्व्यवहार, विधवा और वृद्ध महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार
  •         आपराधिक हिंसा जैसे- बलात्कार, अपहरण, हत्या
  •         सामाजिक हिंसा जैसे पत्नी/पुत्रवधू को मादा भ्रूण की हत्या (female foeticide) के लिये बाध्य करना, महिलाओं से छेड़-छाड़, संपत्ति में महिलाओं को हिस्सा देने से इंकार करना, अल्पवयस्क विधवा को सती होने के लिये बाध्य करना, पुत्र-वधू को और अधिक दहेज के लिये सताना, साइबर उत्पीड़न आदि।

भारत में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा से संबंधित कुछ आँकड़े

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2015 में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के 3.29 लाख मामले, साल 2016 में 3.38 लाख मामले, साल 2017 में 3.60 लाख मामले और साल 2020 में 3,71,503 मामले दर्ज किये गए। वहीं, साल 2021 में ये आँकड़ा बढ़कर 4,28,278 हो गया, जिनमें से अधिकतर यानी 31.8 फीसदी पति या रिश्तेदार द्वारा की गई हिंसा के, 7.40 फीसदी बलात्कार के, 17.66 फीसदी अपहरण के, 20.8 फीसदी महिलाओं को अपमानित करने के इरादे से की गई हिंसा के मामले शामिल हैं।

महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के प्रमुख कारण

  •         पुरुष और महिलाओं के बीच शक्ति एवं संसाधनों का असमान वितरण।
  •         पितृसत्तात्मक मानसिकता।
  •         लैंगिक जागरूकता का अभाव।
  •         पुरुषों की तुलना में महिलाओं का सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से कम सशक्तीकरण।
  •         समाज द्वारा लैंगिक हिंसा को मौन सहमति।
  •         पुरुषों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण महिलाओं का लैंगिक हिंसा के प्रति अधिक सुभेद्य (Vulnerable) होना।
  •         कानूनों का कुशल कार्यान्वयन न होना।
  •         लिंग भूमिकाओं से संबंधित रूढ़ियाँ।

यदि हम महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के सभी मामलों का अवलोकन करें तो हम पाएँगे कि सामान्यतया हिंसा की शिकार वे महिलाएँ होती हैं-

  •         जो असहाय और अवसादग्रस्त होती हैं; जिनकी आत्मछवि खराब होती है; जो आत्म अवमूल्यन से ग्रसित होती हैं या वे जो अपराधकर्ताओं द्वारा की गई हिंसा के कारण भावात्मक रूप से निर्बल हो गई हैं।
  •         जो दबावपूर्ण पारिवारिक स्थितियों में रहती हैं।
  •         जिनमें सामाजिक परिपक्वता की या सामाजिक अन्तर-वैयक्तिक प्रवीणताओं की कमी है, जिसके कारण उन्हें व्यवहार संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  •         जिनके पति या ससुराल वालों का व्यक्तित्व विकृत है और जिनके पति प्राय: शराब पीते हैं।

महिलाओं के विरुद्ध हिंसा को रोकने के उपाय

  •         महिलाओं की सुरक्षा के लिये बनाए गए कानूनों को मज़बूत करने के साथ-साथ उन्हें सख्ती से लागू किया जाए।
  •         सरकार द्वारा सभी स्तरों पर महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ावा दिया जाए।
  •         फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना की जाए।
  •         महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली संस्थाओं को मजबूत बनाया जाए।
  •         महिला थानों की संख्या के साथ-साथ महिला पुलिस अधिकारियों की संख्या को बढ़ाया जाए और हेल्पलाइन नंबर, फोरेंसिक लैब की स्थापना, सार्वजनिक परिवहन में सीसीटीवी और पैनिक बटन लगाने जैसी व्यवस्थाएँ की जानी चाहिये।
  •         सभी महिलाओं को शिक्षित किया जाए जिससे वे अपने अधिकारों के प्रति जागरुक हों और आत्मनिर्भर बन सकें।

निष्कर्ष

वर्तमान समय में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों से सुरक्षा हेतु सरकार ने कुछ महत्त्वपूर्ण कानून का प्रावधान किया है ,जिनमे भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के अंतर्गत बलात्कार को अत्यंत जघन्य अपराध माना गया है। साथ ही दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961और 1986 का प्रावधान किया गया है,इसके अलावा  आईपीसी की धारा 494 के तहत पति या पत्नी के जीवित होते हुए विवाह करना दंडनीय अपराध है।

 

 

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