उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित यूपी पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा 2025 राज्य की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक है। परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों द्वारा सबसे अधिक खोजा जाने वाला विषय होता है –
“यूपी पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा 2025 प्रश्न पत्र हिंदी में हल सहित”।
हम आपके लिए यूपी पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा 2025 का संपूर्ण प्रश्न पत्र हिंदी भाषा में, सभी प्रश्नों के सही उत्तर तथा सरल एवं विस्तृत व्याख्या के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं:
- ‘रक्त’ के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1.रक्त प्लाज्मा और विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं से बना होता है।
2.हीमोग्लोबिन की उपस्थिति रक्त को लालिमायुक्त बनाती है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (d) दोनों 1 और 2
व्याख्या:
कथन 1 सही है: रक्त प्लाज़्मा (तरल भाग) और विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं — जैसे लाल रक्त कणिकाएँ (RBCs), श्वेत रक्त कणिकाएँ (WBCs) तथा प्लेटलेट्स — से मिलकर बना होता है। रक्त में लगभग 55% प्लाज़्मा (मुख्यतः जल) होता है और 45% रक्त कोशिकाएँ होती हैं। प्लाज़्मा में लगभग 92% पानी, 7% प्रोटीन (जैसे एल्ब्यूमिन, ग्लोब्युलिन, क्लॉटिंग फैक्टर) तथा लगभग 1% लवण, पोषक तत्व, हार्मोन और विटामिन पाए जाते हैं।
कथन 2 सही है: लाल रक्त कणिकाओं (RBCs) में पाया जाने वाला हीमोग्लोबिन वर्णक लोह (Iron) तत्व से युक्त होता है, जो ऑक्सीजन से संयोजित होकर रक्त को लाल रंग प्रदान करता है। जब हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन के साथ संयोजन करता है, तो ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनता है, जिसका रंग चमकीला लाल होता है। इसी प्रक्रिया के माध्यम से लाल रक्त कोशिकाएँ फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के सभी ऊतकों तक पहुँचाती हैं।
अतः, दोनों कथन सही हैं।
- सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए।
सूची – I (लेखक) सूची – II (पुस्तक)
- त्रिविक्रम भट्ट 1. गीत गोविंदा
- सोमदेव 2. बृहत्कथामंजरी
- जयदेव 3.नैलचम्पू
- क्षेमेन्द्र 4. कथा सरित सागर
कूट:
A B C D
(a) 4 3 2 1
(b) 3 4 2 1
(c) 3 4 1 2
(d) 4 3 1 2
उत्तर: (c) 3 4 1 2
व्याख्या:
- त्रिविक्रम भट्ट ने नलचम्पू की रचना की थी। वे एक संस्कृत विद्वान और कवि थे; नलचम्पू उनकी प्रसिद्ध कृति मानी जाती है। नल चम्पू काव्य की रचना संस्कृत भाषा के शारदा लिपि में की गई है। चम्पू भारतीय साहित्य की एक प्रमुख साहित्यिक विधा है, जिसमें गद्य-काव्य और पद्य-काव्य का सुंदर समन्वय किया जाता है। इस शैली में पद्य (छंदबद्ध कविता) के बीच-बीच में गद्यांश जुड़े होते हैं, जिससे यह एक विशिष्ट और मिश्रित रचनात्मक रूप धारण कर लेती है।
- सोमदेव भट्ट, जो कश्मीर के विख्यात कवि थे, ने लगभग 1070 ईस्वी के आसपास कथासरित्सागर की रचना की। यह ग्रंथ लोहार वंश की रानी सूर्यमती के लिए लिखा गया था। यह विशालकाय कृति संस्कृत कथाओं का एक समृद्ध संग्रह है। मूलतः यह गुणाढ्य द्वारा रचित बृहत्कथा का परिष्कृत पुनर्निर्माण एवं संरक्षण माना जाता है।
- जयदेव ने गीत गोविंद की रचना की थी। वे 12वीं शताब्दी के कवि थे और राजा लक्ष्मण सेन के दरबार में रहते थे; गीत गोविंद में श्रीकृष्ण और राधा के प्रेम का वर्णन किया गया है।
- क्षेमेन्द्र ने बृहत्कथामंजरी की रचना की थी। बृहत्कथामंजरी प्राचीन बृहत्कथा का संस्कृत रूपांतर है, जो परंपरानुसार गुणाढ्य द्वारा रचित मानी जाती है तथा मूलतः पैशाची भाषा में लिखी गई थी, जो अब लुप्त हो चुकी है। 11वीं शताब्दी में कश्मीरी कवि क्षेमेन्द्र ने इस कृति की रचना की। उन्होंने मूल कथाओं को अधिक परिष्कृत, सरल एवं सुगम संस्कृत शैली में पुनः संयोजित कर प्रस्तुत किया।
- ज्ञानपीठ पुरस्कार के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- 58वां ज्ञानपीठ पुरस्कार संस्कृत विद्वान जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी को प्रदान किया गया।
- पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार 1965 में दिया गया था।
नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (d) दोनों 1 और 2
व्याख्या:
कथन 1 सही है: 58वां ज्ञानपीठ पुरस्कार वास्तव में संस्कृत विद्वान जगद्गुरु रामभद्राचार्य को प्रदान किया गया था।
कथन 2 सही है: पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार वर्ष 1965 में मलयालम कवि जी. शंकर कुरुप को उनकी कविता-संग्रह “ओडक्कुज़ल” (The Bamboo Flute) के लिए दिया गया था।
अतः, दोनों कथन सही हैं।
ज्ञानपीठ पुरस्कार
ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है, जो संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त 22 भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट सृजनात्मक लेखन के लिए प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है, और 2013 से अंग्रेज़ी भाषा को भी इसके दायरे में शामिल किया गया है। यह पुरस्कार भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा स्थापित किया गया है तथा इसके अंतर्गत नकद राशि, प्रशस्ति-पत्र और वाग्देवी (सरस्वती) की कांस्य प्रतिमा प्रदान की जाती है। इस पुरस्कार की अवधारणा 1961 में भारतीय ज्ञानपीठ के संस्थापक साहू शांतिप्रसाद जैन के 50वें जन्मदिन के अवसर पर उत्पन्न हुई थी और पहला पुरस्कार 1965 में प्रदान किया गया। प्रारंभ में 1982 तक यह पुरस्कार किसी एक विशिष्ट कृति के लिए दिया जाता था, किंतु उसके बाद से यह साहित्य में संपूर्ण योगदान के लिए दिया जाने लगा। सामान्यतः यह पुरस्कार एक ही लेखक को दिया जाता है, हालांकि कुछ वर्षों में इसे संयुक्त रूप से दो लेखकों को भी प्रदान किया गया है।
- निम्नलिखित विद्युत चुम्बकीय विकिरणों को उनकी आवृत्तियों के घटते क्रम में व्यवस्थित करें)
- गामा किरणें
- पराबैंगनी किरणें
- रेडियो तरंगें
- एक्स-रे
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 4, 1, 2, 3
(c) 1, 4, 3, 2
(b) 4, 1, 3, 2
(d) 1, 4, 2, 3
उत्तर: (d) 1, 4, 2, 3
व्याख्या: विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम को घटते हुए आवृत्ति क्रम (सर्वाधिक से न्यूनतम) में इस प्रकार रखा जाता है:
गामा किरणें → एक्स किरणें → पराबैंगनी किरणें → रेडियो तरंगें
| विकिरण का प्रकार | आवृत्ति का क्षेत्र | उत्पत्ति / प्रकृति | विशेषताएँ व उपयोग |
| गामा किरणें | सर्वाधिक आवृत्ति — लगभग >10¹⁹ Hz | नाभिकीय अभिक्रियाओं, रेडियोधर्मी क्षय, परमाणु विस्फोट तथा ब्रह्मांडीय स्रोतों से उत्पन्न | अत्यधिक ऊर्जा और वेधन क्षमता; कैंसर उपचार में रेडियोथैरेपी, चिकित्सा उपकरणों के जीवाणुमार्जन और वैज्ञानिक अनुसंधान में उपयोग |
| एक्स किरणें | गामा किरणों से कम परंतु बहुत अधिक — लगभग 10¹⁶–10¹⁹ Hz | उच्च ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉनों द्वारा धातु लक्ष्य से टकराने पर उत्पन्न; परमाणु इलेक्ट्रॉन संक्रमणों से भी | शरीर की आंतरिक संरचना देखने हेतु एक्स-रे इमेजिंग, सुरक्षा जांच, क्रिस्टल संरचना निर्धारण (XRD) में उपयोग |
| पराबैंगनी किरणें) | लगभग 10¹⁵–10¹⁶ Hz (दृश्य वर्णक्रम के बैंगनी भाग के ठीक परे) | सूर्य, गर्म वस्तुओं तथा आयनीकरण प्रक्रियाओं से उत्पन्न | जीवाणुनाशक; विटामिन-D संश्लेषण को प्रेरित करती हैं; अधिक मात्रा में त्वचा के लिए हानिकारक |
| दृश्य प्रकाश | 4×10¹⁴–8×10¹⁴ Hz | सूर्य तथा अन्य प्रकाश स्रोतों से; मानव नेत्र द्वारा ग्रहणीय | मानव दृष्टि, प्रकाश-संचार, ऑप्टिकल उपकरणों में उपयोग |
| अवरक्त किरणें | लगभग 10¹²–10¹⁴ Hz | तापीय विकिरण—गरम वस्तुओं से उत्सर्जन | रिमोट कंट्रोल, थर्मल कैमरा, नाइट विजन उपकरण, ऊष्मा उपचार |
| सुक्ष्म तरंगें (माइक्रोवेव) | लगभग 10⁹–10¹² Hz | विद्युत दोलनकारी सर्किट, रडार, संचार उपकरणों से उत्पन्न | भोजन पकाने, वायरलेस नेटवर्क, रडार प्रणालियों में प्रयोग |
| रेडियो तरंगें | न्यूनतम आवृत्ति — लगभग <10⁹ Hz | ऐन्टिना और ट्रांसमीटर द्वारा उत्पन्न | टीवी, रेडियो, मोबाइल संचार, उपग्रह प्रसारण में व्यापक उपयोग |
अतः सही क्रम है —
1 (गामा किरणें), 4 (एक्स किरणें), 2 (पराबैंगनी किरणें), 3 (रेडियो तरंगें)।
- ‘आदि कर्मयोगी बीटा संस्करण – एक उत्तरदायी शासन पहल’ जून 2025 में निम्नलिखित में से किस मंत्रालय द्वारा शुरू की गई थी?
- आयुष मंत्रालय
- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
- जनजातीय कार्य मंत्रालय
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनें:
कूट:
(a) केवल 4
(b) केवल 1
(c) केवल 1 और 2
(d) केवल 2 और 3
उत्तर: (a)
व्याख्या:
सही उत्तर है (a) केवल 4
आदि कर्मयोगी बीटा वर्ज़न एक उत्तरदायी शासन पहल है, जिसे आदिवासी मंत्रालय ने जून 2025 में व्यापक आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत आदिवासी समुदायों के लिए सेवा वितरण और जवाबदेही को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुरू किया। यह कार्यक्रम एक डिजिटल द्वि-दिशीय संचार प्लेटफ़ॉर्म पर आधारित है, जो शिकायत निवारण, लाभों की निगरानी तथा आंकड़ा-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को सक्षम बनाता है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षित आदिवासी नेतृत्व—आदि कर्मयोगी—सरकार और समुदाय के बीच सेतु का कार्य करते हैं, जिससे प्रतिक्रिया-तंत्र सुदृढ़ होता है और जमीनी स्तर पर सुशासन को बढ़ावा मिलता है। पहल में राज्य, ज़िला और ब्लॉक स्तर पर प्रोसेस लैब्स के माध्यम से बहु-स्तरीय प्रशिक्षण व्यवस्था शामिल है, जिसका लक्ष्य 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के एक लाख से अधिक आदिवासी ग्रामों तक पहुँचकर लगभग 11 करोड़ जनजातीय लोगों के जीवन में परिवर्तन लाना है। बीटा संस्करण जून 2025 में जारी हुआ, जबकि पूर्ण पैमाने पर आदि कर्मयोगी अभियान का शुभारंभ 17 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया।
- निम्नलिखित में से कौन सा विभाग उत्तर प्रदेश में सतत विकास लक्ष्यों से संबंधित राष्ट्रीय संकेतक रूपरेखा प्रगति रिपोर्ट तैयार करता है?
- वित्त विभाग
- शिक्षा विभाग
- योजना विभाग
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 1 और 3
उत्तर: (a) केवल 3
व्याख्या:
उत्तर प्रदेश में योजना विभाग (Department of Planning) सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्रगति की निगरानी और रिपोर्टिंग के लिए मुख्य नोडल विभाग है। यह विभाग “उत्तर प्रदेश एसडीजी प्रगति रिपोर्ट” तथा “राष्ट्रीय संकेतक रूपरेखा (NIF) प्रगति रिपोर्ट” तैयार करता है, जिससे राज्य के लक्ष्य नीति आयोग की राष्ट्रीय रूपरेखा के अनुरूप बनाए जा सकें।
उत्तर प्रदेश का योजना विभाग विकास योजना और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्रगति के आकलन में भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के साथ समन्वय में कार्य करता है। मंत्रालय द्वारा विकसित राष्ट्रीय संकेतक रूपरेखा (NIF) को मानकीकृत मूल्यांकन उपकरण के रूप में उपयोग करते हुए, राज्य स्तरीय योजना विभाग उत्तर प्रदेश की प्रगति रिपोर्ट तैयार करता है, जिससे राज्य के आकलन राष्ट्रीय निगरानी मानकों के अनुरूप सुनिश्चित हो सकें।
हालाँकि वित्त, शिक्षा आदि अन्य विभाग क्षेत्रवार आँकड़े प्रदान करते हैं, परंतु समन्वय एवं संकलन का प्रमुख कार्य योजना विभाग द्वारा किया जाता है।
- ‘बेकिंग सोडा’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- यह सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट है।
- इसका उपयोग अग्निशामक यंत्रों में किया जाता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (d) दोनों 1 और 2
व्याख्या:
बेकिंग सोडा का रासायनिक नाम सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (NaHCO₃) या सोडियम बाइकार्बोनेट है। यह एक श्वेत, क्रिस्टलीय अकार्बनिक यौगिक है, जिसका प्रचलित उपयोग खाद्य प्रौद्योगिकी में उत्थापक (leavening agent) के रूप में, चिकित्सा विज्ञान में अम्लनाशी के रूप में तथा रासायनिक अभिक्रियाओं व स्वच्छता प्रक्रिया में हल्के क्षारक के रूप में किया जाता है।
अग्निशामक यंत्रों में उपयोग: जब इसे गर्म किया जाता है, तो यह कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस उत्सर्जित करता है, जो ऑक्सीजन की आपूर्ति को रोककर आग बुझाने में सहायता करती है।
अतः, दोनों कथन सही हैं।
- नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): उपभोक्ता अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से कम पर मोलभाव कर सकते हैं।
कारण (R): MRP वह मूल्य है जो विक्रेता को क्रेता से वसूलना होता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: (d)
व्याख्या:
कथन (A) सही है: अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) वह सर्वोच्च मूल्य है, जिसे कोई खुदरा विक्रेता किसी वस्तु के लिए ले सकता है। अधिकतम खुदरा मुल्य (एम.आर.पी.) में सभी लागू कर पहले से शामिल होते हैं। किसी भी विक्रेता को एम.आर.पी. से अधिक कीमत वसूलने की अनुमति नहीं है, परंतु वे छूट, ऑफर या मोलभाव के तहत इससे कम मूल्य पर वस्तु बेच सकते हैं। इसलिए उपभोक्ता लाभ उठाने के लिए कम कीमत पर सौदेबाज़ी कर सकते हैं, क्योंकि ग्राहक आकर्षित करने हेतु दुकानदार अक्सर एम.आर.पी. से कम दाम पर सामान बेचते हैं।
कारण (R) गलत है: चूँकि विक्रेता को कानूनन एम.आर.पी. से अधिक मूल्य लेने की अनुमति नहीं है, इसलिए वह इससे कम कीमत पर वस्तु बेच सकता है।
अतः, सही उत्तर है- (d)
- सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिए।
सूची-I (परमाणु ऊर्जा संयंत्र) सूची-II (राज्य)
- कुडनकुलम 1. कर्नाटक
- काकरापार 2. तमिलनाडु
- कैगा 3. राजस्थान
- रावतभाटा 4. गुजरात
कूट:
A B C D
(a) 2 4 3 1
(b) 4 2 3 1
(c) 4 2 1 3
(d) 2 4 1 3
उत्तर: (d)
व्याख्या:
कुडनकुलम – तमिलनाडु: यह परमाणु ऊर्जा केंद्र तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित है। इसे रूस के सहयोग (रोसएटम) से स्थापित किया गया था। यह भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र है।
काकरापार – गुजरात: यह संयंत्र गुजरात के सूरत के निकट स्थित है। यहाँ भारत में विकसित पहला स्वदेशी दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) स्थापित किया गया था। इसका संचालन न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) द्वारा किया जाता है।
कैगा – कर्नाटक: यह केंद्र काली नदी के किनारे, उत्तर कन्नड़ जिले में स्थित है। यहाँ कई PHWR प्रकार के रिएक्टर हैं, जो दक्षिण भारत में विद्युत आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत हैं।
रावतभाटा – राजस्थान: यह संयंत्र कोटा के समीप, चंबल नदी के किनारे स्थित है। यह भारत के सबसे पुराने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में से एक है, जहाँ NPCIL द्वारा संचालित कई PHWR इकाइयाँ स्थापित हैं।
| परमाणु ऊर्जा संयंत्र | राज्य | स्थापित क्षमता | रिएक्टर प्रकार | प्रमुख विशेषताएँ / तथ्य |
| कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र | तमिलनाडु | 2000 मेगावाट (संचालित) + 2000 मेगावाट निर्माणाधीन | दाबित जल रिएक्टर (PWR – रूसी तकनीक) | भारत का सबसे अधिक क्षमता वाला संयंत्र; 2011 में विरोध के चलते निर्माण रुका, 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दी |
| तारापुर परमाणु रिएक्टर | महाराष्ट्र | 1400 मेगावाट (2 × 160 MW BWR + 2 × 540 MW PHWR) | BWR + PHWR | भारत का सबसे पुराना परमाणु संयंत्र (1969 से संचालन); दो PHWR इकाइयाँ 2005 व 2006 में जोड़ी गईं |
| राजस्थान परमाणु ऊर्जा संयंत्र | राजस्थान | 1180 मेगावाट (6 PHWR चालू + 2 प्रस्तावित) | PHWR | प्रथम रिएक्टर 1973 में चालू; 2012 में विरोध प्रदर्शन हुए |
| कैगा परमाणु ऊर्जा संयंत्र | कर्नाटक | 880 मेगावाट (4 × 220 MW) | PHWR | इकाई-1 ने 962 दिन लगातार संचालन कर विश्व रिकॉर्ड बनाया (2016–2018) |
| कलपक्कम परमाणु ऊर्जा संयंत्र | तमिलनाडु | लगभग 470 मेगावाट (2 × 235 MW) + भविष्य में 500 व 600 MW यूनिट | PHWR + प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) | PFBR लगभग 70% अधिक ऊर्जा उत्पन्न करता है व रेडियोधर्मी अवशेष कम बनाता है; वर्धा चक्रवात 2016 में सुरक्षित रहा |
| नरोरा परमाणु रिएक्टर | उत्तर प्रदेश | 440 मेगावाट (2 × PHWR) | PHWR | 1991–92 में संचालन प्रारंभ; 1993 में अग्निकांड के बावजूद देश के सुरक्षित संयंत्रों में अग्रणी; 2000 में गोल्डन पीकॉक अवॉर्ड प्राप्त |
| ककरापार परमाणु ऊर्जा संयंत्र | गुजरात | 440 मेगावाट (2 × PHWR) | PHWR | 1998 में जल प्रणाली रिसाव के कारण अस्थायी बंद, पर 2003 में सर्वश्रेष्ठ PHWR घोषित; 2018 में शीतलक नलिकाओं का पूर्ण प्रतिस्थापन (एन-मास कूलेंट चैनल रिप्लेसमेंट” (ईएमसीसीआर)) किया गया |
- एक सामान्य 70 किग्रा वजन वाले व्यक्ति में पाए जाने वाले निम्नलिखित तत्वों पर विचार कीजिए और उन्हें सही बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
- सोडियम
- पोटेशियम
- तांबा
- लोहा
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 3, 4, 2, 1
(b) 4, 3, 2, 1
(c) 4, 3, 1, 2
(d) 3, 4, 1, 2
उत्तर: (d) 3, 4, 1, 2
व्याख्या: मानव शरीर में, जीवन के लिए आवश्यक समझे जाने वाले लगभग 25 आवश्यक तत्व पाए जाते हैं। इनमें से छह प्रमुख तत्व—ऑक्सीजन, कार्बन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, कैल्शियम और फॉस्फोरस—मिलकर शरीर के लगभग 99% द्रव्यमान का निर्माण करते हैं। इसके अतिरिक्त पाँच गौण तत्व—पोटैशियम, सल्फर, सोडियम, क्लोरीन और मैग्नीशियम—करीब 0.85% का योगदान देते हैं। शेष 14 सूक्ष्म तत्व अत्यंत कम मात्रा में उपस्थित होते हैं, परंतु शरीर की विभिन्न शारीरिक क्रियाओं के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। इनमें लौह, जिंक, तांबा, मैंगनीज़, आयोडीन, फ्लोरीन, सेलेनियम, कोबाल्ट, क्रोमियम, मॉलिब्डेनम, सिलिकॉन, लिथियम, ब्रोमीन और निकल शामिल हैं।
70 किलोग्राम वजन वाले मानव शरीर में प्रश्नगत तत्वों की अनुमानित मात्रा निम्नलिखित है –
| तत्व | अनुमानित मात्रा | विवरण |
| तांबा (Cu) | लगभग 0.1 ग्राम | सूक्ष्म तत्व; एंजाइम क्रिया, हीमोग्लोबिन-संश्लेषण, प्रतिरक्षा तंत्र एवं स्नायविक तंत्र के कार्यों के लिए आवश्यक। |
| लोहा (Fe) | लगभग 4 ग्राम | रक्त में हीमोग्लोबिन का मुख्य घटक; ऑक्सीजन परिवहन और कोशिकीय श्वसन में सहायक। |
| सोडियम (Na) | लगभग 100 ग्राम | प्रमुख बाह्य कोशिकीय इलेक्ट्रोलाइट; तंत्रिका आवेग संप्रेषण, मांसपेशी संकुचन तथा परासरण संतुलन के लिए आवश्यक। |
| पोटैशियम (K) | लगभग 140 ग्राम | प्रमुख अंतरकोशिकीय इलेक्ट्रोलाइट; तंत्रिका संकेत-प्रेषण, मांसपेशी क्रिया और हृदय की धड़कन के संतुलन हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण। |
इस प्रकार, मात्रा के आधार पर तत्वों का बढ़ता क्रम (सबसे कम से सबसे अधिक) होगा:
तांबा < लोहा < सोडियम < पोटैशियम → 3, 4, 1, 2
- निम्नलिखित संतों को सही कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित कीजिए और नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
- नानक
- चैतन्य महाप्रभु
- नामदेव
- कबीर
कूट:
(a) 4, 3, 1, 2
(b) 4, 3, 2, 1
(c) 3, 4, 2, 1
(d) 3, 4, 1, 2
उत्तर: (d) 3, 4, 1, 2
व्याख्या:
- नामदेव (1270–1350 ई.)
नामदेव महाराष्ट्र के प्रमुख प्रारम्भिक भक्ति संत थे जिन्होंने मराठी और हिन्दी में भक्तिपरक अभंग रचनाएँ कीं। उनकी वाणी ने ईश्वर के प्रति व्यक्तिगत और निष्काम प्रेम को महत्व दिया तथा भक्ति को कर्मकाण्ड से परे ले जाकर सामान्य जन तक पहुँचाया। वे वारकरी संप्रदाय तथा उत्तर भारत की भक्ति-धारा के बीच सेतु के रूप में उभरे। आज भी उनके अभंग वारकरी परंपरा में गाए जाते हैं, जो उनकी अमिट आध्यात्मिक विरासत को दर्शाता है।
- कबीर (1440–1518 ई.)
कबीर निर्गुण भक्ति के सर्वाधिक प्रभावशाली प्रणेताओं में से रहे। वे निराकार ईश्वर में विश्वास करते थे तथा जाति-व्यवस्था, मूर्तिपूजा और धार्मिक रूढ़िवाद का विरोध करते थे। उनके दोहों और साखियों ने लोकभक्ति साहित्य को समृद्ध किया तथा गुरु ग्रन्थ साहिब में भी उनकी रचनाएँ शामिल हुईं। कबीर की विचारधारा ने हिन्दू और सूफी परंपराओं का समन्वय करते हुए भक्ति आंदोलन को सार्वभौमिक आध्यात्मिक संदेश दिया।
- गुरु नानक (1469–1539 ई.)
गुरु नानक ने भक्ति आंदोलन में समानता और सामाजिक न्याय की भावना को आगे बढ़ाया। उन्होंने एक ओंकार — एक परम सत्य ईश्वर — का सिद्धांत स्थापित किया तथा नाम सिमरन, सेवा और सत् आजीविका पर बल दिया। वे सिख धर्म के संस्थापक थे और उनकी वाणी आगे चलकर गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित हुई। गुरु नानक ने भक्ति को संगठित रूप प्रदान किया तथा सामाजिक-सांस्कृतिक सुधार को भी गति दी।
- चैतन्य महाप्रभु (1486–1534 ई.)
चैतन्य महाप्रभु बंगाल और उड़ीसा में गौड़ीय वैष्णव भक्ति आंदोलन के प्रमुख आचार्य थे। उन्होंने सगुण कृष्ण भक्ति को विशेष रूप से कीर्तन, प्रेम-भक्ति एवं रस-भक्ति के माध्यम से अभिव्यक्त किया। उनकी भक्ति पद्धति ने आस्था को जन-सामान्य तक पहुँचाया और वैष्णव साहित्य, संगीत एवं मंदिर परंपराओं को समृद्ध किया। आधुनिक वैश्विक कृष्ण-भक्ति संस्थाएँ, जैसे इस्कॉन, आज भी उनकी शिक्षाओं से प्रेरित हैं।
- निम्नलिखित पर विचार कीजिए और उन्हें सही कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
- जवाहर रोजगार योजना
- ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं और बच्चों का विकास
- एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम
- राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 4, 3, 2, 1
(b) 3, 4, 2, 1
(c) 3, 4, 1, 2
(d) 4, 3, 1, 2
उत्तर: (b) 3, 4, 2, 1
व्याख्या (कालानुक्रमिक क्रम):
| कार्यक्रम | प्रारंभ वर्ष | मुख्य उद्देश्य |
| एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) | 1978–79 | लक्षित परिवारों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने के लिए आय का एक स्थायी स्रोत प्रदान करना, ग्रामीण गरीबों के लिए उत्पादक संपत्ति सृजन के माध्यम से स्वरोज़गार। |
| राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम (NREP) | 1980 | ग्रामीण बेरोज़गारों को मजदूरी आधारित रोजगार प्रदान करना तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना। |
| ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं और बच्चों का विकास (DWCRA) | 1982 | आईआरडीपी की उप-योजना; महिलाओं के समूह बनाकर उन्हें ऋण, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास के माध्यम से आय सृजन में सक्षम बनाना तथा आत्मनिर्भर बनाना। |
| जवाहर रोजगार योजना (JRY) | 1989 | NREP और ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम को मिलाकर, ग्राम पंचायतों के माध्यम से रोजगार के अवसर सृजित करके, विशेष रूप से ग्रामीण गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराना। |
- नई अखिल भारतीय सेवा के निर्माण के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- राष्ट्रीय हित में, राज्यसभा नई अखिल भारतीय सेवा के निर्माण हेतु प्रस्ताव पारित कर सकती है।
- नई अखिल भारतीय सेवा के निर्माण हेतु प्रस्ताव राज्यसभा द्वारा सदन के कुल सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित किया जाना चाहिए।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (b) केवल 1
व्याख्या:
कथन 1 सही है तथा कथन 2 गलत है: भारतीय संविधान के भाग XIV में निहित अनुच्छेद 312 संसद को आवश्यकता पड़ने पर नए अखिल भारतीय सेवाओं की स्थापना करने का अधिकार प्रदान करता है। यह शक्ति तभी सक्रिय होती है जब राज्यसभा—जो राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है—उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से यह घोषणा करते हुए प्रस्ताव पारित करे कि ऐसी सेवा का निर्माण राष्ट्रीय हित में आवश्यक या उपयुक्त है। इस शर्त की पूर्ति के बाद संसद कानून बना सकती है, जिसके माध्यम से सेवा की स्थापना तथा भर्ती, प्रशिक्षण, सेवा-शर्तें और अनुशासन से सम्बंधित प्रावधान निर्धारित किए जा सकते हैं।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अनुच्छेद 312 के अंतर्गत सृजित सेवाओं के प्रमुख उदाहरण हैं, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाते हैं। यह अनुच्छेद सहकारी संघवाद की भावना को भी प्रतिबिंबित करता है—जहाँ भर्ती के नियम और मानक केंद्र द्वारा निर्धारित किए जाते हैं, वहीं अधिकारी केंद्र और राज्यों दोनों के अधीन कार्य करते हैं, जिससे पूरे देश में संचालन एवं प्रशासनिक क्षमता में समानता और समन्वय सुनिश्चित होता है।
यह प्रावधान उभरती राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप नई सेवाओं के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त करता है—जैसे कि अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (AIJS) की स्थापना पर चल रही चर्चाएँ इसका उदाहरण हैं। यद्यपि इस विषय पर संघ-राज्य संबंधों के संदर्भ में विमर्श और मतभेद बने हुए हैं, फिर भी अनुच्छेद 312 भारत के प्रशासनिक ढाँचे को सुदृढ़ बनाने का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक साधन बना हुआ है।
- गरीबी से संबंधित निम्नलिखित समितियों पर विचार कीजिए और उनके गठन को सही कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
- लकड़ावाला समिति
- रंगराजन समिति
- तेंदुलकर समिति
- दांडेकर एवं रथ समिति
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 1, 4, 3, 2
(c) 4, 1, 2, 3
(b) 4, 1, 3, 2
(d) 1, 4, 2, 3
उत्तर: (b) 4, 1, 3, 2
व्याख्या (कालानुक्रमिक क्रम):
| समिति | वर्ष | मुख्य योगदान |
| डांडेकर और रथ समिति | 1971 | एनएसएस आंकडों का उपयोग कर भारत में गरीबी का व्यापक आकलन करने वाली पहली समिति।
रोजाना 2,250 कैलोरी की आवश्यकता पर आधारित व्यय को गरीबी रेखा मानने की सिफारिश। |
| अलघ समिति | 1979 | न्यूनतम पोषण आवश्यकताओं तथा संबंधित उपभोग व्यय के आधार पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग गरीबी रेखाएँ निर्धारित कीं।
भविष्य के वर्षों में मूल्य-वृद्धि और महँगाई के अनुसार गरीबी रेखा को अद्यतन करके गरीबी का अनुमान लगाने की सलाह दी। |
| लकड़ावाला समिति | 1993 | सन् 1973–74 को आधार वर्ष रखते हुए ग्रामीण क्षेत्र के लिए 2400 किलो-कैलोरी तथा शहरी क्षेत्र के लिए 2100 किलो-कैलोरी पर आधारित गरीबी निर्धारण पद्धति जारी रखने की अनुशंसा।
राज्यों के बीच मूल्य-स्तर में अंतर को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक राज्य के लिए पृथक गरीबी-रेखा तय करने का सुझाव। ग्रामीण क्षेत्र में कृषि श्रमिकों हेतु उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तथा शहरी क्षेत्र में औद्योगिक श्रमिकों हेतु उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर गरीबी-रेखा अद्यतन करने की सिफारिश। राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी के आधार पर होने वाली ‘अनुपात-समायोजन’ (स्केलिंग) की प्रथा समाप्त करने की सलाह। |
| तेन्दुलकर समिति | 2009 | कैलोरी-आधारित गरीबी मापन से हटकर व्यापक उपभोग वस्तुओं व सेवाओं (खाद्य सामग्री, वस्त्र, स्वास्थ्य, शिक्षा इत्यादि) की खपत पर आधारित निर्धारण की सिफारिश की।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए एक समान गरीबी-रेखा उपभोग टोकरी (यूनिफ़ॉर्म प्लावर्टी लाइन बास्केट) अपनाने का प्रस्ताव रखा, जबकि पूर्व समितियाँ दोनों के लिए अलग टोकरी का उपयोग करती थीं। मूल्य-वृद्धि और समय के साथ उपभोग पैटर्न में परिवर्तन को समायोजित करते हुए गरीबी-रेखा अद्यतन करने की नई पद्धति सुझाई। गरीबी अनुमान में एकसमान संदर्भ अवधि के स्थान पर मिश्रित संदर्भ अवधि (मिक्स्ड रेफरेंस पीरियड) के उपयोग की अनुशंसा की। क्रय शक्ति समता (PPP) को देशों के बीच मुद्रा की खरीद क्षमता की तुलना करने की पद्धति के रूप में स्पष्ट किया। |
| रंगराजन समिति | 2014 | गरीबी रेखा को ग्रामीण क्षेत्र के लिए ₹972 प्रति व्यक्ति प्रति माह (~₹32 प्रतिदिन) और शहरी क्षेत्र के लिए ₹1,407 प्रति व्यक्ति प्रति माह (~₹47 प्रतिदिन) निर्धारित किया।
केवल कैलोरी-आधारित माप के बजाय भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य पर होने वाले व्यय को शामिल करते हुए व्यापक पद्धति अपनाई। खाद्य मानकों का निर्धारण केवल कैलोरी के आधार पर नहीं, बल्कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा सुझाए गए प्रोटीन और वसा आवश्यकताओं पर किया। |
- ‘ब्राज़ील’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- ब्राज़ील के भूमध्यरेखीय वर्षावनों को ‘सेल्वा’ कहा जाता है।
- यहाँ की गहरे काले रंग की उपजाऊ भूमि को ‘टेरा रोक्सा’ कहा जाता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (D)
व्याख्या:
कथन 1 सही है: ब्राज़ील के अमेज़न बेसिन की सघन भूमध्यीय वर्षावनियाँ, जिन्हें स्थानीय रूप से सेल्वास (Selvas) कहा जाता है, प्रति वर्ष 2000 मिमी से अधिक वर्षा प्राप्त करती हैं और वर्षभर गर्म तथा आर्द्र रहती हैं। यहाँ अनेक स्तरों वाली छत्रछाया (कैनोपी) पाई जाती है, जिसमें महोगनी, सीडर और रबर जैसे सदाबहार वृक्ष प्रमुख हैं। यह क्षेत्र संसार की सबसे समृद्ध जैव विविधता का घर है, जिसमें जैगुआर, स्लॉथ, एनाकोंडा, मकाव समेत असंख्य वनस्पतियाँ और जीव शामिल हैं। अमेज़न नदी द्वारा सिंचित यह क्षेत्र यानोमामी जैसी आदिवासी जनजातियों का निवास भी है, जो वनों पर निर्भर होकर जीवनयापन करती हैं। विश्व के “फेफड़े” कहे जाने वाले ये वन वैश्विक जलवायु संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किन्तु वनों की कटाई, कृषि विस्तार, खनन और आगजनी जैसे कारक इनके लिए गंभीर खतरे उत्पन्न कर रहे हैं, जिनके संरक्षण हेतु त्वरित प्रयास आवश्यक हैं।
कथन 2 सही है: ‘टेरा रोक्सा’ (Terra Roxa) का अर्थ पुर्तगाली में ‘लाल मिट्टी’ है (हालाँकि यह गहरे बैंगनी रंग जैसी दिखती है)। यह मिट्टी दक्षिणी ब्राज़ील में पाई जाती है, जो बेसाल्टिक चट्टानों के अपघटन से बनी है। यह मिट्टी कॉफ़ी और अन्य वाणिज्यिक फसलों के लिए उपयुक्त है। यह मिट्टी टेरा रोसा से भिन्न है। टेरा रोसा लालिमायुक्त, चिकनी (क्लेयी) मिट्टी है, जो मुख्यतः भूमध्यसागरीय क्षेत्र में चूना-पत्थर (लाइमस्टोन) की आधारशिला पर विकसित होती है।
अतः दोनों कथन सही हैं।
- निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिए और उन्हें सही कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
- पूना समझौता
- सविनय अवज्ञा आंदोलन का अंत
- गांधी-इरविन समझौता
- दूसरा गोलमेज सम्मेलन
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 4, 3, 1, 2
(b) 3, 4, 1, 2
(c) 3, 4, 2, 1
(d) 4, 3, 2, 1
उत्तर: (b) 3, 4, 1, 2
व्याख्या (कालानुक्रमिक क्रम):
| घटना | वर्ष | विवरण |
| गांधी–इरविन समझौता | मार्च 1931 | सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी और वायसराय इरविन के बीच समझौता हुआ।
सरकार ने अध्यादेश वापस लेने और राजनीतिक कैदियों को रिहा करने पर सहमति व्यक्त की (हिंसक अपराधियों को छोड़कर)। शांतिपूर्ण धरने की अनुमति तथा जहाँ संभव हो, जब्त संपत्ति लौटाने पर सहमति बनी। गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया। गांधीजी लंदन में होने वाले द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने पर सहमत हुए। |
| दूसरा गोलमेज सम्मेलन | सितंबर–दिसंबर 1931 | पहले गोलमेज सम्मेलन की विफलता के बाद संवैधानिक सुधारों पर चर्चा के लिए लंदन में आयोजित।
गांधीजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुए। मुख्य विवाद अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व, विशेषकर गांधी और अम्बेडकर के बीच, को लेकर हुआ। पूरे सम्मेलन में साम्प्रदायिक मुद्दे हावी रहे। सम्मेलन किसी ठोस संवैधानिक परिणाम के बिना समाप्त हुआ। |
| पूना समझौता | सितंबर 1932 | महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अम्बेडकर के बीच यरवदा जेल में समझौता संपन्न हुआ।
गांधीजी के अनशन के बाद, जो सामुदायिक पुरस्कार में दलितों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल के विरोध में था। समझौते में दलितों (बाद में अनुसूचित जाति) के लिए आरक्षित सीटें सुनिश्चित की गईं। पृथक निर्वाचन की बजाय संयुक्त निर्वाचन प्रणाली लागू की गई। आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ाई गई तथा पृथक प्राथमिक चुनाव की व्यवस्था की गई। |
| सविनय अवज्ञा आंदोलन का समापन | अप्रैल 1934 | गांधीजी ने मई 1933 में आंदोलन को स्थगित किया और अप्रैल 1934 में इसे औपचारिक रूप से वापस ले लिया।
आंदोलन के परिणामस्वरूप जन-जागरण और राजनीतिक सक्रियता में व्यापक वृद्धि हुई। महिलाओं, किसानों, मजदूरों और सामान्य जनता की भागीदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ी। इसने पूरे भारत में औपनिवेशिक-विरोधी राष्ट्रवाद को मजबूती प्रदान की। |
- जून 2025 में घोषित साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- युवा पुरस्कार की घोषणा 23 भारतीय भाषाओं में की गई थी।
- इस वर्ष डोगरी में कोई युवा पुरस्कार नहीं है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनें:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (d) दोनों 1 और 2
व्याख्या:
साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार, जिसकी स्थापना वर्ष 2011 में की गई, भारत के 35 वर्ष या उससे कम आयु के प्रतिभाशाली युवा लेखकों को प्रति वर्ष प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार साहित्य अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त 24 भारतीय भाषाओं (अंग्रेज़ी सहित) में रचित मौलिक साहित्यिक कृतियों—रचनात्मक या आलोचनात्मक—के लिए दिया जाता है। पुरस्कार में ₹50,000 की नकद राशि, ताम्र पट्ट तथा प्रशस्ति-पत्र शामिल होते हैं।
पात्रता के लिए कृति मौलिक होनी चाहिए, पिछले पाँच वर्षों के भीतर प्रकाशित, न्यूनतम 49 पृष्ठ की, और लेखक को प्रत्येक भाषा में केवल एक बार यह पुरस्कार दिया जा सकता है। अनुवाद, संक्षिप्त संस्करण, शोध-प्रबंध, ई–बुक, मरणोपरांत कृतियाँ, तथा एनआरआई/पीआईओ या द्वि-नागरिकता वाले व्यक्तियों की रचनाएँ विचार के योग्य नहीं मानी जातीं।
चयन प्रक्रिया में सार्वजनिक आमंत्रण, विशेषज्ञों द्वारा प्राथमिक जाँच, इसके पश्चात तीन-सदस्यीय भाषा-जूरी द्वारा अंतिम मूल्यांकन, तथा अंत में कार्यकारी बोर्ड की स्वीकृति शामिल होती है, जिसके बाद विजेताओं की आधिकारिक घोषणा की जाती है।
कथन 1 सही है: वर्ष 2025 में, साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार के लिए 23 भाषाओं में 23 लेखकों का चयन किया गया।
कथन 2 सही है: वर्ष 2025 में डोगरी भाषा में साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार प्रदान नहीं किया गया।
| भाषा | कृति (शैली/विधा) | लेखक/लेखिका |
| असमिया | कुचियानामा (कहानी संग्रह) | सुप्रकाश भुइयाँ |
| बांग्ला | एकरोखा चीरुनी तलाशी (कविता) | सुदेशना मोइत्रा |
| बोड़ो | आंग असुर (कविता) | अमर खुंगुर बोरो |
| डोगरी | कोई पुरस्कार नहीं | — |
| अंग्रेज़ी | सिद्धार्थ: द बॉय हू बिकेम द बुद्ध (उपन्यास) | अद्वैत कोटारी |
| गुजराती | नरसिंह टेकारी (निबंध) | मयूर खावडु |
| हिंदी | फिर उगना (कविता) | पार्वती तिर्की |
| कन्नड़ | पच्चेय जगुलि (आलोचना) | आर. दिलीपकुमार |
| कश्मीरी | हरफ़स हरफ़स ज़ाग (आलोचना) | सैका सेहर |
| कोंकणी | गांवगाथा (कहानी संग्रह) | ग्लाइनीस डायस |
| मैथिली | बनारस आ हम (कविता) | नेहा झा मणि |
| मलयालम | राम c/o आनंदी (उपन्यास) | अखिल पी. धर्मजन |
| मणिपुरी | खोयुम नोंगदाम काउ (महाकाव्य) | ए. के. जीतन |
| मराठी | खोल खोल दुष्काळ डोळे (उपन्यास) | प्रदीप कोकरे |
| नेपाली | जुनको आँसु (कविता) | सुभाष ठकुरी |
| उड़िया | कदंबबन (कहानी संग्रह) | सुव्रत कुमार सेनापति |
| पंजाबी | गर्ल्स हॉस्टल (कविता) | मंदीप औलख |
| राजस्थानी | अंतस रे आंगणै (कविता) | पूनमचंद गोडारा |
| संस्कृत | परिभाषिकशब्द-स्वरस्यं (आलोचना) | धीरज कुमार पांडे |
| संथाली | आरा साओ इन (कविता) | फागु बास्के |
| सिंधी | पंधियाडो (कविता) | मंथन बचानी |
| तमिल | कुट्टोंरु कुटिर्रु (कहानी संग्रह) | लत्श्मिहार |
| तेलुगु | मैरावन (उपन्यास) | प्रसाद सूरी |
| उर्दू | मज़हरुल हक़ : तारीख़-ए-आज़ादी-ए-हिन्द : हिन्द का फ़रामोश कर्दा क़ाएद (उपन्यास) | नेहा रूबाब |
- निम्नलिखित युद्धों पर विचार करें और उन्हें सही कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित करें।
- प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध
- द्वितीय आंग्ल-फ्रांसीसी युद्ध
- प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध
- प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 1, 2, 3, 4
(b) 2, 1, 3, 4
(c) 2, 1, 4, 3
(d) 1, 2, 4, 3
उत्तर: (c) 2, 1, 4, 3
व्याख्या (कालानुक्रमिक क्रम):
| युद्ध | वर्ष | मुख्य विवरण |
| प्रथम आंग्ल-फ्रांसीसी (कर्नाटक) युद्ध | 1746–1748 | दक्षिण भारत में प्रभुत्व हेतु अंग्रेज़ों व फ्रांसीसियों में संघर्ष; ऐक्स-ला-शैपल संधि से समाप्त। |
| द्वितीय आंग्ल-फ्रांसीसी (कर्नाटक) युद्ध | 1749–1754 | कर्नाटक में नियंत्रण हेतु संघर्ष; डुप्ले की प्रमुख भूमिका; निर्णायक परिणाम नहीं। |
| तृतीय आंग्ल-फ्रांसीसी (कर्नाटक) युद्ध | 1756–1763 | निर्णायक युद्ध; वांडीवाश में अंग्रेज़ विजय; पेरिस संधि से फ्रांसीसी शक्ति क्षीण। |
| प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध | 1767–1769 | हैदर अली ने अंग्रेज़ों के विस्तार का विरोध किया; मद्रास संधि से समाप्त। |
| द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध | 1780–1784 | हैदर अली व टीपू सुल्तान बनाम अंग्रेज़; मंगलोर संधि—यथास्थिति बहाल। |
| तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध | 1790–1792 | अंग्रेज़ गठबंधन की विजय; श्रीरंगपट्टनम संधि—टीपू ने आधा राज्य छोड़ा। |
| चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध | 1799 | टीपू सुल्तान युद्ध में मारे गए; मैसूर पर अंग्रेज़ों का नियंत्रण स्थापित। |
| प्रथम आंग्ल-अफ़गान युद्ध | 1839–1842 | अंग्रेज़ों ने शाह शुजा को गद्दी पर बैठाने का प्रयास किया; काबुल से घातक वापसी। |
| द्वितीय आंग्ल-अफ़गान युद्ध | 1878–1880 | अफ़गान विदेश नीति पर ब्रिटिश वर्चस्व; गंडामक संधि। |
| तृतीय आंग्ल-अफ़गान युद्ध | 1919 | अफ़गानिस्तान ने पूर्ण स्वतंत्रता की माँग की; रावलपिंडी संधि—स्वाधीनता मान्य। |
| प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध | 1845–1846 | आंग्ल-सिख संघर्ष; लाहौर संधि से समाप्त। |
| द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध | 1848–1849 | ब्रिटिश विजय से पंजाब का विलय। |
- भारत द्वारा मार्च 2025 में निम्नलिखित में से किस देश को मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए ऑपरेशन ब्रह्मा शुरू किया गया था?
- बांग्लादेश
- म्यांमार
- श्रीलंका
- मलेशिया
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 2 और 4
(c) केवल 2
(b) केवल
(d) केवल 1 और 3
उत्तर: (c)
व्याख्या:
सही उत्तर है (c) केवल 2, क्योंकि ऑपरेशन ब्रह्मा म्यांमार को मानवीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। ऑपरेशन ब्रह्मा 28 मार्च 2025 को म्यांमार में आए भूकंप के बाद भारत द्वारा चलाई गई व्यापक मानवीय राहत पहल है। प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता के रूप में भारत ने वायुसेना और नौसेना के माध्यम से 625 मीट्रिक टन राहत सामग्री—जिसमें दवाएँ, खाद्य सामग्री, तंबू, पेयजल और खोज-बचाव दल शामिल हैं—शीघ्रता से पहुँचाई। मांडले में स्थापित 200-बिस्तरों वाला फील्ड हॉस्पिटल इलाज और शल्य चिकित्सा कार्य में सक्रिय योगदान दे रहा है। यह अभियान भारत की पड़ोसी-प्रथम नीति, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, तथा पड़ोसी देशों की सहायता के प्रति प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से दर्शाता है।
प्रश्न 20. 1748 की ऐक्स-ला-चैपल संधि के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- प्रथम कर्नाटक युद्ध समाप्त हो गया।
- मद्रास अंग्रेजों को वापस कर दिया गया।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनें:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (d)
व्याख्या:
ऐक्स-ला-शैपेल की संधि (1748) ने ऑस्ट्रियाई उत्तराधिकार युद्ध का औपचारिक अंत किया, जो हैब्सबर्ग सिंहासन के उत्तराधिकार को लेकर यूरोपीय शक्तियों के बीच लड़ा गया प्रमुख संघर्ष था। यूरोपीय प्रतिद्वंद्विता का विस्तार भारत जैसे उपनिवेश क्षेत्रों तक भी हुआ, जिसके परिणामस्वरूप यह संधि भारत में चले इसके विस्तार प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746–1748) को भी समाप्त करती है। इस युद्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और फ्रांसीसी कंपनी डेस इंडेस आमने-सामने थीं, तथा कई भारतीय शासक भी इसमें शामिल हुए।
युद्ध के दौरान ला बॉर्दोनै के नेतृत्व में फ्रांसीसियों ने 1746 में मद्रास (फोर्ट सेंट जॉर्ज) पर कब्जा कर लिया था, जो उनका प्रमुख लाभ था। किन्तु संधि ने दोनों पक्षों द्वारा कब्जाई गई भूमि को पूर्व-युद्ध स्थिति में लौटाने का प्रावधान किया।
इसके अंतर्गत—
- मद्रास ब्रिटिशों को वापस कर दिया गया, यद्यपि डुप्ले ने इसका विरोध किया।
- बदले में ब्रिटिशों ने लुईसबर्ग, जो उत्तरी अमेरिका में फ्रांस का प्रमुख गढ़ था, वापस लौटा दिया।
फिर भी यह संधि भारत में अंग्रेज़–फ्रांसीसी सत्ता संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त नहीं कर सकी। यह केवल अस्थायी युद्धविराम साबित हुई। फ्रांसीसी महत्वाकांक्षाएँ डेक्कन और कर्नाटक में जारी रहीं, और ब्रिटिश विस्तार नीति भी अविरल बनी रही। अंततः यह प्रतिद्वंद्विता पुनः भड़की और आगे चलकर द्वितीय कर्नाटक युद्ध (1749–1754) का कारण बनी।
प्रश्न 21. निम्नलिखित में से किसने खाद्य सुरक्षा में अधिकारों की अवधारणा प्रस्तुत की?
- एम. एस. स्वामीनाथन
- अतुल प्रणय
- समाली श्रीकांत
- अमर्त्य सेन
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनें:
कूट:
(a) केवल 4
(b) केवल
(c) 1 और 2
(d) 3 और 4
उत्तर: (a)
व्याख्या:
अमर्त्य सेन, भारतीय अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता, ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में “अधिकार (Entitlements)” की अवधारणा प्रस्तुत की। यह विचार उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘Poverty and Famines: An Essay on Entitlement and Deprivation’ (1981) में विकसित किया। सेन का तर्क था कि अकाल और भूख केवल इसलिए नहीं उत्पन्न होते कि भोजन उपलब्ध नहीं है, बल्कि इसलिए कि लोग भोजन प्राप्त नहीं कर पाते — यानी उनके पास अधिकार नहीं होते।
उनके अनुसार अधिकार से तात्पर्य उस वस्तु-संपदा, संसाधन और सेवाओं से है जिन्हें कोई व्यक्ति कानूनी रूप से अर्जित कर सकता है — जैसे मजदूरी, व्यापार, उत्पादन से प्राप्त आय, या राज्य द्वारा प्रदत्त सहायता। इसलिए यदि बाजार में भोजन उपलब्ध हो, फिर भी व्यक्ति भूखा रह सकता है यदि उसके पास खरीदने या प्राप्त करने की सामर्थ्य न हो।
सेन ने इस सिद्धांत को ऐतिहासिक उदाहरणों से सिद्ध किया — जैसे 1943 का बंगाल अकाल, जिसमें खाद्यान्न उत्पादन पर्याप्त था, फिर भी मजदूरी गिरने, महँगाई बढ़ने और अधिकारों के ह्रास के कारण लाखों लोग मर गए। इस सिद्धांत ने खाद्य सुरक्षा को मात्र उत्पादन से आगे बढ़ाकर वितरण, पहुँच, आय, सामाजिक सुरक्षा, और राज्य की नीतियों तक विस्तारित किया। आज अनेक कल्याणकारी खाद्य-प्रणालियाँ, सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ तथा ‘खाद्य-अधिकार’ आधारित विधिक ढाँचे इसी सिद्धांत पर आधारित हैं।
प्रश्न 22. सूची – I को सूची II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए।
सूची – I (राज्य) सूची – II (राज्यसभा में सीटों की संख्या)
- महाराष्ट्र 1. 16
- कर्नाटक 2. 18
- बिहार 3. 19
- तमिलनाडु 4. 12
कूट:
A B C D
(a) 2 4 3 1
(b) 3 4 1 2
(c) 2 1 3 4
(d) 1 2 4 3
उत्तर: (b)
व्याख्या:
वर्तमान में राज्यों के लिए राज्यसभा सीटों की संख्या इस प्रकार है:
- महाराष्ट्र – 19 सीटें
- कर्नाटक – 12 सीटें
- बिहार – 16 सीटें
- तमिलनाडु – 18 सीटें
| राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश | राज्यसभा सीटें |
| आंध्र प्रदेश | 11 |
| अरुणाचल प्रदेश | 1 |
| असम | 7 |
| बिहार | 16 |
| छत्तीसगढ़ | 5 |
| गोवा | 1 |
| गुजरात | 11 |
| हरियाणा | 5 |
| हिमाचल प्रदेश | 3 |
| झारखण्ड | 6 |
| कर्नाटक | 12 |
| केरल | 9 |
| मध्य प्रदेश | 11 |
| महाराष्ट्र | 19 |
| मणिपुर | 1 |
| मेघालय | 1 |
| मिज़ोरम | 1 |
| नागालैण्ड | 1 |
| राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली | 3 |
| ओडिशा | 10 |
| पुदुच्चेरी (के.शा.प्र.) | 1 |
| पंजाब | 7 |
| राजस्थान | 10 |
| सिक्किम | 1 |
| तमिलनाडु | 18 |
| तेलंगाना | 7 |
| त्रिपुरा | 1 |
| उत्तर प्रदेश | 31 |
| उत्तराखण्ड | 3 |
| जम्मू एवं कश्मीर (के.शा.प्र.) | 4 |
| पश्चिम बंगाल | 16 |
- निम्नलिखित विद्रोहों पर विचार कीजिए और उन्हें सही कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
- पबना
- नील
- रसोइया
- संन्यासी
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 3, 4, 1, 2
(b) 4, 2, 3, 1
(c) 4, 3, 2, 1
(d) 3, 4, 2, 1
उत्तर: (b)
व्याख्या:
- 1. संन्यासी विद्रोह (1770–1790 के दशक, बंगाल क्षेत्र)
1770 के बंगाल अकाल और ब्रिटिश कर-वृद्धि के कारण संन्यासियों, फ़क़ीरों व किसानों का प्रारंभिक औपनिवेशिक-विरोधी विद्रोह। कंपनी पर धार्मिक आवागमन व संग्रह पर रोक से संघर्ष भड़का; दो दशकों तक गुरिल्ला शैली में कोषाध्यक्षियों व चौकियों पर हमले हुए।
- कूका/नामधारी आंदोलन (1840–1850 का दशक, पंजाब)
बाबा राम सिंह द्वारा आरंभित सिख धार्मिक–सामाजिक सुधार आंदोलन, जिसमें जातिभेद, गौ-वध, मद्यपान और पाश्चात्य प्रभावों का विरोध। बाद में ब्रिटिश-विरोधी उग्र आंदोलन बना; 1871–72 में कठोर दमन और तोप से उड़ा कर फांसियां हुईं। पंजाब में राष्ट्रवादी चेतना का प्रारंभिक स्वर।
- पाबना किसान आंदोलन (1873–1876, बंगाल)
जमींदारों द्वारा अवैध किराए, जबरन वसूली और बेदखली के विरुद्ध शांतिपूर्ण किसान प्रतिरोध। किसानों ने संघ बनाए, सामूहिक सभाएँ कीं और कानूनी कार्रवाई की। इसके फलस्वरूप बंगाल जमींदारी अधिनियम, 1885 के निर्माण में योगदान मिला।
- नील विद्रोह (1859–1860, बंगाल)
यूरोपीय नील-रोपकों द्वारा किसानों पर थोपे गए शोषणकारी करारों एवं जबरदस्ती नील की खेती करवाए जाने के विरुद्ध यह एक व्यापक किसान-प्रतिरोध था। कृषकों द्वारा नील की खेती से सामूहिक इंकार किया गया, जिसे स्थानीय जमींदारों तथा बंगाली बुद्धिजीवियों का समर्थन प्राप्त हुआ। इसके परिणामस्वरूप 1860 में नील आयोग का गठन हुआ, जिसकी रिपोर्ट के बाद नील-खेती धीरे-धीरे समाप्त होने लगी।
- नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): ऑस्ट्रेलिया का आंतरिक भाग रेगिस्तानी और अर्ध-रेगिस्तानी है।
कारण (R): उत्तरी ऑस्ट्रेलिया समशीतोष्ण क्षेत्र में स्थित है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: (D)
व्याख्या:
अभिकथन (A) सत्य है।
ऑस्ट्रेलिया का आंतरिक भाग, जिसे आउटबैक कहा जाता है, बहुत कम वर्षा, उच्च तापमान और तेज वाष्पीकरण के कारण मुख्यतः शुष्क और अर्ध-शुष्क है। इसी कारण यहाँ ग्रेट विक्टोरिया, ग्रेट सैंडी, सिम्पसन, तनामी और गिब्सन जैसे विशाल मरुस्थल पाए जाते हैं। वनस्पति विरल है, जल स्रोत सीमित हैं और आबादी भी बहुत कम—इससे यह क्षेत्र शुष्क प्रकृति का स्पष्ट प्रमाण देता है।
कथन (R) असत्य है।
उत्तरी ऑस्ट्रेलिया समशीतोष्ण क्षेत्र में नहीं आता, बल्कि यह ऊष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में स्थित है। यहाँ वर्ष भर ऊँचा तापमान, नमी युक्त जलवायु, तथा गर्मी में मानसूनी वर्षा होती है। डार्विन और केप यॉर्क प्रायद्वीप जैसे क्षेत्रों में भारी वर्षा और उष्णकटिबंधीय तूफान आम हैं।
समशीतोष्ण जलवायु मुख्यतः दक्षिण-पूर्वी व दक्षिण-पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में पाई जाती है।
- नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): मानव त्वचा से पसीने के वाष्पीकरण से शरीर की गर्मी नष्ट हो जाती है।
कारण (R): गर्म दिन में उच्च आर्द्रता से बेचैनी बढ़ जाती है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) (A) असत्य है, परन्तु (R) सत्य है।
(b) (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(c) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(d) (A) सत्य है, परन्तु (R) असत्य है।
उत्तर: (C)
व्याख्या:
मानव शरीर का तापमान नियंत्रित करने में स्वेद वाष्पीकरण एक प्रमुख प्रक्रिया है। जब शरीर का तापमान बढ़ता है, तो ग्रंथियाँ पसीना उत्पन्न करती हैं, जो त्वचा की सतह पर फैल जाता है। पसीने को वाष्पित होने के लिए वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा शरीर से अवशोषित करनी पड़ती है। इस ऊष्मा-हानि के कारण त्वचा ठंडी होती है और शरीर का तापमान संतुलित व नियंत्रित रहता है। इसलिए, कथन (A) सही है।
दूसरी ओर, कारण (R) एक अन्य परिस्थिति का वर्णन करता है। गर्म और आर्द्र दिनों में वायुमंडल में पहले से ही अधिक नमी होती है, जिससे वाष्प दाब-प्रवणता कम हो जाती है। परिणामस्वरूप पसीना आसानी से वाष्पित नहीं हो पाता। पसीना त्वचा पर बना रहता है और ऊष्मा-निष्कासन धीमा पड़ जाता है, जिससे शरीर प्रभावी रूप से ठंडा नहीं हो पाता। इसी कारण ऐसी परिस्थितियों में चिपचिपाहट, भारीपन, असुविधा तथा कभी-कभी उष्मा-जनित थकान महसूस होता है।
अभिकथन यह बताता है कि पसीने का वाष्पीकरण कैसे शरीर को ठंडा करता है, जबकि कारण केवल यह समझाता है कि आर्द्र दिनों में यह प्रक्रिया क्यों प्रभावी नहीं रहती। ये दोनों विषय संबंधित तो हैं, परन्तु कारण अभिकथन की पूर्ण व्याख्या नहीं है।
- नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): हिमालय पर्वतों में विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ पाई जाती हैं।
कारण (R): हिमालय में ऊँचाई में परिवर्तन के साथ जलवायु में भी विविधताएँ होती हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: (B)
व्याख्या:
हिमालय पर्वतमाला में वनस्पति की अत्यधिक विविधता पाई जाती है। निम्न पहाड़ी क्षेत्रों में ऊष्ण एवं आर्द्र परिस्थितियाँ उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वनों को बढ़ावा देती हैं, जहाँ साल, बाँस तथा चौड़ी पत्ती वाले वृक्ष प्रमुख हैं। लगभग 1500–3000 मीटर की ऊँचाई पर तापमान में कमी होने से समशीतोष्ण शंकुधारी वन विकसित होते हैं, जिनमें देवदार, चीड़, फ़र, स्प्रूस और ओक जैसे वृक्ष प्रमुख हैं। 3500 मीटर से अधिक ऊँचाई पर तापमान अत्यंत कम होने लगता है, जिससे एल्पाइन झाड़ियाँ, घास, लाइकेन तथा हिमान्चली (टुण्ड्रा प्रकार) वनस्पति पाई जाती है। अतः कथन (A) पूर्णतः सही है।
यह परिवर्तन सीधे ऊँचाई के साथ जलवायु परिवर्तन से संबंधित है। जैसे-जैसे ऊँचाई बढ़ती है, तापमान लगभग प्रति 1000 मीटर पर 6.5°C घटता है, वायु का दाब और घनत्व कम होता है तथा वर्षा के प्रकार एवं मात्रा में भी परिवर्तन आता है—नीचे वर्षा, ऊपर हिमपात। विभिन्न ऊँचाइयों पर तापमान, नमी, मृदा तथा वर्षा में यह अंतर भिन्न जैव-भौगोलिक वन पट्टियों का निर्माण करता है। इसलिए कारण (R) भी सही है।
चूँकि ऊँचाई-जनित जलवायु भिन्नता ही हिमालय में वनस्पति विविधता का मुख्य कारण है, अतः कारण (R) कथन (A) का उपयुक्त एवं वैज्ञानिक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है।
- ‘बहु-आयामी गरीबी सूचकांक’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- इसे 2010 में विकसित और प्रस्तुत किया गया ।
- यह अत्यधिक गरीबी को मापता है और प्रतिदिन एक डॉलर से कम पर जीवन यापन करने वालों को शामिल करता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (b)
व्याख्या:
कथन 1 सही है: यह 2010 में विकसित और प्रस्तुत किया गया था। बहु-आयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) को ऑक्सफ़ोर्ड पावर्टी और ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (ओपीएचआई) ने विकसित किया और 2010 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की मानव विकास रिपोर्ट में प्रस्तुत किया।
कथन 2 ─ यह अत्यधिक गरीबी को मापता है तथा उन लोगों को शामिल करता है जो प्रतिदिन एक डॉलर से कम पर जीवनयापन करते हैं─ गलत है: एमपीआई गरीबी को मात्र आय के आधार पर नहीं मापता, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन-स्तर से संबंधित विभिन्न संकेतकों के आधार पर बहुआयामी रूप से गरीबी का आकलन करता है। प्रतिदिन 1 डॉलर से कम आय वाली परिभाषा विश्व बैंक की आय-आधारित अत्यधिक गरीबी माप प्रणाली से संबद्ध है, एमपीआई से नहीं।
| बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई)
बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) गरीबी को केवल आय से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन-स्तर में होने वाली वंचनाओं के आधार पर मापता है। इसे यूएनडीपी और ओपीएचआई ने विकसित किया। यदि किसी परिवार में कुल संकेतकों के भारित हिस्से में से एक-तिहाई या उससे अधिक वंचनाएँ पाई जाएँ, तो उसे बहुआयामी रूप से गरीब माना जाता है। एमपीआई गरीबी की विभिन्न कमियों को एक साथ मापकर व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करता है, जिसे सरकारें नीतियाँ बनाने और प्रगति आँकने के लिए उपयोग करती हैं। मुख्य विशेषताएँ आयाम और संकेतक तीन प्रमुख आयाम: स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन-स्तर स्वास्थ्य व शिक्षा को अपेक्षाकृत अधिक भारांश दिया जाता है गणना किसी व्यक्ति/परिवार का वंचना स्कोर = अनुभव की गई भारित वंचनाओं का योग एमपीआई= गरीबी का प्रसार × गरीबी की तीव्रता मूल्य 0 से 1 तक — कम मूल्य = कम गरीबी उद्देश्य और उपयोग केवल आय आधारित गरीबी माप से अधिक समग्र तस्वीर प्रदान करता है देशों, क्षेत्रों और सामाजिक समूहों के बीच तुलना संभव सरकारें इसे लक्षित नीतियाँ बनाने तथा गरीबी में कमी का मूल्यांकन करने हेतु उपयोग करती हैं वैश्विक एवं राष्ट्रीय रूप में उपयोग वैश्विक एमपीआई: 100+ विकासशील देशों में तीव्र बहुआयामी गरीबी को मापता है राष्ट्रीय एमपीआई: कई देश, जैसे भारत, अपने राष्ट्रीय स्तर के एमपीआई का उपयोग राज्य/जिला स्तर तक गरीबी का आकलन करने के लिए करते हैं |
- सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिए।
सूची – I (सम्राट)
सूची – II (वह शहर जहाँ मकबरा स्थित है)
- बाबर 1. आगरा
- हुमायूँ 2. लाहौर
- जहाँगीर 3. दिल्ली
- शाहजहाँ 4. काबुल
कूट:
A B C D
(a) 3 4 1 2
(b) 4 3 1 2
(c) 4 3 2 1
(d) 3 4 2 1
उत्तर: (c)
व्याख्या:
| मुगल सम्राट | मक़बरे का स्थान | शहर / देश | विशेषताएँ / स्थापत्य विवरण |
| बाबर (1526–1530) | बाग़-ए-बाबर | काबुल, अफ़ग़ानिस्तान | सीढ़ीनुमा चारबाग़ शैली वाला उद्यान; बाद के मुगल शासकों ने इसका जीर्णोद्धार कराया; फ़ारसी उद्यान योजना का प्रारंभिक स्वरूप। |
| हुमायूँ (1530–1540, 1555–1556) | हुमायूँ का मक़बरा | दिल्ली, भारत | भारत का पहला गार्डन-टॉम्ब; यूनेस्को विश्व धरोहर; आगे चलकर ताजमहल जैसे स्मारकों की प्रेरणा; हाजी बेगम द्वारा बनवाया गया। |
| अकबर (1556–1605) | अकबर का मक़बरा | सिकंदरा, आगरा, भारत | हिन्दू, इस्लामी, फ़ारसी व जैन स्थापत्य का संगम; विशाल द्वार, चार मंज़िला संरचना। |
| जहाँगीर (1605–1627) | जहाँगीर का मक़बरा | शाहदरा बाग़, लाहौर, पाकिस्तान | भित्ति-चित्रण (Fresco), संगमरमर जड़ाई और पिएत्रा-दुरा की उत्कृष्ट कला; चार मीनारों वाला विस्तृत उद्यान परिसर। |
| शाहजहाँ (1628–1658) | ताजमहल | आगरा, भारत | संगमरमर का विश्वप्रसिद्ध प्रेम-स्मारक; मुमताज़ महल हेतु निर्मित; यूनेस्को धरोहर; मुगल स्थापत्य की चरम अभिव्यक्ति। |
| औरंगज़ेब (1658–1707) | शेख ज़ैनुद्दीन की दरगाह | खुल्दाबाद, महाराष्ट्र, भारत | अत्यंत साधारण, बिना गुंबद का खुला मकबरा—उसी के निर्देशानुसार; उसके अपने श्रम से अर्जित धन से निर्मित; पूर्ववर्ती भव्य मकबरों से भिन्न। |
इसलिए सही सुमेलन है: A-4, B-3, C-2, D-1
- लोक लेखा समिति के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- लोक लेखा समिति अपनी रिपोर्ट लोकसभा को प्रस्तुत करती है।
- लोक लेखा समिति में राज्यसभा के 15 सदस्य होते हैं।
नीचे दिए गए कोड से सही उत्तर चुनें:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) 1 और 2 दोनों
(d) केवल 2
उत्तर: (b)
व्याख्या:
लोक लेखा समिति (पीएसी) संसदीय व्यवस्था में वित्तीय उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण समिति है। सरकारी व्यय और लेखा परीक्षण से जुड़े बिंदुओं की जांच-पड़ताल पूर्ण करने के बाद, समिति अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपती है, जो उसे विचार और आगे की कार्रवाई हेतु सदन के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। इससे विधायिका को यह जानकारी मिलती रहती है कि विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों द्वारा सार्वजनिक धन का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है।
समिति का मुख्य दायित्व महालेखाकार एवं नियंत्रक (कैग) की वार्षिक लेखा रिपोर्टों की जांच करना, यह देखना कि व्यय संसद द्वारा अधिकृत था या नहीं, तथा यह मूल्यांकन करना कि धन का उपयोग वाजिब, पारदर्शी एवं आर्थिक रूप से हुआ है या नहीं। समिति अनावश्यक एवं अतिरिक्त व्यय, गलत बजटीय अनुमान के कारण हुई बचत, वित्तीय अनियमितताओं, दुरुपयोग और अपव्यय के मामलों की भी समीक्षा करती है।
पीएसी में कुल 22 सदस्य होते हैं—15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से, जिन्हें प्रतिनिधिक अनुपात के आधार पर वार्षिक रूप से चुना जाता है। समिति के अध्यक्ष का चयन प्रायः विपक्ष के सदस्य में से किया जाता है, जो इसकी निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठ जांच को सुदृढ़ बनाता है।
- तटरेखा आवास और मूर्त आय के लिए मैंग्रोव पहल (मिष्टी) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- इसे 2019 में प्रारम्भ किया गया था।
- इसका उद्देश्य मैंग्रोव वनों को पुनर्स्थापित करना है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनें:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (C)
व्याख्या:
कथन 1 गलत है: तटीय आवास और मूर्त आय के लिए मैंग्रोव पहल- MISHTI (Mangrove Initiative for Shoreline Habitats and Tangible Incomes) को 2019 में नहीं, बल्कि संघीय बजट 2023–24 में घोषित किया गया था।
कथन 2 सही है: यह योजना भारत के तटवर्ती और सॉल्टपैन क्षेत्रों में मैन्ग्रोव वनों को पुनर्स्थापित और विस्तारित करने के उद्देश्य से है। यह जलवायु लचीलापन, जैव विविधता संरक्षण और तटीय समुदायों के लिए मूर्त आजीविका सृजन पर ध्यान देती है। मैंग्रोव एक विशिष्ट तटीय पारितंत्र हैं, जिनमें उच्च जैव उत्पादकता, कार्बन अवशोषण की अद्वितीय क्षमता होती है तथा ये प्राकृतिक बायो-शील्ड की तरह तटीय क्षेत्रों को तूफान, ज्वार-भाटा व तटीय कटाव से सुरक्षित रखते हैं। इसी संदर्भ में, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून 2023) के अवसर पर मिष्टी कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया था।
कार्यक्रम के उद्देश्य एवं लक्ष्य
संरक्षण एवं पुनर्जीवन: तटीय क्षेत्रों और लवणीय भू-भागों में क्षतिग्रस्त मैंग्रोव वनों का पुनर्वास, पुनर्स्थापन एवं विस्तार कर उनके पारिस्थितिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करना।
तटीय सुरक्षा में वृद्धि: समुद्री तूफ़ानों, ज्वार-भाटा, तटीय कटाव तथा जलवायु परिवर्तन संबंधी जोखिमों के विरुद्ध मैंग्रोव को प्राकृतिक जैव-सुरक्षा कवच (Bio-shield) के रूप में विकसित और सशक्त बनाना।
स्थानीय आजीविका को सुदृढ़ करना: इको-टूरिज़्म, प्राकृतिक संसाधन-आधारित उद्यम, मत्स्य आजीविका एवं अन्य सतत आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से तटीय समुदायों को स्थिर व वास्तविक आय के अवसर प्रदान करना।
जलवायु परिवर्तन शमन: मैंग्रोवों की उच्च कार्बन भंडारण एवं अवशोषण क्षमता को प्रोत्साहन देकर उन्हें जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रभावी साधन के रूप में बढ़ावा देना।
- निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिए तथा इन्हें सही कालक्रमानुसार क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
- क्रिप्स मिशन
- कैबिनेट मिशन
- शिमला सम्मेलन
- वेवेल योजना
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 4, 1, 2, 3
(b) 1, 4, 2, 3
(c) 1, 4, 3, 2
(d) 4, 1, 3, 2
उत्तर: (C)
व्याख्या:
भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान ब्रिटिश सरकार द्वारा समय-समय पर संवैधानिक समाधान और सत्ता हस्तांतरण के लिए अनेक प्रस्ताव तथा समितियाँ भेजी गईं। इनमें से कुछ प्रमुख निम्नलिखित हैं:
- क्रिप्स मिशन – मार्च 1942
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन ने भारत का समर्थन सुनिश्चित करने और युद्ध के पश्चात् भारत को डोमिनियन स्टेटस देने हेतु सर स्टैफर्ड क्रिप्स के नेतृत्व में यह मिशन भेजा। इसमें संविधान-निर्माण सभा के गठन का प्रस्ताव था, परंतु भारतीय नेताओं ने विभाजन के अधिकार और सत्ता हस्तांतरण में असपष्टता के कारण इसे अस्वीकार कर दिया। यह मिशन असफल रहा, जिससे बाद में भारत छोड़ो आंदोलन की पृष्ठभूमि बनी।
- वेवल योजना – 14 जून 1945
वेवल योजना का मुख्य प्रावधान था- केंद्र में ऐसे कार्यकारी परिषद का गठन जिसमें समस्त सदस्य भारतीय हों और वायसराय मात्र अध्यक्ष के रूप में रहें। योजना में सार्वजनिक कार्यभार का बड़ा हिस्सा भारतीयों को देने की बात थी, परंतु हिंदू–मुस्लिम प्रतिनिधित्व विवाद के कारण सफलता नहीं मिली।
- शिमला सम्मेलन – जून–जुलाई 1945
शिमला सम्मेलन वेवल योजना का परिणाम थी। भारत में अंतरिम सरकार के गठन पर सहमति बनाने के लिए वाइसरॉय लॉर्ड वेवल द्वारा शिमला में यह सम्मेलन बुलाया गया। उद्देश्य था- कांग्रेस, मुस्लिम लीग और अन्य राजनीतिक दलों को सत्ता में भागीदारी दिलाने के लिए समझौता करवाना। किन्तु मुस्लिम लीग द्वारा मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर एकाधिकार की मांग के कारण वार्ता विफल हो गई।
- कैबिनेट मिशन – मार्च 1946
स्वतंत्रता और सत्ता हस्तांतरण का समाधान खोजने के लिए ब्रिटेन ने स्टैफर्ड क्रिप्स, पैथिक लॉरेंस और ए.वी. एलेक्जेंडर को भारत भेजा। मिशन के मुख्य प्रस्ताव थे—समूचे भारत के लिए संविधान सभा, प्रांतों का समूहकरण और एक संघीय ढाँचे की स्थापना। कांग्रेस ने इसे आंशिक रूप से स्वीकार किया, परंतु मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग स्पष्ट रूप से न माने जाने पर विरोध किया। यह मिशन भारत की स्वतंत्रता प्रक्रिया का निर्णायक चरण साबित हुआ।
- निम्नलिखित में से कौन-सी नदी अरब सागर में गिरती है?
- पेरियार
- पेन्नार
- पलार
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) 1 और 2
(c) केवल 1
(d) 2 और 3
उत्तर: (C)
व्याख्या:
पेरियार : पेरियार नदी केरल की सबसे लंबी नदी है, जिसका उद्गम पश्चिमी घाट के इलाईची पहाड़ियों में स्थित पेरियार राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के पास होता है। यह मुख्यतः पश्चिम की ओर बहती है और मालाबार तट की ओर आगे बढ़ते हुए कोच्चि के निकट अरब सागर में मिलती है। इस नदी पर इडुक्की बांध, मुल्लापेरियार बांध जैसे महत्वपूर्ण जलाशय स्थित हैं, जो केरल की जल–विद्युत एवं सिंचाई व्यवस्था में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
पेन्नार : पेन्नार नदी का उद्गम कर्नाटक के नंदी हिल्स में होता है। यह दक्षिण-पूर्व दिशा में बहते हुए आंध्र प्रदेश से गुजरती है तथा नेल्लोर के पास बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ चित्रावती, पापग्नि और चेय्येरु हैं। यह नदी अरब सागर में प्रवाहित नहीं होती।
पलार : पलार नदी भी नंदी हिल्स (कर्नाटक) से निकलती है और दक्षिण भारत की तमिलनाडु की प्रमुख नदियों में से एक है। यह पूर्व की ओर प्रवाहित होकर चेंगलपट्टू–कांचीपुरम क्षेत्र से गुजरती है और अंततः चेन्नई के दक्षिण में बंगाल की खाड़ी में समाहित हो जाती है। अतः यह भी अरब सागर में नहीं गिरती।
- सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
सूची – I (कोयला क्षेत्र) सूची – II (देश)
- अपालेशियन 1. इंग्लैंड
- लंकाशायर 2. जर्मनी
- रुर 3. रूस
- कुज़बास 4. संयुक्त राज्य अमेरिका
कूट:
A B C D
(a) 1 4 3 2
(b) 4 1 3 2
(c) 4 1 2 3
(d) 1 4 2 3
उत्तर: (C)
व्याख्या:
अप्लेशियन– अमेरिका: दुनिया के सबसे बड़े और प्राचीन कोयला क्षेत्रों में से एक। पेंसिल्वेनिया से अलबामा तक फैली अप्पलाचियन पर्वतमालाओं में स्थित। मुख्य रूप से बिट्यूमिनस कोयला का स्रोत।
लंकाशायर – इंग्लैंड: उत्तर-पश्चिम इंग्लैंड में स्थित। औद्योगिक क्रांति के दौरान कपड़ा उद्योगों को कोयला उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण।
रूर – जर्मनी: रूर घाटी जर्मनी का औद्योगिक हृदयस्थल। बिट्यूमिनस कोयला में समृद्ध और लोहा और इस्पात उत्पादन का केंद्र।
कुज़बास – रूस: कुज़नेत्स बेसिन का संक्षिप्त नाम, दक्षिण-पश्चिमी साइबेरिया में स्थित। रूस के सबसे बड़े कोयला उत्पादक क्षेत्रों में से एक, उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोयला के लिए प्रसिद्ध।
विश्व की प्रमुख कोयला खानें
| क्रम | कोयला क्षेत्र / खान | देश/स्थान | प्रमुख कोयले का प्रकार | विशेषताएँ / उपयोग | सम्बद्ध औद्योगिक क्षेत्र / उपभोग क्षेत्र |
| 1. | डोनबास/डोनेट्स बेसिन | यूक्रेन | उच्च श्रेणी का बिटुमिनस कोयला | पूर्व सोवियत काल में लगभग आधा कोयला उत्पादन; अत्यंत विस्तृत बेसिन | यूक्रेन, मॉस्को एवं डोनेट्स औद्योगिक क्षेत्र |
| 2. | कुजबास/कुजनेट्स्क बेसिन | रूस | प्रमुखतः बिटुमिनस | रूस का सबसे बड़ा कोयला उत्पादन क्षेत्र; कोयला धरातल के समीप — खनन सुगम | यूराल औद्योगिक क्षेत्र |
| 3. | कारागंडा | कज़ाकिस्तान (बाल्खश झील के उत्तर) | बिटुमिनस कोयला | कज़ाकिस्तान के कुल उत्पादन में ~8% योगदान | अधिकांश कोयला यूराल क्षेत्र को भेजा जाता है |
| 4. | पिचौरा बेसिन | साइबेरिया, रूस | बिटुमिनस (मिश्रित श्रेणी) | 1930 से उत्पादन; अत्यधिक शीत जलवायु के कारण खनन कठिन | रूस का प्रमुख उत्तरी कोयला क्षेत्र |
| 5. | रुर बेसिन | जर्मनी (रुर एवं लिप्पी नदियों के बीच) | उच्च गुणवत्ता का बिटुमिनस | जर्मनी का लगभग 75% कोयला उत्पादन | पश्चिमी जर्मनी का मुख्य औद्योगिक केंद्र |
| 6. | साइलेशिया | पोलैंड | बिटुमिनस | पोलैंड का प्रमुख कोयला क्षेत्र; कई स्टील एवं भारी उद्योगों को ईंधन | साइलेशिया औद्योगिक क्षेत्र |
| 7. | कम्पेन | बेल्जियम | बिटुमिनस | बेल्जियम का मुख्य कोयला उत्पादक क्षेत्र; नई खानों की खोज जारी | बेल्जियम एवं यूरोप के औद्योगिक संयंत्र |
| 8. | पेनाइन रेंज | ब्रिटेन | बिटुमिनस | खनन अधिकतर डरहम, पार्कशायर, नोटिंघमशायर, लंकाशायर, कंबरलैण्ड क्षेत्रों में | ब्रिटेन के स्टील, रेल एवं बिजली उद्योग |
| 9. | अप्लेशियन कोयला क्षेत्र | संयुक्त राज्य अमेरिका | बिटुमिनस + एंथ्रासाइट | संयुक्त राज्य अमेरिका का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र; एंथ्रासाइट मुख्यतः पेंसिलवानिया में | अमेरिका के धातु, ऊर्जा व इंजीनियरिंग उद्योगों का प्रमुख आधार |
- निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- डॉल्फ़िन और व्हेल ब्लोहोल से साँस लेती हैं।
- केंचुआ अपनी त्वचा से साँस लेता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (d)
व्याख्या:
कथन 1 सही है: डॉल्फ़िन और व्हेल अपने सिर के ऊपरी भाग में स्थित ब्लोहोल नामक छिद्र से श्वास लेती हैं। यह छिद्र वास्तव में उनके परिवर्तित नथुने होते हैं। चूँकि ये दोनों समुद्री स्तनधारी हैं, इसलिए इनके पास मछलियों की तरह गलफड़े नहीं, बल्कि फेफड़े होते हैं। इस कारण इन्हें समय–समय पर पानी की सतह पर आकर हवा लेना आवश्यक होता है। ब्लोहोल की ऊपरी स्थिति इन्हें बिना शरीर को पूर्णतः बाहर निकाले ही तेज़ी से साँस लेने और छोड़ने में सक्षम बनाती है। पानी के भीतर रहते समय ब्लोहोल के आसपास स्थित मजबूत पेशियाँ इसे पूरी तरह बंद रखती हैं, जिससे पानी फेफड़ों में प्रवेश नहीं कर पाता। इस प्रकार, ब्लोहोल समुद्री वातावरण में रहते हुए प्रभावी श्वसन और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित करता है।
कथन 2 सही है: केंचुए अपनी त्वचा के माध्यम से श्वसन (Cutaneous Respiration) करते हैं। उनकी त्वचा पतली, मुलायम और सदैव नम रहती है, जिससे वातावरण से ऑक्सीजन त्वचा के द्वारा रक्त प्रवाह में प्रवेश करती है तथा शरीर में निर्मित कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकल जाती है। यह पूरा आदान–प्रदान प्रसरण की प्रक्रिया से होता है। त्वचा की आर्द्रता यहाँ अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे गैसों को शरीर में प्रवेश करने से पहले त्वचा की सतह पर मौजूद पानी में घुलना आवश्यक होता है। यदि त्वचा सूख जाए तो गैसों का प्रसरण बाधित होने के कारण केंचुआ श्वसन नहीं कर पाएगा और उसका जीवन संकट में पड़ सकता है। इस प्रकार, केंचुए का श्वसन तंत्र उसकी नम त्वचा पर पूर्णतः निर्भर होता है, जो उसे पर्यावरण से ऑक्सीजन ग्रहण करने और अपशिष्ट गैस बाहर निकालने में सक्षम बनाता है।
- निम्नलिखित में से कौन सी पुस्तक कालिदास द्वारा नहीं लिखी गई है?
- मेघदूत
- रघुवंशम्
- श्रृंगार शतक
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(c) 1 और 2
(b) केवल 1
(d) 2 और 3
उत्तर: (a) केवल 3
व्याख्या:
कालिदास संस्कृत साहित्य के महानतम कवि-नाटककार माने जाते हैं। इन्हें काव्य–कला का सूर्य कहा गया है। विद्वानों द्वारा कालिदास की लगभग 40 रचनाओं का उल्लेख मिलता है, परन्तु सात रचनाएँ प्रमाणिक रूप से उनकी मानी जाती हैं — तीन नाटक, दो महाकाव्य तथा दो खंडकाव्य।
| रचना का नाम | साहित्यिक विधा | विषय-वस्तु / विशेषता |
| मालविकाग्निमित्रम् | नाटक (रूपक) | राजा अग्निमित्र–मालविका की प्रेमकथा; प्रथम नाटक माना जाता है। |
| अभिज्ञान शाकुन्तलम् | नाटक (रूपक) | दुष्यंत–शकुंतला प्रेमकथा; विश्वप्रसिद्ध, अनेक भाषाओं में अनूदित। |
| विक्रमोर्वशीयम् | नाटक (रूपक) | पुरूरवा–उर्वशी कथा; सौंदर्य, भाव और रहस्य से पूर्ण। |
| रघुवंशम् | महाकाव्य | रघुकुल के राजाओं का गौरव–वर्णन। |
| कुमारसंभवम् | महाकाव्य | शिव–पार्वती प्रेमकथा और कार्तिकेय का जन्म। |
| मेघदूतम् | खंडकाव्य | यक्ष द्वारा मेघ के माध्यम से संदेश-प्रेषण; पूर्वमेघ व उत्तरमेघ दो खंड। |
| ऋतुसंहार | खंडकाव्य | छह ऋतुओं में प्रकृति सौंदर्य का विस्तार; कुछ विद्वानों में श्रेय पर मतभेद। |
श्रृंगार शतक कालिदास द्वारा नहीं लिखा गया है; यह भर्तृहरि द्वारा रचित है, जो अपने तीन शतकों (नीति शतक, वैराग्य शतक, और श्रृंगार शतक ) के लिए प्रसिद्ध हैं।
- भारतीय संविधान के भाग और उसके विषय के निम्नलिखित युग्मों में से कौन सा/से युग्म सही सुमेलित नहीं है/हैं?
- भाग IV A – मौलिक कर्तव्य
- भाग VI – राज्य
- भाग XI – नगरपालिकाएँ
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 2 और 3
उत्तर: (a) केवल 3
व्याख्या:
| भाग | विषय | सही / गलत | विवरण |
| भाग IV-A | मौलिक कर्तव्य | सही | 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा जोड़ा गया। प्रारंभ में 10 कर्तव्य शामिल थे, बाद में 86वें संशोधन (2002) द्वारा एक अतिरिक्त कर्तव्य जोड़ा गया, इस प्रकार कुल 11 मौलिक कर्तव्य |
| भाग VI | राज्य | सही | राज्यों के शासन–संरचना का पूर्ण विवरण; राज्यपाल, राज्य कार्यपालिका, राज्य विधानसभा, विधान परिषद (जहाँ द्विसदनीय व्यवस्था है), राज्य उच्च न्यायालय आदि इसके अंतर्गत। |
| भाग XI | संघ और राज्यों के बीच संबंध | गलत | यह केंद्र व राज्य के विधायी, प्रशासनिक तथा वित्तीय संबंधों की रूपरेखा देता है (अनुच्छेद 245–263)। नगरपालिकाओं का वर्णन भाग IX-A (74वाँ संशोधन, 1992) में है, न कि भाग XI में। |
- नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): पुरुषों और महिलाओं की आवाज़ें अलग-अलग होती है।
कारण (R): पुरुषों और महिलाओं में वोकल कॉर्ड की लंबाई और मोटाई अलग-अलग होती है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: (b)
व्याख्या:
यह कथन सत्य है कि पुरुषों और महिलाओं की आवाज़ अलग होती है । जीवविज्ञान के अनुसार नर और मादा में आवाज़ के स्वर, पिच, टिम्बर तथा आवृत्ति में स्पष्ट अंतर पाया जाता है। पुरुषों के स्वर तंतु (वोकल कॉर्ड) महिलाओं की तुलना में लंबे व मोटे होते हैं, जबकि महिलाओं के पतले व छोटे। यही आवाज़ में भिन्नता का वैज्ञानिक आधार है। पुरुषों की औसत स्वर तंतु लंबाई लगभग 20 मिमी तथा महिलाओं की लगभग 15 मिमी होती है। स्वर तंतुओं की लंबाई व मोटाई बढ़ने पर वे धीमी गति से कंपन करते हैं, जिसके कारण कम आवृत्ति उत्पन्न होती है और आवाज़ भारी सुनाई देती है। इसके विपरीत, छोटे व पतले तंतु तेज़ कंपन करते हैं, जिससे उच्च आवृत्ति उत्पन्न होती है और महिलाओं की आवाज़ अपेक्षाकृत तेज व तीक्ष्ण सुनाई देती है। इसके अलावा पुरुषों का कंठ आकार में बड़ा होता है, जिसे आम बोलचाल में एडम्स एप्पल कहा जाता है। यह भी स्वर की गहराई को प्रभावित करता है। साथ ही बढ़ती उम्र के साथ स्वर तंतुओं की लोच घटने से आवाज़ में परिवर्तन आता है, तथा उच्चारण शैली, भाषा तथा सामाजिक आदतें भी स्वर की पिच को प्रभावित करती हैं। अतः कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
- सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिए।
सूची-I (रिफाइनरी) सूची-II (राज्य)
- नायरा 1. असम
- मनाली 2. गुजरात
- नुमालीगढ़ 3. आंध्र प्रदेश
- तातीपाका 4. तमिलनाडु
कूट:
A B C D
(a) 2 4 1 3
(b) 4 2 1 3
(c) 4 2 3 1
(d) 2 4 3 1
उत्तर: (a)
व्याख्या:
नयारा रिफाइनरी → गुजरात
मनाली रिफाइनरी → तमिलनाडु
नुमालिगढ़ रिफाइनरी → असम
तातिपाका रिफाइनरी → आंध्र प्रदेश
भारत की प्रमुख तेल रिफ़ाइनरियाँ
| रिफ़ाइनरी / परिसर | राज्य | संचालनकर्ता कंपनी | क्षेत्र | मुख्य विशेषताएँ |
| जामनगर रिफ़ाइनरी | गुजरात | रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड | निजी क्षेत्र | विश्व की सबसे बड़ी रिफ़ाइनिंग कॉम्प्लेक्स; उत्पादों का बड़ा हिस्सा निर्यात। |
| नायारा रिफ़ाइनरी | वडिनार, गुजरात | नायारा एनर्जी लिमिटेड | निजी क्षेत्र | उन्नत तकनीकयुक्त गहरी रिफ़ाइनिंग क्षमता; देश की प्रमुख निजी रिफ़ाइनरी। |
| एचएमईएल (बठिंडा रिफ़ाइनरी) | पंजाब | एचपीसीएल–मित्तल एनर्जी लिमिटेड | निजी/संयुक्त | उत्तर भारत के लिए ईंधन आपूर्ति का प्रमुख केंद्र; पेट्रोकेमिकल एकीकृत। |
| कोच्चि रिफ़ाइनरी | केरल | बीपीसीएल | सार्वजनिक क्षेत्र | बड़ी क्षमता वाली सार्वजनिक क्षेत्र की रिफ़ाइनरी; केमिकल एवं पेट्रोकेमिकल उत्पादन केंद्र। |
| मुंबई रिफ़ाइनरी (बीपीसीएल) | महाराष्ट्र | बीपीसीएल | सार्वजनिक क्षेत्र | पश्चिमी भारत की प्रमुख ईंधन आपूर्ति रिफ़ाइनरी। |
| मुंबई रिफ़ाइनरी (एचपीसीएल) | महाराष्ट्र | एचपीसीएल | सार्वजनिक क्षेत्र | प्राचीन तटीय रिफ़ाइनरी; उच्च गुणवत्ता का ईंधन उत्पादन। |
| विजाग/विशाखापत्तनम रिफ़ाइनरी | आंध्र प्रदेश | एचपीसीएल | सार्वजनिक क्षेत्र | बड़े तटीय कॉम्प्लेक्स; वर्तमान में विस्तार कार्य जारी। |
| तातिपाका रिफ़ाइनरी | पूर्वी गोदावरी ज़िला, आंध्र प्रदेश | ओएनजीसी | सार्वजनिक क्षेत्र | ओएनजीसी द्वारा संचालित एक लघु-रिफ़ाइनरी, क्षेत्रीय ज़रूरतों के लिए नेफ्था, केरोसिन और डीज़ल जैसे उत्पाद बनाती है। |
| पानीपत रिफ़ाइनरी | हरियाणा | आईओसीएल | सार्वजनिक क्षेत्र | उत्तर भारत की सबसे प्रमुख ईंधन एवं पेट्रोकेमिकल रिफ़ाइनरी। |
| मथुरा रिफ़ाइनरी | उत्तर प्रदेश | आईओसीएल | सार्वजनिक क्षेत्र | एनसीआर, राजस्थान और यूपी को ईंधन आपूर्ति; कम सल्फर ईंधन उत्पादन। |
| पारादीप रिफ़ाइनरी | ओडिशा | आईओसीएल | सार्वजनिक क्षेत्र | आधुनिकतम तकनीक आधारित; ऊर्जा-कुशल; पेट्रोकेमिकल विस्तार जारी। |
| बरौनी रिफ़ाइनरी | बिहार | आईओसीएल | सार्वजनिक क्षेत्र | पूर्व भारत का प्रमुख ईंधन केंद्र; ऐतिहासिक महत्व। |
| कोयली/गुजरात रिफ़ाइनरी | गुजरात | आईओसीएल | सार्वजनिक क्षेत्र | पश्चिम भारत का प्रमुख आपूर्ति बिंदु; बहु-ग्रेड उत्पाद निर्माण। |
| हल्दिया रिफ़ाइनरी | पश्चिम बंगाल | आईओसीएल | सार्वजनिक क्षेत्र | तटीय एवं निर्यात क्षमता वाला पूर्व भारत का पेट्रोकेमिकल केंद्र। |
| गुवाहाटी रिफ़ाइनरी | असम | आईओसीएल | सार्वजनिक क्षेत्र | स्वतंत्र भारत की पहली रिफ़ाइनरी (1962)। |
| डिगबोई रिफ़ाइनरी | असम | आईओसीएल | सार्वजनिक क्षेत्र | भारत की सबसे पुरानी कार्यरत रिफ़ाइनरी (1901) — ऐतिहासिक विरासत। |
| नुमालिगढ़ रिफ़ाइनरी (एनआरएल) | असम | एनआरएल | सार्वजनिक क्षेत्र | पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख रिफ़ाइनिंग केंद्र; विस्तार 9 एमएमटीपीए तक। |
| एमआरपीएल रिफ़ाइनरी (मंगलुरु) | कर्नाटक | ओएनजीसी सहायक कंपनी | सार्वजनिक क्षेत्र | सुगंधित व पेट्रोकेमिकल निर्माण केंद्र; निर्यात-सुगम स्थित। |
| सीपीसीएल (मनाली रिफ़ाइनरी) | तमिलनाडु | सीपीसीएल (आईओसी सहायक) | सार्वजनिक क्षेत्र | दक्षिण भारत की मुख्य रिफ़ाइनरी; नई द्वितीय रिफ़ाइनरी का विकास जारी। |
- ‘ऑपरेशन ओलिविया’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- यह ओडिशा के तट पर ओलिव रिडले कछुओं की सुरक्षा के लिए भारतीय तट रक्षकों की एक पहल है।
- ऑपरेशन ओलिविया अगस्त के महीने के दौरान चलाया जाता है, जो ओलिव रिडले कछुओं के घोंसले बनाने का समय होता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (B)
व्याख्या:
कथन 1 सही है: ऑपरेशन ओलिविया भारतीय तटरक्षक बल द्वारा सन् 1988 में प्रारम्भ किया गया समुद्री संरक्षण अभियान है। इसका मुख्य उद्देश्य ओलिव रिडले समुद्री कछुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, विशेष रूप से ओडिशा के तटीय क्षेत्रों-
- गहिरमाथा समुद्र तट
- देवी नदी का मुहाना
- रुषिकुल्या तट क्षेत्र
जहाँ इन कछुओं का विश्व के सबसे बड़े सामूहिक अंडे देने वाले स्थलों (निवेशन स्थल) में से एक स्थित है।
इस अभियान के अंतर्गत तटरक्षक बल-
- समुद्र में चौबीसों घंटे निगरानी गश्त संचालित करता है,
- अवैध जाल डालने, मछली पकड़ने व शिकार पर रोक लगाता है,
- मछुआरा नौकाओं में कछुआ बचाव उपकरण (सी.ई.डी.) का प्रयोग अनिवार्य कराता है,
- अंडे देने और बच्चों के निकलने की अवधि में समुद्र तट पर पूर्ण शांति, सुरक्षा और अनुकूल माहौल सुनिश्चित करता है।
कथन 2 गलत है: क्योंकि यह अभियान नवंबर से मई तक सक्रिय रहता है, जो इन कछुओं का प्रजनन एवं घोंसले बनाने का मुख्य काल होता है। ओलिव रिडली कछुए अपनी लंबी समुद्री यात्रा के साथ-साथ विशेष रूप से अपनी सामूहिक अंडे देने की अद्वितीय प्रक्रिया “अरिबाडा” के लिए प्रसिद्ध हैं, जिसमें हज़ारों — लाखों मादा कछुए दिसंबर से मार्च के बीच तट पर एक साथ आकर अंडे देती हैं, जबकि नर समुद्र में ही रहते हैं। लगभग पैंतालीस से साठ दिन बाद अंडे फूटते हैं और बच्चे वापस समुद्र में प्रवेश करते हैं, जो इनके जीवन चक्र का सबसे संवेदनशील चरण माना जाता है।
- अंतर्राष्ट्रीय पुलिस सहयोग के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल ‘भारतपोल‘ निम्नलिखित में से किसके द्वारा विकसित किया गया है?
- केंद्रीय जाँच ब्यूरो
- अनुसंधान एवं विश्लेषण विंग
- आसूचना ब्यूरो
- प्रवर्तन निदेशालय
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 3 और 4
(b) केवल 1
(c) 2 और 3
(d) केवल 3
उत्तर: (B)
व्याख्या:
भारतपोल पोर्टल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा विकसित एक ऑनलाइन मंच है। यह पोर्टल भारत की ओर से इंटरपोल (अंतरराष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन) के लिए राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो के रूप में कार्य करता है, जिसके माध्यम से देश की सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ एकीकृत रूप से वैश्विक स्तर पर अपराध नियंत्रण में सहभागिता कर सकती हैं। जनवरी 2025 में आरम्भ हुए इस पोर्टल का उद्देश्य सीमापार अपराधों से निपटने में भारतीय कानून प्रवर्तन संस्थाओं की क्षमता बढ़ाना है। यह मंच तस्करी, साइबर अपराध, आतंकवाद जैसे मामलों में त्वरित संचार, सूचना साझा करने तथा नोटिस प्रेषण की प्रक्रिया को सरल बनाता है।
इसमें अनेक खण्ड कार्यरत हैं जैसे-
- संपर्क खण्ड, जो देशभर के समन्वय अधिकारियों को जोड़ता है;
- प्रसारण खण्ड, जो विदेशों से प्राप्त अनुरोधों को संबंधित भारतीय संस्थाओं तक पहुँचाता है;
- संदर्भ तथा सूचना खण्ड, जो अंतरराष्ट्रीय जाँच में आवश्यक सहायता प्रदान करता है; तथा
- नोटिस खण्ड, जिसके द्वारा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय नोटिस सुरक्षित और शीघ्र भेजे जाते हैं।
इस पोर्टल के मुख्य उद्देश्य हैं- सीमापार अपराधों पर नियंत्रण, जांच में तीव्रता और देश की संस्थाओं के बीच समन्वय सुदृढ़ करना।
- 42वें संविधान संशोधन द्वारा भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निम्नलिखित में से कौन-से शब्द जोड़े गए थे?
- समाजवादी
- धर्मनिरपेक्षता
- संप्रभुता
- गणतंत्र
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 3 और 4
(b) 1 और 2
(c) 1 और 3
(d) 2 और 3
उत्तर: (b) 1 और 2
व्याख्या:
42वें संविधान संशोधन (1976) के माध्यम से प्रस्तावना में दो नए शब्द-“समाजवादी” और “पंथनिरपेक्ष”, जोड़े गए। इससे पहले प्रस्तावना में भारत को “संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य” कहा गया था, अर्थात संप्रभुता और गणतंत्र शब्द आरंभ से ही मौजूद थे और उन्हें 42वें संशोधन के अंतर्गत शामिल नहीं किया गया। संशोधन के बाद प्रस्तावना का स्वरूप “संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य” हो गया, जिससे राज्य की नीतियों में सामाजिक-आर्थिक समानता तथा सभी धर्मों के प्रति निष्पक्षता की संवैधानिक प्रतिबद्धता और अधिक स्पष्ट हो गई। इसी संशोधन के अंतर्गत “राष्ट्र की एकता” की जगह “राष्ट्र की एकता एवं अखंडता” शब्दों का प्रयोग भी किया गया, जिसने भारत के भावी विकास, राष्ट्रीय एकात्मता तथा धर्म-निरपेक्ष सामाजिक व्यवस्था की दिशा को और सुदृढ़ बनाया।
प्रश्न के हिंदी संस्करण में धर्मनिरपेक्ष दिया है जबकि अंग्रेजी में “Secular” दिया गया है। अंग्रेजी के आधार पर विकल्प (b) 1 और 2 को सही माना जा सकता है।
- ‘अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- यह पहला संधि आधारित अंतर-सरकारी संगठन है जिसका मुख्यालय भारत में है और इसमें 38 सदस्य देश हैं।
- विश्व सौर बैंक और वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड की पहल इसके अन्तर्गत की गई है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (C)
व्याख्या:
कथन 1 गलत है: अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन विश्व का पहला संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन है, जिसका मुख्यालय भारत के गुरुग्राम (हरियाणा) में स्थित है। इसे भारत और फ्रांस द्वारा पेरिस जलवायु सम्मेलन (कॉप–21), 2015 में संयुक्त रूप से प्रारंभ किया गया था। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना है, विशेषतः उन देशों में जो कर्क और मकर रेखा के बीच स्थित हैं।
हालाँकि कथन 1 गलत है, क्योंकि इसमें अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के 38 सदस्य देशों का उल्लेख किया गया है, जबकि वास्तविक स्थिति इस प्रकार है-
-
- प्रारंभ में 121 देश सदस्यता हेतु पात्र थे।
- वर्ष 2018 के संशोधन के बाद, सदस्यता सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों के लिए खोल दी गई।
- वर्तमान में 102 देश अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के सदस्य हैं।
कथन 2 सही है: अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के अंतर्गत विश्व सौर बैंक की परिकल्पना की गई है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए कम लागत वाली वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इसका लक्ष्य सौर ऊर्जा में निवेश को बढ़ावा देना तथा बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ स्थापित करने में सदस्य देशों की सहायता करना है।
इसी प्रकार, भारत द्वारा प्रारंभ किया गया वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड अभियान भी अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की व्यापक दृष्टि का हिस्सा है। इसका उद्देश्य पूरे विश्व में एक वैश्विक सौर ग्रिड तैयार करना है, जिससे विभिन्न देशों के बीच सौर ऊर्जा का वास्तविक समय में आदान-प्रदान सम्भव हो सके। इससे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ती है, लागत घटती है तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।
- नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): मुगल सम्राट अकबर ने फतेहपुर सीकरी में बुलन्द दरवाजा का निर्माण करवाया था।
कारण (R): अकबर ने इस स्मारक का निर्माण अपने पुत्र जहाँगीर के जन्म की याद में कराया था।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: (d)
व्याख्याः
अभिकथन (A) सही है क्योंकि मुगल सम्राट अकबर ने 1575 ई. में फ़तेहपुर सीकरी में बुलंद दरवाज़ा का निर्माण गुजरात की विजय के उपलक्ष्य में करवाया था। यही द्वार फ़तेहपुर सीकरी स्थित प्रसिद्ध जामा मस्जिद का मुख्य प्रवेश द्वार भी है और इसे मुगल स्थापत्य कला की सबसे भव्य उपलब्धियों में गिना जाता है। इसकी ऊँचाई लगभग 54 मीटर है, जो इसे भारत के सबसे विशाल द्वारों में सम्मिलित करती है। लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से निर्मित होने के साथ-साथ इसमें उकेरे गए फ़ारसी अभिलेख अकबर की धार्मिक उदारता के साक्ष्य हैं।
कारण (R) गलत है क्योंकि बुलंद दरवाज़ा का निर्माण गुजरात विजय के उपलक्ष्य में कराया गया था, न कि जहाँगीर के जन्म की याद में। अतः कारण तथ्यात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण है।
- भारत के निम्नलिखित राज्यों के गठन पर विचार कीजिए तथा इन्हें सबसे पहले से लेकर आखिरी तक के सही कालक्रमानुसार क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
- पंजाब
- अरुणाचल प्रदेश
- नागालैंड
- सिक्किम
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 3, 4, 1, 2
(c) 3, 2, 4, 1
(b) 2, 3, 4, 1
(d) 3, 1, 4, 2
उत्तर: (d) 3, 1, 4, 2
व्याख्या (राज्यों के गठन का कालानुक्रमिक क्रम):
| राज्य | गठन वर्ष | मुख्य तथ्य |
| नागालैंड | 1963 | 1950 के दशक में नागा राष्ट्रीय आंदोलन के उद्भव के बाद केन्द्र सरकार और नागा नेताओं के बीच समझौते हुए। इसके परिणामस्वरूप 1 दिसंबर 1963 को नागालैंड को भारत का 16वाँ राज्य घोषित किया गया। |
| पंजाब | 1966 | भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग बढ़ने के बाद पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 पारित हुआ, जिसके तहत पुराना पंजाब विभाजित हुआ और हरियाणा तथा हिमाचल प्रदेश को अलग राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के रूप में स्थापित किया गया। |
| सिक्किम | 1975 | प्रारंभ में सिक्किम एक संरक्षित रियासत (Protectorate) था। 1974 में लोकतांत्रिक शासन की स्थापना हुई और 1975 में जनमत-संग्रह के बाद 36वाँ संविधान संशोधन पारित कर इसे भारत का 22वाँ राज्य बनाया गया। |
| अरुणाचल प्रदेश | 1987 | 1972 तक इसे उत्तर-पूर्व सीमांत प्रदेश (NEFA) कहा जाता था, बाद में इसे केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा मिला। 20 फरवरी 1987 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला और यह भारत का 24वाँ राज्य बना। |
- सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
सूची – I (पुलित्ज़र पुरस्कार की श्रेणी) सूची – II (2025 में विजेता)
- फिक्शन 1. जेसन रॉबर्ट्स
- संगीत 2. ब्रैंडन जैकब्स-जेनकिंस
- जीवनी 3. सूसी इबारा
- ड्रामा/नाटक 4. पर्सिवल एवरेट
कूट:
A B C D
(a) 4 3 1 2
(b) 3 4 1 2
(c) 3 4 2 1
(d) 4 3 2 1
उत्तर: (a)
व्याख्या: पुलित्ज़र पुरस्कार संयुक्त राज्य अमरीका में पत्रकारिता, साहित्य और संगीत के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च वार्षिक सम्मान है, जिसका प्रशासन कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा किया जाता है। इसकी स्थापना 1917 में समाचार-पत्र प्रकाशक जोसेफ पुलित्ज़र की वसीयत से हुई। यह कुल 23 वर्गों में प्रदान होता है—15 पत्रकारिता तथा 8 साहित्य, नाटक और संगीत से संबंधित। उत्कृष्ट रिपोर्टिंग, लेखन, फोटोग्राफी, संपादकीय, पुस्तकों, नाटकों और संगीत रचनाओं को विशेष रूप से सम्मानित किया जाता है। चयन प्रक्रिया पुलित्ज़र पुरस्कार बोर्ड द्वारा होती है, जो आवश्यक मानक न मिलने पर पुरस्कार रोक भी सकता है।
पुलित्ज़र पुरस्कार 2025
- कथा साहित्य — पर्सिवल एवरेट : सन् 2025 में कथा साहित्य के क्षेत्र में पुलित्जर सम्मान पर्सिवल एवरेट को उनकी प्रसिद्ध कृति “जेम्स” के लिए प्रदान किया गया। यह रचना प्रसिद्ध कहानी हकलबेरी फिन का पुन: प्रस्तुतीकरण है, परंतु इसमें घटनाओं को जिम नामक पात्र के दृष्टिकोण से वर्णित किया गया है। इस कारण यह उपन्यास अधिक संवेदनशील, मानवीय और जातिगत अनुभवों के संदर्भ में अत्यंत महत्त्वपूर्ण बन जाता है।
- संगीत — सूज़ी इबारा : वर्ष 2025 में संगीत श्रेणी का पुलित्जर सम्मान सूज़ी इबारा को उनकी रचना “फोर मेडिटेशन्स ऑन इम्पर्मानेंस” के लिए मिला। इस संगीत-रचना में उन्होंने फिलिपीनी पारंपरिक तालों को नवप्रयोगात्मक वाद्य लयों के साथ मिलाया है। यह कृति संगीत में सांस्कृतिक विविधता और नए प्रयोगों का सुंदर उदाहरण मानी जाती है।
- जीवनी — जेसन रॉबर्ट्स: जीवनी श्रेणी में वर्ष 2025 का पुलित्जर सम्मान जेसन रॉबर्ट्स को उनकी पुस्तक “एवरी लिविंग थिंग” हेतु प्राप्त हुआ। यह कृति महान प्रकृतिवेत्ता और अन्वेषक अलेक्ज़ेंडर वॉन हंबोल्ट के जीवन, यात्राओं, खोजों तथा पर्यावरण संरक्षण में उनके योगदान को गहराई से प्रस्तुत करती है। यह जीवनी इतिहास, विज्ञान और मानवीय संवेदनाओं के संतुलित समन्वय का श्रेष्ठ उदाहरण कही जाती है।
- रंगमंच/नाटक — ब्रैंडन जैकब्स–जेनकिंस: वर्ष 2025 में रंगमंच (नाटक) के क्षेत्र में पुलित्जर सम्मान ब्रैंडन जैकब्स–जेनकिंस को उनकी रचना “द कमअपेन्स” के लिए दिया गया। यह नाटक मित्रता, पहचान, मृत्यु के बोध, जातीय प्रश्नों और सामाजिक तनाव जैसे विषयों को गहन मानवीय संवेदनाओं एवं व्यंग्यात्मक विलक्षणता के साथ अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।
- सूची – I को सूची – II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
सूची – I (गवर्नर जनरल/वायसराय) सूची – II (महत्वपूर्ण योगदान/कार्य)
- लॉर्ड डलहौजी 1. बंगाल का स्थायी बंदोबस्त
- लॉर्ड कर्जन 2. सती प्रथा का निषेध
- लॉर्ड विलियम बेंटिक 3. बंगाल का विभाजन
- लॉर्ड कॉर्नवालिस 4. व्यपगत का सिद्धांत
कूट:
A B C D
(a) 3 4 2 1
(b) 4 3 2 1
(c) 4 3 1 2
(d) 3 4 1 2
उत्तर: (b)
व्याख्या:
| गवर्नर जनरल/ वायसराय | मुख्य योगदान |
| लॉर्ड डलहौज़ी (1848-56) | द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध (1848-49) तथा पंजाब का कम्पनी साम्राज्य में विलय (1849), व्यपगत सिद्धांत — झाँसी, सातारा, नागपुर जैसे राज्यों के लिए हड़प नीति, वुड का शिक्षा संबंधी डिस्पैच (1854) |
| लॉर्ड कर्ज़न (1899-1905) | पुलिस प्रशासन में सुधार के लिये एन्ड्रयू फ्रेजर की अध्यक्षता में पुलिस आयोग का गठन (1902), विश्वविद्यालय आयोग की स्थापना (1902) तथा भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पारित (1904),
बंगाल विभाजन (1905) — प्रशासनिक कदम जिसने स्वदेशी आंदोलन को जन्म दिया, रेलवे बोर्ड की स्थापना (1905) |
| लॉर्ड विलियम बेंटिंक (1828-35) | सती प्रथा का निषेध (1829) और सामाजिक सुधारों को प्रोत्साहन, ठगी प्रथा का अंत (1830), 1833 का चार्टर अधिनियम |
| लॉर्ड कॉर्नवालिस (1786-93) | बंगाल का स्थायी बंदोबस्त (1793) — निश्चित भूमि राजस्व प्रणाली, श्रीरंगपट्टम की संधि (1792),
कार्नवालिस कोड का निर्माण (1793)─जिसमें द्वारा अनेक न्यायिक सुधारों का प्रयास किया गया। |
- उत्तर प्रदेश की एक ज़िला एक उत्पाद (ओ.डी.ओ.पी. ) योजना के अनुसार, मूंज उत्पाद निम्नलिखित में से किस ज़िले से संबंधित हैं?
- अमेठी
- सुल्तानपुर
- संत कबीर नगर
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) 1 और 2
(c) 1 और 3
(d) 2 और 3
व्याख्या:
ओडीओपी पोर्टल के अनुसार:
अमेठी को आवंटित उत्पाद के रूप में मूंज उत्पाद दिया गया है।
सुल्तानपुर मूंज आधारित उत्पादों के लिए प्रसिद्ध है, जैसे रस्सियां, बुने हुए खाट आदि।
संत कबीर नगर को ओडीओपी के तहत पीतल के बर्तन के लिए आवंटित किया गया है, न कि मूंज उत्पादों के लिए।
उत्तर प्रदेश के जिले और उनके ओडीओपी उत्पाद
| क्रम | जनपद | प्रमुख उत्पाद / शिल्प |
| 1 | आगरा | चमड़ा उत्पाद, स्टोन/मार्बल हस्तशिल्प |
| 2 | अमरोहा | वाद्य यंत्र (ढोलक), रेडीमेड गारमेंट्स |
| 3 | अलीगढ़ | ताले, हार्डवेयर, मेटल हैण्डीक्राफ्ट |
| 4 | औरैया | दूध प्रसंस्करण (देसी घी) |
| 5 | आजमगढ़ | काली मिट्टी की कलाकृतियाँ |
| 6 | अम्बेडकर नगर | वस्त्र उत्पाद |
| 7 | अयोध्या | गुड़ |
| 8 | अमेठी | मूंज उत्पाद |
| 9 | बदायूं | ज़री-जरदोज़ी |
| 10 | बागपत | होम फर्निशिंग |
| 11 | बहराइच | गेहूं डंठल हस्तकला, खाद्य प्रसंस्करण |
| 12 | बरेली | ज़री-ज़रदोज़ी, बांस उत्पाद, सुनारी उद्योग |
| 13 | बलिया | बिंदी उत्पाद |
| 14 | बस्ती | काष्ठ कला, सिरका उत्पाद |
| 15 | बलरामपुर | खाद्य प्रसंस्करण (दाल) |
| 16 | भदोही | कालीन (दरी) |
| 17 | बांदा | शज़र पत्थर शिल्प |
| 18 | बिजनौर | काष्ठ कला |
| 19 | बाराबंकी | वस्त्र उत्पाद |
| 20 | बुलंदशहर | सिरेमिक उत्पाद |
| 21 | चंदौली | ज़री-जरदोज़ी, काला चावल |
| 22 | चित्रकूट | लकड़ी के खिलौने |
| 23 | देवरिया | सजावटी सामान, कढ़ाई-सिलाई, रेडीमेड गारमेंट्स |
| 24 | इटावा | वस्त्र उद्योग, सिलाई एवं कढ़ाई |
| 25 | एटा | घुंघरू, घंटी, पीतल उत्पाद |
| 26 | फर्रुखाबाद | वस्त्र छपाई, ज़री-जरदोज़ी |
| 27 | फतेहपुर | बेडशीट, आयरन फैब्रिकेशन वर्क्स |
| 28 | फिरोजाबाद | कांच उत्पाद |
| 29 | गौतमबुद्ध नगर | रेडीमेड गारमेंट्स |
| 30 | गाजीपुर | जूट वॉल हैंगिंग |
| 31 | गाज़ियाबाद | अभियांत्रिकी सामग्री |
| 32 | गोंडा | खाद्य प्रसंस्करण (दाल) |
| 33 | गोरखपुर | टेराकोटा, रेडीमेड गारमेंट्स |
| 34 | हापुड़ | होम फर्निशिंग |
| 35 | हरदोई | हैंडलूम |
| 36 | हाथरस | हींग |
| 37 | हमीरपुर | जूते |
| 38 | जालौन | हस्तनिर्मित कागज कला |
| 39 | जौनपुर | ऊनी कालीन (दरी) |
| 40 | झांसी | सॉफ्ट ट्वॉयज |
| 41 | कौशाम्बी | खाद्य प्रसंस्करण (केला) |
| 42 | कन्नौज | इत्र |
| 43 | कुशीनगर | केला फाइबर व अन्य केला उत्पाद |
| 44 | कानपुर देहात | एल्युमिनियम बर्तन |
| 45 | कानपुर नगर | चमड़ा उत्पाद |
| 46 | कासगंज | ज़री-जरदोज़ी |
| 47 | लखीमपुर खीरी | जनजातीय शिल्प, गुड़ उत्पाद |
| 48 | ललितपुर | ज़री सिल्क साड़ी, खाद्य प्रसंस्करण, रेडीमेड स्कूल ड्रेस |
| 49 | लखनऊ | चिकनकारी, ज़री-जरदोज़ी |
| 50 | महाराजगंज | फर्नीचर |
| 51 | मेरठ | खेल सामग्री |
| 52 | महोबा | गौरा पत्थर |
| 53 | मिर्जापुर | कालीन, मेटल उद्योग |
| 54 | मैनपुरी | तारकशी कला |
| 55 | मुरादाबाद | धातु शिल्प |
| 56 | मथुरा | सैनिटरी फिटिंग, ठाकुर जी की पोषाक, श्रृंगार मूर्ति, कण्ठी माला |
| 57 | मुजफ्फरनगर | गुड़ |
| 58 | मऊ | वस्त्र उत्पाद |
| 59 | पीलीभीत | बांसुरी, लकड़ी उत्पाद |
| 60 | प्रतापगढ़ | खाद्य प्रसंस्करण (आंवला) |
| 61 | प्रयागराज | मूंज उत्पाद |
| 62 | रायबरेली | काष्ठ कला |
| 63 | रामपुर | एप्लिक वर्क, ज़री पैचवर्क, मेंथा |
| 64 | संत कबीर नगर | पीतल के बर्तन (ब्रासवेयर) |
| 65 | शाहजहांपुर | ज़री-ज़रदोज़ी |
| 66 | शामली | लौह कला |
| 67 | सहारनपुर | लकड़ी पर नक्काशी |
| 68 | श्रावस्ती | जनजातीय शिल्प |
| 69 | सम्भल | हॉर्न-बोन हस्तशिल्प |
| 70 | सिद्धार्थनगर | काला नमक चावल |
| 71 | सीतापुर | दरी |
| 72 | सोनभद्र | कालीन |
| 73 | सुल्तानपुर | मूंज उत्पाद |
| 74 | उन्नाव | ज़री-जरदोज़ी, चर्म उत्पाद |
| 75 | वाराणसी | बनारसी रेशम साड़ी |
- निम्नलिखित में से कौन सा/से युग्म सही सुमेलित नहीं है/हैं?
(बायोस्फीयर रिजर्व) (राज्य)
- नोकरेक – मणिपुर
- मानस – असम
- अगस्त्यमलाई – केरल
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 2 और 3
व्याख्या:
नोकरेक जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र – मेघालय (मणिपुर नहीं): मेघालय के पश्चिमी गारो हिल्स जिले में स्थित। अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध, जिसमें रेड पांडा और सिट्रस जीन संरक्षित क्षेत्र शामिल हैं।
मानस बायोस्फियर रिज़र्व – असम: असम में स्थित, इसमें मानस नेशनल पार्क शामिल है, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। यह बाघ, हाथी, और पिग्मी हॉग के लिए जाना जाता है।
अगस्त्यमलाई बायोस्फियर रिज़र्व – केरल और तमिलनाडु: पश्चिमी घाट के दक्षिणी छोर पर स्थित, केरल और तमिलनाडु दोनों में फैला। ऋषि अगस्त्य के नाम पर नामित, यह सदाबहार वन और अंतर्धारी प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध है।
| क्रम संख्या | वर्ष | जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र का नाम | राज्य |
| 1 | 1986 | नीलगिरि जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र | तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक |
| 2 | 1988 | नन्दा देवी जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र | उत्तराखंड |
| 3 | 1988 | नोकरेक जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र | मेघालय |
| 4 | 1989 | गल्फ ऑफ मन्नार जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र | तमिलनाडु |
| 5 | 1989 | सुंदरबन जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र | पश्चिम बंगाल |
| 6 | 1989 | मानस जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र | असम |
| 7 | 1989 | ग्रेट निकोबार जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र | अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह |
| 8 | 1994 | सिमलीपाल जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र | ओडिशा |
| 9 | 1997 | दिब्रू–सैखोवा जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र | असम |
| 10 | 1998 | दिहांग–दिबांग जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र | अरुणाचल प्रदेश |
| 11 | 1999 | पंचमढ़ी जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र | मध्य प्रदेश |
| 12 | 2000 | खांगचेंदजोंगा (कंचनजंगा) जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र | सिक्किम |
| 13 | 2001 | अगस्थ्यमलाई जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र | केरल, तमिलनाडु |
| 14 | 2005 | अचानकमार–अमरकंटक जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र | मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ |
| 15 | 2008 | ग्रेट रन ऑफ कच्छ जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र | गुजरात |
| 16 | 2009 | शीत मरुस्थल (कोल्ड डेज़र्ट) जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र | हिमाचल प्रदेश |
| 17 | 2010 | शेषाचलम पहाड़ियाँ जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र | आंध्र प्रदेश |
| 18 | 2011 | पन्ना जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र | मध्य प्रदेश |
- गोबी मरुस्थल निम्नलिखित में से कौन-से देशों में फैला है?
- मंगोलिया
- चीन
- रूस
- कजाखस्तान
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 1, 2 और 4
(b) केवल 1
(c) केवल 1 और 2
(d) केवल 1, 2 और 3
उत्तर: C
व्याख्या:
गोबी मरुस्थल उत्तरी चीन और दक्षिणी मंगोलिया में स्थित एक विशाल शीत रेगिस्तान है। यह अपने कठोर मौसम, तापमान में अत्यधिक उतार-चढ़ाव, और चट्टानी, निर्जन परिदृश्य के लिए जाना जाता है।
रेगिस्तान दक्षिणी मंगोलिया के ओम्नोगोवी और डुंडगोवी प्रांतों और उत्तरी चीन के आंतरिक मंगोलिया और गांसु प्रांतों में फैला है। यह रूस या कजाखस्तान तक नहीं जाता।
एशिया के कुछ प्रमुख मरुस्थल निम्नलिखित हैं:
| विशेषता | गोबी मरुस्थल | तकलामाकन मरुस्थल | कराकुम मरुस्थल | किज़िलकुम मरुस्थल |
| स्थान | उत्तरी चीन व दक्षिणी मंगोलिया | उत्तर-पश्चिम चीन (शिनजियांग, तारिम बेसिन) | तुर्कमेनिस्तान | उज़्बेकिस्तान, कज़ाखस्तान, तुर्कमेनिस्तान |
| भौगोलिक स्थिति | तिब्बती पठार के उत्तर; अल्ताई पर्वत सीमा | कुनलुन, पामीर व तियानशान पर्वतों से घिरा | कैस्पियन सागर के पूर्व; तुर्कमेनिस्तान का 70% भाग | अमू दरिया–सिर दरिया के बीच; तूरान निम्नभूमि |
| मरुस्थल का प्रकार | शीत मरुस्थल | रेतीला/वृहद रेत मरुस्थल | उष्ण मरुस्थल | अर्ध-शुष्क/उष्ण मरुस्थल |
| जलवायु | अत्यधिक तापांतर: −40°C से 45°C; कम वर्षा; प्रबल हवाएँ | अत्यंत शुष्क (<100 मिमी), अत्यधिक तापमान; धूल आंधियाँ | भीषण गर्मी (≈50°C), कम वर्षा | गर्मी तीव्र, सर्दी शुष्क; वर्षा अपेक्षाकृत अधिक |
| भू-दृश्य | पथरीले मैदान, बजरी; सीमित रेत के टीले | ऊँचे व चलायमान रेत टीले (300 मीटर तक) | रेत टीले, नमक मैदान, दरवाज़ा गैस क्रेटर | लाल रेत टीले, स्टेप्पी क्षेत्र, जिप्सम मैदान |
| मुख्य जीव-जंतु | हिम तेंदुआ, गोबी भालू, जंगली बेक्ट्रीयन ऊँट | जर्बुआ, जंगली ऊँट, नखलिस्तानों की वनस्पति | गैज़ेल, सरीसृप, मरुस्थलीय झाड़ियाँ | साईगा मृग, मॉनिटर लिज़र्ड, टूगाई वनस्पति |
| मानव गतिविधि | चरवाहा जीवन; खनन; रेशम मार्ग; जीवाश्म स्थल | काशगर, होतान, तुरपान जैसे नखलिस्तान; केंद्र में नगण्य निवास | कम आबादी; प्राकृतिक गैस; कराकुम नहर | पशुपालन; सोना खनन (मुरुनताऊ); कपास कृषि |
| ऐतिहासिक महत्व | रेशम मार्ग, मंगोल साम्राज्य, जीवाश्म खोजें | रेशम मार्ग की उत्तरी-दक्षिणी शाखाएँ | फारसी इतिहास; सोवियत सिंचाई परियोजनाएँ | तुर्किक जनजातियाँ; व्यापार व खनन परंपरा |
- ‘अम्ल और क्षार’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- अम्लीय विलयन 7 से अधिक pH का होता है।
- क्षारीय विलयन का pH 7 से कम होता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (a)
व्याख्या:
कथन 1 – गलत है: pH पैमाना एक लघुगणकीय माप है जहाँ कम संख्याएँ हाइड्रोजन आयनों की उच्च सांद्रता दर्शाती हैं। pH पैमाना 0 से 14 तक होता है और यह किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन (H⁺) की सांद्रता को दर्शाता है। अम्ल पानी में घुलकर H⁺ आयन उत्पन्न करते हैं, जिससे विलयन अधिक अम्लीय बनता है। इस कारण अम्लीय विलयनों का pH हमेशा 7 से कम होता है, अधिक नहीं। उदाहरण:
प्रबल अम्ल (जैसे HCl) → pH 0–3
दुर्बल अम्ल (जैसे एसीटिक अम्ल) → pH 4–6
कथन 2 – गलत है: क्षार पानी में घुलकर हाइड्रॉक्सिल आयन (OH⁻) उत्पन्न करते हैं या H⁺ आयन को ग्रहण करते हैं। OH⁻ की मात्रा बढ़ने पर H⁺ आयनों की मात्रा कम हो जाती है, जिससे विलयन अधिक क्षारीय हो जाता है। अतः क्षारीय विलयनों का pH हमेशा 7 से अधिक होता है। उदाहरण:
दुर्बल क्षार → pH 8–11
प्रबल क्षार → pH 12–14
प्रश्न 51. नगरपालिका के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- नगरपालिका का सदस्य बनने के लिए अर्हता आयु 25 वर्ष है।
- नगरपालिकाओं में सीधे चुनाव से आने वाले कुल सदस्य संख्या का एक-तिहाई स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) 1 और 2 दोनों
(d) केवल 2
उत्तर: (d) केवल 2
व्याख्या:
कथन 1 गलत है: अनुच्छेद 243V (74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा सम्मिलित) नगरपालिकाओं के सदस्य होने के लिए योग्यता एवं अयोग्यता निर्धारित करता है। इस अनुच्छेद के अनुसार नगरपालिका चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष है, 25 वर्ष नहीं।
अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
- 25 वर्ष की आयु सीमा लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए होती है, नगर निकायों के लिए नहीं।
- राज्य/केंद्रशासित प्रदेश आवश्यकतानुसार अन्य योग्यताएँ (जैसे – मतदाता सूची में नाम, स्थानीय निवास आदि) जोड़ सकते हैं, लेकिन आयु सीमा 21 वर्ष से अधिक नहीं कर सकते क्योंकि यह संविधान द्वारा निर्धारित न्यूनतम है।
- यह प्रावधान स्थानीय निकायों में युवाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया है।
कथन 2 सही है: अनुच्छेद 243T(3) के अनुसार प्रत्येक नगरपालिका में प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा भरी जाने वाली कुल सीटों में से कम से कम एक-तिहाई (1/3) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, और यह आरक्षण अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की महिलाओं की सीटों को शामिल करता है।
अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
- यह आरक्षण केवल प्रत्यक्ष चुनाव वाली सीटों पर लागू होता है, नामित सदस्यों पर नहीं।
- एक-तिहाई न्यूनतम सीमा है; राज्य चाहें तो इससे अधिक आरक्षण भी प्रदान कर सकते हैं (जैसे कई राज्यों में 50%)।
- महिलाओं, विशेषकर एससी /एसटी, महिलाओं को स्थानीय शासन में प्रतिनिधित्व देने के लिए यह प्रावधान 74वें संशोधन में अनिवार्य रूप से जोड़ा गया।
- महिलाओं तथा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित वार्डों का निर्धारण संबंधित राज्य/केंद्रशासित प्रदेश की सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया जाता है। आरक्षण के लाभ का समुचित विस्तार एवं न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करने हेतु आरक्षित वार्डों का आवर्तन (Rotation) एक प्रचलित प्रशासनिक प्रथा है।
प्रश्न 52. निम्नलिखित में से कौन सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
(कोयला उत्पादक क्षेत्र) (राज्य)
- माओलोंग – अरुणाचल प्रदेश
- रानीगंज – पश्चिम बंगाल
- रामगढ़ – झारखंड
- तालचेर – ओडिशा
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन करें:
कूट:
(a) केवल 2, 3 और 4
(b) केवल 1
(c) केवल 1 और 2
(d) केवल 1, 2 और 3
उत्तर: A
व्याख्या:
माओलोंग – अरुणाचल प्रदेश। अरुणाचल प्रदेश में माओलोंग नाम का कोई बड़ा कोयला क्षेत्र नहीं है । हालाँकि अरुणाचल प्रदेश में कुछ कोयला भंडार हैं , खासकर नामचिक-नामफुक क्षेत्र में , माओलोंग को एक प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र के रूप में मान्यता नहीं दी गई है।
रानीगंज – पश्चिम बंगाल: रानीगंज कोयला क्षेत्र भारत का सबसे पुराना कोयला क्षेत्र है , जो पश्चिम बंगाल (आसनसोल-दुर्गापुर क्षेत्र) में स्थित है । यह दामोदर घाटी में स्थित है और पूर्वी भारत के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्रों में से एक है।
रामगढ़ – झारखंड: रामगढ़ कोयला क्षेत्र झारखंड में हजारीबाग और बोकारो कोयला क्षेत्रों के पास स्थित है । यह बिटुमिनस कोयले से समृद्ध है ।
तालचेर – ओडिशा: तालचेर कोयला क्षेत्र ओडिशा के अंगुल जिले में स्थित है । यह महानदी कोलफील्ड्स का हिस्सा है , जो भारत के ताप विद्युत संयंत्रों में प्रमुख योगदानकर्ता है।
भारत के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र:
| क्रमांक | राज्य / क्षेत्र | प्रमुख कोयला क्षेत्र | विशेषताएँ / टिप्पणियाँ |
| 1 | झारखंड | झरिया, बोकारो, गिरिडीह, करनपुरा (उत्तर एवं दक्षिण) | झरिया देश का सबसे बड़ा कोकिंग कोयला क्षेत्र; दामोदर घाटी का मुख्य केंद्र |
| 2 | पश्चिम बंगाल | रानीगंज, धनबाद (झारखंड के साथ साझा), दार्जिलिंग–जलपाईगुड़ी | रानीगंज भारत का पहला विकसित कोयला क्षेत्र; कुछ क्षेत्रों में उच्च ग्रेड कोयला |
| 3 | ओडिशा | तालचेर, हिमगिरि, रामपुर | तालचेर देश के सबसे बड़े कोयला उत्पादक क्षेत्रों में से एक |
| 4 | छत्तीसगढ़ | कोरबा, बिश्रामपुर, सोनहत | कोरबा मध्य भारत का प्रमुख कोयला व ताप विद्युत केंद्र |
| 5 | मध्य प्रदेश–उत्तर प्रदेश | सिंगरौली | विशाल खुली खदानें; दोनों राज्यों में विस्तृत क्षेत्र; एनटीपीसी की प्रमुख परियोजनाएँ |
| 6 | महाराष्ट्र | चांदा–वर्धा (चंद्रपुर), काम्पटी, बंदर | चंद्रपुर प्रमुख उत्पादक; काम्पटी ऐतिहासिक क्षेत्र |
| 7 | तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश | सिंगरेनी क्षेत्र | दक्षिण भारत का सबसे महत्वपूर्ण कोयला उत्खनन क्षेत्र |
| 8 | उत्तर–पूर्व भारत | असम (मकुम, जयपुर, नज़ीरा) मेघालय (चेरापूंजी, दारंगिरी), नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश (नामचिक–नामफुक) | छोटे पर उच्च गुणवत्ता वाले कोयला भंडार |
| 9 | जम्मू एवं कश्मीर | कलाकोट | सीमित उत्पादन; प्रमुख क्षेत्र कलाकोट |
प्रश्न 53. अलाउद्दीन खिलजी की निम्नलिखित विजयों को सही कालक्रमानुसार क्रम में व्यवस्थित करें तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर को चुनिए।
- रणथंभौर
- जैसलमेर
- वारंगल
- चित्तौड़
कूट:
(a) 2, 1, 4, 3
(b) 1, 2, 4, 3
(c) 1, 2, 3, 4
(d) 2, 1, 3, 4
उत्तर: (a) 2, 1, 4, 3
व्याख्या
(अलाउद्दीन खिलजी की प्रमुख विजयों का कालानुक्रमिक क्रम):
| क्रमांक | विजय / अभियान | वर्ष (लगभग) | लक्षित राज्य / क्षेत्र | स्थानीय शासक / विपक्ष | सेनापति / नेतृत्व | परिणाम / प्रभाव | विशेष टिप्पणियाँ |
| 1 | भिलसा (विदिशा) अभियान | 1292 ई. | मालवा क्षेत्र | – | अलाउद्दीन स्वयं | विजय; विशाल लूट | इस विजय के बाद अलाउद्दीन को कड़ा व अवध का इक्ता मिला |
| 2 | जैसलमेर | 1294 ई. | राजपूताना | दूदा और उनके सहयोगी तिलक सिंह | अलाउद्दीन स्वयं | लम्बी घेराबंदी के बाद कब्जा | जैसलमेर की स्त्रियों ने जौहर किया, जो जैसलमेर का पहला जौहर माना जाता है। |
| 3 | देवगिरि (पहला दक्षिणी अभियान) | 1294 ई. | देवगिरि (यादव) | रामचंद्र | अलाउद्दीन | पहली तुर्की चढ़ाई; भारी धन-संपत्ति प्राप्त | अलाउद्दीन की सैन्य क्षमता साबित |
| 4 | गुजरात विजय | 1299 ई. | गुजरात | राय करण (वागेला) | उलूग़ ख़ाँ, नुसरत ख़ाँ | गुजरात पर नियंत्रण; सोमनाथ मंदिर लूटा; विशाल धन-संपत्ति प्राप्त | राय करण भागा; मलिक काफ़ूर को यहीं से प्राप्त किया गया; कमला देवी से अलाउद्दीन ने विवाह किया |
| 5 | मंगोल आक्रमणों का प्रतिरोध (6 बार) | 1297–1306 ई. | उत्तर-पश्चिम सीमा | मंगोल सेनाएँ | अलाउद्दीन, ज़फर ख़ाँ, ग़ाज़ी मलिक | मंगोलों की बुरी तरह पराजय; हजारों मंगोल मारे गए | सीमा सुरक्षा हेतु ग़ाज़ी मलिक को सरहद के संरक्षक नियुक्त |
| 6 | रणथंभौर विजय | 1301 ई. | राजस्थान | हमीरदेव | अलाउद्दीन, नुसरत ख़ाँ (मृत्यु), उलूग़ ख़ाँ | किले पर कब्ज़ा; राजपूतों ने जौहर किया | राजपूत शक्ति को निर्णायक झटका |
| 7 | चित्तौड़ विजय | 1303 ई. | मेवाड़ | रतन सिंह | अलाउद्दीन | चित्तौड़ पर कब्ज़ा; जनसंहार; खिज़्राबाद नाम रखा | पद्मिनी–जौहर की कथा इसी घटना से जुड़ी |
| 8 | मालवा विजय | 1305 ई. | मालवा | – | ऐन-उल-मुल्क | मालवा, उज्जैन, मंदसौर, धारा, चंदेरी पर कब्ज़ा | उत्तर भारत में सल्तनत का और विस्तार |
| 9 | सीवाना विजय | 1305–1308 ई. | राजस्थान | शीतलदेव | अलाउद्दीन | कठिन युद्ध के बाद विजय | राजपूत प्रतिरोध को और कमजोर किया |
| 10 | जालौर विजय | 1311 ई. | राजस्थान | कन्नड़देव व वीरदेव | अलाउद्दीन | जालौर सल्तनत में शामिल | 1311 तक राजस्थान का अधिकांश भाग गुलाम वंश के अधीन |
| 11 | देवगिरि (दूसरा अभियान) | 1306–07 ई. | देवगिरि (यादव) | रामचंद्र | मलिक काफ़ूर | रामचंद्र ने आत्मसमर्पण किया; सम्मानपूर्वक रखा गया | “राय रायन” की उपाधि मिली; बेटी का विवाह अलाउद्दीन से |
| 12 | वारंगल विजय | 1309–10 ई. | काकतीय राज्य (तेलंगाना) | प्रतापरुद्रदेव | मलिक काफ़ूर | काकतीय राज्य ने कर देना स्वीकार किया | भारी धन-संपत्ति प्राप्त; दक्षिण की शक्ति नियंत्रित |
| 13 | द्वारसमुद्र (होयसाल राज्य) विजय | 1310 ई. | होयसाल राज्य | वीर बल्लाल III | मलिक काफ़ूर | राज्य पर नियंत्रण; विशाल लूट प्राप्त | दक्षिण भारत की दूसरी बड़ी विजय |
| 14 | पांड्य देश अभियान | 1311 ई. | मदुरै एवं पांड्य राज्य | सुंदर पांड्य, वीर पांड्य (गृहयुद्ध) | मलिक काफ़ूर | पांड्य राज्य लूटा; निर्णायक युद्ध नहीं | काफ़ूर रामेश्वरम तक पहुँचा; मस्जिद बनवाई; 512 हाथी व 7000 घोड़े, रत्न लूट कर दिल्ली पहुँचा |
| 15 | दक्षिण भारत पर नियंत्रण की स्थापना | 1311–1316 ई. | समस्त दक्कन | – | मलिक काफ़ूर | दक्कन सल्तनत के प्रभाव में | अलाउद्दीन उत्तर भारत का नियंत्रक बन गया |
प्रश्न 54. नई पंबन ब्रिज के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- इसका निर्माण रेल विकास निगम लिमिटेड द्वारा किया गया है, जो रेल मंत्रालय के तहत एक ‘नवरत्न‘ सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई है।
- यह भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेलवे सी ब्रिज है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (d)
व्याख्या:
न्यू पंबन ब्रिज भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेलवे समुद्री पुल है, जिसका निर्माण रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) द्वारा किया गया है। आरवीएनएल रेलवे मंत्रालय के अधीन एक नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई है। यह पुल पुराने पंबन ब्रिज के स्थान पर बनाया गया है, जो 1914 में निर्मित हुआ था और समय के साथ कमज़ोर पड़ने लगा था। नए पुल को आधुनिक तकनीक से डिज़ाइन किया गया है ताकि समुद्री यातायात और रेल यातायात दोनों सुरक्षित रूप से संचालित रह सकें।
इस पुल की सबसे विशेष विशेषता इसका केंद्रीय लिफ्ट स्पैन है, जो इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम द्वारा ऊर्ध्वाधर रूप से ऊपर उठाया जा सकता है। इससे बड़े जहाज़ आसानी से नीचे से गुजर सकते हैं। पुल में स्वचालित नियंत्रण प्रणाली, उन्नत सेंसर, और सुरक्षित लॉकिंग तकनीकें लगाई गई हैं, जिससे किसी भी ट्रेन की आवाजाही केवल पूरी स्थिरता की स्थिति में ही संभव होती है। लगभग 2.07 किलोमीटर लंबा यह पुल तमिलनाडु के मंडपम को रामेश्वरम द्वीप से जोड़ता है और धार्मिक, पर्यटन तथा सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह भारत की समुद्री इंजीनियरिंग और अधोसंरचना क्षमता का आधुनिक उदाहरण है।
प्रश्न 55. निम्नलिखित में से कौन-सा/से रामसर आर्द्रभूमि स्थल उत्तर प्रदेश में स्थित नहीं है/हैं?
- सरसई नावर झील
- समसपुर पक्षी अभयारण्य
- रुद्रसागर झील
- सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन करें:
कूट:
(a) 3 और 4
(b) 1 और 2
(c) 1 और 3
(d) 2 और 3
उत्तर: A
व्याख्या:
सरसई नावर झील – उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में स्थित है। 2019 में रामसर साइट घोषित किया गया।
समसपुर पक्षी अभयारण्य – उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के पास स्थित। प्रवासी पक्षियों और आर्द्रभूमि जैव विविधता के लिए जाना जाता है।
रुद्रसागर झील – त्रिपुरा: त्रिपुरा के सिपाहीजाला ज़िले में मेलाघर के पास स्थित यह झील एक रामसर स्थल है, और इसके बीच में नीरमहल पैलेस स्थित है। यह “जल महल” के नाम से प्रसिद्ध है और हिंदू और मुगल वास्तुकला का एक अनूठा मिश्रण है। इसे महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य ने 1930 के दशक में अपने ग्रीष्मकालीन निवास के रूप में बनवाया था।
सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान – हरियाणा: हरियाणा के गुरुग्राम जिले में स्थित, यह एक रामसर स्थल है जो फ्लेमिंगो और पेलिकन जैसे प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख रामसर स्थल
| क्रमांक | रामसर स्थल | जिला / स्थान | संक्षिप्त विवरण |
| 1 | ऊपरी गंगा नदी | बृजघाट (गाजियाबाद) से नरोरा (बुलंदशहर) तक | गंगा नदी का महत्वपूर्ण मीठे पानी का तंत्र; जैव विविधता से समृद्ध |
| 2 | हैदरपुर वेटलैंड | बिजनौर | गंगा नदी के तट पर स्थित कृत्रिम रूप से बनी महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि |
| 3 | बखिरा वन्यजीव अभयारण्य | संत कबीर नगर | विशाल प्राकृतिक झील और प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आश्रय |
| 4 | नवाबगंज पक्षी अभयारण्य | उन्नाव | विभिन्न प्रवासी पक्षियों के संरक्षण हेतु प्रसिद्ध |
| 5 | पार्वती अरगा पक्षी अभयारण्य | गोंडा | प्राकृतिक आर्द्रभूमि, विविध जलपक्षियों का आवास |
| 6 | समन पक्षी अभयारण्य | मैनपुरी | छोटी लेकिन अत्यधिक समृद्ध जैव विविधता वाली आर्दभूमि |
| 7 | समसपुर पक्षी अभयारण्य | रायबरेली | जलपक्षियों का महत्वपूर्ण प्रजनन और प्रवास स्थल |
| 8 | सांडी पक्षी अभयारण्य | हरदोई | मीठे पानी की दलदली भूमि; विभिन्न प्रवासी पक्षियों का आश्रय |
| 9 | सरसई नावर झील | इटावा | प्राकृतिक झील; सारस पक्षियों और जलपक्षियों का महत्वपूर्ण अधिवास |
| 10 | सूर सरोवर (कीथम झील) | आगरा | मानव निर्मित झील; चंबल-बेतवा क्षेत्रीय पारिस्थितिकी का प्रमुख हिस्सा |
प्रश्न 56. मार्च 2025 में संयुक्त विशेष बल अभ्यास ‘खंजर -XII’ भारत और निम्नलिखित में से किन देशों के बीच आयोजित किया गया था?
- रूस
- तुर्कमेनिस्तान
- किर्गिज़स्तान
- मंगोलिया
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए
कूट:
(a) 3 और 4
(c) 2 और 3
(b) केवल 1
(d) केवल 3
उत्तर: d
व्याख्या:
खंजर–XII भारत और किर्गिज़स्तान के बीच आयोजित वार्षिक संयुक्त विशेष बल अभ्यास का 12वाँ संस्करण है, जो 10 से 23 मार्च 2025 तक किर्गिज़स्तान में संपन्न हुआ। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के विशेष बलों के बीच अंतर-संचालनीयता बढ़ाना, आतंकवाद-रोधी अभियानों में कौशल-साझाकरण करना, तथा पहाड़ी और शहरी युद्धक रणनीतियों में संयुक्त क्षमता को मजबूत करना था।
अभ्यास में भारत की पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेज) और किर्गिज़स्तान की स्कॉर्पियन ब्रिगेड ने भाग लिया। दोनों दलों ने वास्तविक युद्ध परिस्थितियों जैसे काउंटर-टेरर ऑपरेशन, उन्नत स्नाइपिंग, क्लोज क्वार्टर बैटल, तथा जटिल इमारतों में प्रवेश एवं सफाई अभियानों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस संयुक्त अभ्यास ने दोनों सेनाओं को पहाड़ी इलाकों में लड़ाई, छिपे हुए आतंकवादी ठिकानों पर हमले, और शहरी इलाकों में समन्वित कार्रवाई जैसे कौशलों में महारत विकसित करने का अवसर दिया।
प्रश्न 57. निम्नलिखित में से कौन फजल अली आयोग के सदस्य थे?
- के.टी. शाह
- के.एम. पणिक्कर
- पी. सीतारमैया
- एच.एन. कुंजरू
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 2 और 4
(b) 1 और 2
(c) 1 और 3
(d) 2 और 3
उत्तर: (a) 2 और 4
व्याख्या:
फ़ज़ल अली आयोग, जिसे राज्य पुनर्गठन आयोग भी कहा जाता है, भारत में राज्यों की सीमाओं के पुनर्गठन हेतु दिसंबर 1953 में स्थापित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय राज्यों की उन सीमाओं की समीक्षा करना था जो ब्रिटिश काल से विरासत में मिली थीं, तथा उन्हें भाषाई आधार पर पुनर्गठित करने की बढ़ती मांगों पर विचार करना था।
आयोग का नेतृत्व न्यायमूर्ति फ़ज़ल अली ने किया, जबकि इसके अन्य दो सदस्य के. एम. पनिक्कर और एच. एन. कुंज़रू थे। आयोग ने अपना विस्तृत प्रतिवेदन सितंबर 1955 में केंद्र सरकार को सौंपा। इसकी कई सिफारिशें संशोधित रूप में स्वीकार की गईं और परिणामस्वरूप राज्यों का पुनर्गठन अधिनियम, 1956 लागू किया गया। 1956 के इस अधिनियम ने भारत में राज्यों की पुराने वर्गीकरण प्रणाली- भाग A, B, C और D राज्यों- को समाप्त कर दिया। इसके आधार पर देश में 14 राज्य और 6 केंद्रशासित प्रदेश बनाए गए।
प्रश्न 58. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
सूची – I सूची – II
(राष्ट्रीय उद्यान/वन्यजीव अभयारण्य) (राज्य/केंद्र शासित प्रदेश)
- दाचीगाम 1. मध्य प्रदेश
- केवलादेव 2. राजस्थान
- कान्हा 3. केरल
- पेरियार 4. जम्मू और कश्मीर
कूट:
A B C D
(a) 2 4 1 3
(b) 4 2 1 3
(c) 4 2 3 1
(d) 2 4 3 1
उत्तर: (b) 4 2 1 3
व्याख्या:
दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान – जम्मू और कश्मीर: केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में श्रीनगर के पास स्थित । यह जम्मू और कश्मीर के राज्य पशु हंगुल हिरण (कश्मीरी हिरण) के लिए जाना जाता है ।
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान – राजस्थान: भरतपुर , राजस्थान में स्थित । यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है , जो साइबेरियन क्रेन और अन्य प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान – मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के मंडला और बालाघाट जिलों में स्थित है । रॉयल बंगाल टाईगर्स, बारासिंघा (दलदली हिरण) और साल वनों के लिए जाना जाता है ।
पेरियार वन्यजीव अभयारण्य – केरल: केरल के पश्चिमी घाट में थेक्कडी के पास स्थित है । हाथियों, बाघों और मुल्लापेरियार बांध से बनी पेरियार झील के लिए प्रसिद्ध ।
भारत के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान
| क्रमांक | राष्ट्रीय उद्यान का नाम | राज्य / केन्द्रशासित प्रदेश | स्थापना वर्ष | विशेषता / प्रमुख वन्यजीव |
| 1 | जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान | उत्तराखंड | 1936 | भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान; बंगाल टाइगर संरक्षण के लिए प्रसिद्ध |
| 2 | काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान | असम | 1974 | एक-सींग वाले गैंडे का विश्व प्रसिद्ध आवास |
| 3 | रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान | राजस्थान | 1980 | बाघों की उच्च संख्या; ऐतिहासिक रणथंभौर किले के आसपास विस्तृत वन |
| 4 | कान्हा राष्ट्रीय उद्यान | मध्य प्रदेश | 1955 | बारासिंगा (Swamp Deer) का प्रमुख संरक्षण स्थल |
| 5 | सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान | पश्चिम बंगाल | 1984 | विश्व का सबसे बड़ा मैन्ग्रोव वन; रॉयल बंगाल टाइगर का प्राकृतिक आवास |
| 6 | पेरियार राष्ट्रीय उद्यान | केरल | 1982 | पेरियार झील के आसपास स्थित; हाथियों और टाइगर रिज़र्व के लिए प्रसिद्ध |
| 7 | बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान | कर्नाटक | 1974 | नीलगिरि जैवमंडल रिज़र्व का हिस्सा; बाघों और हाथियों की महत्वपूर्ण जनसंख्या |
| 8 | दाचिगाम राष्ट्रीय उद्यान | जम्मू और कश्मीर | 1981 | हैंगुल (कश्मीर स्टैग) का एकमात्र प्राकृतिक आवास |
| 9 | केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (घाना पक्षी विहार) | राजस्थान | 1982 | विश्व प्रसिद्ध पक्षी अभयारण्य; साइबेरियन क्रेन का ऐतिहासिक प्रवास स्थल |
प्रश्न 59. निम्नलिखित में से कौन सा/से युग्म सही सुमेलित नहीं है/हैं?
(जनजाति) (आवास क्षेत्र)
- बुशमैन – कालाहारी मरुस्थल
- एस्किमो – उत्तरी कनाडा
- पिग्मी – कांगो बेसिन
- मसाई – पश्चिम अफ्रीका
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 4
(b) केवल 1
(c) केवल 1, 2 और 3
(d) केवल 3 और 4
उत्तर (a) केवल 4
व्याख्या:
बुशमैन (सैन) – बोत्सवाना, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के कालाहारी रेगिस्तान क्षेत्र में निवास करते हैं
एस्किमो (इनुइट) – उत्तरी कनाडा, अलास्का और ग्रीनलैंड में रहते हैं
पिग्मी – कांगो बेसिन (मध्य अफ्रीका) में रहने वाले मूल निवासी
मसाई – पूर्वी अफ्रीका में केन्या और उत्तरी तंजानिया के घास के मैदानों में निवास करते हैं, पश्चिमी अफ्रीका में नहीं
| क्रमांक | जनजाति का नाम | निवास क्षेत्र |
| 1 | एल्युट | अलास्का |
| 2 | ऐनू | जापान |
| 3 | बेडौइन | सहारा रेगिस्तान और मध्य पूर्व |
| 4 | बिंदीबू / एबोरिजिन | ऑस्ट्रेलिया |
| 5 | बुशमैन (सैन) | कालाहारी रेगिस्तान |
| 6 | चुकची | उत्तर-पूर्व एशिया, उत्तरी साइबेरिया |
| 7 | एस्किमो | ग्रीनलैंड, उत्तर कनाडा, अलास्का, उत्तर साइबेरिया |
| 8 | फुलानी | पश्चिमी अफ्रीका |
| 9 | गोबी मंगोल | गोबी क्षेत्र |
| 10 | गुइका | अमेज़न वन क्षेत्र |
| 11 | हौसा | उत्तरी नाइजीरिया |
| 12 | हॉटेंटॉट्स | उष्णकटिबंधीय अफ्रीका |
| 13 | इबानास | दक्षिण-पूर्व एशिया का भूमध्यरेखीय वर्षावन क्षेत्र |
| 15 | कालमुक | मध्य एशिया |
| 16 | कज़ाख | कज़ाखिस्तान |
| 17 | किर्गिज़ | एशियाई स्टेपी क्षेत्र |
| 18 | कोर्याक | उत्तरी साइबेरिया, यूरेशिया |
| 19 | लैप्स | उत्तरी फ़िनलैंड, स्कैंडिनेवियाई क्षेत्र |
| 20 | माओरी | न्यूज़ीलैंड |
| 21 | मसाई | पूर्वी और मध्य अफ्रीका |
| 22 | मियो | म्यांमार (बर्मा) |
| 23 | ओरंग अस्ली | मलेशिया |
| 24 | पिग्मी | कांगो बेसिन, ज़ैरे |
प्रश्न 60. नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): खाद्य सुरक्षा अधिशेष खाद्य उत्पादन वर्षों में भी आवश्यक है।
कारण (R): असमान वितरण और दुर्गम/पहुँच के बाहर होने के कारण भूखमरी अभी भी हो सकती है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: (b)
व्याख्या:
खाद्य सुरक्षा अधिशेष उत्पादन वाले वर्षों में भी आवश्यक है क्योंकि किसी देश में भोजन का अधिशेष उत्पादन होना इस बात की गारंटी नहीं है कि सभी नागरिकों को पर्याप्त भोजन उपलब्ध होगा। खाद्यान्न सुरक्षा केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि वितरण, क्रय-शक्ति, परिवहन, भंडारण क्षमता और सरकारी नीतियों पर भी निर्भर करती है। असमान आय, कमजोर वितरण प्रणाली, क्षेत्रीय विषमताएँ, सामाजिक-आर्थिक बाधाएँ और परिवहन की कमी के कारण भोजन उपलब्ध होने के बावजूद भूख और कुपोषण की स्थिति पैदा हो सकती है। इतिहास में बंगाल का अकाल दिखाता है कि खाद्य उपलब्धता के बावजूद वितरण असमानता भुखमरी उत्पन्न कर सकती है, और समकालीन काल में भी प्रवासी मजदूरों, दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तथा शहरी झुग्गियों में इसी कारण खाद्य असुरक्षा देखी जाती है। इसके अतिरिक्त, मुद्रास्फीति, भंडारण क्षमता की कमी, बाजार-चालित मूल्य उतार–चढ़ाव, और पोषक आहार तक असमान पहुँच भी खाद्य सुरक्षा को अनिवार्य बनाते हैं। इसलिए, अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की वैज्ञानिक और व्यावहारिक व्याख्या करता है।
प्रश्न 61. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
सूची- I (शिष्य) सूची-II (गुरु)
- कबीर 1. गुरु नानक देव
- आमिर खुसरो 2. स्वामी रामानंद
C.सूरदास 3. निज़ामुद्दीन औलिया
- मर्दाना 4. वल्लभाचार्य
कूट:
A B C D
(a) 3 2 1 4
(b) 2 3 1 4
(c) 3 2 4 1
(d) 2 3 4 1
उत्तर: (d) 2 3 4 1
व्याख्या:
कबीर → गुरु — स्वामी रामानंद: कबीरदास निर्गुण भक्ति परंपरा के प्रमुख संत थे और माना जाता है कि उन्होंने काशी में स्वामी रामानंद से दीक्षा ली। रामानंद की समन्वयवादी वैष्णव परंपरा ने कबीर की निर्गुण भक्ति, सामाजिक समरसता, जाति-विरोध और सहज आध्यात्मिकता को गहरा प्रभाव दिया। उनके दोहे हिन्दू–मुस्लिम एकता तथा मानवतावादी दृष्टिकोण के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
अमीर ख़ुसरो → गुरु — निज़ामुद्दीन औलिया: अमीर खुसरो दिल्ली सल्तनत काल के महान सूफी कवि, संगीतकार और फारसी–हिंदी परंपरा के अग्रणी रचनाकार थे। वे चिश्ती संत हजरत निज़ामुद्दीन औलिया के प्रिय शिष्य थे। खुसरो ने अपनी काव्य-प्रतिभा और संगीत नवाचारों (तबला, सितार की परंपरा का विकास) से सूफी परंपरा को अत्यधिक समृद्ध किया। उनका गुरु–समर्पण अद्वितीय माना जाता है; वे “तूती-ए-हिंद” के नाम से विख्यात हैं।
सूरदास → गुरु — वल्लभाचार्य: सूरदास कृष्णभक्ति के महान कवि और अष्टछाप के प्रमुख सदस्यों में थे। वे वल्लभाचार्य के पुष्टिमार्ग के अनुयायी थे, जिसका प्रभाव उनके ग्रंथ सूरसागर में बाल-कृष्ण की लीलाओं के मार्मिक एवं रसपूर्ण वर्णन में स्पष्ट दिखाई देता है। वल्लभाचार्य के शुद्धाद्वैत दर्शन—कृष्ण को पूर्ण पुरुषोत्तम मानना—का सूरदास के काव्य पर गहरा प्रभाव था।
मर्दाना → गुरु — गुरु नानक देव: भाई मरदाना गुरु नानक देव के सबसे घनिष्ठ साथी, शिष्य और सहयात्री थे। एक मुस्लिम रैबाबी होने के नाते उन्होंने रबाब के माध्यम से गुरु नानक की वाणी का प्रसार किया, जिससे सिख भक्ति-संगीत की नींव मजबूत हुई। उनके माध्यम से गुरु नानक का संदेश मुस्लिम समुदायों तक पहुँचा, जो सिख धर्म की सार्वभौमिक एवं समन्वयवादी भावना को दर्शाता है।
प्रश्न 62. नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): भारत में जनहित याचिका कानून के शासन के लिए आवश्यक है।
कारण (R): जनहित याचिका सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को न्याय तक प्रभावकारी पहुँच प्रदान करता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: (b)
व्याख्या:
अभिकथन (A) सत्य है, क्योंकि जनहित याचिका (पीआईएल) न्यायिक जवाबदेही, कानून के समक्ष समानता और शासन की पारदर्शिता को मजबूत करती है। यह सुनिश्चित करती है कि न्याय व्यवस्था केवल विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग तक सीमित न रहे, बल्कि गरीब, वंचित, शोषित और हाशिए पर रहने वाले लोगों के अधिकार भी समान रूप से संरक्षित हों। जनहित याचिका ने न्यायपालिका को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया है, जिसके द्वारा पर्यावरण संरक्षण, कारागार सुधार, बंधुआ मजदूरी उन्मूलन, महिला–बाल सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही जैसे सार्वजनिक मुद्दों पर प्रभावी हस्तक्षेप संभव हुआ।
कारण (R) भी सत्य है, क्योंकि जनहित याचिका की प्रक्रिया न्यायालयों को यह शक्ति देती है कि वे स्वयं संज्ञान लें या उन जनोन्मुख व्यक्तियों/संस्थाओं को याचिका दायर करने की अनुमति दें, जो उन लोगों की ओर से आवाज उठाते हैं जो संसाधनों, ज्ञान या अवसरों के अभाव में न्यायालय नहीं पहुँच सकते। इस प्रकार न्याय प्रणाली का दायरा व्यापक होता है और न्याय तक पहुँच का लोकतंत्रीकरण होता है।
साथ ही, जनहित याचिका का मूल उद्देश्य न्याय तक पहुँच बढ़ाना और शासन को संवैधानिक दायित्वों के अनुरूप कार्य करने के लिए बाध्य करना है, जो विधि के शासन का एक आवश्यक तत्व है। अतः कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है, क्योंकि दोनों का मूल भाव यह है कि पीआईएल ने न्याय को सभी वर्गों तक पहुँचाया और राज्य की जवाबदेही को मज़बूत किया।
प्रश्न 63. निम्नलिखित घटनाओं को सही कालक्रमानुसार क्रम में व्यवस्थित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर को चुनिए।
- कन्नौज का युद्ध
- दौराह की लड़ाई
- सामूगढ़ का युद्ध
- चौसा का युद्ध
कूट:
(a) 4, 2, 1, 3
(b) 2, 4, 1, 3
(c) 2, 4, 3, 1
(d) 4, 2, 3, 1
उत्तर: (b) 2, 4, 1, 3
व्याख्या (कालानुक्रमिक क्रम):
| युद्ध | वर्ष | मुख्य विवरण |
| दौरा की लड़ाई | 1532 | हुमायूँ ने बिहार और जौनपुर पर अधिकार कर चुके अफ़ग़ानों को दौरा में पराजित किया। इसके बाद उसने पूर्वी भारत के प्रवेश द्वार माने जाने वाले चुनार दुर्ग की घेराबंदी की, जो शेर ख़ान के नियंत्रण में था। यद्यपि हुमायूँ की स्थिति मज़बूत थी, फिर भी उसने शेर ख़ान से संधि करके उसे बनारस के पूर्व के क्षेत्रों तथा चुनार दुर्ग का नियंत्रण बनाए रखने दिया। यही निर्णय आगे चलकर उसके लिए घातक सिद्ध हुआ। |
| चौसा का युद्ध | 1539 | हुमायूँ को शेर ख़ान से करारी हार मिली। हुमायूँ किसी तरह गंगाजी पार कर भाग निकला, जबकि शेर ख़ान ने “शेरशाह” की उपाधि धारण की। |
| कन्नौज का युद्ध | 1540 | भाइयों के असहयोग और सीमित सेना के कारण हुमायूँ शेर शाह से निर्णायक रूप से पराजित हुए। यह युद्ध मुगलों के पतन और शेर शाह के उदय का निर्णायक क्षण बना। पराजय के बाद हुमायूँ राज्यहीन होकर लगभग पंद्रह वर्ष (1540–1555) निर्वासन में रहा। |
| सामूगढ़ का युद्ध | 1658 | औरंगज़ेब व दारा शिकोह के बीच लड़ा गया निर्णायक संघर्ष था। दारा की विभाजित सलाहकारों, रणनीतिक भूलों और औरंगज़ेब को कमतर आँकने के कारण उसे पराजय का सामना करना पड़ा। इस युद्ध ने उत्तराधिकार के प्रश्न को लगभग निश्चित कर दिया। विजय के बाद औरंगज़ेब ने अपने भाई मुराद को कपटपूर्वक बंदी बनाकर ग्वालियर किले भेज दिया, जहाँ दो वर्ष बाद उसकी हत्या कर दी गई। |
प्रश्न 64. भारत के निम्नलिखित राज्यों को उनके क्षेत्रफल के आधार पर आरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
- हरियाणा
- हिमाचल प्रदेश
- पंजाब
- उत्तराखंड
कूट:
(a) 3, 1, 4, 2
(b) 1, 3, 4, 2
(c) 1, 3, 2, 4
(d) 3, 1, 2, 4
उत्तर: (b)
व्याख्या:
आधिकारिक आंकड़ों (भारतीय जनगणना/सर्वेक्षण) के अनुसार:
| क्रमांक | राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | क्षेत्रफल (वर्ग किमी) |
| 1 | राजस्थान | 3,42,239 |
| 2 | मध्य प्रदेश | 3,08,252 |
| 3 | महाराष्ट्र | 3,07,713 |
| 4 | उत्तर प्रदेश | 2,40,928 |
| 5 | गुजरात | 1,96,244 |
| 6 | कर्नाटक | 1,91,791 |
| 7 | आंध्र प्रदेश | 1,62,968 |
| 8 | ओडिशा | 1,55,707 |
| 9 | छत्तीसगढ़ | 1,35,192 |
| 10 | तमिलनाडु | 1,30,060 |
| 11 | तेलंगाना | 1,12,077 |
| 12 | बिहार | 94,163 |
| 13 | पश्चिम बंगाल | 88,752 |
| 14 | अरुणाचल प्रदेश | 83,743 |
| 15 | झारखंड | 79,716 |
| 16 | असम | 78,438 |
| 17 | लद्दाख | 59,000 |
| 18 | हिमाचल प्रदेश | 55,673 |
| 19 | उत्तराखंड | 53,483 |
| 20 | पंजाब | 50,362 |
| 21 | जम्मू और कश्मीर | 42,241 |
| 22 | हरियाणा | 44,212 |
| 23 | केरल | 38,852 |
| 24 | मेघालय | 22,429 |
| 25 | मणिपुर | 22,327 |
| 26 | मिजोरम | 21,081 |
| 27 | नागालैंड | 16,579 |
| 28 | त्रिपुरा | 10,486 |
| 29 | अंडमान और निकोबार द्वीप समूह | 8,249 |
| 30 | सिक्किम | 7,096 |
| 31 | गोवा | 3,702 |
| 32 | दिल्ली | 1,483 |
| 33 | दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव | 602 |
| 34 | पुदुच्चेरी | 490 |
| 35 | चंडीगढ़ | 114 |
| 36 | लक्षद्वीप | 30 |
प्रश्न 65. उत्तर भारत में जल विद्युत के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- हिमालय क्षेत्र में जलविद्युत की विशाल संभावनाएं हैं।
- पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार इस क्षमता का उपयोग नहीं कर सकते क्योंकि उनके उत्तर में स्थित हिमालय नेपाल की सीमा में आता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (d)
व्याख्या:
कथन 1 – सही: हिमालयी क्षेत्र में अपनी खड़ी ढलानों, तेज़ बहने वाली नदियों (जैसे गंगा, यमुना, सतलुज, चिनाब और तीस्ता) और उच्च वर्षा के कारण जलविद्युत की अपार संभावनाएँ हैं । हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएँ हैं (जैसे, भाखड़ा नांगल, टिहरी, नाथपा झाकरी)।
कथन 2 – सही: पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार इस क्षमता का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाते क्योंकि उनके उत्तर में हिमालय का विस्तार नेपाल में है, भारत में नहीं। इसलिए, इन राज्यों में प्रवेश करते समय नदी का प्रवाह समतल और धीमा हो जाता है, जिससे जलविद्युत उत्पादन के लिए आवश्यक “हाइड्रोलिक हेड” उपलब्ध नहीं रहता और जलविद्युत उत्पादन क्षमता कम हो जाती है।
प्रश्न 66. समस्थानिक (आइसोटोप) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- समान परमाणु क्रमांक किन्तु अलग परमाणु द्रव्यमान संख्या वाले परमाणुओं को समस्थानिक के रूप में जाना जाता है।
- प्रोटियम, ड्यूटेरियम और ट्रिटियम कार्बन के समस्थानिक हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (b)
व्याख्या:
समस्थानिक (आइसोटोप) किसी तत्व के वे परमाणु होते हैं जिनमें परमाणु क्रमांक (प्रोटॉन की संख्या) समान होता है, इसलिए उनकी रासायनिक गुणधर्म समान रहते हैं, लेकिन द्रव्यमान संख्या (न्यूट्रॉन + प्रोटॉन) अलग होती है। द्रव्यमान संख्या में अंतर न्यूट्रॉनों की संख्या अलग होने के कारण होता है।
उदाहरण: प्रोटियम, ड्यूटेरियम और ट्रिटियम हाइड्रोजन के समस्थानिक हैं (कार्बन के नहीं)। कार्बन के समस्थानिक—
कार्बन-12 — 6 प्रोटॉन + 6 न्यूट्रॉन
कार्बन-14 — 6 प्रोटॉन + 8 न्यूट्रॉन
दोनों में प्रोटॉन 6 हैं, पर न्यूट्रॉनों की संख्या अलग है, इसलिए द्रव्यमान संख्या अलग है।
समान द्रव्यमान संख्या परंतु अलग-अलग परमाणु क्रमांक वाले परमाणु समभारिक (आईसोबार) कहलाते हैं। चूँकि इनमें प्रोटॉनों की संख्या अलग होती है, इसलिए इनके रासायनिक गुणधर्म भी अलग होते हैं।
उदाहरण:
आर्गन-40 — 18 प्रोटॉन + 22 न्यूट्रॉन
कैल्शियम-40 — 20 प्रोटॉन + 20 न्यूट्रॉन
प्रश्न 67. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
सूची – I (संविधान सभा की समितियाँ)
- संघीय संविधान समिति
- प्रक्रिया नियम समिति
- प्रारूप समिति
- मौलिक अधिकार उप-समिति
सूची – II (समितियों के अध्यक्ष)
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद
- जे.बी. कृपलानी
- डॉ. बी.आर. अंबेडकर
- जवाहरलाल नेहरू
कूट:
A B C D
(a) 1 4 3 2
(b) 1 2 3 4
(c) 2 1 3 4
(d) 4 1 3 2
उत्तर: (d) 4 1 3 2
व्याख्या:
| क्रमांक | समिति का नाम | अध्यक्ष |
| 1 | राष्ट्रीय ध्वज पर तदर्थ समिति | राजेन्द्र प्रसाद |
| 2 | मौलिक अधिकारों पर परामर्श समिति | वल्लभभाई पटेल |
| 3 | संविधान सभा के कार्यों पर समिति | जी. वी. मावलंकर |
| 4 | अल्पसंख्यकों एवं आदिवासी तथा बहिष्कृत क्षेत्रों पर समिति | वल्लभभाई पटेल |
| 5 | प्रक्रिया नियम समिति | राजेन्द्र प्रसाद |
| 6 | संविधान का मसौदा जाँचने हेतु विशेष समिति | अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर |
| 7 | प्रांतीय संविधान समिति | वल्लभभाई पटेल |
| 8 | प्रारूप (ड्राफ्टिंग) समिति | बी. आर. अम्बेडकर |
| 9 | बहिष्कृत एवं आंशिक रूप से बहिष्कृत क्षेत्र उप-समिति | ए. वी. ठक्कर |
| 10 | वित्त एवं कर्मचारी समिति | राजेन्द्र प्रसाद |
| 11 | मौलिक अधिकार उप-समिति | जे. बी. कृपलानी |
| 12 | गृह (हाउस) समिति | बी. पट्टाभि सीतारमैया |
| 13 | अल्पसंख्यक उप-समिति | एच. सी. मुखर्जी |
| 14 | उत्तर-पूर्व सीमांत जनजातीय क्षेत्र एवं असम, बहिष्कृत एवं आंशिक रूप से बहिष्कृत क्षेत्रों की उप-समिति | गोपीनाथ बोरदोलोई |
| 15 | कार्यसूची (ऑर्डर ऑफ बिज़नेस) समिति | के. एम. मुंशी |
| 16 | राज्यों पर समिति | जवाहरलाल नेहरू |
| 17 | संचालन (स्टीयरिंग) समिति | राजेन्द्र प्रसाद |
| 18 | संघीय संविधान समिति | जवाहरलाल नेहरू |
| 19 | संघीय शक्तियाँ समिति | जवाहरलाल नेहरू |
प्रश्न 68. ‘केंचुए‘ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- केंचुए मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाते हैं और किसानों के मित्र के रुप में जाने जाते हैं।
- केंचुए में दो जोड़ी हृदय होते हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (b)
व्याख्या:
कथन 1 – सही: केंचुओं को “किसान का मित्र” इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे मिट्टी की उर्वरता में सुधार करते हैं। उनके द्वारा छोड़े गए पोषक तत्वों से भरपूर मल (कास्टिंग) मिट्टी को स्वाभाविक रूप से उर्वर बनाता है। वे अपने बिल बनाकर मिट्टी में हवा और पानी के प्रवाह को बढ़ाते हैं, जिससे मिट्टी का दाब कम होता है और जड़ों की वृद्धि आसान होती है। केंचुए मृत पत्तियों और जैविक अपशिष्ट को खाकर उसे सूक्ष्म कणों में बदलते हैं, जिससे आवश्यक पोषक तत्व मिट्टी में पुनः लौट आते हैं और अपघटन की प्रक्रिया तेज होती है। उनकी निरंतर गतिविधि मिट्टी को भुरभुरा बनाकर उसकी संरचना सुधारती है तथा जल धारण क्षमता बढ़ाती है। साथ ही, केंचुए मिट्टी के pH को संतुलित करने में भी सहायक होते हैं, जिससे फसलों के लिए अनुकूल वातावरण बनता है। यही सभी कारण केंचुओं को मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने वाला और कृषि के लिए अत्यंत उपयोगी जीव बनाते हैं।
कथन 2 – गलत: केंचुए का रक्त परिसंचरण तंत्र पूर्णतः बंद प्रकार का होता है, जिसमें रक्त हमेशा नलिकाओं के भीतर ही बहता है। रक्त परिवहन के लिए तीन मुख्य नलिकाएँ होती हैं—महाधमनी चाप, पृष्ठीय रक्त वाहिका और उदरीय रक्त वाहिका। केंचुए में पाँच जोड़ी (कुल दस) महाधमनी चाप होती हैं, जो साधारण हृदय की भाँति संकुचन–विस्फारण के द्वारा रक्त को आगे-पीछे की रक्त वाहिकाओं में भेजती हैं। पृष्ठीय रक्त वाहिका शरीर के पीछे वाले भाग से रक्त लेकर आगे की ओर पहुँचाती है, जबकि उदरीय रक्त वाहिका रक्त को आगे से पीछे की ओर पहुँचाती है।
प्रश्न 69. ‘अटल सुरंग’ के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- यह सुरंग विश्व की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग है।
- यह सुरंग हिमालय की पीर पंजाल श्रृंखला में बनाई गई है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (c)
व्याख्या:
कथन 1 गलत है: अटल सुरंग (9.02 किमी) विश्व की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग नहीं है, परंतु 10,000 फीट से अधिक ऊँचाई पर स्थित सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग होने का विशिष्ट गौरव रखती है। इसके विपरीत, दुनिया की सबसे लंबी सड़क सुरंग का रिकॉर्ड नॉर्वे की लार्डल सुरंग के नाम है, जिसकी कुल लंबाई 24.5 किलोमीटर है। यह सुरंग ऑरलैंड और लार्डल को जोड़ती है तथा ओस्लो–बर्गेन मार्ग पर स्थित एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है।
कथन 2 सही है: अटल सुरंग हिमालय की पीर पंजाल पर्वत श्रेणी में रोहतांग दर्रे के नीचे निर्मित एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जो मनाली को लाहौल–स्पीति से पूरे वर्ष निर्बाध रूप से जोड़ता है। यह सुरंग उस रोहतांग दर्रे का विकल्प प्रदान करती है, जो प्रायः भारी हिमपात के कारण कई माह बंद रहता था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में इसका नामकरण किया गया। रणनीतिक दृष्टि से यह सुरंग अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों तक सेना की पहुँच तेज़ और सुगम हुई है। साथ ही यह क्षेत्रीय पर्यटन, परिवहन और आर्थिक विकास को उल्लेखनीय बढ़ावा देती है, जिससे लाहौल–स्पीति जैसे दुर्गम क्षेत्रों का मुख्यधारा से बेहतर संपर्क स्थापित हो सका है।
प्रश्न 70.सिन्धु घाटी सभ्यता से सम्बन्धित निम्नलिखित पुरातात्विक स्थलों में से कौन आज के उत्तर प्रदेश में स्थित हैं?
- मंडी
- राखीगढ़ी
- हुलास
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 1 और 3
उत्तर: (d) 1 और 3
व्याख्या:
सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) का विस्तार मुख्यतः वर्तमान पाकिस्तान और पश्चिमी भारत तक सीमित था, किन्तु इसके कुछ पूर्ववर्ती स्थल उत्तर प्रदेश में भी पाए गए हैं, जो इसके सबसे पूर्वी विस्तार का प्रतिनिधित्व करते हैं। उत्तर प्रदेश में मंडी (आलमगीरपुर) और हुलास सिंधु सभ्यता के दो प्रमुख स्थल हैं।
मंडी/आलमगीरपुर (मेरठ) एक उत्तर हड़प्पा बस्ती है, जहाँ से टेराकोटा वस्तुएँ, मनके, ताँबे के औज़ार और हड़प्पा शैली की कुम्हारी प्राप्त हुई है, जो सभ्यता के व्यापार, शिल्प और सांस्कृतिक प्रभाव को पूर्व की ओर बढ़ने का संकेत देती है।
हुलास (सहारनपुर) से मिट्टी के बर्तन, मनके और ईंट संरचनाओं जैसे अवशेष मिले हैं, जो उत्तर हड़प्पा काल की बस्ती और स्थानीय–हड़प्पा संस्कृति के संपर्क को दर्शाते हैं। ये दोनों स्थल दर्शाते हैं कि हड़प्पाई संस्कृति का प्रभाव गंगा–यमुना क्षेत्र तक पहुँचा था।
इसके विपरीत, राखीगढ़ी हरियाणा में स्थित है ना कि उत्तर प्रदेश में।
प्रश्न 71. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
सूची – I (पद्मविभूषण क्षेत्र 2025) सूची – II ( विजेता 2025)
- व्यापार और उद्योग 1. श्री लक्ष्मीनारायण सुब्रमण्यम
- साहित्य और शिक्षा 2. श्री ओसामु सुजुकी
- दवा 3. श्री एम. टी. वासुदेवन नायर
- कला 4. श्री डी. नागेश्वर रेड्डी
कूट:
A B C D
(a) 2 3 4 1
(b) 3 2 4 1
(c) 3 2 1 4
(d) 2 3 1 4
उत्तर: (a)
व्याख्या:
पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से हैं, जिन्हें तीन श्रेणियों—पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री—में प्रदान किया जाता है। ये सम्मान कला, सामाजिक सेवा, जन-कार्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उद्योग, चिकित्सा, साहित्य-शिक्षा, खेल, सिविल सेवा आदि विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिए जाते हैं।
इनमें पद्म विभूषण असाधारण एवं उच्चतम विशिष्ट सेवा के लिए, पद्म भूषण उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए तथा पद्म श्री किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा हेतु प्रदान किया जाता है। इन पुरस्कारों की घोषणा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस पर की जाती है और राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति भवन में आयोजित औपचारिक समारोह में प्रदान किए जाते हैं।
वर्ष 2025 के लिए राष्ट्रपति द्वारा कुल 139 पद्म पुरस्कारों को मंजूरी दी गई है, जिसमें 1 युगल पुरस्कार (जिसे एक माना गया है) भी शामिल है। इन पुरस्कारों में 7 पद्म विभूषण, 19 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री सम्मिलित हैं। सूची में 23 महिलाएँ, 10 विदेशी/एनआरआई/पीआईओ/ओसीआई श्रेणी के व्यक्ति तथा 13 मरणोपरांत पुरस्कार भी शामिल हैं।
पद्म विभूषण पुरस्कार के प्राप्तकर्ता:
| क्रम संख्या | नाम | क्षेत्र / योगदान का क्षेत्र | राज्य / देश | संक्षिप्त विवरण / उल्लेखनीय योगदान |
| 1 | श्री दुव्वुर नागेश्वर रेड्डी | चिकित्सा (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी) | तेलंगाना | विश्वप्रसिद्ध गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट; एंडोस्कोपी तकनीकों में महत्वपूर्ण योगदान, कई अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पुरस्कारों से सम्मानित। |
| 2 | न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री जगदीश सिंह खेहर | सार्वजनिक क्षेत्र / न्यायपालिका | चंडीगढ़ | भारत के 44वें मुख्य न्यायाधीश; संविधान एवं न्याय सुधारों पर कई महत्वपूर्ण निर्णयों और जनहित मामलों में उल्लेखनीय भूमिका। |
| 3 | श्रीमती कुमुदिनी रजनीकांत लाखिया | कला (नृत्य – कथक) | गुजरात | कथक नृत्य की अग्रणी नृत्यांगना एवं कोरियोग्राफर; कथक के नवाचार, संरक्षण और प्रचार में बड़ा योगदान। |
| 4 | श्री लक्ष्मीनारायण सुब्रमण्यम | कला (संगीत – वायलिन) | कर्नाटक | प्रसिद्ध वायलिन वादक; भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका। |
| 5 | श्री एम. टी. वासुदेवन नायर (मरणोपरांत) | साहित्य एवं शिक्षा | केरल | मलयालम साहित्य के प्रमुख लेखक; उपन्यास, पटकथा और कहानी लेखन में असाधारण योगदान; ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित। |
| 6 | श्री ओसामु सुजुकी (मरणोपरांत) | व्यापार एवं उद्योग | जापान | सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के पूर्व प्रमुख; भारत में मारुति–सुजुकी साझेदारी के माध्यम से औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन में बड़ा योगदान। |
| 7 | श्रीमती शारदा सिन्हा (मरणोपरांत) | कला (लोक संगीत) | बिहार | मैथिली और भोजपुरी लोकसंगीत की प्रमुख गायिका; ‘छठ गीतों’ को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में अग्रणी भूमिका। |
प्रश्न 72. निम्नलिखित में से कौन-सी घटनाएं वर्ष 1911 में घटित हुई थी?
- बंगाल का विभाजन रद्द करना
- राजधानी का कलकत्ता से दिल्ली परिवर्तन
- कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग के बीच लखनऊ समझौता
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 2 और 3
उत्तर: (c) 1 और 2
व्याख्या:
1911 भारतीय इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण वर्ष था, जिसमें दो प्रमुख घटनाएँ हुईं-
(1) बंगाल विभाजन का रद्द होना और (2) भारत की राजधानी का कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरण।
- बंगाल विभाजन का रद्द होना (1911):
1905 में लॉर्ड कर्ज़न द्वारा प्रशासनिक सुविधा के नाम पर बंगाल का विभाजन किया गया था, जिसे पूर्वी बंगाल और पश्चिमी बंगाल में बाँटा गया। इस विभाजन ने व्यापक असंतोष पैदा किया और स्वदेशी आंदोलन को तेज़ किया। लगातार जनआंदोलन, बहिष्कार और राजनीतिक दबाव के परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने 1911 में विभाजन को रद्द कर दिया, जिससे बंगाल की एकता पुनः स्थापित हुई।
- राजधानी का दिल्ली स्थानांतरण (1911):
इसी वर्ष दिल्ली दरबार में किंग जॉर्ज पंचम की उपस्थिति में घोषणा की गई कि भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित की जाएगी। दिल्ली का केंद्रीय भौगोलिक स्थान, ऐतिहासिक महत्व (मुगल राजधानी), और सामरिक दृष्टि से उपयुक्तता इस निर्णय के प्रमुख कारण थे। इसके बाद नई दिल्ली के निर्माण का कार्य लुटियंस और हर्बर्ट बेकर को सौंपा गया।
- लखनऊ समझौता (1916):
कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच हुआ यह समझौता 1916 में हुआ था, 1911 में नहीं। इसमें संयुक्त निर्वाचन और मुसलमानों के लिए अलग प्रतिनिधित्व की व्यवस्था पर सहमति बनी।
प्रश्न 73. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
सूची – I (वित्त आयोग) सूची – II (अध्यक्ष)
- ग्यारहवाँ 1. डॉ. सी. रंगराजन
- बारहवीं 2. डॉ. वाई.वी. रेड्डी
- तेरहवां 3. प्रो. ए. एम. खुसरो
- चौदहवाँ 4. डॉ. विजय एल. केलकर
कूट:
A B C D
(a) 2 3 4 1
(b) 1 3 4 2
(c) 3 1 4 2
(d) 3 2 1 4
उत्तर: C
व्याख्या:
| वित्त आयोग | अवधि | अध्यक्ष | मुख्य सिफारिशें / विशेष बिंदु |
| 11वां वित्त आयोग | 2000–2005 | प्रो. ए. एम. खुसरो | • राज्यों को करों में 29.5% हिस्सा देने की सिफारिश।
• पंचायती राज संस्थाओं एवं नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिरता पर जोर। • आपदा प्रबंधन हेतु कैलैमिटी रिलीफ फंड (CRF) को मजबूत करना। |
| 12वां वित्त आयोग | 2005–2010 | डॉ. सी. रंगराजन | • करों में राज्यों का हिस्सा 30.5% करने की सिफारिश।
• ऋण राहत एवं राज्यों के राजकोषीय अनुशासन पर विशेष बल। • FRBM अधिनियम के कार्यान्वयन को मजबूत करना। |
| 13वां वित्त आयोग | 2010–2015 | डॉ. विजय एल. केलकर | • राज्यों को केंद्रीय करों में 32% हिस्सा निर्धारित।
• पर्यावरण, वन संरक्षण और ऊर्जा सुधारों के लिए प्रोत्साहन आधारित अनुदान। • स्थानीय निकायों के लिए अब तक का सबसे बड़ा अनुदान पैकेज। |
| 14वां वित्त आयोग | 2015–2020 | डॉ. वाई. वी. रेड्डी | • राज्यों का हिस्सा बढ़ाकर 42% (अब तक का सर्वोच्च) किया।
• सहकारी संघवाद और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर बल। • केंद्र प्रायोजित योजनाओं के पुनर्गठन की सिफारिश। |
| 15वां वित्त आयोग | 2020–2025 | एन. के. सिंह | • कर-वितरण 41% (जम्मू–कश्मीर के पुनर्गठन के कारण 1% कमी)
• स्वास्थ्य, रक्षा को उच्च प्राथमिकता; स्थानीय निकायों के लिए बड़े अनुदान • जनसांख्यिकी के आधार पर आवंटन मानदंडों में परिवर्तन। |
| 16वां वित्त आयोग | 2026–2031 | डॉ. अरविंद पनगढ़िया | • आयोग कार्यरत
• 2025 में अंतिम रिपोर्ट अपेक्षित • राज्यों के लिए कर-वितरण, GST क्षतिपूर्ति ढांचा, और स्थानीय निकायों के वित्तीय सुदृढ़ीकरण पर सिफारिशें देने की प्रक्रिया जारी। |
प्रश्न 74. निम्नलिखित में से कौन सा/से कार्यक्रम/योजना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को पूरा करने में शामिल नहीं है?
- उल्लास
- दीक्षा
- भारत निर्माण कार्यक्रम
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 1 और 3
उत्तर: (a) केवल 3
व्याख्या:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 का मुख्य उद्देश्य शिक्षा में सुलभता, समानता, गुणवत्ता, वहनीयता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इसी संदर्भ में उल्लास और दीक्षा जैसे कार्यक्रम सीधे शिक्षा-सुधार से जुड़े हैं। उल्लास का लक्ष्य विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कम करना, विद्यालयों में उनकी पुनःभागीदारी बढ़ाना और सीखने के स्तर में सुधार लाना है, जो एनईपी 2020 के आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता लक्ष्य एवं पहुँच और समानता सिद्धांतों से मेल खाता है। दीक्षा प्लेटफ़ॉर्म शिक्षा मंत्रालय की आधिकारिक डिजिटल अवसंरचना है, जो शिक्षक प्रशिक्षण, ई-शैक्षिक सामग्री, और मिश्रित शिक्षण मॉडल को सुदृढ़ करती है; यह एनईपी 2020 के तकनीकी-सक्षम शिक्षा पर जोर का प्रत्यक्ष क्रियान्वयन है। दूसरी ओर, भारत निर्माण कार्यक्रम ग्रामीण अवसंरचना—जैसे सड़क, आवास, सिंचाई, पेयजल और विद्युतीकरण—के विकास पर केंद्रित सरकारी पहल है, जो ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होती है। इसका उद्देश्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है, न कि शिक्षा-सुधार को बढ़ावा देना। अतः उल्लास और दीक्षा दोनों एनईपी 2020 के शिक्षा-केंद्रित उद्देश्यों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं, जबकि भारत निर्माण का शिक्षा नीति से कोई सीधा संबंध नहीं है।
प्रश्न 75. वैश्विक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट निम्नलिखित में से किनके द्वारा जारी की जाती है?
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष
- विश्व आर्थिक मंच
- विश्व बैंक
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 2 और 3
उत्तर: (b)
व्याख्या:
वैश्विक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (जीएफएसआर) अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा जारी एक अर्ध-वार्षिक आकलन है, जिसका उद्देश्य विश्व वित्तीय प्रणाली की स्थिरता, जोखिमों और नीति-संबंधी चुनौतियों का मूल्यांकन करना है। यह रिपोर्ट वैश्विक वित्तीय बाज़ारों की वर्तमान स्थिति, संभावित प्रणालीगत जोखिमों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की वित्तीय संवेदनशीलताओं को रेखांकित करती है। जीएफएसआर न केवल वित्तीय असंतुलनों के निहितार्थों का विश्लेषण करती है, बल्कि केंद्रीय बैंकों व नीति निर्माताओं के लिए उपयुक्त कदम सुझाती है, ताकि वैश्विक वित्तीय स्थिरता को संरक्षित रखा जा सके। इसमें विशिष्ट विषयों—जैसे कॉर्पोरेट ऋण, आवास बाज़ार, पूंजी प्रवाह और साइबर जोखिम—पर विश्लेषणात्मक अध्याय भी शामिल होते हैं।
विश्व आर्थिक मंच जिनेवा में स्थित एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो हर वर्ष वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रतिवेदन प्रकाशित करती है। इस प्रतिवेदन में विभिन्न देशों की आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है। इसमें ढांचागत सुविधाएँ, नवाचार, श्रम बाज़ार, उत्पादकता, संस्थागत गुणवत्ता, तकनीकी तैयारी और बाज़ार दक्षता जैसे अनेक संकेतकों के आधार पर देशों की तुलना की जाती है। इसका उद्देश्य यह आकलन करना है कि कोई देश आर्थिक रूप से कितनी दक्षता, उत्पादकता और स्थायित्व के साथ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकता है।
विश्व बैंक प्रतिवर्ष वैश्विक आर्थिक संभावना प्रतिवेदन प्रकाशित करता है, जिसमें विश्व अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, महँगाई, वित्तीय जोखिम, और विभिन्न क्षेत्रों तथा देशों की भावी आर्थिक दिशा का विश्लेषण किया जाता है। यह प्रतिवेदन वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का मूल्यांकन करता है और नीति-निर्माताओं को संभावित जोखिमों, चुनौतियों और अवसरों के बारे में मार्गदर्शन प्रदान करता है।
प्रश्न 76. स्वेज नहर निम्नलिखित में से किन्हे जोड़ती है?
- अटलांटिक महासागर
- लाल सागर
- भूमध्य सागर
- हिंद महासागर
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 3 और 4
(b) 1 और 2
(c) 1 और 3
(d) 2 और 3
उत्तर: (d) 2 और 3
व्याख्या:
स्वेज़ नहर मिस्र में स्थित विश्व की सबसे महत्वपूर्ण मानवनिर्मित समुद्री जलधाराओं में से एक है, जो भूमध्य सागर को लाल सागर से सीधे जोड़ती है और यूरोप–एशिया के मध्य समुद्री मार्ग को अत्यंत छोटा कर देती है। इसके उत्तरी छोर पर पोर्ट सईद भूमध्य सागर से और दक्षिणी छोर पर पोर्ट स्वेज़ लाल सागर की खाड़ी से जुड़ा हुआ है। इसलिए नहर वास्तव में केवल दो जल–निकायों—भूमध्य सागर और लाल सागर—को जोड़ती है, न कि अटलांटिक या हिंद महासागर को, यद्यपि व्यापारिक जहाज़ आगे बढ़कर इन महासागरों तक पहुँचते हैं। 1869 में निर्मित यह नहर आज भी विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में शामिल है। वैश्विक व्यापार का लगभग 12% हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है, और यह यूरोप तथा एशिया के बीच की दूरी को लगभग 7,000 किलोमीटर तक कम कर देती है क्योंकि जहाज़ों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ़ गुड होप से होकर लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ता।
सही उत्तर: (d) 2 और 3 → लाल सागर और भूमध्य सागर ।
प्रश्न 77. अप्पिको आंदोलन निम्नलिखित में से किन भारतीय राज्यों से संबंधित है/हैं?
- उत्तराखंड
- उत्तर प्रदेश
- केरल
4.कर्नाटक
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 4
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 3 और 4
उत्तर: (a)
व्याख्या:
अप्पिको आंदोलन 1983 में कर्नाटक के उत्तर-कन्नड़ जिले में शुरू हुआ एक जन–आधारित पर्यावरण संरक्षण आंदोलन था, जिसका उद्देश्य वनों की अंधाधुंध कटाई को रोकना और स्थानीय समुदायों के वनाधिकारों की रक्षा करना था। यह आंदोलन पांडुरंग हेगड़े के नेतृत्व में आरंभ हुआ, जो चिपको आंदोलन से प्रेरित थे। 8 सितंबर 1983 को कलसे वन क्षेत्र में ग्रामीणों, पुरुषों, महिलाओं और बच्चों, ने पेड़ों को घेरकर उनके कटाव को रोका, जिससे इसे “अप्पिको चालुवली” (कन्नड़ में ‘गले लगाना’) कहा गया।
1950 के दशक में जहाँ उत्तर कन्नड़ का लगभग 81% क्षेत्र वनाच्छादित था, वहीं औद्योगिक दोहन, कागज–मिलों, बाँध निर्माण और वनों के व्यावसायिक दोहन के कारण 1980 तक यह घटकर 25% से भी कम रह गया। परिणामस्वरूप मिट्टी अपरदन, जलस्रोतों का क्षरण, मसाला–खेती पर संकट और बाँस जैसी जीवनोपयोगी वस्तुओं की कमी ने स्थानीय समुदायों की आजीविका को गंभीर रूप से प्रभावित किया। इसी संकट ने लोगों को संगठित होकर पेड़ों की कटाई के विरुद्ध सामूहिक प्रतिरोध खड़ा करने के लिए प्रेरित किया।
आंदोलन ने “उलिसु–बेलसु–बालसु” (संरक्षण–विकास–सतत उपयोग) के सिद्धांत पर काम किया और वृक्ष–अलिंगन, पदयात्राएँ, लोक–नाट्य, ग्राम सभाएँ, शैक्षिक प्रदर्शनियाँ तथा सामुदायिक वनरोपण जैसी विधियों से व्यापक जनजागरण किया। आंदोलन के प्रभाव से लाखों स्थानीय पौधों का रोपण हुआ, बाँस और औषधीय वनस्पतियों का संरक्षण संभव हुआ तथा 1990 में कर्नाटक सरकार ने पश्चिमी घाट के सदाबहार वनों में हरे पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध लागू किया।
प्रश्न 78. आयरन डोम मिसाइल रक्षा प्रणाली निम्नलिखित में से किस देश की है?
- फ्रांस
- संयुक्त राज्य अमेरिका
- इज़राइल
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन करें:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 2 और 3
उत्तर: (a) केवल 3
व्याख्या:
आयरन डोम इज़रायल द्वारा विकसित एक उन्नत, मोबाइल और हर मौसम में कार्य करने वाली वायु-रक्षा प्रणाली है, जिसका उद्देश्य 70 किमी तक की दूरी से दागे गए कम दूरी के रॉकेट, मोर्टार, तोप के गोले तथा ड्रोन को हवा में ही नष्ट करना है। 2011 में तैनाती के बाद से इस प्रणाली ने 90% से अधिक सफलता दर का दावा किया है। इसकी विशेषता यह है कि यह केवल उन्हीं प्रक्षेपास्त्रों को इंटरसेप्ट करती है जो आबादी वाले क्षेत्रों या महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर गिरने की संभावना रखते हैं, जिससे महंगे अवरोधक मिसाइलों की बचत होती है। इसकी एक बैटरी में तीन प्रमुख घटक होते हैं—खतरे का पता लगाने व ट्रैक करने वाला रडार, नियंत्रण प्रणाली जो लक्ष्य का आकलन कर निर्णय लेती है, और तमीर इंटरसेप्टर मिसाइल वाला प्रक्षेपण तंत्र।
हालाँकि यह अत्यंत प्रभावी है, परंतु भारी संख्या में एक साथ दागे गए रॉकेटों से इसे चुनौती मिल सकती है और यह लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए नहीं बनी है। इन खतरों के लिए इज़रायल डेविड्स स्लिंग, ऐरो-2/3 और लेज़र आधारित आयरन बीम जैसी प्रणालियों का उपयोग करता है। इसे इजरायल के राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स व इज़रायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ ने विकसित किया है तथा भारत और अमेरिका सहित कई देशों ने इसमें गहरी रुचि दिखाई है।
प्रश्न 79. लाइकेन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- लाइकेन प्रदूषण के बहुत अच्छे संकेतक हैं।
- लाइकेन प्रदूषित क्षेत्रों में अच्छी तरह से उगते हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (b)
व्याख्या:
लाइकेन एक एकल जीव नहीं होते, बल्कि एक विशिष्ट एवं स्थायी सहजीवी संघ होते हैं, जिसमें एक कवक (फंगस) और एक या अधिक प्रकाश-संश्लेषी साथी, हरित शैवाल या नीली-हरित जीवाणु (सायनोबैक्टीरिया), सहभागी होते हैं। इस सहजीवन में कवक बाहरी संरचना और संरक्षण प्रदान करता है, जबकि प्रकाश-संश्लेषी साथी (फोटोबायोन्ट) सूर्य के प्रकाश से ऊर्जा प्राप्त कर सरल शर्कराएँ बनाते हैं, जो दोनों जीवों को पोषण देती हैं। इसी सहजीवी तंत्र के कारण लाइकेन अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों, अत्यधिक ठंड, सूखे, ऊष्मा, में भी जीवित रह पाने में सक्षम होते हैं।
कथन 1 सही है – लाइकेन वायु प्रदूषण, विशेषकर सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) तथा अन्य वायुजनित प्रदूषकों के अत्यंत संवेदनशील जैवसूचक माने जाते हैं। इनके वितरण, विविधता और वृद्धि दर में परिवर्तन वैज्ञानिकों को किसी क्षेत्र की वायु गुणवत्ता का आकलन करने में महत्वपूर्ण संकेत देता है।
कथन 2 गलत है – लाइकेन प्रदूषित वातावरण में पनप नहीं सकते। SO₂ जैसे प्रदूषकों के प्रति उनकी अत्यंत संवेदनशीलता के कारण वे केवल स्वच्छ, ताजी हवा वाले, अप्रदूषित क्षेत्रों में ही अच्छी तरह बढ़ते हैं। इसलिए जहाँ लाइकेन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, वह क्षेत्र सामान्यतः कम प्रदूषित माना जाता है।
प्रश्न 80. नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): भारत में संसदीय शासन प्रणाली है।
कारण (R): भारत में कार्यपालिका व्यवस्थापिका के प्रति उत्तरदायी होती है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: (b)
व्याख्या:
भारत का शासन ढांचा ब्रिटेन के वेस्टमिंस्टर मॉडल पर आधारित है, जिसमें कार्यपालिका विधायिका से निकलती है और उसके प्रति उत्तरदायी रहती है। संविधान के अनुच्छेद 74–75 (केंद्र) और 163–164 (राज्य) इसी संसदीय ढांचे को स्थापित करते हैं। प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद वास्तविक कार्यपालिका होते हैं तथा सदन का विश्वास खोने पर पद से हटना पड़ता है। यह संसदीय प्रणाली की मूल पहचान है।
संसदीय शासन का केंद्रीय सिद्धांत यह है कि कार्यपालिका (मंत्रिपरिषद) विधायिका (संसद/विधानसभा) के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव पारित कर पूरी मंत्रिपरिषद को पद से हटा सकती है। प्रश्नकाल, स्थगन प्रस्ताव, शून्यकाल आदि उपकरणों द्वारा भी सरकार को उत्तरदायी ठहराया जाता है। इसलिए कार्यपालिका सदन के विश्वास पर ही निर्भर रहती है।
संसदीय शासन प्रणाली की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यही है कि कार्यपालिका विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है। यदि कार्यपालिका उत्तरदायी न हो, तो संसदीय प्रणाली अस्तित्व में ही नहीं रह सकती। अतः कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
प्रश्न 81. ‘पर्यावरण की वहन क्षमता’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- संसाधन निष्कर्षण की दर संसाधन सृजन की दर से अधिक रहनी चाहिए।
- अपशिष्ट का उत्पादन पर्यावरण की अवशोषण क्षमता के भीतर रहना चाहिए।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (c) केवल 2
व्याख्या:
पर्यावरण की वहन क्षमता वह सीमा है जिसके भीतर कोई पारिस्थितिकी तंत्र किसी जनसंख्या को बिना दीर्घकालिक क्षरण के स्थायी रूप से सहन कर सकता है। यह सीमा तब बनी रहती है जब संसाधनों का उपयोग उनकी प्राकृतिक पुनर्भरण दर के भीतर हो तथा अपशिष्ट का उत्पादन पर्यावरण की अवशोषण क्षमता से अधिक न हो। कथन 1 गलत है क्योंकि वहन क्षमता बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि संसाधन निष्कर्षण की दर, संसाधन सृजन (या पुनर्भरण) की दर से कम या अधिकतम बराबर हो, न कि उससे अधिक। यदि निष्कर्षण पुनर्भरण से अधिक हो जाए तो संसाधन क्षीण होते हैं, पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित होता है और वहन क्षमता घट जाती है।
कथन 2 सही है क्योंकि किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र के स्थायी रूप से कार्य करने के लिए यह आवश्यक है कि उत्पन्न अपशिष्ट पर्यावरण की प्राकृतिक अवशोषण और विघटन क्षमता के भीतर रहे। यदि अपशिष्ट की मात्रा इस सीमा से अधिक हो जाती है, तो प्रदूषण, आवास विनाश, मृदा एवं जल गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, जिससे वहन क्षमता प्रभावित होती है।
प्रश्न 82.सूची-I को सूची II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए ।
| सूची-I (शासक) | सूची-II (राजवंश) |
| A. महेंद्रवर्मन प्रथम | 1. राष्ट्रकूट |
| B. कडुंगोन | 2. पल्लव |
| C. अमोघवर्ष प्रथम | 3. चोल |
| D. राजराज प्रथम | 4. पांड्य
|
कूट:
(a) 2 4 1 3
(b) 4 2 1 3
(c) 2 3 4 1
(d) 2 4 3 1
उत्तर: (a) 2 4 1 3
व्याख्या:
| शासक | राजवंश / समयकाल | मुख्य उपलब्धियाँ | ऐतिहासिक महत्व |
| महेंद्रवर्मन प्रथम | पल्लव राजवंश (लगभग 590–630 ई.) | ● तिरुमलाई, महाबलीपुरम तथा ममंदूर में शैल–गुहा वास्तुकला का विकास।
● प्रसिद्ध ग्रंथ ‘मत्तविलास प्रहसन’ की रचना। ● चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय के आक्रमण का सफल प्रतिरोध। |
पल्लव कला–वास्तुकला के स्वर्णयुग का आरंभ इन्हीं से हुआ। इनका काल पल्लवों के सांस्कृतिक उत्थान का आधार बना। |
| कडुंगोन | पांड्य राजवंश (6वीं शताब्दी ई.) | ● पांड्य शक्ति का पुनरुद्धार; कडुंगोन ने कलभ्र विद्रोह का दमन कर पांड्य सत्ता को पुनः स्थापित किया।
● प्रारम्भिक संगम परंपरा के राजनीतिक पुनर्गठन में योगदान। |
पांड्य पुनर्जागरण का सूत्रपात इन्होने ही किया। इनके बाद मदुरै पुनः शक्ति–केंद्र बना। |
| अमोघवर्ष प्रथम | राष्ट्रकूट राजवंश (815–877 ई.) | ● 64 वर्षों तक शासन—भारतीय इतिहास के दीर्घकालिक शासकों में प्रमुख।
● राजधानी मान्यखेट। ● कन्नड़ काव्य कविराजमार्ग के संरक्षक एवं संभवतः सह-लेखक। ● जैन धर्म के महान संरक्षक। |
राष्ट्रकूट साम्राज्य की स्थिरता, प्रशासनिक सुधार एवं सांस्कृतिक उत्कर्ष के आदर्श प्रतीक। |
| राजराजा प्रथम | चोल राजवंश (985–1014 ई.) | ● चोल साम्राज्य का विस्तार—श्रीलंका, मालदीव, दक्षिण भारत का अधिकांश भाग चोल नियंत्रण में।
● तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर (यूनेस्को विश्व धरोहर) का निर्माण। ● सुव्यवस्थित प्रशासन, भूमि सर्वेक्षण और आय–व्यवस्था का विकास। |
चोल शक्ति के साम्राज्यवादी युग का आरंभ। चोल कला, नौसेना और प्रशासन का स्वर्णयुग। |
प्रश्न 83. सूची-1 को सूची II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
| सूची-I (राज्य) | सूची-II(सबसे ऊँची चोटी) |
| A. तमिलनाडु | 1. धूपगढ़ |
| B. राजस्थान | 2. डोड्डाबेट्टा |
| C. नागालैंड | 3. गुरु शिखर |
| D. मध्य प्रदेश | 4. सारामति |
कूट:
(a) 3 2 4 1
(b) 2 3 4 1
(c) 3 2 1 4
(d) 3 2 1 4
उत्तर: (b) 2 3 4 1
व्याख्या:
| क्रम | राज्य | सबसे ऊँची चोटी | ऊँचाई / पर्वतमाला | संक्षिप्त विवरण |
| A | तमिलनाडु | डोड्डाबेट्टा | 2,637 मीटर (नीलगिरी पर्वतमाला) | तमिलनाडु की सर्वाधिक ऊँची चोटी; ऊटी के पास स्थित; नीलगिरि की प्रमुख स्थलाकृति |
| B | राजस्थान | गुरु शिखर | 1,722 मीटर (अरावली पर्वतमाला) | राजस्थान की सबसे ऊँची चोटी; माउंट आबू में स्थित; अरावली की सर्वोच्च बिंदु |
| C | नागालैंड | सारामती | 3,826 मीटर (पूर्वी हिमालय की शाखा) | नागालैंड की सर्वाधिक ऊँची चोटी; नगालिम–म्यांमार सीमा पर; महत्वपूर्ण जैव विविधता क्षेत्र |
| D | मध्य प्रदेश | धूपगढ़ | 1,350 मीटर (सतपुड़ा पर्वतमाला) | मध्य प्रदेश की सबसे ऊँची चोटी; पचमढ़ी के पास; सतपुड़ा की प्रमुख स्थलाकृति, पर्यटन हेतु प्रसिद्ध |
प्रश्न 84. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): बाबर ने चगताई तुर्की में तुजुक-ए-बाबरी लिखा ।
कारण (R) : तुर्की मुगल दरबार की राजभाषा थी।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
कूट:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: (d) (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है
व्याख्या: अभिकथन (A) सत्य है। बाबर ने अपनी आत्मकथा तुज़ुक-ए-बाबरी (बाबरनामा) अपनी मातृभाषा चगताई तुर्की में ही लिखी। यह भाषा मध्य एशिया की तुर्की–तैमूरी सांस्कृतिक परंपरा की प्रमुख साहित्यिक भाषा थी, और बाबर की निजी अभिव्यक्ति तथा राजनीतिक-सांस्कृतिक विरासत का स्वाभाविक माध्यम भी थी।
कारण (R) असत्य है। मुगल भारत में चगताई तुर्की कभी भी औपचारिक अथवा प्रशासनिक दरबारी भाषा नहीं बनी। भारत में सत्ता स्थापित करने के कुछ ही वर्षों बाद फ़ारसी को दरबारी, राजकीय अभिलेखीय तथा प्रशासनिक भाषा के रूप में अपनाया गया। फ़ारसी की प्रतिष्ठा के कई कारण थे—इसका विकसित साहित्यिक एवं प्रशासनिक परंपरा होना, इस्लामी शासन व्यवस्थाओं में इसका व्यापक प्रयोग, और भारत में पहले से ही फ़ारसीभाषी विद्वानों, लेखकों तथा अधिकारियों (मुंशी, दारोगा, क़ाज़ी आदि) की उपलब्धता।
प्रश्न 85. लाइफस्टाइल फॉर द एनवायरमेंट (लाइफ) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- इसे जून 2022 में लॉन्च किया गया था।
- इसके विचार को मैड्रिड, स्पेन में कॉप 25 में प्रस्तावित किया गया था।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (b) केवल 1
व्याख्या:
लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (LiFE) एक वैश्विक आंदोलन है, जिसका उद्देश्य लोगों को अपनी दैनिक जीवनशैली में सचेत, पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करना है। इसे COP26 (ग्लासगो) में प्रारंभ किया गया, जिसका लक्ष्य “Pro-Planet People” का एक वैश्विक समुदाय बनाना है—ऐसे नागरिक जो धरती की सुरक्षा हेतु छोटे-छोटे, पर प्रभावी कदम सामूहिक रूप से उठाएँ। इसलिए, केवल कथन 1 ही सही है।
सतत जीवनशैली के प्रमुख व्यक्तिगत कदम
- ऊर्जा संरक्षण: एलईडी बल्बों का उपयोग, आवश्यकता न होने पर बिजली बंद करना, 24°C पर एसी चलाना, सौर ऊर्जा अपनाना।
- जल संरक्षण: लीक ठीक करना, जल–सक्षम उपकरणों का उपयोग, बागवानी और घरेलू गतिविधियों में पानी की बचत।
- परिवहन: पैदल चलना, साइकिल उपयोग, सार्वजनिक परिवहन, कारपूल, तथा सीएनजी/इलेक्ट्रिक वाहन अपनाना।
- कचरा प्रबंधन: रिड्यूस-रियूज-रिसाईकल, एकल-उपयोग प्लास्टिक से बचना, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की मरम्मत कर उनका पुनः उपयोग।
- भोजन: भोजन की बर्बादी रोकना, स्थानीय और सतत कृषि उत्पादों को बढ़ावा देना।
- तकनीक: क्लाउड स्टोरेज उपयोग करना, ई–वेस्ट कम करने हेतु उपकरणों की मरम्मत को प्राथमिकता देना।
सामुदायिक सहयोग
- सोशल मीडिया से जागरूकता फैलाना, स्थानीय पर्यावरणीय अभियानों में भाग लेना, पारंपरिक टिकाऊ प्रथाओं को फिर अपनाना।
लाईफ का लक्ष्य उपभोग-प्रधान जीवनशैली को बदलकर सचेत एवं ग्रह-अनुकूल व्यवहार को सामान्य बनाना है, जिससे मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलित सह-अस्तित्व सुनिश्चित हो सके।
प्रश्न 86. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): राष्ट्रीय एकता की अवधारणा में राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं मनोवैज्ञानिक आयाम तथा उनके बीच आंतरिक संबंध सम्मिलित हैं।
कारण (R): राष्ट्रीय एकता परिषद का गठन 1961 में ‘अनेकता में एकता’ के सिद्धांत के आधार पर किया गया।
विकल्प:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: (c) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
व्याख्या:
राष्ट्रीय एकीकरण एक व्यापक और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य देश की विविधताओं के बीच सामंजस्य स्थापित कर नागरिकों में साझा राष्ट्रीय पहचान का विकास करना है। यह केवल भौगोलिक एकता का विचार नहीं, बल्कि राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक स्तर पर एकरूपता का विमर्श है। भारत की बहुभाषी, बहुधर्मी और बहुसांस्कृतिक संरचना में राष्ट्रीय एकता लोकतांत्रिक स्थिरता, सामजिक शांति और समग्र विकास के लिए अनिवार्य आधार बन जाती है।
राजनीतिक एकीकरण के अंतर्गत संविधान की सर्वोच्चता, समान अधिकारों तथा केंद्र–राज्य संबंधों में संतुलन सुनिश्चित किया जाता है। सामाजिक एकीकरण का उद्देश्य जाति, धर्म, भाषा और लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त कर सामाजिक सौहार्द और पारस्परिक सम्मान को बढ़ावा देना है। आर्थिक एकता संसाधनों के समान वितरण, क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और अवसरों की समानता से सुदृढ़ होती है। सांस्कृतिक एकीकरण भारत की विविध परंपराओं और भाषाओं को सम्मान देकर अनेकता में एकता की भावना को मजबूत करता है, जबकि भावनात्मक एकीकरण नागरिकों में राष्ट्र के प्रति गर्व, निष्ठा और एकत्व की भावना विकसित करता है। राष्ट्रीय एकता परिषद की स्थापना 1961 में इसी उद्देश्य से की गई थी। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली यह परिषद सांप्रदायिक तनाव, जातीय हिंसा, उग्रवाद और घृणा-प्रचार जैसी चुनौतियों पर विचार कर सरकार को नीतिगत सुझाव प्रदान करती है।
हालाँकि दोनों कथन सत्य हैं, लेकिन (R) सीधे तौर पर (A) की व्याख्या नहीं करता है।
प्रश्न 87. निम्नलिखित पर विचार कीजिए तथा उन्हें सही कालक्रमानुसार क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
- काम के बदले अनाज कार्यक्रम
- सामुदायिक विकास कार्यक्रम
- स्व रोजगार के लिए ग्रामीण युवाओं के लिए प्रशिक्षण (ट्राइसेम)
- सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 2, 4, 1, 3
(b) 4, 2, 1, 3
(c) 4, 2, 3, 1
(d) 2, 4, 3, 1
उत्तर: (a) 2, 4, 1, 3
व्याख्या:
सामुदायिक विकास कार्यक्रम (1952) ग्रामीण क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास हेतु शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य आत्मनिर्भरता, सामुदायिक भागीदारी और कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य व बुनियादी सुविधाओं का सुधार था। ब्लॉक-स्तरीय ढाँचे द्वारा संचालित इस कार्यक्रम ने ग्रामीण विकास की आधारशिला रखी, यद्यपि संसाधन व कर्मियों की कमी की चुनौतियाँ रहीं।
सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम (1973–74) का उद्देश्य सूखे की समस्या वाले क्षेत्रों में जलसंभर विकास, मृदा–नमी संरक्षण, वनरोपण और आजीविका सुदृढ़ीकरण के माध्यम से पारिस्थितिक संतुलन बहाल करना है। सामुदायिक भागीदारी आधारित इस कार्यक्रम से जल उपलब्धता, कृषि उत्पादन और रोजगार में सुधार दर्ज हुआ।
स्वरोजगार के लिए ग्रामीण युवाओं का प्रशिक्षण (ट्राइसेम) – ग्रामीण गरीब युवाओं को तकनीकी व उद्यमशीलता कौशल देकर स्वरोजगार योग्य बनाने हेतु 1979 में शुरू की गई योजना थी। बाद में इसे अधिक प्रभावी मॉडल, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से प्रतिस्थापित किया गया, जहाँ बैंक संचालित संस्थान युवाओं को निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता और उद्यम स्थापना का मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
काम के बदले अनाज कार्यक्रम – काम के बदले अनाज कार्यक्रम की मूल अवधारणा 1977–78 में शुरू हुई, जिसका उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों को श्रम के बदले अनाज प्रदान करना था। 2004 में इसे पुनः संरचित कर राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम (एनएफपीडब्ल्यू) के रूप में 150 पिछड़े जिलों में लागू किया गया, जो पूर्णतः केंद्र वित्तपोषित था।
अतः, कालानुक्रमिक क्रम 2 → 4 → 1 → 3 है ।
प्रश्न 88. निम्नलिखित में से किसके द्वारा वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट 2024 तैयार की गई?
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- केंद्रीय जल आयोग
- केंद्रीय भूजल बोर्ड
नीचे दिए गए कोड से सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 2 और 3
उत्तर: (a) केवल 3
व्याख्या:
वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट 2024 का निर्माण जल शक्ति मंत्रालय के तहत केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) द्वारा किया गया, जो भारत में भूजल संसाधनों के मूल्यांकन, निगरानी और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार शीर्ष वैज्ञानिक संस्था है। यह रिपोर्ट दिसंबर 2024 में जारी की गई और पूरे देश में फैले 15,259 निगरानी जल-अवस्थान बिंदुओं से एकत्रित भूजल नमूनों के विश्लेषण पर आधारित है। रिपोर्ट का उद्देश्य पेयजल, सिंचाई तथा अन्य उपयोगों के लिए भूजल की गुणवत्ता का आकलन करना है। इसमें विद्युत चालकता, फ्लोराइड, आर्सेनिक, नाइट्रेट तथा भारी धातुओं जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों का अध्ययन किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार भारत में भूजल गुणवत्ता में राज्यों के बीच उल्लेखनीय विविधता पाई गई। जहाँ अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मेघालय और जम्मू-कश्मीर में सभी नमूने BIS मानक के अनुरूप थे, वहीं राजस्थान, हरियाणा और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में रासायनिक संदूषण अधिक पाया गया। परीक्षण किए गए नमूनों में 19.8% में नाइट्रेट, 3.1% में आर्सेनिक और 9.04% में फ्लोराइड की मात्रा स्वीकार्य सीमा से अधिक थी।
प्रश्न 89. ‘ओजोन परत’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- ओजोन परत पृथ्वी की सतह को सूर्य से आने वाली पराबैंगनी विकिरण से बचाती है।
- ओजोन क्षरण को क्लोरोफ्लोरोकार्बन से जोड़ा गया है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (d) 1 और 2 दोनों
व्याख्या:
ओजोन परत पृथ्वी के वायुमंडल के समतापमंडल में लगभग 15 से 35 किमी की ऊँचाई पर स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण संरचना है। इसमें उपस्थित ओजोन (O₃) अणु सूर्य से उत्सर्जित हानिकारक पराबैंगनी विकिरणों (विशेषकर UV-B और UV-C) को अवशोषित कर पृथ्वी पर जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
यदि यह परत अनुपस्थित हो, तो मानवों में त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद एवं प्रतिरक्षा तंत्र के कमजोर पड़ने जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ जाएँगी। साथ ही, पौधों एवं कृषि फसलों की वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा तथा समुद्री पारिस्थितिकी, विशेष रूप से फाइटोप्लैंकटन, गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। इस प्रकार, ओजोन परत पृथ्वी के जीवमंडल के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करती है।
ओजोन क्षरण का मुख्य कारण क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) तथा अन्य ओजोन-क्षयकारी पदार्थ— जैसे हैलॉन, कार्बन टेट्राक्लोराइड, मिथाइल क्लोरोफॉर्म और एचसीएफसी—हैं। समतापमंडल में पहुँचने पर, सूर्य के विकिरणों के प्रभाव से इन रसायनों से मुक्त होने वाले क्लोरीन और ब्रोमीन परमाणु अत्यधिक सक्रिय रूप से ओजोन के साथ अभिक्रिया कर उसे नष्ट करते हैं। एक-एक परमाणु हजारों ओजोन अणुओं को विघटित कर सकता है। अंटार्कटिका के ऊपर प्रतिवर्ष बनने वाला प्रसिद्ध ओजोन छिद्र इसी प्रक्रिया का परिणाम है।
ओजोन परत की रक्षा हेतु वैश्विक स्तर पर किए गए प्रयासों में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) अब तक की सबसे सफल पर्यावरणीय संधियों में से एक है। इसने विश्वभर में ओजोन-क्षयकारी पदार्थों के उपयोग को उल्लेखनीय रूप से कम किया है, जिसके फलस्वरूप ओजोन परत धीरे-धीरे पुनर्प्राप्ति की दिशा में अग्रसर है।
अतः दोनों कथन ओजोन परत के कार्य और खतरे का सही वर्णन करते हैं।
प्रश्न 90. भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार, उत्तर प्रदेश के निम्नलिखित में से किन जिलों में उनके कुल क्षेत्रफल के 20% से अधिक पर वन है?
- बहराइच
- चंदौली
- श्रावस्ती
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 2 और 3
उत्तर: (d) 2 और 3
व्याख्या:
भारत वन स्थिति रिपोर्ट (आईएसएफआर) 2023 के अनुसार , उत्तर प्रदेश के चंदौली (21.63%) और श्रावस्ती (20.95%) जिलों में उनके भौगोलिक क्षेत्र के सापेक्ष 20% से अधिक वन आवरण दर्ज किया गया।
बहराइच में उसके भौगोलिक क्षेत्र के सापेक्ष 10.15 % ही वन क्षेत्र है।
अतः, सही उत्तर (d) चंदौली और श्रावस्ती है ।
भौगोलिक क्षेत्रफल के सापेक्ष वन आवरण (%) शीर्ष पाँच जिले:
| क्रम | जिला | वन आवरण (% भू-क्षेत्र के सापेक्ष) |
| 1 | सोनभद्र | 34.87% |
| 2 | चंदौली | 21.63% |
| 3 | श्रावस्ती | 20.95% |
| 4 | पीलीभीत | 19.26% |
| 5 | मिर्जापुर | 16.73% |
प्रश्न 91. निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिए तथा इन्हें सही कालक्रमानुसार क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
- अंग्रेजों द्वारा अवध का अधिग्रहण
- इल्बर्ट बिल विवाद
- नील विद्रोह
- द्वितीय एंग्लो-अफगान युद्ध
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 3, 1, 2, 4
(b) 1, 3, 2, 4
(c) 1, 3, 4, 2
(d) 3, 1, 4, 2
उत्तर: (c) 1, 3, 4, 2
व्याख्या:
1) अंग्रेजों द्वारा अवध का अधिग्रहण – फरवरी 1856
गवर्नर-जनरल: लॉर्ड डलहौजी
कारण (आधार): अंग्रेज़ सरकार ने कुप्रशासन का बहाना बनाकर नवाब वाजिद अली शाह को सजा देने और शासन बदलने का दावा किया।
प्रक्रिया: अधिग्रहण का औपचारिक निर्णय लिया गया तथा अवध का शासकीय अधिकार ईस्ट इंडिया कंपनी ने ले लिया।
प्रभाव: अवध के राजनैतिक और सामाजिक विनाश ने लोगों में गहरा रोष उत्पन्न किया। यह कदम 1857 के व्यापक विद्रोह के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है।
2) नील (इंडीगो) विद्रोह – 1859–1860
स्थान: प्रारम्भिक स्थल – नदिया ज़िला (बंगाल)। बाद में मुर्शिदाबाद, बीरभूम, बर्दवान, जेसोर आदि क्षेत्रों में फैल गया।
कारण: यूरोपीय प्लान्टरों की ओर से किसानों पर अनुचित दबाव – नील की खेती के लिए चालाकी से किये हुए अनुबंध, ज़बरदस्ती दिये जाने वाले अनुबंध, असमान शर्तें और कृषकों का आर्थिक शोषण।
परिणाम: विद्रोह के बाद समस्याओं की जाँच हेतु सरकार ने नील आयोग मार्च 1860 में गठन किया – जिससे बहुत-सी शोषणपूर्ण प्रथाएँ सामने आईं और किसानों की शिकायतों की वैधानिक पहचान बनी।
3) द्वितीय एंग्लो-अफ़ग़ान युद्ध – 1878–1880
पृष्ठभूमि: ग्रेट गेम के तंतुओं के चलते – ब्रिटिश साम्राज्य और रूसी साम्राज्य के मध्य अफगानिस्तान को भूराजनीतिक प्रभाव-क्षेत्र बनाये रखने का संघर्ष।
शुरुआत: नवंबर 1878 में ब्रिटिश सेना ने अफगान सीमा में प्रवेश किया, इसका कारण था अमीर शेर अली का ब्रिटिश दूतावास के साथ असभ्य व्यवहार।
अवसान: 1879–1880 के संघर्षों के पश्चात् गंडामक की संधि व अन्य समझौतों के माध्यम से अफगानिस्तान की विदेश नीति पर ब्रिटिश प्रभाव स्थापित हुआ; अब अंदरूनी शासन पर नहीं, पर विदेश नीति व सीमा मामलों में अंग्रेज़ों का नियंत्रण बढ़ा। परिणामस्वरूप अब्दुर रहमान खान को अमीर के रूप में स्थापित किया गया और कुछ सीमा-क्षेत्र (जैसे क़्वेट्टा) ब्रितानी भारत को सौंपे गए।
4) इल्बर्ट बिल विवाद – 1883–1884
सार: इल्बर्ट बिल का प्रस्ताव यह था कि उच्च श्रेणी के भारतीय मैजिस्ट्रेट (सिविल/क्रिमिनल) अब ब्रिटिश प्रजा के खिलाफ मुकदमों में भी आरोपी/विवाद का निपटारा कर सकें – यानी भारतीय जजों को ब्रिटिश नागरिकों पर अधिकार देने का प्रयास।
विवाद: यूरोपीय समुदाय और ब्रिटिश अफ़सरों ने इस प्रस्ताव का तीव्र विरोध किया; स्थिति इतनी गर्म हुई कि बिल को समझौते के द्वारा कमजोर कर दिया गया (प्रस्तावित प्रावधानों में संशोधन/रियायतें दीं) ताकि ब्रिटिश-यूरोपीय विरोध को संतुष्ट किया जा सके।
महत्व: यह घटना उपनिवेशी कानून-व्यवस्था और सिविल-अधिकारों के सन्दर्भ में नस्ल-आधारित असमानताओं की बहस को उजागर करती है – भारतीय न्यायाधिकार के प्रति ब्रिटिश अत्यधिक असुरक्षा व यूरोपीय सहवासियों का दबाव स्पष्ट हुआ।
इसलिए, कालक्रमानुसार सही क्रम 1 → 3 → 4 → 2 है ।
प्रश्न 92. उत्तर प्रदेश के निम्नलिखित जिलों में से कौन-सा/से जिले, उत्तर प्रदेश के केवल एक अन्य जिले के साथ अपनी सीमा साझा करते है/हैं?
- ललितपुर
- सहारनपुर
- सोनभद्र
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) सभी 1, 2 और 3
(b) केवल 1
(c) केवल 1 और 2
(d) केवल 2 और 3
उत्तर: (b) केवल 1
व्याख्या:
उत्तर प्रदेश में केवल ललितपुर ऐसा जिला है जो राज्य के भीतर सिर्फ एक ही जिले—झाँसी—से सीमा साझा करता है। ललितपुर तीन दिशाओं से मध्य प्रदेश से घिरा है और उत्तर में एक संकीर्ण गलियारे के माध्यम से ही झाँसी से जुड़ा है। इसके विपरीत, सहारनपुर उत्तर प्रदेश के भीतर मुज़फ्फरनगर और शामली दो जिलों से सीमा साझा करता है और साथ ही हरियाणा, उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश से भी लगता है। सोनभद्र भी उत्तर प्रदेश के भीतर मिर्ज़ापुर और चंदौली दो जिलों से सीमा साझा करता है तथा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार की सीमाओं को भी छूता है।
इसलिए, केवल ललितपुर ही प्रश्नगत शर्त पर खरा उतरता है।
प्रश्न 93. निम्नलिखित में से कौन सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
| (रेलवे मण्डल) | (मुख्यालय) |
| 1. उत्तर रेलवे | नई दिल्ली |
| 2. उत्तर पूर्वी रेलवे | गोरखपुर |
| 3. दक्षिण पूर्वी रेलवे | कटक |
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) केवल 1 और 2
(d) केवल 2 और 3
उत्तर: (c) केवल 1 और 2
व्याख्या:
उत्तर रेलवे – मुख्यालय नई दिल्ली में ।
पूर्वोत्तर रेलवे – मुख्यालय गोरखपुर में ।
दक्षिण पूर्व रेलवे – मुख्यालय कोलकाता (गार्डन रीच) में है, कटक में नहीं।
अतः केवल युग्म 1 और 2 ही सही सुमेलित हैं।
रेलवे जोन तथा उनके मुख्यालय
| क्रम संख्या | क्षेत्र (Zone) | मुख्यालय | अधीन रेल मंडल (Divisions) |
| 1 | मध्य | मुंबई | मुंबई (CST), भुसावल, नागपुर, पुणे |
| 2 | पश्चिम | मुंबई | मुंबई (मध्य), वडोदरा, रतलाम, अहमदाबाद, राजकोट, भावनगर |
| 3 | उत्तर | दिल्ली | अंबाला, दिल्ली, लखनऊ, मोरादाबाद, फिरोजपुर |
| 4 | पूर्व | कोलकाता | आसनसोल, हावड़ा, मालदा, सियालदह |
| 5 | दक्षिण | चेन्नई | चेन्नई, मदुरै, पालघाट, त्रिची, त्रिवेन्द्रम, सलेम |
| 6 | पूर्व मध्य | हाजीपुर | दानापुर, धनबाद, मुगलसराय, समस्तीपुर, सोनपुर |
| 7 | पूर्व तट | भुवनेश्वर | खुर्दा रोड, संबलपुर, वालटायर |
| 8 | उत्तर मध्य | इलाहाबाद | इलाहाबाद, आगरा, झाँसी |
| 9 | पूर्वोत्तर | गोरखपुर | लखनऊ, इज़्ज़तनगर, वाराणसी |
| 10 | पूर्वोत्तर सीमा | गुवाहाटी | कटिहार, अलीपुरदुआर, रंगिया, लुमडिंग, तिनसुकिया |
| 11 | उत्तर पश्चिम | जयपुर | अजमेर, बीकानेर, जयपुर, जोधपुर |
| 12 | दक्षिण मध्य | सिकंदराबाद | हैदराबाद, नांदेड़, सिकंदराबाद |
| 13 | दक्षिण पूर्व मध्य | बिलासपुर | बिलासपुर, नागपुर, रायपुर |
| 14 | दक्षिण पूर्व | कोलकाता (गार्डन रीच) | आद्रा, चक्रधरपुर, खड़गपुर, रांची |
| 15 | दक्षिण पश्चिम | हुबली | बैंगलोर, हुबली, मैसूर |
| 16 | दक्षिण तटीय | विशाखापट्टनम | गुंटकल, गुंटूर, विजयवाड़ा |
| 17 | पश्चिम मध्य | जबलपुर | भोपाल, जबलपुर |
| 18 | कोलकाता मेट्रो | कोलकाता | लागू नहीं |
प्रश्न 94. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): मानव पूँजी में निवेश से भविष्य में लाभ मिलता है।
कारण (R): शिक्षा और स्वास्थ्य लोगों को अधिक उत्पादक बनाते हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: (b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
व्याख्या:
मानव पूँजी का तात्पर्य उन कौशलों, क्षमताओं, ज्ञान, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं दक्षताओं से है जो किसी व्यक्ति की उत्पादकता को बढ़ाती हैं। जब किसी समाज या सरकार द्वारा शिक्षा, प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण, कौशल विकास आदि में निवेश किया जाता है, तो इससे व्यक्तियों की क्षमता बढ़ती है और भविष्य में अधिक आय, बेहतर रोजगार अवसर तथा समग्र आर्थिक विकास के रूप में प्रतिफल मिलता है। इसके अतिरिक्त, अर्थशास्त्र में भी मानव पूँजी को दीर्घकालिक निवेश माना गया है, ठीक उसी तरह जैसे भौतिक पूँजी में निवेश किया जाता है। कई शोधों में यह सिद्ध हुआ है कि मानव पूँजी में निवेश जीडीपी वृद्धि, गरीबी उन्मूलन और सामाजिक गतिशीलता का मुख्य कारक है। इसलिए अभिकथन (A) सही है।
कारण (R) भी सही है क्योंकि शिक्षा और स्वास्थ्य किसी व्यक्ति की उत्पादकता बढ़ाने वाले प्रमुख घटक हैं:
- शिक्षा व्यक्ति के ज्ञान, कौशल, नवाचार क्षमता तथा निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाती है।
- इससे श्रम की गुणवत्ता बढ़ती है।
- तकनीकी कार्यों को बेहतर ढंग से करने की क्षमता विकसित होती है।
- उच्च कौशल के कारण व्यक्ति अधिक आय अर्जित करता है, जिससे निवेश के प्रतिफल स्वतः स्पष्ट होते हैं।
- स्वास्थ्य एक व्यक्ति की कार्य करने की क्षमता और कार्य दिवसों को बढ़ाता है।
- बीमारी की स्थिति में उत्पादकता घटती है, अनुपस्थितियाँ बढ़ती हैं और आय पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
- स्वस्थ व्यक्ति अधिक समय तक और अधिक कुशलता से काम कर सकता है।
इस प्रकार शिक्षा और स्वास्थ्य उत्पादकता में वृद्धि करते हैं, और यही बढ़ी हुई उत्पादकता आगे चलकर उच्च आय, बेहतर नौकरी की संभावना, और आर्थिक प्रगति के रूप में प्रतिफल देती है। इसलिए यह कारण (R) सीधे-सीधे अभिकथन (A) की व्याख्या करता है।
प्रश्न 95. ‘संसद की संयुक्त बैठक’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- भारत के संविधान का अनुच्छेद 109 संसद की संयुक्त बैठक का प्रावधान करता है।
- संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए संसद की संयुक्त बैठक आहूत की जा सकती है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) 1 और 2 दोनों
(d) केवल 2
उत्तर: (a) न तो 1 और न ही 2
व्याख्या:
कथन 1 गलत है, क्योंकि संसद के संयुक्त बैठक का प्रावधान अनुच्छेद 108 में किया गया है, न कि अनुच्छेद 109 में।
अनुच्छेद 108 यह प्रावधान करता है कि यदि किसी सामान्य विधेयक पर दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा, के बीच असहमति हो जाए, या एक सदन विधेयक को अनुचित रूप से विलंबित करे, तो राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुला सकता है।
वहीं अनुच्छेद 109 केवल धन विधेयक से संबंधित प्रावधानों को बताता है और संयुक्त बैठक से इसका कोई संबंध नहीं है।
कथन 2 भी गलत है, क्योंकि संविधान संशोधन विधेयकों के लिए संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है। संविधान संशोधन विधेयक अनुच्छेद 368 के तहत पारित होते हैं, और इन्हें दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित होना आवश्यक है। यदि किसी सदन में विधेयक पारित न हो पाए, तो संयुक्त बैठक नहीं बुलाई जा सकती। संविधान निर्माताओं ने जानबूझकर संविधान संशोधनों को सामान्य विधेयकों से अलग रखा है ताकि संशोधन प्रक्रिया अधिक कठोर और संतुलित बनी रहे।
भारत में संयुक्त बैठक मुख्य रूप से साधारण विधेयकों और कुछ वित्त विधेयकों के लिए होती है, जब दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में गतिरोध हो, लेकिन धन विधेयकों और संविधान संशोधन विधेयकों के लिए इसका प्रावधान नहीं है।
प्रश्न 96. विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना एक साथ की गई और इन्हें लोकप्रिय रूप से ब्रेटन वुड जुड़वाँ कहा जाता है।
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक का मुख्यालय क्रमशः वाशिंगटन डी.सी. और न्यूयॉर्क में स्थित हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (b) केवल 1
व्याख्या:
विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष दोनों की स्थापना वर्ष 1944 में अमेरिका के न्यू हैम्पशायर स्थित ब्रेटन वुड्स नामक स्थान पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सम्मेलन में की गई थी। चूँकि इन दोनों संस्थाओं की उत्पत्ति एक ही सम्मेलन से हुई और दोनों का उद्देश्य विश्व आर्थिक स्थिरता एवं विकास को बढ़ावा देना था, इसलिए इन्हें संयुक्त रूप से “ब्रेटन वुड्स जुड़वाँ” कहा जाता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का उद्देश्य सदस्य देशों की आर्थिक स्थिरता, मुद्रा विनिमय व्यवस्था और भुगतान संतुलन से संबंधित समस्याओं में सहायता करना है। जबकि विश्व बैंक का उद्देश्य दीर्घकालीन विकास, बुनियादी ढाँचा, शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबी-निवारण संबंधी परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। अतः पहला कथन सही है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक का मुख्यालय वॉशिंगटन डी.सी. (अमेरिका) में ही स्थित है, और एक-दूसरे के करीब स्थित होने से वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर सहयोग आसान होता है। अतः दूसरा कथन असत्य है।
प्रश्न 97. -सूची-1 को सूची II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
सूची – I (लोकसभा)
A. 11वीं लोकसभा
B. 12वीं लोकसभा
C. 14वीं लोकसभा
D. 17वीं लोकसभा
सूची – II (लोकसभा अध्यक्ष)
- ओम बिरला
- पी.ए. संगमा
- सोमनाथ चटर्जी
- जी.एम.सी. बालयोगी
कूट:
ABCD
(a) 4 2 3 1
(b) 4 3 2 1
(c) 2 4 3 1
(d) 3 2 4 1
उत्तर: (c) 2 4 3 1
व्याख्या:
सूची-I का सूची-II से सही सुमेलन निम्नलिखित है:
- A → 2 (11वीं लोकसभा → पी.ए. संगमा)
- B → 4 (12वीं लोकसभा → जी.एम.सी. बालयोगी)
- C → 3 (14वीं लोकसभा → सोमनाथ चटर्जी)
- D → 1 (17वीं लोकसभा → ओम बिड़ला)
| क्रम | नाम | कार्यकाल | राजनीतिक दल | विशेष तथ्य |
| 1 | गणेश वासुदेव मावलंकर | 1952–1956 | कांग्रेस | भारत के पहले लोकसभा अध्यक्ष; कार्यकाल के दौरान निधन। |
| एम. ए. अयंगर | 1956–1957 | कांग्रेस | मावलंकर के निधन के बाद अध्यक्ष बने। | |
| 2 | एम. ए. अयंगर | 1957–1962 | कांग्रेस | दो कार्यकाल; संसदीय परंपराओं को मजबूत किया। |
| 3 | हुकुम सिंह | 1962–1967 | कांग्रेस | आपातकाल से पहले के महत्वपूर्ण संसदीय निर्णयों के लिए प्रसिद्ध। |
| 4 | नीलम संजीव रेड्डी | 1967–1969 | कांग्रेस | बाद में भारत के राष्ट्रपति बने; त्यागपत्र दिया। |
| डॉ. गुरुदत्त सिंह ढिल्लो | 1969–1971 | कांग्रेस | राजनीतिक अस्थिरता के दौर में लोकसभा का संचालन। | |
| 5 | डॉ. गुरुदत्त सिंह ढिल्लो | 1971–1975 | कांग्रेस | 1975 में इस्तीफा; आपातकाल से पूर्व का समय। |
| बलीराम भगत | 1976–1977 | कांग्रेस | आपातकाल के दौरान अध्यक्ष; अध्यक्ष बनने वाले एकमात्र बिहारी नेता। | |
| 6 | नीलम संजीव रेड्डी | 1977 | जनता पार्टी | अध्यक्ष पद छोड़कर राष्ट्रपति बने। |
| के. एस. हेगड़े | 1977–1980 | जनता पार्टी | न्यायपालिका से राजनीति में आए; मर्यादित, सुसंस्कृत कार्यकाल। | |
| 7 | डॉ. बलराम जाखड़ | 1980–1985 | कांग्रेस | भारतीय इतिहास में सबसे लंबा कार्यकाल (10 वर्ष)। |
| 8 | डॉ. बलराम जाखड़ | 1985–1989 | कांग्रेस | संसदीय समितियों को सुदृढ़ करने का श्रेय। |
| 9 | रवी राय | 1989–1991 | जनता दल | अल्पमत सरकारों के दौरान सफल संचालन। |
| 10 | शिवराज वी. पटिल | 1991–1996 | कांग्रेस | उल्लेखनीय शांति और अनुशासन के लिए प्रसिद्ध। |
| 11 | पी. ए. संगमा | 1996–1998 | कांग्रेस → बाद में एनसीपी | संसदीय मर्यादाओं के पालन के लिए अत्यधिक सम्मानित। |
| 12 | जी. एम. सी. बालयोगी | 1998–1999 | तेलुगु देशम पार्टी | लोकसभा के सबसे युवा अध्यक्ष (36 वर्ष); हेलीकॉप्टर दुर्घटना में निधन। |
| 13 | जी. एम. सी. बालयोगी | 1999–2002 | TDP | लगातार दो कार्यकाल; निधन के बाद पद रिक्त। |
| मनोहर जोशी | 2002–2004 | शिवसेना | महाराष्ट्र से आने वाले पहले लोकसभा अध्यक्ष। | |
| 14 | सोमनाथ चटर्जी | 2004–2009 | CPI(M) | पार्टी व्हिप न मानकर निष्पक्ष भूमिका निभाई; अत्यंत सम्मानित वक्ता। |
| 15 | मीरा कुमार | 2009–2014 | कांग्रेस | भारत की पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष। |
| 16 | सुमित्रा महाजन | 2014–2019 | भाजपा | लोकसभा की दूसरी महिला अध्यक्ष; सौम्य एवं संयमित संचालन के लिए प्रसिद्ध। |
| 17 | ओम बिड़ला | 19 जून 2019 – 24 जून 2024 | भाजपा | युवा सांसदों की सहभागिता बढ़ाने के लिए प्रयासशील। |
| 18 | ओम बिड़ला | 26 जून 2024 – वर्तमान | भाजपा | लगातार दूसरी बार अध्यक्ष बनने वाले दुर्लभ नेताओं में शामिल। |
प्रश्न 98. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना निम्नलिखित में से किसके अंतर्गत आती है?
- कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय
- ग्रामीण विकास मंत्रालय
- वित्त मंत्रालय
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 2 और 3
उत्तर: (a) केवल 3
व्याख्या:
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, जिसकी शुरुआत 2015 में हुई, का उद्देश्य छोटे, सूक्ष्म और अनौपचारिक क्षेत्र के उद्यमों को बिना जमानत ऋण उपलब्ध कराकर स्वरोज़गार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देना है। वित्त मंत्रालय के अधीन संचालित इस योजना की निगरानी वित्तीय सेवा विभाग करता है, जबकि मुद्रा संस्था बैंकों को पुनर्वित्त प्रदान करती है। योजना के अंतर्गत ऋण तीन श्रेणियों—शिशु (50,000 रुपये तक), किशोर (50,000 से 5 लाख) और तरुण (5 से 10 लाख रुपये)—में दिए जाते हैं, जिनसे छोटे दुकानदार, कुटीर उद्योग, महिला उद्यमी, परिवहन सेवाएँ तथा कृषि-आधारित गैर-कृषि गतिविधियाँ लाभान्वित होती हैं। इसकी प्रमुख विशेषताओं में बिना जमानत ऋण, उचित ब्याज दर, रोजगार सृजन तथा अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ना शामिल है। इस योजना ने करोड़ों लोगों को स्वरोज़गार प्रदान किया, महिलाओं और युवाओं में उद्यमिता को बढ़ावा दिया तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाया, हालांकि प्रशिक्षण की कमी, ऋण स्वीकृति में विलंब और जागरूकता का अभाव जैसी चुनौतियाँ अब भी मौजूद हैं। इसके बावजूद यह योजना देश में वित्तीय समावेशन और रोजगार वृद्धि की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
प्रश्न 99. निम्नलिखित में से कौन दो, बायोगैस के प्रमुख घटक हैं?
- मिथेन
- ब्युृूटेन
- कार्बन डाईऑक्साइड
- कार्बन मोनोऑक्साइड
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 3 और 4
(b) 1 और 2
(c) 1 और 3
(d) 2 और 3
उत्तर: (c) 1 और 3
व्याख्या:
बायोगैस एक नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है, जो जैविक अवशेषों के एनारोबिक अपघटन (ऑक्सीजन रहित वातावरण में सूक्ष्मजीवी क्रिया) से उत्पन्न होती है। इसका प्रमुख घटक मीथेन (CH₄) होता है, जो सामान्यतः कुल गैस मिश्रण का 50–70% होता है और बायोगैस की ज्वलनशीलता तथा ऊर्जा क्षमता का आधार है। इसके अतिरिक्त इसमें 25–45% कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) तथा अल्प मात्रा में हाइड्रोजन (H₂), हाइड्रोजन सल्फाइड (H₂S), नाइट्रोजन (N₂), ऑक्सीजन (O₂), अमोनिया (NH₃) एवं जल वाष्प (H₂O) सम्मिलित होते हैं।
बायोगैस का उपयोग खाना पकाने, बिजली उत्पादन, गर्मी प्रदान करने तथा शुद्धिकरण के बाद बायो-CNG के रूप में किया जा सकता है। इसके साथ प्राप्त होने वाली बायो-स्लरी उच्च गुणवत्ता की जैव-उर्वरक होती है, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है। पर्यावरणीय दृष्टि से बायोगैस ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करती है और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस प्रकार बायोगैस ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सतत ऊर्जा समाधान के रूप में अत्यंत उपयोगी है।
प्रश्न 100. निम्नलिखित में से कौन भारतीय उपन्यासकार और पत्रकार 2026 के अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार की पाँच सदस्यीय जूरी का हिस्सा है/हैं ?
- नताशा ब्राउन
- किरण देसाई
- नीलांजना एस. रॉय
- रजनी चौहान
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 3 और 4
(b) केवल 1
(c) 2 और 3
(d) केवल 3
उत्तर: (d) केवल 3
व्याख्या:
अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार की पाँच सदस्यीय जूरी:
| क्रम | सदस्य का नाम | देश / पृष्ठभूमि | प्रमुख कृतियाँ / उपलब्धियाँ | विशेष तथ्य |
| 1 | नीलांजना एस. रॉय | भारत — उपन्यासकार, स्तंभ लेखिका | द वाइल्डिंग्स (2012), द हण्ड्रेड नेम्स ऑफ डार्कनेस (2013), ब्लैक रिवर (2022), द गर्ल हू एट बुक्स | दो दशकों से साहित्य आलोचना में सक्रिय; अनेक अंतरराष्ट्रीय पत्रों में लेखन; वर्तमान में पुस्तकों पर स्तंभ लिखती हैं; दिल्ली में निवास। |
| 2 | ट्रॉय ओन्यांगो | केन्या — लेखक, संपादक | फॉर व्हाट आर बटरफ्लाइज विदाउट देयर विंग्स (2022) | पैन-अफ्रीकी साहित्य पत्रिका लोल्वे और लोल्वे पुस्तकों के संस्थापक; कैन पुरस्कार के अंतिम चरण में चयन; अनेक साहित्यिक सम्मानों के प्राप्तकर्ता; विधि व साहित्य में उच्च शिक्षा। |
| 3 | सोफी ह्यूजेस | इटली में निवास — स्पेनी–इतालवी साहित्य की अनुवादक | बीस से अधिक उपन्यासों का अनुवाद; 2021 में रानी सोफिया अनुवाद सम्मान | अंतर्राष्ट्रीय बुकर इतिहास में सबसे अधिक बार नामित अनुवादक; पाँच बार प्रारंभिक/अंतिम सूची में चयन; अनेक अंतरराष्ट्रीय पत्रों में लेखन; यूरोपा 28 संकलन की सह-संपादक। |
| 4 | मार्कस ड्यू सॉटॉय | ब्रिटेन — गणितज्ञ, विज्ञान संप्रेषक | गणित व सृजनशीलता पर नौ प्रमुख पुस्तकें; रंगमंच-रचनाएँ आई इज़ अ स्ट्रेंज लूप और द ऐक्सिओम ऑफ चॉइस | ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में साइमनाई प्रोफ़ेसर (जन-सामान्य के लिए विज्ञान की समझ) तथा गणित के प्रोफ़ेसर; 2016 में विज्ञान अकादमी के सदस्य; गणित पर आधारित अनेक टेलीविजन कार्यक्रमों के प्रस्तोता; सममिति पर शोध; 2010 का राजकीय अलंकरण प्राप्त। |
| 5 | नताशा ब्राउन (अध्यक्ष) | ब्रिटेन — उपन्यासकार | असेम्बली (2021), यूनिवर्सैलिटी (2025) | 2026 निर्णायक समिति की अध्यक्ष; पहले उपन्यास को महत्वपूर्ण पुरस्कार; गणित में उच्च शिक्षा; वित्त क्षेत्र में दस वर्ष का अनुभव; 2023 में श्रेष्ठ युवा उपन्यासकारों में चयन; आलोचकों द्वारा सशक्त साहित्यिक आवाज़ के रूप में मान्यता। |
प्रश्न 101. निम्नलिखित में से किसने जलियांवाला बाग हत्याकांड से दुखी होकर वायसराय की कार्यकारिणी परिषद से इस्तीफा दे दिया था ?
- चेट्टूर शंकरन नायर
- ईश्वरी प्रसाद
- मुहम्मद शफी
- इकबाल नारायण गुरटू
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 4
(b) केवल 1
(c) 2 और 3
(d) 3 और 4
उत्तर: (b) केवल 1
व्याख्या:
चेट्टूर शंकरन नायर एक प्रतिष्ठित भारतीय वकील, न्यायविद और राजनीतिज्ञ थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासनकाल में वायसराय की कार्यकारी परिषद में सदस्य के रूप में कार्य किया। 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड में निहत्थे नागरिकों पर हुए भीषण गोलीकांड से व्यथित होकर उन्होंने इस घटना का कड़ा विरोध करते हुए परिषद से इस्तीफा दे दिया। उनका त्यागपत्र औपनिवेशिक दमन के विरुद्ध नैतिक साहस का महत्वपूर्ण उदाहरण बना और यह स्पष्ट किया कि ब्रिटिश प्रशासन में शामिल भारतीय प्रतिनिधि भी अन्यायपूर्ण नीतियों का समर्थन नहीं कर सकते। उनका यह कदम राष्ट्रवादी चेतना को बल प्रदान करने वाला था और इससे भारतीय नेतृत्व में यह संदेश गया कि औपनिवेशिक शासन की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध नैतिक प्रतिरोध भी प्रभावी राजनीतिक प्रतिक्रिया बन सकता है। अन्य सदस्यों—मुहम्मद शफी, ईश्वरी प्रसाद और इकबाल नारायण गुर्टू—ने इस्तीफा नहीं दिया, जिससे नायर का विरोध विशेष रूप से उल्लेखनीय बन गया। उनका रुख उस समय भारतीय उदारवादियों में बढ़ते मोहभंग और स्वतंत्रता आंदोलन की तीव्र होती दिशा का प्रतीक माना जाता है।
| क्रम | विषय / तथ्य | विवरण |
| 1 | स्थापना | 1858 के भारत शासन अधिनियम के बाद वायसराय की सहायता हेतु कार्यकारी परिषद की स्थापना हुई। |
| 2 | उद्देश्य | प्रशासनिक निर्णयों में वायसराय को सलाह देना तथा शासन का संचालन करना। |
| 3 | सदस्यों की प्रकृति | प्रारंभिक काल में सभी सदस्य ब्रिटिश थे; भारतीयों का प्रवेश बाद में हुआ। |
| 5 | वायसराय की स्थिति | परिषद के अध्यक्ष; अंतिम निर्णय लेने का अधिकार वायसराय के पास। |
| 6 | पहली बार भारतीयों का प्रवेश | 1909 के मोर्ले–मिन्टो सुधारों के तहत। |
| 7 | प्रथम भारतीय सदस्य | सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा (1909 में कानून सदस्य)। |
| 8 | परिषद की शक्तियाँ | सीमित विधायी भूमिकाएँ, प्रशासनिक विभागों का संचालन, बजट मामलों में भागीदारी। |
| 9 | विभागीय सदस्य | वित्त, गृह, खाद्य, शिक्षा, रक्षा आदि विभागों का संचालन परिषद सदस्य करते थे। |
| 10 | विधायी भूमिका | 1861 के भारतीय परिषद अधिनियम द्वारा कार्यकारी परिषद को सीमित विधायी अधिकार दिए गए। |
| 11 | युद्धकालीन भूमिका | प्रथम व द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान रक्षा और युद्ध-नीतियों में महत्वपूर्ण भूमिका। |
| 12 | 1919 के सुधार | मॉन्टैग्यू–चेम्सफोर्ड सुधारों से भारतीयों का प्रतिनिधित्व बढ़ा। |
| 13 | 1935 का अधिनियम | संघीय सरकार की योजना के अंतर्गत इसे केंद्र के मंत्रिमंडल जैसा स्वरूप देने का प्रयास। |
| 14 | परिषद का स्वभाव | सलाहकार प्रकृति; वायसराय आवश्यक होने पर परिषद की सलाह को नज़रअंदाज़ कर सकता था। |
| 15 | जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद इस्तीफा | सर चेत्तूर शंकरन नायर ने 1919 के जलियांवाला बाग नरसंहार का विरोध करते हुए कार्यकारी परिषद से इस्तीफा दे दिया। |
| 16 | परिषद का अंत | 1947 में भारत की स्वतंत्रता के साथ वायसराय की कार्यकारी परिषद समाप्त हो गई। |
प्रश्न 102. निम्नलिखित में से कौन सा/से जिले उत्तर प्रदेश में देवी पाटन मंडल का हिस्सा है/हैं?
- बस्ती
- बहराइच
- बलरामपुर
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) केवल 1 और 2
(d) केवल 2 और 3
उत्तर: (d) केवल 2 और 3
व्याख्या:
देवीपाटन मंडल का नाम, तुलसीपुर में स्थित माँ पाटेश्वरी देवी को सम्मान देते हुए देवीपाटन मंडल रखा गया है। यह मंडल उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में स्थित है और चार जनपद—गोण्डा, बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती—इसमें सम्मिलित हैं। देवीपाटन मंडल का मुख्यालय गोण्डा है।
देवीपाटन मंडल भौगोलिक रूप से 81.30° से 82.40° पूर्व देशांतर तथा लगभग 26.48° उत्तरी अक्षांश के मध्य स्थित है। मंडल की उत्तरी सीमा नेपाल से मिलती है, जबकि पश्चिम में लखीमपुर खीरी और सीतापुर, दक्षिण में फैजाबाद (अयोध्या) और बाराबंकी, तथा पूर्व में बस्ती और सिद्धार्थनगर जनपद स्थित हैं। पूरा क्षेत्र अपने विशेष भौगोलिक स्वरूप के कारण तराई क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। मंडल का उत्तरी भाग घने वनों से आच्छादित है। यहाँ बहने वाली प्रमुख नदियाँ—राप्ती, बूढ़ी राप्ती, घाघरा, सरयू, सुआन, कुआनों और भकला—इस क्षेत्र को अत्यंत उपजाऊ और जलसमृद्ध बनाती हैं।
प्रश्न 103. भारत में निम्नलिखित चुनाव सुधारों पर विचार कीजिए तथा इन्हें सबसे पहले से लेकर आखिरी तक के सही कालक्रमानुसार क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
- मतदाता फोटो पहचान पत्र
- इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन
- वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल
- नोटा
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 1, 2, 4, 3
(b) 2, 1, 4, 3
(c) 2, 1, 3, 4
(d) 1, 2, 3, 4
उत्तर: (b) 2, 1, 4, 3
व्याख्या:
इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीन (ईवीएम)
ईवीएम का पहला प्रयोगात्मक उपयोग 19 मई 1982 को केरल के नॉर्थ परवूर क्षेत्र में किया गया। वर्ष 1998 के बाद निर्वाचन आयोग ने इसका व्यापक उपयोग प्रारम्भ किया। वर्ष 2003 के सभी राज्य चुनाव ईवीएम के माध्यम से संपन्न हुए और 2004 के आम चुनावों में आयोग ने केवल ईवीएम के उपयोग का निर्णय लिया। ईवीएम ने मतदान प्रक्रिया को अधिक तेज़, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मतदाता फोटो पहचान पत्र (एपिक)
मतदाता फोटो पहचान पत्र भारत में वर्ष 2003 से अनिवार्य किया गया। इसे निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किया जाता है। बाद के वर्षों में इसका डिजिटल रूप, अर्थात् इलेक्ट्रॉनिक पहचान पत्र भी उपलब्ध कराया गया। इस पहचान पत्र ने मतदाता सत्यापन को सुगम बनाया तथा दोहरे पंजीकरण और मतदान में अनियमितताओं को रोकने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुआ।
नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं)
27 सितंबर 2013 को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद मतदान मशीनों और मतपत्रों पर “उपरोक्त में से कोई नहीं” विकल्प जोड़ा गया। इसका उद्देश्य मतदाता को उपलब्ध प्रत्याशियों को अस्वीकार करने का गोपनीय अधिकार प्रदान करना था। यह पहली बार 2013 के विधानसभा चुनावों में दिखाई दिया और 11 अक्टूबर 2013 से देशभर में लागू हो गया। नोटा लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के अधिकार को सुदृढ़ करता है।
मतदाता पुष्टिकरण कागज़ पर्ची प्रणाली (वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल-वीवीपैट)
वीवीपैट की अवधारणा वर्ष 2010 में सामने आई और 2011 में इसके क्षेत्रीय परीक्षण हुए। निर्वाचन आयोग ने 19 फरवरी 2013 को इसे तकनीकी स्वीकृति प्रदान की। इसका पहला प्रयोग 4 सितंबर 2013 को नागालैंड के नोकसेन विधानसभा उपचुनाव में किया गया। जून 2017 तक इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया।
सर्वोच्च न्यायालय ने बाद के वर्षों में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ाने हेतु वीवीपैट पर्चियों की गणना संबंधी निर्देश भी दिए, जैसे 2019 में प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में चुनिंदा पर्चियों की अनिवार्य गिनती का आदेश।
प्रश्न 104. वैश्विक पर्यावरण सुविधा के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
- इसकी स्थापना 1991 में हुई थी।
- केवल विकसित देश ही इसके दाता (डोनर) हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (b) केवल 1
व्याख्या:
वैश्विक पर्यावरण सुविधा (जीईएफ) की स्थापना 1991 में दुनिया भर में पर्यावरण परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए की गई थी।
यह मुख्य रूप से जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, अंतर्राष्ट्रीय जल, भूमि क्षरण और रसायन प्रबंधन पर केंद्रित है।
जीईएफ वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करते हुए सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए विकासशील देशों में परियोजनाओं को वित्तपोषित करता है।
विकसित और विकासशील दोनों देश इसमें भाग ले सकते हैं, लेकिन विकसित राष्ट्र आमतौर पर प्रमुख दाता होते हैं, जबकि विकासशील राष्ट्र वित्तपोषण के प्राथमिक प्राप्तकर्ता होते हैं।
यह कथन कि केवल विकसित देश ही दाता हैं, आंशिक रूप से सत्य है, लेकिन जीईएफ अन्य देशों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से भी योगदान की अनुमति देता है।
वैश्विक पर्यावरण सुविधा: अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य
|
प्रश्न 105. सूची – I को सूची – II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
सूची – I (सतत विकास लक्ष्य) | सूची – II (लक्ष्य का क्षेत्र)
- लक्ष्य 1 | 1. स्वच्छ जल और स्वच्छता
- लक्ष्य 3 | 2. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
- लक्ष्य 4 | 3. गरीबी के सभी रूपों को खत्म करना
- लक्ष्य 6 | 4. अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण
कूट:
(a) 3 4 2 1
(b) 4 3 2 1
(c) 4 3 1 2
(d) 3 4 1 2
उत्तर: (a) 3 4 2 1
व्याख्या:
लक्ष्य 1 (गरीबी उन्मूलन): इसका उद्देश्य अत्यधिक गरीबी का उन्मूलन करना तथा कमजोर आबादी के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
लक्ष्य 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण): मृत्यु दर को कम करना, बीमारियों से लड़ना और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना।
लक्ष्य 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा): समावेशी एवं समतापूर्ण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा आजीवन सीखने के अवसरों पर ध्यान केंद्रित करता है।
लक्ष्य 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता): सभी के लिए सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता और स्वास्थ्य तक पहुंच सुनिश्चित करना।
सतत विकास लक्ष्य, जिन्हें वैश्विक लक्ष्य भी कहा जाता है, संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2015 में अपनाए गए एक व्यापक वैश्विक एजेंडा का हिस्सा हैं। इनका उद्देश्य 2030 तक गरीबी का उन्मूलन, पृथ्वी की रक्षा, और सभी मनुष्यों के लिए शांति, सम्मान व समृद्धि सुनिश्चित करना है।
| क्रम | सतत विकास लक्ष्य | क्रम | सतत विकास लक्ष्य |
| 1 | गरीबी उन्मूलन | 10 | असमानताओं में कमी |
| 2 | भुखमरी का उन्मूलन | 11 | टिकाऊ शहर और समुदाय |
| 3 | अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण | 12 | जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन |
| 4 | सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा | 13 | जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई |
| 5 | लैंगिक समानता | 14 | जलमंडल में जीवन |
| 6 | स्वच्छ जल और स्वच्छता | 15 | स्थलीय पारिस्थितिकी का संरक्षण |
| 7 | सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा | 16 | शांति, न्याय और सशक्त संस्थाएँ |
| 8 | उचित कार्य और आर्थिक वृद्धि | 17 | लक्ष्यों के लिए वैश्विक साझेदारी |
| 9 | उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढाँचा | — | — |
प्रश्न 106.निम्नलिखित में से किस संगठन द्वारा वैश्विक वेतन रिपोर्ट 2024-25 जारी की गई है?
- अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन
- विश्व बैंक
- अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 2 और 3
उत्तर: (b) केवल 1
व्याख्या:
ग्लोबल वेज रिपोर्ट आईएलओ का एक प्रमुख प्रकाशन है, जो वैश्विक स्तर पर वेतन प्रवृत्तियों, असमानता और श्रम बाजार की गतिशीलता के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
2024-25 की रिपोर्ट वेतन वृद्धि, लिंग वेतन अंतर, न्यूनतम मजदूरी और रोजगार पर आर्थिक झटकों के प्रभाव पर केंद्रित है।
आईएलओ तुलनात्मक मजदूरी, श्रम उत्पादकता और सामाजिक सुरक्षा तंत्र का आकलन करने के लिए कई देशों के आंकड़ों का उपयोग करता है।
यह रिपोर्ट सरकारों, नीति निर्माताओं और श्रमिक संगठनों के लिए उचित वेतन नीतियां तैयार करने हेतु एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में कार्य करती है।
इस रिपोर्ट का प्रकाशन विश्व बैंक या अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक द्वारा नहीं किया जाता। ये संस्थाएँ वैश्विक वित्त, विकास तथा गरीबी उन्मूलन से जुड़े आकलन जारी करती हैं, परंतु वेतन संबंधी वैश्विक विश्लेषण आईएलओ का विशेष क्षेत्र है।
विश्व बैंक एक वैश्विक वित्तीय संस्था है, जिसकी स्थापना 1944 में ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में हुई। यह मुख्यतः विकासशील देशों को आर्थिक विकास, गरीबी उन्मूलन और बुनियादी ढाँचा सुधार हेतु ऋण, अनुदान व तकनीकी सहायता प्रदान करता है। विश्व बैंक दो संस्थाओं—अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (आईबीआरडी) और अंतर्राष्ट्रीय विकास संघ (आईडीए)—से मिलकर बना है।
आईबीआरडी विश्व बैंक समूह का प्रमुख अंग है, जो मध्यम-आय और ऋण-सक्षम देशों को बाज़ार-आधारित दरों पर वित्तीय सहायता देता है। यह बुनियादी ढाँचे, जलवायु परिवर्तन, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता जैसी परियोजनाओं का पोषण करता है।
प्रश्न 107. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
सूची – I (पत्तन) | सूची – II (राज्य)
- पारादीप | 1. तमिलनाडु
- तूतीकोरिन | 2. केरल
- काकीनाडा | 3. ओडिशा
- अलप्पुझा | 4. आंध्र प्रदेश
कूट:
(a) 3 4 2 1
(b) 1 3 4 2
(c) 1 3 2 4
(d) 3 1 2 4
उत्तर: (a) 3 4 2 1
व्याख्या:
भारत की समुद्री शक्ति उसकी 7,500 किमी लंबी तटरेखा, 13 प्रमुख बंदरगाहों और 200 से अधिक गौण बंदरगाहों पर आधारित है, जो देश के 95% विदेशी व्यापार (आयतन) और 70% व्यापार (मूल्य) को संभालते हैं। बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय प्रमुख बंदरगाहों का संचालन करता है, जबकि गैर-प्रमुख बंदरगाह राज्यों के अधीन हैं। निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए रियायत मॉडल अपनाया गया है। 19 जून 2024 को सरकार ने महाराष्ट्र के वधावन में देश का 13वाँ प्रमुख बंदरगाह स्थापित करने को मंजूरी दी, जिसमें जेएनपीए और महाराष्ट्र समुद्री बोर्ड की हिस्सेदारी क्रमशः 74:26 है। मैरिटाइम इंडिया विज़न 2030 के तहत प्रमुख बंदरगाहों की कुल क्षमता बढ़ाकर 2,200 एमएमटीपीए करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे भारत वैश्विक समुद्री व्यापार में अपनी भूमिका और अधिक सुदृढ़ कर सके।
| क्रम | बंदरगाह का नाम | राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | तट | प्रमुख विशेषताएँ / महत्व |
| 1 | दीनदयाल बंदरगाह (कांडला) | गुजरात | पश्चिमी तट | भारत का सबसे बड़ा कार्गो संभालने वाला बंदरगाह; पेट्रोलियम, अनाज, नमक एवं अन्य थोक वस्तुओं का प्रमुख केंद्र |
| 2 | मुंबई पोर्ट ट्रस्ट | महाराष्ट्र | पश्चिमी तट | भारत का सबसे पुराना प्राकृतिक बंदरगाह; पेट्रोलियम, रसायन, कंटेनर और क्रूज़ सेवाओं के लिए प्रसिद्ध |
| 3 | जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (न्हावा शेवा) | महाराष्ट्र | पश्चिमी तट | भारत का सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह; देश के कुल कंटेनर ट्रैफिक का लगभग आधा यहीं से संचालन |
| 4 | मोर्मुगाओ पोर्ट | गोवा | पश्चिमी तट | लौह अयस्क निर्यात का प्रमुख केंद्र; गोवा की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग |
| 5 | न्यू मैंगलोर पोर्ट | कर्नाटक | पश्चिमी तट | कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक, कोयला व आयात-निर्यात का प्रमुख हब |
| 6 | श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट (कोलकाता पोर्ट) | पश्चिम बंगाल | पूर्वी तट | भारत का एकमात्र नदी-आधारित प्रमुख बंदरगाह; हुगली नदी के माध्यम से अंतर्देशीय जल परिवहन |
| 7 | हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स (कोलकाता पोर्ट का हिस्सा) | पश्चिम बंगाल | पूर्वी तट | पेट्रोकेमिकल और रिफाइनरी उत्पादों का प्रमुख निर्यात-आयात केंद्र |
| 8 | कोचीन पोर्ट | केरल | पश्चिमी तट | भारत का प्रमुख मसाला, कोयर, और क्रूज़ पर्यटन हब; अरब सागर हेतु महत्वपूर्ण द्वार |
| 9 | चेन्नई पोर्ट | तमिलनाडु | पूर्वी तट | ऑटोमोबाइल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र; दक्षिण भारत का प्रमुख माल–वाहक बंदरगाह |
| 10 | कामराजार (एन्नोर) पोर्ट | तमिलनाडु | पूर्वी तट | भारत का पहला कंपनी अधिनियम के तहत स्थापित प्रमुख बंदरगाह; कोयला और कंटेनर ढुलाई |
| 11 | पारादीप पोर्ट | ओडिशा | पूर्वी तट | लौह अयस्क, कोयला, पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात–आयात केंद्र; पूर्वी तट का सबसे व्यस्त बंदरगाह |
| 12 | विशाखापत्तनम पोर्ट | आंध्र प्रदेश | पूर्वी तट | दुनिया के गहरे प्राकृतिक बंदरगाहों में से एक; स्टील प्लांटों के लिए लौह अयस्क आपूर्ति |
| 13 | तूतिकोरिन पोर्ट | तमिलनाडु | पूर्वी तट | पर्ल फिशरी, उर्वरक, नमक निर्यात का मुख्य केंद्र; दक्षिण एशिया–पूर्व एशिया व्यापार के लिए रणनीतिक बंदरगाह |
| 14 | वधावन पोर्ट (निर्माणाधीन) | महाराष्ट्र | पश्चिमी तट | 19 जून 2024 को मंजूर; JNPA और महाराष्ट्र समुद्री बोर्ड की 74:26 भागीदारी; गहरे पानी वाला आधुनिक कंटेनर पोर्ट |
- पोर्ट ब्लेयर को 2017 में प्रमुख बंदरगाह की सूची से हटा दिया गया, क्योंकि वहाँ कंटेनर यातायात बहुत कम था।
- भारत के सभी प्रमुख बंदरगाह पूर्वी और पश्चिमी तट पर विभाजित हैं—
- पश्चिमी तट: कांडला, मुंबई, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट, मोर्मुगाओ, न्यू मैंगलोर, कोचीन
- पूर्वी तट: कोलकाता, पारादीप, विशाखापत्तनम, चेन्नई, एन्नोर, तूतिकोरिन
प्रश्न 108. निम्नलिखित में से कौन सी गैस हवा से हल्की है/हैं?
- हाइड्रोजन क्लोराइड
- सल्फर डाइऑक्साइड
- हीलियम
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 2 और 3
उत्तर: (a) केवल 3
व्याख्या:
वायु का घनत्व: मानक ताप एवं दाब पर वायु का घनत्व लगभग 1.225 किलोग्राम प्रति घन मीटर होता है। वायु मुख्यतः नाइट्रोजन (78%), ऑक्सीजन (21%) तथा अल्प मात्रा में आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य गैसों से मिलकर बनती है। वायु का औसत आणविक द्रव्यमान लगभग 29 ग्राम प्रति मोल माना जाता है। सामान्यतः किसी गैस का घनत्व उसके आणविक द्रव्यमान के सीधे अनुपात में होता है, अर्थात जितना अधिक आणविक द्रव्यमान होगा, गैस उतनी ही अधिक सघन होगी।
हीलियम: हीलियम का आणविक द्रव्यमान केवल 4 ग्राम प्रति मोल है, इसलिए यह वायु की तुलना में अत्यंत हल्की गैस है। कम घनत्व के कारण हीलियम में उर्ध्वप्लावन अधिक होता है, जिसके कारण यह ऊपर उठती है। इसे गुब्बारों, वायुयान, अत्यंत निम्न ताप पर होने वाले वैज्ञानिक प्रयोगों तथा गैस रिसाव जाँच में उपयोग किया जाता है। हीलियम निष्क्रिय गैस है, इसलिए ज्वलनशील नहीं होती।
हाइड्रोजन क्लोराइड: हाइड्रोजन क्लोराइड का आणविक द्रव्यमान लगभग 36.5 ग्राम प्रति मोल है, इसलिए यह वायु से अधिक सघन होती है और नीचे की ओर फैलती है। जल वाष्प के संपर्क में आते ही यह तीक्ष्ण अम्ल में परिवर्तित होकर आँख और श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकती है। इसी प्रकार सल्फर डाइऑक्साइड का आणविक द्रव्यमान 64 ग्राम प्रति मोल है, जिसके कारण यह वायु से बहुत अधिक भारी होती है और भूमि के समीप फैलती है। यह गैस भी श्वसन तंत्र पर प्रभाव डालती है तथा इसका अत्यधिक उत्सर्जन अम्लीय वर्षा का प्रमुख कारण बनता है।
सल्फर डाइऑक्साइड: सल्फर डाइऑक्साइड का आणविक द्रव्यमान लगभग 64 ग्राम प्रति मोल होता है, इसलिए यह वायु की तुलना में काफी अधिक सघन होती है और प्रायः भूमि के निकट ही फैलती है। यह गैस आँखों, नाक और श्वसन तंत्र के लिए तीव्र रूप से उत्तेजक होती है तथा संवेदनशील व्यक्तियों में साँस लेने में कठिनाई उत्पन्न कर सकती है। वातावरण में सल्फर डाइऑक्साइड का अत्यधिक उत्सर्जन अम्लीय वर्षा का प्रमुख कारण माना जाता है, क्योंकि यह वायुमंडल में जल वाष्प और अन्य घटकों के साथ क्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल जैसे यौगिक बनाती है।
हवा से हल्की तथा भारी गैसों का व्यवहार: हवा से हल्की गैसें जैसे हीलियम और हाइड्रोजन ऊपर की ओर उठती हैं और इन्हें गुब्बारों, मौसम अध्ययन तथा वायवीय प्रयोगों में उपयोग किया जाता है। इसके विपरीत, हवा से भारी गैसें जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन क्लोराइड जमीन के पास एकत्रित हो जाती हैं, जिससे बंद स्थानों में जोखिम बढ़ जाता है क्योंकि ये गैसें ऑक्सीजन की मात्रा घटा सकती हैं। ऐसे स्थानों पर औद्योगिक सुरक्षा अत्यंत आवश्यक होती है।
प्रश्न 109. पूर्वोत्तर के लिए महिला उद्यमिता कार्यक्रम “स्वावलंबिनी“, निम्नलिखित में से किस मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है?
- कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय
- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 2 और 3
उत्तर: (b)
व्याख्या:
स्वावलंबिनी कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय और नीति आयोग की संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों की छात्राओं में उद्यमिता क्षमता विकसित करना है। इसकी शुरुआत चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से हुई। कार्यक्रम को NIESBUD के माध्यम से चरणबद्ध रूप में लागू किया जाता है, जिसमें उद्यमिता जागरूकता, 40 घंटे का प्रशिक्षण, छह माह की मेंटरशिप और फैकल्टी विकास कार्यक्रम शामिल हैं। इसका लक्ष्य छात्राओं को कौशल, संसाधन, परामर्श और वित्तीय समझ प्रदान करके उन्हें उद्यम स्थापना के योग्य बनाना है। पूर्वी भारत में सफल क्रियान्वयन के बाद अब इसे देशभर में विस्तारित किया जा रहा है। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य प्रशिक्षित छात्राओं में से कम से कम 10% को सफल उद्यमी बनाना और महिला-नेतृत्व वाले विकास को प्रोत्साहित करना है।
प्रश्न 110. निम्नलिखित को उनके शासन के कालक्रमानुसार क्रम में व्यवस्थित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
- बाजीराव Ⅰ
- बालाजी बाजीराव
- बालाजी विश्वनाथ
- माधव राव Ⅰ
कूट:
(a) 3, 1, 4, 2
(b) 1, 3, 4, 2
(c) 1, 3, 2, 4
(d) 3, 1, 2, 4
उत्तर: (d) 3, 1, 2, 4
व्याख्या: पेशवा शब्द का आशय है—सबसे अग्रणी या प्रधान मंत्री। आरंभ में यह पद मात्र सलाहकार और प्रशासनिक प्रमुख तक सीमित था, परंतु समय के साथ इसकी शक्तियाँ बढ़ती गईं और 18वीं शताब्दी में पेशवा मराठा साम्राज्य के वास्तविक शासक रूप में स्थापित हो गए। छत्रपति शिवाजी द्वारा नियुक्त मोरोपंत पिंगले से लेकर 1818 में बाजीराव द्वितीय तक, लगभग 170 वर्षों में पेशवाओं ने मराठा राजनीति, सैन्य अभियानों और राज्य-व्यवस्था को संगठित एवं व्यापक दिशा प्रदान की।
| क्रम | पेशवा / अधिकारी | कार्यकाल | नियुक्तकर्ता / परिस्थितियाँ | प्रमुख कार्य / उपलब्धियाँ | विशेष तथ्य |
| 1 | सोनोपंत दबीर | 1640–1652 | प्रारंभिक काल, अनौपचारिक पेशवा | प्रशासनिक कार्यों का संचालन | प्रथम अनौपचारिक पेशवा |
| 2 | श्यामपंत कुलकर्णी रांजेकर | 1652–1657 | शाहजी भोंसले | शाहजी के अंतर्गत प्रशासन | शाहजी के दरबार में प्रमुख भूमिका |
| 3 | मोरोपंत त्रिंबक पिंगले | 1657–1683 | छत्रपति शिवाजी | शिवाजी द्वारा नियुक्त प्रथम औपचारिक पेशवा | शिवाजी के विश्वसनीय मंत्री |
| 4 | मोरेश्वर पिंगले | 1683–1689 | संभाजी | सैन्य और प्रशासनिक कार्य | संभाजी के काल के महत्वपूर्ण पेशवा |
| 5 | रामचंद्रपंत अमात्य | 1689–1708 | राजाराम | राज्य का संचालन, संकट काल में शासन | ‘अद्यापत्र’ नामक ग्रंथ की रचना; प्रछन्न-राजा की भांति कार्य; ताराबाई के प्रति निष्ठा के कारण बाद में उपेक्षित |
| 6 | बालाजी विश्वनाथ भट्ट | 1713–1719 | शाहू | पेशवा पद को वंशानुगत बनाया; शाही अधिकारों की पुनर्स्थापना; मुगल बादशाह से चौथ-सर्देशमुखी का अधिकार | पेशवा पद के वास्तविक संस्थापक; कान्होजी आंग्रे को अपने पक्ष में किया |
| 7 | बाजीराव प्रथम | 1720–1740 | शाहू | उत्तरी भारत में विस्तार; पालखेड़ और भोपाल में निजाम पर विजय; सालसेट-बसेन पर अधिकार; राजधानी को पुणे स्थानांतरित | अद्वितीय योद्धा; गुरिल्ला युद्धकला में दक्ष; कभी पराजित नहीं हुए |
| 8 | बालाजी बाजीराव (नाना साहेब प्रथम) | 1740–1761 | शाहू द्वारा नियुक्त | मराठा शक्ति चरम पर; मुगल बादशाह की रक्षा हेतु संधि; तृतीय पानीपत युद्ध में पराजय | संगोला समझौता (1750) से पेशवाओं का सर्वोच्च अधिकार |
| 9 | माधवराव प्रथम | 1761–1772 | बालाजी बाजीराव के बाद | पानीपत के बाद मराठा शक्ति का पुनरुत्थान; निजाम, हैदर अली, रोहिल्लों व राजपूतों पर विजय; शाह आलम द्वितीय को दिल्ली के सिंहासन पर पुनः स्थापित | उत्कृष्ट प्रशासक; मराठा साम्राज्य को पुनर्जीवित करने वाले |
| 10 | रघुनाथराव | 1772–1773 | राजनीतिक संघर्ष | सत्ता संघर्ष; नारायण राव की हत्या | प्रथम आंग्ल–मराठा युद्ध का कारण |
| 11 | नारायणराव | 1772–1773 | माधवराव के बाद | अल्पकालीन शासन | रघुनाथराव द्वारा हत्या |
| 12 | रघुनाथराव (द्वितीय प्रयास) | 1773–1774 | बलपूर्वक सत्ता ग्रहण | ब्रिटिश से सहायता अनुबंध | ब्रिटिश हस्तक्षेप का मार्ग प्रशस्त |
| 13 | सवाई माधवराव | 1774–1795 | 40 दिन की आयु में अभिषिक्त | नाना फड़नवीस व बारभाई परिषद द्वारा शासन संचालन; प्रथम आंग्ल–मराठा युद्ध का सफल प्रतिरोध | पुरंधर (1776) व सालबाई संधि (1782); नाना फड़नवीस का स्वर्णकाल |
| 14 | बाजीराव द्वितीय | 1796–1818 | रघुनाथराव का पुत्र | बेसिन की अपमानजनक संधि (1802); तृतीय आंग्ल–मराठा युद्ध में पराजय; पेशवा पद का अंत | अंतिम पेशवा; नाना साहेब (1857) उनके दत्तक पुत्र |
प्रश्न 111. निम्नलिखित भाषाओं में से कौन-सी भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं है/हैं?
- नेपाली
- डोगरी
- बोडो
- भोजपुरी
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:
(a) केवल 4
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 3 और 4
उत्तर: (a)
व्याख्या:
भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची देश की मान्यता प्राप्त भाषाओं को संवैधानिक संरक्षण प्रदान करती है। प्रारंभ में संविधान (1950) में 14 भाषाएँ शामिल थीं, परंतु समय के साथ विभिन्न संशोधनों के माध्यम से भाषाओं की संख्या बढ़ाई गई और आज कुल 22 भाषाएँ इसमें सम्मिलित हैं। यह अनुसूची भारतीय भाषाई विविधता को सम्मान देती है और उनके संवर्धन हेतु सरकारी दायित्व निर्धारित करती है।
आठवीं अनुसूची से जुड़े प्रमुख संवैधानिक संशोधन
मूल संविधान (1950): 14 भाषाएँ
- असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु और उर्दू।
21वाँ संशोधन (1967):
- सिंधी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया।
- यह पहली बार था जब किसी भाषा को संशोधन के माध्यम से जोड़ा गया।
71वाँ संशोधन (1992):
- कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली भाषाओं को जोड़ा गया।
- इस संशोधन ने उत्तर-पूर्व और पश्चिमी तट की भाषाई पहचान को संवैधानिक मान्यता दी।
92वाँ संशोधन (2003):
- बोड़ो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषाओं को शामिल किया गया।
- इसके साथ कुल भाषाओं की संख्या 22 हो गई। परन्तु भोजपुरी इसमें अभी तक शामिल नहीं है।
प्रश्न 112. ‘चांदी की वस्तुओं’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- चांदी की वस्तुएं हवा के संपर्क में आने पर कुछ समय बाद काली हो जाती हैं।
- ऐसा सिल्वर सल्फाइड की कोटिंग के कारण होता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: d
व्याख्या:
चाँदी का काला पड़ना एक प्राकृतिक रासायनिक प्रक्रिया है, जिसका कारण वायु में उपस्थित गंधक यौगिकों (विशेषकर हाइड्रोजन सल्फ़ाइड – H₂S) के साथ होने वाली रासायनिक अभिक्रिया है। चाँदी (Ag) जब इन सल्फ़र यौगिकों के संपर्क में आती है, तो इसकी सतह पर चाँदी के सल्फ़ाइड (Ag₂S) की एक काली परत बन जाती है। यही पदार्थ चाँदी को काला दिखाता है। यह प्रक्रिया टर्निशिंग या धातु का क्षरण कहलाती है।
रासायनिक अभिक्रिया: 2Ag(s)+H2S(g)→Ag2S(s)+H2(g)
जब चाँदी ऐसी हवा में रहती है जिसमें सल्फ़र यौगिक मौजूद हों, विशेषकर नमी, पसीना, रबर, ऊन, प्रदूषण या सड़े हुए कार्बनिक पदार्थों के पास, तो टर्निशिंग तेज़ होती है।
अतः दोनों कथन सही हैं।
प्रश्न 113. ‘दिल्ली सरकार के बायो-डीकंपोजर और स्प्रे कार्यक्रम’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- पराली को खाद में बदलने में मदद के लिए किसानों को बायो-डीकंपोजर घोल मुफ्त में उपलब्ध कराया जाता है।
- बायो-डीकंपोजर घोल कई कवकों का उपयोग करके तैयार किया जाता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (d)
व्याख्या:
दिल्ली सरकार का बायो-डीकंपोजर और स्प्रे कार्यक्रम पराली जलाने की समस्या को वैज्ञानिक तरीके से कम करने हेतु शुरू किया गया एक महत्वपूर्ण नवाचार-आधारित पर्यावरणीय उपाय है। इस योजना के तहत किसानों को बायो-डीकंपोजर घोल बिल्कुल मुफ्त प्रदान किया जाता है ताकि वे धान या गेहूँ की कटाई के बाद बचे ठूंठों (पराली) को जलाने के बजाय प्राकृतिक रूप से खाद में परिवर्तित कर सकें। इससे न केवल खेतों की ऊर्वरता बढ़ती है बल्कि दिल्ली-एनसीआर में शीतकालीन वायु-प्रदूषण में होने वाली तीव्र वृद्धि को भी नियंत्रित किया जा सकता है।
बायो-डीकंपोजर:
- यह घोल इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट (IARI), पूसा द्वारा विकसित तकनीक पर आधारित है।
- इसमें कई प्रकार के कवकों (फंगी) का जैविक मिश्रण होता है, जैसे– ट्राईकोडर्मा, पाइथियम, एस्पर्जिलस आदि।
- ये कवक पौधों के अवशेषों में उपस्थित सेलूलोज़, लिग्निन और अन्य कार्बनिक पदार्थों को तेजी से अपघटित करते हैं।
- सामान्यतः पराली के सड़ने में 2–3 महीने लगते हैं, परंतु बायो-डीकंपोजर से यह प्रक्रिया 15–20 दिनों में पूरी हो जाती है।
कार्यक्रम के लाभ:
- पराली जलाने की आवश्यकता कम होती है, जिससे वायु-प्रदूषण में भारी कमी आती है।
- खेत की मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ (ऑर्गेनिक मैटर) बढ़ता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता और पोषण में सुधार होता है।
- किसानों के लिए लागत शून्य—न तो जुताई का अतिरिक्त खर्च, न प्रदूषण का जुर्माना।
- फसल चक्र के बीच की अवधि कम होती है, जिससे अगली फसल की बुवाई समय पर होती है।
प्रश्न 114. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत के संसद में वित्तीय समिति है/हैं?
- लोक लेखा समिति
- प्राक्कलन समिति
- सार्वजनिक उपक्रम समिति
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) सभी 1, 2 और 3
(b) केवल 1
(c) केवल 1 और 2
(d) केवल 2 और 3
उत्तर: (a)
व्याख्या:
भारत की संसदीय प्रणाली में वित्तीय समितियाँ कार्यपालिका के वित्तीय कार्यों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करती हैं और बजटीय प्रबंधन में पारदर्शिता व उत्तरदायित्व सुनिश्चित करती हैं। संसद की तीन प्रमुख वित्तीय समितियाँ—लोक लेखा समिति (पीएसी), प्राक्कलन समिति, और सार्वजनिक उपक्रम समिति —वित्तीय प्रबंधन की रीढ़ मानी जाती हैं।
लोक लेखा समिति नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्टों की जाँच करती है तथा यह सुनिश्चित करती है कि सार्वजनिक धन नियमों, संसद की अनुमतियों और वित्तीय अनुशासन के अनुरूप व्यय हुआ है। यह समिति वित्तीय अनियमितताओं पर कठोर टिप्पणियाँ प्रस्तुत करती है।
प्राक्कलन समिति विभिन्न मंत्रालयों व विभागों के व्यय के प्राक्कलनों का विश्लेषण कर यह समीक्षा करती है कि सार्वजनिक धन का उपयोग कितना कुशल, आर्थिक एवं उद्देश्यपूर्ण है। यह अनावश्यक व्यय को नियंत्रित करने और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के सुझाव देती है।
सार्वजनिक उपक्रम समिति केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले उपक्रमों के कार्यनिष्पादन, वित्तीय स्थिति, नीतिगत अनुपालन और प्रबंधन की समीक्षा करती है तथा सुधारात्मक सुझाव प्रदान करती है।
इन समितियों के अतिरिक्त, विभागीय संबंधित स्थायी समितियाँ भी अनुदान मांगों और बजटीय प्रावधानों की गहन समीक्षा में सहयोग करती हैं।
प्रश्न 115. निम्नलिखित में से कौन-सा/से देश खाड़ी सहयोग परिषद का हिस्सा नहीं है/हैं?
- बहरीन
- ईरान
- इराक
- कतर
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 3 और 4
(b) केवल 1
(c) 2 और 3
(d) केवल 3
उत्तर: (c)
व्याख्या:
खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी):
- खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) एक क्षेत्रीय राजनीतिक एवं आर्थिक संगठन है, जिसकी स्थापना 25 मई 1981 को अबू धाबी में की गई। इसमें छह खाड़ी देश—बहरीन, कुवैत, ओमान, क़तर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात—सदस्य हैं। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, सैन्य और सांस्कृतिक सहयोग को गहरा करना तथा पश्चिम एशिया में स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देना है। ईरान और इराक इसके सदस्य देशों में शामिल नहीं हैं।
- जीसीसी का गठन ईरानी क्रांति (1979) और क्षेत्रीय अस्थिरता की परिस्थितियों के बीच सामूहिक सुरक्षा और आर्थिक एकीकरण को ध्यान में रखते हुए हुआ। संगठन की सर्वोच्च संस्था उच्च परिषद है, जिसमें सदस्य देशों के प्रमुख शामिल होते हैं। इसके अतिरिक्त मंत्रिपरिषद और सचिवालय भी प्रमुख अंग हैं।
- आर्थिक क्षेत्र में जीसीसी ने सीमा शुल्क संघ, साझा बाजार, और मुद्रा संघ की दिशा में उल्लेखनीय कदम उठाए हैं। जीसीसी देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और श्रम का आवागमन अपेक्षाकृत सरल है। ऊर्जा, पेट्रोलियम निर्यात, परिवहन अवसंरचना और व्यापार नीति में भी सामंजस्य स्थापित किया गया है।
- सुरक्षा सहयोग जीसीसी का महत्वपूर्ण आयाम है। जीसीसी पेनिनसुला शील्ड फोर्स क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए संयुक्त सैन्य ढांचा प्रदान करती है।
- भारत के साथ जीसीसी का आर्थिक संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण है; भारत के कुल व्यापार का बड़ा भाग इन देशों से होता है और लाखों भारतीय प्रवासी इन देशों की अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं।
प्रश्न 116. ‘मानव विकास सूचकांक’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- यू.एन.डी.पी. ने 1990 में अपनी पहली मानव विकास रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें मानव विकास सूचकांक था।
- मानव विकास सूचकांक विकसित करने वाली पहली टीम का नेतृत्व महबूब-उल-हक और एस. प्रीसनर ने किया था।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (b) केवल 1
व्याख्या:
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने वर्ष 1990 में पहली मानव विकास रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें पहली बार मानव विकास सूचकांक प्रस्तुत किया गया। यह सूचकांक विकास की परंपरागत आर्थिक अवधारणा—जैसे केवल प्रति व्यक्ति आय—से आगे बढ़कर मानव जीवन की गुणवत्ता को मापने का एक व्यापक प्रयास था। मानव विकास सूचकांक तीन प्रमुख आयामों पर आधारित है—दीर्घ और स्वस्थ जीवन, शिक्षा के अवसर, और सम्मानजनक जीवन स्तर। इसका उद्देश्य विकास को केवल उत्पादन की वृद्धि नहीं, बल्कि मानव क्षमताओं, अवसरों और जीवन की वास्तविक स्थिति के आधार पर समझना था। इस सूचकांक ने वैश्विक नीति निर्माण और विकास योजनाओं की दिशा बदलने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह कथन कि मानव विकास सूचकांक बनाने वाली पहली टीम का नेतृत्व महबूब-उल-हक और एस. प्रिज़नर ने किया था, तथ्यात्मक रूप से गलत है। वास्तव में, इस सूचकांक की मूल अवधारणा और नेतृत्व महबूब-उल-हक, एक पाकिस्तानी अर्थशास्त्री, ने किया था। उनके साथ भारतीय अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन का गहन बौद्धिक सहयोग था, जिन्होंने मानव क्षमताओं की अवधारणा को विकसित किया और सूचकांक की सैद्धांतिक नींव रखी। अन्य विशेषज्ञों (सर रिचर्ड जॉली, फ्रांसिस स्टुअर्ट, और पॉल स्ट्रीटनर) का सहयोग भी था, परंतु नेतृत्व महबूब-उल-हक का तथा बौद्धिक योगदान अमर्त्य सेन का था।
प्रश्न 117. निम्नलिखित में से कौन सा/से युग्म सही सुमेलित नहीं है/हैं?
- राष्ट्रीय मतदाता दिवस (भारत) – 25 जनवरी
- संविधान दिवस (भारत) – 27 जनवरी
- मानवाधिकार दिवस (विश्व) – 29 जनवरी
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(c) 1 और 2
(b) केवल 1
(d) 2 और 3
उत्तर: (d)
व्याख्या:
राष्ट्रीय मतदाता दिवस (भारत) – 25 जनवरी को मनाया जाता है
संविधान दिवस (भारत) – 27 जनवरी को नहीं, बल्कि 26 नवंबर को मनाया जाता है
मानवाधिकार दिवस (विश्व) – 29 जनवरी को नहीं, बल्कि 10 दिसंबर को मनाया जाता है
अतः जो युग्म सही सुमेलित नहीं हैं वे 2 और 3 हैं ।
लोकतंत्र, संविधान व मानवाधिकार से संबंधित महत्त्वपूर्ण दिवस:
| क्रम | दिवस / घटना | तिथि | वर्ष | महत्त्व / विवरण |
| 1 | राष्ट्रीय मतदाता दिवस | 25 जनवरी | 2011 से | भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना (1950) के उपलक्ष्य में; नए मतदाताओं का पंजीकरण व जागरूकता। |
| 2 | भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना | 25 जनवरी | 1950 | भारतीय लोकतंत्र के लिए मुख्य संवैधानिक संस्था का गठन। |
| 3 | संविधान दिवस | 26 नवंबर | 1949 (स्वीकृति), 2015 से औपचारिक | संविधान अंगीकृत; नागरिकों में संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता। |
| 4 | गणतंत्र दिवस (संविधान लागू) | 26 जनवरी | 1950 | भारतीय गणराज्य की स्थापना, संविधान के लागू होने का दिन। |
| 5 | मानवाधिकार दिवस (विश्व) | 10 दिसंबर | 1948 (घोषणा), 1950 से | मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा के उपलक्ष्य में; वैश्विक मानवाधिकार संरक्षण पर बल। |
| 6 | अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस | 15 सितंबर | 2007 | लोकतांत्रिक सिद्धांतों, सहभागिता, समानता और अधिकारों का प्रसार। |
| 7 | विश्व सामाजिक न्याय दिवस | 20 फरवरी | 2009 | समान अवसर, न्याय एवं सामाजिक असमानता में कमी पर वैश्विक ध्यान। |
| 8 | अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस | 8 मार्च | 1911 से | लैंगिक समानता, अधिकारों और सशक्तिकरण को बढ़ावा। |
| 9 | अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस | 12 अगस्त | 1999 | युवाओं की भूमिका, अवसर और चुनौतियों पर वैश्विक फोकस। |
| 10 | विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस | 3 मई | 1993 | मीडिया की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की सुरक्षा। |
| 11 | अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्मूलन दिवस | 9 दिसंबर | 2003 | भ्रष्टाचार-रोधी जागरूकता और सुशासन को बढ़ावा। |
| 12 | लोकसभा दिवस | 17 अप्रैल | 1952 | प्रथम लोकसभा के गठन की तिथि—लोकतांत्रिक शासन की औपचारिक शुरुआत। |
प्रश्न 118. निम्नलिखित पर विचार करें तथा उन्हें सही कालक्रमानुसार क्रम में व्यवस्थित करें।
- अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन
- जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन
- जल जीवन मिशन
- राष्ट्रीय शहरी आवास और पर्यावास नीति
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 4, 2, 1, 3
(b) 4, 2, 3, 1
(c) 2, 4, 1, 3
(d) 2, 4, 3, 1
उत्तर: (c)
व्याख्या:
भारत में शहरी विकास, आवास और जल आपूर्ति से संबंधित कई महत्त्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम विभिन्न समयों पर शुरू किए गए। इन योजनाओं का उद्देश्य शहरी बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करना, आवास सुविधाओं को बढ़ाना तथा जल एवं स्वच्छता सेवाओं की पहुँच में सुधार करना था। इनकी शुरुआत का सही कालानुक्रमिक क्रम (सबसे पुराना → नवीनतम) इस प्रकार है:
| क्रम | योजना / नीति | प्रारम्भ वर्ष | प्रमुख उद्देश्य | प्रमुख विशेषताएँ / महत्त्व |
| 1 | जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (JNNURM) | 2005 | – शहरी बुनियादी ढाँचे का विकास
– किफायती आवास, पेयजल, ड्रेनेज, स्वच्छता और परिवहन में सुधार – शहरी गरीबी उन्मूलन |
– उस समय का भारत का सबसे बड़ा शहरी सुधार कार्यक्रम
– नगर प्रशासन में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर – शहरों को मिशन मोड में सुधार लागू करने के लिए प्रेरित किया |
| 2 | राष्ट्रीय शहरी आवास एवं पर्यावास नीति | 2007 | – सभी के लिए आवास का लक्ष्य
– शहरी गरीबों, झुग्गी निवासियों एवं बेघर लोगों को सुरक्षित व सस्ते आवास की उपलब्धता |
– आवास क्षेत्र में निजी क्षेत्र, सहकारी संस्थाओं और सरकारी एजेंसियों की सहभागिता को बढ़ावा
– किफायती आवास की दिशा में नीति-आधारित ढाँचे की स्थापना |
| 3 | अटल मिशन फॉर रेजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (AMRUT) | 2015 | – शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति और सीवरेज की सार्वभौमिक पहुँच
– हरित क्षेत्र, पार्क और खुली जगहों का विकास – शहरी परिवहन में सुधार |
– मूलभूत शहरी सेवाओं पर केंद्रित मिशन
– ईज ऑफ लिविंग बढ़ाने पर विशेष ध्यान – शहरों में आधारभूत संरचनात्मक सुधार हेतु फंडिंग आधारित सुधार मॉडल |
| 4 | जल जीवन मिशन (ग्रामीण) | 2019 | – 2024 तक हर ग्रामीण परिवार को नल से जल (टैप कनेक्शन)
– सुरक्षित पेयजल, जल संरक्षण और समुदाय की भागीदारी |
– भारत का सबसे बड़ा जल आपूर्ति कार्यक्रम
– गाँवों में जल सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर – स्रोत स्थिरता, वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण आधारित मॉडल |
Q119. निम्नलिखित में से कौन सा/से युग्म सही सुमेलित नहीं है/हैं?
(दर्रा) (राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश)
- लिपुलेख-लद्दाख
- नाथू ला – सिक्किम
- बोमडिला – अरुणाचल प्रदेश
- शिपकी ला – हिमाचल प्रदेश
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 2, 3 और 4
(b) केवल 1
(c) केवल 1 और 2
(d) केवल 1, 2 और 3
उत्तर: (b) केवल 1
व्याख्या:
लिपुलेख-लद्दाख: लिपुलेख दर्रा उत्तराखंड में भारत-नेपाल-चीन (तिब्बत) सीमा पर है, लद्दाख में नहीं। इसलिए यह युग्म गलत है।
भारत के कुछ महत्वपूर्ण पर्वतीय दर्रे:
| दर्रा | राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | महत्त्व / किसे जोड़ता है |
| नाथू ला | सिक्किम | भारत–तिब्बत व्यापार मार्ग, सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण |
| जेलेप ला | सिक्किम | ऐतिहासिक रेशम मार्ग, सिक्किम–तिब्बत |
| गोएचा ला | सिक्किम | कंचनजंघा क्षेत्र का महत्वपूर्ण दर्रा व ट्रैकिंग मार्ग |
| काराकोरम दर्रा | लद्दाख | देपसांग मैदान–झिंजियांग को जोड़ता है |
| खारदुंग ला | लद्दाख | लेह–नुब्रा घाटी–सियाचिन मार्ग |
| ज़ोजिला दर्रा | लद्दाख/जम्मू-कश्मीर | कश्मीर–लद्दाख को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण दर्रा |
| तांगलांग ला | लद्दाख | मनाली–लेह मार्ग पर स्थित ऊँचा दर्रा |
| सैसर ला | लद्दाख | नुब्रा घाटी से सियाचिन की ओर सामरिक मार्ग |
| सिया ला | लद्दाख | सियाचिन ग्लेशियर पर सामरिक दृष्टि से महत्व |
| उमलिंग ला | लद्दाख | विश्व का सबसे ऊँचा मोटरेबल दर्रा |
| रोहतांग दर्रा | हिमाचल प्रदेश | मनाली–लाहौल स्पीति को जोड़ता है |
| बारा-लाचा ला | हिमाचल–लद्दाख सीमा | मनाली–लेह मार्ग; चंद्रा–भागा नदियों का विभाजन |
| कुनज़ुम ला | हिमाचल प्रदेश् | लाहौल–स्पीति घाटी को जोड़ता है |
| शिपकी ला | हिमाचल प्रदेश | भारत–तिब्बत व्यापार मार्ग; सतलुज नदी भारत में यहीं प्रवेश करती है |
| सेला दर्रा | अरुणाचल प्रदेश | दिरांग–तवांग; सामरिक महत्व |
| बोमडिला/बुम ला | अरुणाचल प्रदेश | भारत–चीन सीमा; 1962 युद्ध से संबंधित |
| पांगसौ दर्रा | अरुणाचल प्रदेश–म्यांमार | स्टिलवेल रोड; द्वितीय विश्व युद्ध कालीन महत्व |
| माना दर्रा | उत्तराखंड | बद्रीनाथ के पास; कैलाश–मानसरोवर मार्ग का निकट संपर्क |
| नीति दर्रा | उत्तराखंड | पुराना भारत–तिब्बत व्यापार मार्ग |
| लिपुलेख दर्रा | उत्तराखंड | कैलाश–मानसरोवर यात्रा का प्रमुख मार्ग |
| पलक्कड़ गैप | केरल–तमिलनाडु | पश्चिमी घाट का प्राकृतिक मार्ग, व्यापार व आवागमन का मुख्य रास्ता |
प्रश्न 120. ‘पारिस्थितिकी तंत्र’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- हरे पौधे, स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी पत्तियों पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी की लगभग 1% ऊर्जा को ग्रहण करते हैं।
- लगभग 10% कार्बनिक पदार्थ उपभोक्ताओं के अगले उच्च स्तर तक पहुँचता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: (d)
व्याख्या:
कथन 1: स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में हरे पौधे अपनी पत्तियों पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी की लगभग 1% ऊर्जा ग्रहण करते हैं। यह सही है। हरी पत्तियों पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी की केवल लगभग 1% ऊर्जा ही वास्तव में प्रकाश संश्लेषण द्वारा ग्रहण की जाती है और रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित होती है। इसे नेट प्राथमिक उत्पादकता कहते हैं। शेष ऊर्जा परावर्तित, संचरित या ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाती है।
कथन 2: लगभग 10% कार्बनिक पदार्थ उपभोक्ताओं के अगले उच्च स्तर तक पहुँचता है। सही: लिंडमैन के 10% नियम, या ऊर्जा स्थानांतरण के 10% नियम के अनुसार, जब ऊर्जा एक पोषी स्तर (जैसे पौधे) से अगले पोषी स्तर (जैसे शाकाहारी) पर स्थानांतरित होती है, तो ऊर्जा का केवल लगभग 10% ही अगले स्तर के जीवों में जमा होता है। शेष ऊर्जा का 90% श्वसन, उपापचयी क्रियाओं और अन्य जैविक कार्यों में उपयोग हो जाता है या ऊष्मा के रूप में समाप्त हो जाता है।
अतः दोनों कथन सही हैं।
प्रश्न 121. प्रोटीन के पाचन के लिए आमाशय में निम्नलिखित में से कौन-सा/से एंजाइम निकलता है?
- काइमोट्रिप्सिन
- ट्रिप्सिन
- पेप्सिन
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) 1, 2 और 3
(c) केवल 1 और 2
(d) केवल 2 और 3
उत्तर: (a)
व्याख्या: प्रोटीन का पाचन आमाशय में शुरू होता है और छोटी आंत में जारी रहता है । प्रोटीन को तोड़ने के लिए ज़िम्मेदार एंजाइम स्राव के स्थान के आधार पर भिन्न होते हैं।
पेप्सिन – आमाशय एंजाइम: यह आमाशय की मुख्य कोशिकाओं द्वारा पेप्सिनोजेन नामक निष्क्रिय रूप में स्रावित होता है । यह आमाशय रस में मौजूद हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) द्वारा सक्रिय होता है। पेप्सिन प्रोटीन को छोटे पेप्टाइड्स में तोड़ देता है ।
ट्रिप्सिन – छोटी आंत का एंजाइम: अग्न्याशय द्वारा ट्रिप्सिनोजेन के रूप में स्रावित और छोटी आंत में एंटरोकाइनेज द्वारा सक्रिय। यह ग्रहणी में कार्य करता है , आमाशय में नहीं।
काइमोट्रिप्सिन – छोटी आंत का एंजाइम: यह भी अग्न्याशय द्वारा काइमोट्रिप्सिनोजेन के रूप में स्रावित होता है और छोटी आंत में ट्रिप्सिन द्वारा सक्रिय होता है ।
मानव पाचन-क्रिया में शामिल प्रमुख एंजाइम:
| एंजाइम | स्रोत (कहाँ बनता है) | स्राव का रूप | सक्रिय कहाँ होता है | किसका पाचन करता है | मुख्य कार्य |
| लार एमाइलेज (प्टायलिन) | लार ग्रंथि | सक्रिय | मुख गुहा | कार्बोहाइड्रेट (स्टार्च) | स्टार्च को माल्टोज़ में बदलना |
| लिंगुअल लाइपेज़ | जीभ की ग्रंथियाँ | सक्रिय | आमाशय (अम्लीय माध्यम में) | वसा | वसा के प्रारंभिक विघटन में सहायक |
| पेप्सिन | आमाशय | पेप्सिनोजेन (निष्क्रिय) | आमाशय (HCl द्वारा) | प्रोटीन | प्रोटीन को पेप्टाइड्स में तोड़ना |
| गैस्ट्रिक लाइपेज़ | आमाशय | सक्रिय | आमाशय | वसा | वसा का सीमित पाचन (अल्प प्रभावी) |
| रेनिन (इन्फ़ैंट्स में) | आमाशय | प्रोरेनिन | आमाशय | दूध का केसिन | दुग्ध प्रोटीन का जमाव (बच्चों में महत्वपूर्ण) |
| ट्रिप्सिन | अग्न्याशय | ट्रिप्सिनोजेन | छोटी आंत (एंटरोकाइनेज द्वारा) | प्रोटीन/पेप्टाइड्स | पेप्टाइड्स को छोटे अमीनो अम्लों में तोड़ना |
| काइमोट्रिप्सिन | अग्न्याशय | काइमोट्रिप्सिनोजेन | छोटी आंत | प्रोटीन | पेप्टाइड्स का गहन विघटन |
| कार्बोक्सीपेप्टिडेज़ | अग्न्याशय | प्रो-कार्बोक्सीपेप्टिडेज़ | छोटी आंत | पेप्टाइड्स | पेप्टाइड श्रृंखला के अंतिम छोर से अमीनो अम्ल हटाना |
| पैनक्रियाटिक एमाइलेज | अग्न्याशय | सक्रिय | छोटी आंत | कार्बोहाइड्रेट | स्टार्च को माल्टोज़ व डेक्स्ट्रिन में बदलना |
| पैनक्रियाटिक लाइपेज़ | अग्न्याशय | सक्रिय | छोटी आंत (पित्त लवण सहायक) | वसा | ट्राइग्लिसराइड्स को फैटी एसिड + ग्लिसरॉल में तोड़ना |
| न्यूक्लीएज़ | अग्न्याशय | सक्रिय | छोटी आंत | डीएनए/आरएनए | न्यूक्लियोटाइड्स में विघटन |
| माल्टेज़ | आंत्र श्लेष्मिक झिल्ली | सक्रिय | छोटी आंत | माल्टोज़ | माल्टोज़ → ग्लूकोज़ |
| लैक्टेज़ | आंत्र श्लेष्मिक झिल्ली | सक्रिय | छोटी आंत | लैक्टोज़ | लैक्टोज़ → ग्लूकोज़ + गैलेक्टोज़ |
| सुकेरेज़ (इन्वर्टेज़) | छोटी आंत | सक्रिय | छोटी आंत | सुक्रोज़ | सुक्रोज़ → ग्लूकोज़ + फ्रक्टोज़ |
| डायपेप्टिडेज़ | छोटी आंत | सक्रिय | छोटी आंत | डायपेप्टाइड्स | अमीनो अम्लों में तोड़ना |
| अमीनोपेप्टिडेज़ | छोटी आंत | सक्रिय | छोटी आंत | पेप्टाइड्स | पेप्टाइड्स के अमीनो छोर से अमीनो अम्ल हटाना |
| एंटरोकाइनेज (एंटरोपेप्टिडेज़) | छोटी आंत | सक्रिय | छोटी आंत | ट्रिप्सिनोजेन | उसे ट्रिप्सिन में सक्रिय करना |
| लाइपेज़ (ब्रश बॉर्डर) | आंत्र कोशिकाएँ | सक्रिय | छोटी आंत | वसा | वसा का अंतिम पाचन |
| न्यूक्लियोटिडेज़/न्यूक्लियोसिडेज़ | छोटी आंत | सक्रिय | छोटी आंत | न्यूक्लियोटाइड्स | नाइट्रोजनी आधार, शर्करा और फॉस्फेट में विघटन |
प्रश्न 122. सूची–Ⅰ को सूची-ⅠⅠ से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
सूची – Ⅰ (लौह अयस्क खदान) सूची – ⅠⅠ (राज्य)
- गुरुमहिसानी 1. झारखंड
- बैलाडीला 2. कर्नाटक
- नोआमुण्डी 3. ओडिशा
- कुद्रेमुख 4. छत्तीसगढ़
कूट:
A B C D
(a) 4 3 1 2
(b) 3 4 1 2
(c) 3 4 1 2
(d) 4 3 1 2
उत्तर: B
व्याख्या:
गुरुमहिसानी – ओडिशा: ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित। यह भारत में विकसित की गई पहली लौह अयस्क खदान थी (1910 में टाटा स्टील द्वारा)। अतः, A → 3।
बैलाडीला – छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित। अपने उच्च श्रेणी के हिमेटाइट लौह अयस्क भंडारों के लिए प्रसिद्ध। अतः, B → 4।
नोवामुंडी – झारखंड: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित। टाटा स्टील द्वारा संचालित एक प्रमुख लौह अयस्क खनन केंद्र। अतः, C → 1।
कुद्रेमुख – कर्नाटक: कर्नाटक के चिक्कमगलुरु जिले में स्थित। अपने मैग्नेटाइट अयस्क के लिए जाना जाता है और पहले कुद्रेमुख आयरन ओर कंपनी लिमिटेड द्वारा संचालित था। अतः, D → 2.
भारत के प्रमुख लौह-अयस्क खदान:
| क्रम | राज्य | मुख्य खदान / क्षेत्र | अयस्क का प्रकार | विशेषताएँ / महत्त्व |
| 1 | ओडिशा | बारबिल–जोड़दा (केंदुझार) | हिमेटाइट | भारत का सबसे बड़ा लौह-अयस्क उत्पादक क्षेत्र |
| 2 | ओडिशा | सुंदरगढ़ | हिमेटाइट | उच्च-गुणवत्ता वाला अयस्क |
| 3 | ओडिशा | मयूरभंज (ग्वालपहाड़, बाड़िपोसी) | हिमेटाइट | विशाल भंडार |
| 4 | ओडिशा | गुरुमहिसानी | हिमेटाइट | भारत की प्राचीनतम व उच्च श्रेणी की लौह-अयस्क खदानों में से एक; तकनीकी विकास का केंद्र |
| 5 | झारखंड | सिंहभूम (चिरिया) | हिमेटाइट | SAIL का प्रमुख अयस्क स्रोत |
| 6 | झारखंड | नोआमुण्डी | हिमेटाइट | टाटा स्टील की सबसे महत्त्वपूर्ण लौह-अयस्क खदान; उच्च-गुणवत्ता वाले अयस्क के लिए प्रसिद्ध |
| 7 | झारखंड | गुआ | हिमेटाइट | ऐतिहासिक व विशाल खनन क्षेत्र |
| 8 | छत्तीसगढ़ | बैलाडीला श्रृंखला (किरंदुल, बचेली) | उच्च-ग्रेड हिमेटाइट | विश्व-स्तरीय लौह-अयस्क, NMDC संचालित; जापान व दक्षिण कोरिया को निर्यात |
| 9 | कर्नाटक | कुद्रेमुख | मैग्नेटाइट | भारत का सबसे बड़ा मैग्नेटाइट भंडार; पूर्व में कुद्रेमुख आयरन ओर कंपनी लिमिटेड (KIOCL) द्वारा संचालित |
| 10 | कर्नाटक | होसपेट–बेल्लारी | हिमेटाइट | दक्षिण भारत का प्रमुख लौह-अयस्क क्षेत्र |
| 11 | कर्नाटक | बाबा-बुदन हिल्स | मैग्नेटाइट | प्राचीन शोध व खनन क्षेत्र |
| 12 | महाराष्ट्र | चंद्रपुर | हिमेटाइट | पूर्वी महाराष्ट्र का प्रमुख खनन क्षेत्र |
| 13 | महाराष्ट्र | गढ़चिरौली (सूरजगढ़) | हिमेटाइट | उच्च गुणवत्ता वाला अयस्क |
| 14 | आंध्र प्रदेश | अनंतपुर–कडप्पा | मैग्नेटाइट | दक्षिण भारत का महत्त्वपूर्ण स्रोत |
| 15 | तमिलनाडु | सेलम–कोडैकिनल क्षेत्र | मैग्नेटाइट | इस्पात उद्योग के लिए महत्त्वपूर्ण |
| 16 | राजस्थान | अलवर–झुंझुनूं | हिमेटाइट | छोटे स्तर पर उत्पादन |
| 17 | गोवा | बिचोलिम, सांगेम, कंबरजूआ | गोएथाइट/निम्न-ग्रेड हिमेटाइट | निर्यात केंद्र; तटीय निकटता |
| 18 | केरल | कोल्लम–अलप्पुझा तटीय रेत | मिश्रित लौह-खनिज | टाइटेनियम युक्त लौह खनिज |
| 19 | उत्तराखंड | नंदा देवी क्षेत्र | मैग्नेटाइट | सीमित परंतु महत्त्वपूर्ण संसाधन |
प्रश्न 123.निम्नलिखित में से कौन-सा/से देश ‘बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (बिम्सटेक)‘ का सदस्य नहीं है ?
- थाईलैंड
- नेपाल
- भूटान
- इंडोनेशिया
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 4
(c) 2 और 3
(b) केवल 1
(d) 1 और 4
उत्तर: (a)
व्याख्या:
बिम्स्टेक (बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल) बंगाल की खाड़ी से जुड़े सात देशों-बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड-का एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन है। इसका उद्देश्य दक्षिण एशिया और दक्षिण–पूर्व एशिया के बीच आर्थिक, तकनीकी, ऊर्जा, परिवहन, सुरक्षा और सांस्कृतिक सहयोग को सशक्त बनाना है। यह समूह साझा समुद्री संसाधनों, भौगोलिक निकटता और ऐतिहासिक संबंधों के आधार पर क्षेत्रीय एकीकरण तथा सामूहिक विकास को प्रोत्साहित करता है।
मुख्य तथ्य
- स्थापना: वर्ष 1997 की बैंकॉक घोषणा; प्रारम्भ में इसका नाम BIST-EC था।
- उद्देश्य: व्यापार, परिवहन, ऊर्जा, कृषि, मत्स्य, स्वास्थ्य, पर्यटन, प्रौद्योगिकी, आपदा प्रबंधन और आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत करना।
- सहयोग व्यवस्था: प्रत्येक सदस्य देश को विशिष्ट क्षेत्र का दायित्व दिया गया है-जैसे भारत को परिवहन, पर्यटन और आपदा प्रबंधन का नेतृत्व।
- महत्त्व: यह समूह दक्षिण और दक्षिण–पूर्व एशिया के बीच एक रणनीतिक सेतु बनकर क्षेत्रीय चुनौतियों-जैसे समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति, जलवायु जोखिम-के सामूहिक समाधान की दिशा में कार्य करता है।
हालिया विकास (2025)
- सार्वजनिक डिजिटल ढाँचे का विस्तार, कैंसर देखभाल को सुदृढ़ करना और मानव संसाधन विकास हेतु बोधि कार्यक्रम जैसी पहलों पर जोर।
- बिम्स्टेक व्यापार मंच की स्थापना तथा वार्षिक व्यापार सम्मेलन की शुरुआत।
- युवा और सांस्कृतिक सहभागिता को बढ़ावा देने हेतु युवा नेतृत्व सम्मेलन, नवाचार प्रतियोगिता, एथलेटिक्स प्रतियोगिता और संगीत समारोह जैसे कार्यक्रम प्रारम्भ।
प्रश्न 124. निम्नलिखित में से कौन-सी जगहें 1816 की सुगौली संधि के तहत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा प्राप्त की गई थीं?
- काठमांडू
- शिमला
- रानीखेत
- नैनीताल
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3 और 4
(c) 1 और 2
(b) केवल 1
(d) 2, 3 और 4
उत्तर: (d)
व्याख्या
सुगौली की संधि (4 मार्च 1816) ब्रिटिश भारतीय शासन और नेपाल के गोरखा शासकों के बीच हुई एक महत्त्वपूर्ण संधि थी, जिसने आंग्ल–नेपाल (गोरखा) युद्ध (1814–16) को समाप्त किया। इस संधि के द्वारा नेपाल को अपने कई क्षेत्रीय दावों और विजयों को छोड़ना पड़ा।
सौंपे गए क्षेत्र: नेपाल द्वारा सौंपे गए प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं:
- काली नदी के पश्चिम के सभी क्षेत्र: इस क्षेत्र में गढ़वाल और कुमाऊँ भी शामिल थे।
- काली और राप्ती नदियों के बीच का संपूर्ण तराई क्षेत्र (निचला इलाका)।
- पूर्व में सिक्किम क्षेत्र।
हिल स्टेशनों का अधिग्रहण
गढ़वाल और कुमाऊं के जो क्षेत्र सौंपे गए थे, वे सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण थे और उनके पास पहाड़ी क्षेत्र था, जहां बाद में कई प्रमुख ब्रिटिश हिल स्टेशन स्थापित किए गए।
- शिमला: सतलुज नदी के ऊपर पहाड़ियों में स्थित यह क्षेत्र नेपाली प्रभाव में था और इसे अंग्रेजों को सौंप दिया गया था, जिन्होंने बाद में शिमला को ब्रिटिश भारत की अपनी ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में विकसित किया।
- रानीखेत: कुमाऊँ क्षेत्र में स्थित, जिसे संधि के तहत सौंप दिया गया था। बाद में इसे एक प्रमुख छावनी और पर्वतीय स्थल के रूप में विकसित किया गया।
- नैनीताल: यह भी कुमाऊँ क्षेत्र में स्थित है, जिसे अंग्रेजों को सौंप दिया गया था। यह शीघ्र ही एक लोकप्रिय औपनिवेशिक शहर के रूप में विकसित हो गया।
हालिया विवाद:
संधि में स्पष्ट मानचित्रों व निर्देशांकों का अभाव रहा, जिसके कारण वर्तमान में लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों पर दोनों देशों के दावे उत्पन्न हुए। नेपाल का कहना है कि काली नदी का उद्गम लिम्पियाधुरा में है, इसलिए यह क्षेत्र उसका हिस्सा है, जबकि भारत इससे सहमत नहीं है। यही अस्पष्टता आज के सीमा विवादों की जड़ है। भारत द्वारा लिपुलेख दर्रे तक सड़क निर्माण ने भी नेपाल की आपत्तियों को बढ़ाया। नेपाल की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय भू-रणनीति (विशेषकर चीन का प्रभाव) ने इस विवाद को और जटिल बनाया।
प्रश्न 125. नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): निर्धनता रेखा समय और देशों के अनुरूप भिन्न होती है।
कारण (R): लोगों की मूलभूत आवश्यकताएँ क्षेत्रों और समय के अनुसार भिन्न होती है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: B
व्याख्या:
अभिकथन (A) बिल्कुल सही है कि गरीबी रेखा दुनिया भर में एक समान नहीं होती और समय के साथ बदलती रहती है। इसका कारण यह है कि प्रत्येक देश में जीवनयापन की लागत, आय स्तर, मूल्य संरचनाएँ, उपभोग पैटर्न, आर्थिक विकास की अवस्था और मुद्रास्फीति भिन्न होती है। जैसे-जैसे समाज आर्थिक रूप से आगे बढ़ता है, लोगों की आवश्यकताओं और न्यूनतम स्वीकार्य जीवन स्तर की परिभाषा भी बदलती जाती है। इसलिए विभिन्न देशों में गरीबी रेखा का मानक भिन्न होता है और समयानुसार इसका संशोधन आवश्यक हो जाता है।
कारण (R) भी सत्य है, क्योंकि मूलभूत ज़रूरतें—जैसे भोजन, वस्त्र, आवास, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, परिवहन आदि—हर समाज और हर समय में एक जैसी नहीं होतीं। उनकी प्रकृति जलवायु, सामाजिक मानदंडों, तकनीकी प्रगति, आर्थिक विकास और जीवन स्तर के साथ बदलती रहती है। जैसे-जैसे समाज विकसित होते हैं, उपभोग का स्वरूप विस्तृत होता है और न्यूनतम जीवन स्तर की परिभाषा व्यापक होती जाती है।
अन्य महत्त्वपूर्ण बिंदु:
- अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखाएँ भी देशों की आर्थिक स्थिति के अनुसार भिन्न होती हैं। उदाहरणतः विश्व बैंक द्वारा निर्धारित वैश्विक गरीबी रेखा निम्न-आय वाले देशों पर लागू होती है, जबकि विकसित देश अपनी अलग (अधिक ऊँची) गरीबी रेखा अपनाते हैं।
- गरीबी मापन में सापेक्ष गरीबी (विकसित देशों में प्रचलित) और निरपेक्ष गरीबी (विकासशील देशों में) का अंतर भी देशों के बीच गरीबी रेखा को अलग बनाता है।
- समय के साथ मुद्रास्फीति और उपभोग संरचना में परिवर्तन के कारण गरीबी रेखा का संशोधन आवश्यक हो जाता है।
- भारत में समय-समय पर लक्षद्वीप समिति, तेंदुलकर समिति और रंगराजन समिति द्वारा गरीबी मापन के नए मानक सुझाए गए हैं, जो दर्शाते हैं कि गरीबी रेखा स्थिर नहीं रह सकती।
गरीबी रेखा में अंतर सीधे तौर पर क्षेत्रों और समय के अनुसार बदलती बुनियादी जरूरतों और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों के कारण होता है, इसलिए कारण (R) अभिकथन (A) की सही और तार्किक व्याख्या करता है।
प्रश्न 126. भारत के निम्नलिखित राष्ट्रपतियों के कार्यकाल पर विचार कीजिए तथा इन्हें सबसे पहले से आखिरी तक के सही कालक्रमानुसार क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
- नीलम संजीवा रेड्डी
- के.आर. नारायणन
- ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
- आर. वेंकटरमन
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 4, 1, 3, 2
(b) 1, 4, 3, 2
(c) 1, 4, 2, 3
(d) 4, 1, 2, 3
उत्तर: C
व्याख्या:
भारत के राष्ट्रपति, संविधान के अनुच्छेद 52 के अंतर्गत स्थापित राष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख हैं। वे राज्य के प्रमुख होने के साथ-साथ कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका—तीनों का महत्वपूर्ण अंग हैं। राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है तथा उनका निर्वाचन एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में राष्ट्रपतियों की भूमिका केवल औपचारिक नहीं रही; अनेक अवसरों पर उन्होंने संवैधानिक मूल्यों की रक्षा, राष्ट्रीय नेतृत्व, आपातकालीन परिस्थितियों के प्रबंधन, शासन-नीति के मार्गदर्शन और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संविधान सभा के अध्यक्ष रहे डॉ. राजेंद्र प्रसाद से लेकर वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तक, प्रत्येक राष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल के दौरान भारतीय लोकतंत्र, संघीय ढाँचे और राष्ट्रीय चरित्र को सुदृढ़ करने में विशिष्ट भूमिका निभाई है।
भारत के राष्ट्रपति:
| क्रम संख्या | नाम | कार्यकाल | मुख्य विशेषताएँ / उपलब्धियाँ |
| 1 | डॉ. राजेंद्र प्रसाद | 1952–1957, 1957–1962 | भारत के एकमात्र राष्ट्रपति जिन्होंने दो पूर्ण कार्यकाल पूरे किए। संविधान सभा के अध्यक्ष। स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय। भारत रत्न (1962)। |
| 2 | डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन | 1962–1967 | विख्यात दार्शनिक व शिक्षक। आंध्र विश्वविद्यालय व बीएचयू के कुलपति। शिक्षक दिवस उनके सम्मान में मनाया जाता है। |
| 3 | डॉ. ज़ाकिर हुसैन | 1967–1969 | भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति। पद्म विभूषण व भारत रत्न प्राप्तकर्ता। पद पर रहते हुए निधन होने वाले पहले राष्ट्रपति। |
| 4 | वी.वी. गिरि | कार्यवाहक: 1969, पूर्ण: 1969–1974 | एकमात्र राष्ट्रपति जो स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुने गए। श्रमिक आंदोलन के प्रमुख नेता। पूर्व उपराष्ट्रपति। |
| 5 | फखरुद्दीन अली अहमद | 1974–1977 | आपातकाल (1975–77) के दौरान राष्ट्रपति। कार्यकाल में ही निधन—ऐसे दूसरे राष्ट्रपति। |
| 6 | नीलम संजीव रेड्डी | 1977–1982 | भारत के सबसे युवा राष्ट्रपति। भारत के 6वें लोकसभा अध्यक्ष भी रहे। आंध्र प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री। राष्ट्रपति चुनाव दो बार लड़ा—दूसरी बार निर्विरोध चुने गए। |
| 7 | जैल सिंह | 1982–1987 | पंजाब के मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय गृह मंत्री। 1984 की घटनाओं और ब्लू स्टार ऑपरेशन के दौरान राष्ट्रपति। |
| 8 | आर. वेंकटरमन | 1987–1992 | स्वतंत्रता सेनानी, ताम्रपत्र से सम्मानित। वित्त, रक्षा व उद्योग मंत्री। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष व भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर भी रहे। |
| 9 | डॉ. शंकर दयाल शर्मा | 1992–1997 | मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं संचार मंत्री रहे। उत्कृष्ट विधिवेत्ता। अनेक विश्वविद्यालयों से मानद उपाधियाँ। |
| 10 | के.आर. नारायणन | 1997–2002 | भारत के पहले दलित राष्ट्रपति। श्रेष्ठ राजनयिक, अमेरिका, चीन, तुर्की के राजदूत। उन्हें सबसे विद्वान राष्ट्रपति कहा जाता है। |
| 11 | डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम | 2002–2007 | मिसाइल मैन ऑफ इंडिया। पोखरण-II में महत्वपूर्ण भूमिका। भारत रत्न प्राप्तकर्ता। विद्यार्थियों के प्रेरणास्रोत। |
| 12 | प्रतिभा देवी सिंह पाटिल | 2007–2012 | भारत की पहली महिला राष्ट्रपति। राजस्थान की राज्यपाल रहीं। महिला सशक्तिकरण पर जोर। |
| 13 | प्रणब मुखर्जी | 2012–2017 | दशकों तक केंद्रीय राजनीति के महत्वपूर्ण स्तंभ। वित्त, रक्षा, विदेश मंत्री। पद्म विभूषण (2008) व भारत रत्न (2019)। |
| 14 | राम नाथ कोविंद | 2017–2022 | भारत के दूसरे दलित राष्ट्रपति। बिहार के राज्यपाल। वकील व राज्यसभा सदस्य। |
| 15 | द्रौपदी मुर्मू | 2022–वर्तमान | भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति। झारखंड की राज्यपाल। |
प्रश्न 127. ‘उत्तर प्रदेश‘ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- उत्तर प्रदेश, देश में आलू का अग्रणी उत्पादक है।
- भारत सरकार ने अलीगढ़ में अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना को मंजूरी दी है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: B
व्याख्या:
कथन 1 सही है: उत्तर प्रदेश आलू उत्पादन में भारत में प्रथम स्थान पर है, जो कुल राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग 30-35% योगदान देता है। प्रमुख आलू उत्पादक जिलों में आगरा, फर्रुखाबाद, कन्नौज, फिरोजाबाद और इटावा शामिल हैं। अनुकूल जलोढ़ मिट्टी और जलवायु परिस्थितियाँ इसे आलू की खेती के लिए आदर्श बनाती हैं। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश गेहूं, गन्ना, दुग्ध उत्पाद एवं सब्जी उत्पादन में देश में प्रथम स्थान रखता है।
कथन 2 गलत है: भारत सरकार ने जून 2025 में उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के सिंगना गाँव में (अलीगढ़ में नहीं)अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (सीआईपी) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (सीएसएआरपी) की स्थापना को मंजूरी दी। यह केंद्र आलू एवं शकरकंद जैसी कंद फसलों पर उन्नत अनुसंधान का प्रमुख संस्थान बनेगा। इसका उद्देश्य जलवायु-अनुकूल, उच्च उपज वाली, रोग-प्रतिरोधी तथा पोषक किस्मों का विकास करना, कटाई-पश्चात प्रबंधन सुधारना और खाद्य–पोषण सुरक्षा को मजबूत करना है।
मुख्य बिंदु:
- स्थान: सिंगना गाँव, आगरा (उत्तर प्रदेश)।
- मंजूरी: 25 जून 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा।
- वित्तीय प्रावधान: केंद्र सरकार से ₹111.5 करोड़; राज्य सरकार द्वारा 10 हेक्टेयर भूमि निःशुल्क उपलब्ध।
- उद्देश्य: आलू-शकरकंद अनुसंधान, नई किस्मों का विकास, कटाई-पश्चात क्षति में कमी, मूल्य संवर्धन और खाद्य सुरक्षा सुदृढ़ करना।
- लाभ: किसानों की आय में वृद्धि, स्थानीय रोजगार सृजन, दक्षिण एशिया के लिए कंद फसलों का प्रमुख शोध केंद्र विकसित करना।
प्रश्न 128. सूची -Ⅰ को सूची – ⅠⅠ से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
सूची -Ⅰ सूची -ⅠⅠ
(अनुसूची) (विषय)
- 7वीं अनुसूची 1. भाषा
- 8वीं अनुसूची 2. दलबदल के आधार पर अयोग्यता
- 9वीं अनुसूची 3. संघ, राज्य और समवर्ती सूचियाँ
- 10वीं अनुसूची 4. कुछ अधिनियमों और विनियमों का सत्यापन
कूट:
A B C D
(a) 3 1 4 2
(b) 4 2 1 3
(c) 3 1 2 4
(d) 2 3 4 1
उत्तर: A
व्याख्या: 7वीं अनुसूची – संघ, राज्य और समवर्ती सूचियाँ: भारतीय संविधान की 7वीं अनुसूची संघ और राज्यों के बीच शक्तियों के विभाजन को परिभाषित करती है । इसमें तीन सूचियाँ हैं :
संघ सूची – वे विषय जिन पर केवल संसद ही कानून बना सकती है।
राज्य सूची – ऐसे विषय जिन पर केवल राज्य विधानमंडल ही कानून बना सकते हैं।
समवर्ती सूची – ऐसे विषय जिन पर दोनों कानून बना सकते हैं।
अतः , A → 3.
आठवीं अनुसूची – भाषाएँ: आठवीं अनुसूची में भारतीय संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त आधिकारिक भाषाओं की सूची दी गई है। शुरुआत में, इसमें 14 भाषाएँ थीं , और अब विभिन्न संशोधनों के बाद 22 भाषाएँ हैं। अतः, B → 1.
नौवीं अनुसूची – कुछ अधिनियमों/विनियमों का सत्यापन: नौवीं अनुसूची को प्रथम संविधान संशोधन (1951) द्वारा जोड़ा गया था। इसका उद्देश्य भूमि सुधार कानूनों और अन्य कानूनों को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के कारण अदालतों में चुनौती दिए जाने से बचाना था।
अतः, C → 4.
10वीं अनुसूची – दलबदल के आधार पर अयोग्यता: 52वें संशोधन (1985) द्वारा जोड़ी गई 10वीं अनुसूची, दलबदल विरोधी कानून से संबंधित है। यह संसद और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को अयोग्य ठहराने का आधार प्रदान करती है यदि वे एक राजनीतिक दल से दूसरे राजनीतिक दल में चले जाते हैं।
अतः, D → 2.
भारतीय संविधान की अनुसूचियाँ:
| अनुसूची | विषय-वस्तु | संबंधित अनुच्छेद | अतिरिक्त विवरण |
| प्रथम अनुसूची | राज्यों के नाम व क्षेत्र, संघ राज्य क्षेत्रों के नाम व सीमाएँ | अनु. 1 एवं 4 | भारत के राजनीतिक मानचित्र का संवैधानिक आधार; राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित संशोधनों द्वारा अद्यतन। |
| द्वितीय अनुसूची | राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल, लोकसभा–राज्यसभा के अध्यक्ष–उपाध्यक्ष, राज्य विधानसभाओं के अध्यक्ष–उपाध्यक्ष, उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक आदि के वेतन, भत्ते और विशेषाधिकार | अनु. 59, 65, 75, 97, 125, 148, 158, 164, 186, 221 | संवैधानिक पदाधिकारियों के वेतन व भत्तों में संशोधन का अधिकार संसद को। |
| तृतीय अनुसूची | विभिन्न संवैधानिक पदों हेतु शपथ/प्रतिज्ञान | अनु. 75, 84, 99, 124, 146, 173, 188, 219 | राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मंत्री, सांसद, विधायक, न्यायाधीश, राज्यपाल आदि की शपथ का प्रारूप। |
| चतुर्थ अनुसूची | राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को राज्यसभा में सीटों का आवंटन | अनु. 4 एवं 80 | सीटों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर; संसद आवश्यकता अनुसार परिवर्तन कर सकती है। |
| पंचम अनुसूची | अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों का प्रशासन | अनु. 244 | राज्यपाल की विशेष शक्तियाँ; आदिवासी कल्याण हेतु रिपोर्टिंग; कई योजनाओं और प्रशासनिक ढाँचों की प्रेरणा। |
| षष्ठम अनुसूची | असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन | अनु. 244 व 275 | स्वायत्त जिला परिषदें; विधायी, कार्यपालिका तथा न्यायिक शक्तियाँ; पूर्वोत्तर क्षेत्र की विशेष संरचना। |
| सातवीं अनुसूची | संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची – विषयों का विधायी विभाजन | अनु. 246 | 97 (संघ सूची), 66 (राज्य सूची), 47 (समवर्ती सूची); 42वें संशोधन द्वारा परिवर्तन। |
| आठवीं अनुसूची | भारत की 22 मान्यता प्राप्त भाषाएँ | अनु. 344, 351 | प्रारंभ में 14 भाषाएँ; बाद में सिंधी (1967), कोकणी–मणिपुरी–नेपाली (1992), मैथिली–बोड़ो–संथाली–डोगरी (2003) जोड़ी गईं। |
| नवमी अनुसूची | भूमि सुधार एवं राज्यों के कुछ कानूनों को न्यायिक समीक्षा से संरक्षण | अनु. 31-ख | 1951 के पहले संशोधन द्वारा जोड़ी गई; 1975 से पहले शामिल कानूनों को पूर्ण सुरक्षा; 2007 में सर्वोच्च न्यायालय—मूल अधिकारों के उल्लंघन पर समीक्षा संभव। |
| दसवीं अनुसूची | दलबदल कानून—सांसद/विधायक की अयोग्यता | अनु. 102 व 191 | 52वाँ संशोधन (1985) द्वारा जोड़ा गया; 91वाँ संशोधन (2003) द्वारा संशोधित। |
| ग्यारहवीं अनुसूची | पंचायतों के लिए 29 विषय | अनु. 243-छ | 73वाँ संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़ा गया। |
| बारहवीं अनुसूची | नगरपालिकाओं के लिए 18 विषय | अनु. 243-त | 74वाँ संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़ा गया। |
प्रश्न 129. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): सामान्यतः सीसा तथा टिन की मिश्र धातु का प्रयोग फ्यूज तार के पदार्थ के रूप में किया जाता है।
कारण (R): सीसा व टिन की मिश्र धातु का गलनांक ताँबे व एल्यूमिनियम के गलनांक से अधिक होता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: D
व्याख्या:
अभिकथन (A): यह सत्य है कि सीसा और टिन की मिश्रधातु (जिसे आमतौर पर सोल्डर कहा जाता है ) का उपयोग फ्यूज तार बनाने के लिए किया जाता है । फ्यूज तारों को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि वे अत्यधिक धारा प्रवाहित होने पर शीघ्र पिघल जाएँ और परिपथ को तोड़ दें, जिससे विद्युत उपकरणों को होने वाली क्षति को रोका जा सके। अतः, अभिकथन (A) सही है।
कारण (R): सीसा-टिन मिश्र धातु का गलनांक तांबे या एल्युमीनियम की तुलना में कम होता है, न कि अधिक। सीसा-टिन मिश्र धातु लगभग 180°C-250°C पर पिघलती है, तांबा 1083°C पर और एल्युमीनियम 660°C पर पिघलता है। मिश्र धातु का कम गलनांक यह सुनिश्चित करता है कि सुरक्षित सीमा से अधिक धारा प्रवाहित होने पर भी यह आसानी से पिघल जाए – जिससे यह फ्यूज तारों के लिए उपयुक्त हो जाती है। अतः, कारण (R) गलत है।
फ्यूज़ तारों में सीसा–टिन मिश्रधातु का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि इसका गलनांक कम (लगभग 180–250°C) होता है और यह उच्च प्रतिरोधकता के कारण तेजी से गर्म होकर अत्यधिक धारा पर तुरंत पिघल जाती है, जिससे परिपथ सुरक्षित रूप से टूट जाता है। फ्यूज़ जूल के नियम (I²Rt) के आधार पर कार्य करता है—धारा बढ़ते ही ताप तेजी से बढ़ता है और फ्यूज़ पिघल जाता है।
प्रश्न 130. निम्नलिखित युग्मों में कौन-सा/से सही सुमेलित नहीं है/हैं ?
(दिवस) (तारीख)
- अंतर्राष्ट्रीय ओजोन दिवस 16 सितंबर
- विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून
- विश्व वन्यजीव दिवस 22 मार्च
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 3
(d) 2 और 3
उत्तर: A
व्याख्या:
अंतर्राष्ट्रीय ओज़ोन दिवस: हर साल 16 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिवस मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) पर हस्ताक्षर के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य ओज़ोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले पदार्थों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करके ओज़ोन परत की रक्षा करना था।
विश्व पर्यावरण दिवस: प्रतिवर्ष 5 जून को मनाया जाता है। 1972 में स्टॉकहोम मानव पर्यावरण सम्मेलन के दौरान संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसकी स्थापना की गई थी। यह पर्यावरण संरक्षण के लिए वैश्विक जागरूकता और कार्रवाई को बढ़ावा देता है।
विश्व वन्यजीव दिवस: 3 मार्च को मनाया जाता है, जो 1973 में वन्य जीव और वनस्पति की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (सीआईटीईएस) को अपनाने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह वैश्विक वन्यजीव संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाता है।
पर्यावरण से संबंधित कुछ प्रमुख दिवस:
| दिन / तारीख | उद्देश्य / महत्व | अतिरिक्त विवरण |
| विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) | पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता पर वैश्विक जागरूकता बढ़ाना | 1974 से मनाया जा रहा है; संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) द्वारा संचालित; प्रतिवर्ष एक विशेष थीम निर्धारित होती है। |
| पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) | पृथ्वी के पर्यावरण की रक्षा, पारिस्थितिक संतुलन और सतत विकास पर ध्यान केंद्रित करना | 1970 में पहली बार मनाया गया; विश्व का सबसे बड़ा पर्यावरण जन-आंदोलन; 193 से अधिक देशों में आयोजन। |
| विश्व वानिकी दिवस (21 मार्च) | वनों के संरक्षण, पुनर्वनीकरण और वन संसाधनों के सतत उपयोग पर जागरूकता बढ़ाना | संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1971 में घोषित; वनों की भूमिका—जलवायु संतुलन, जैव विविधता, आजीविका—पर जोर। |
| विश्व जल दिवस (22 मार्च) | जल संसाधनों के संरक्षण, जल संकट, स्वच्छ पेयजल और जल प्रबंधन के महत्व पर जागरूकता | 1993 से मनाया जा रहा है; हर वर्ष “जल” से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों पर एक विषय निर्धारित होता है। |
| विश्व ओजोन दिवस (16 सितंबर) | ओजोन परत के संरक्षण और ओजोन क्षयकारी पदार्थों को कम करने के प्रयासों को प्रोत्साहित करना | 1987 के मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की याद में; 1994 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित। |
| विश्व वन्यजीव दिवस (3 मार्च) | वन्यजीवों और उनके आवासों की सुरक्षा तथा जैव विविधता संरक्षण हेतु जागरूकता | 1973 के वन्यजीव संरक्षण समझौते (साईट्स) की वर्षगांठ पर मनाया जाता है। |
| राष्ट्रीय प्रदूषण रोकथाम दिवस (2 दिसंबर) | प्रदूषण नियंत्रण, स्वच्छ वायु और आपदा-जागरूकता के प्रति जनता को संवेदनशील बनाना | 1984 की भोपाल गैस त्रासदी की स्मृति में; औद्योगिक सुरक्षा और प्रदूषण रोकथाम पर बल। |
| विश्व मृदा दिवस (5 दिसंबर) | स्वस्थ मिट्टी के महत्व, कृषि उत्पादकता और भूमि संरक्षण के प्रति जागरूकता | संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा घोषित; मिट्टी क्षरण और पोषक तत्वों के संरक्षण पर ध्यान। |
प्रश्न 131. निम्नलिखित में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित नहीं है/हैं?
(नगर) (नदी)
- बुडापेस्ट डेन्यूब
- कोलोन राइन
- न्यू ऑरलियन्स मिसौरी
- हैदराबाद (भारत) पलेरू
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3 और 4
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 1, 2 और 3
(d) केवल 2, 3 और 4
उत्तर: A
व्याख्या:
बुडापेस्ट – डेन्यूब: डेन्यूब यूरोप की दूसरी सबसे लंबी नदी है, जो जर्मनी से निकलकर 10 देशों से होकर बहती है। यह हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट को दो भागों—बुडा (पश्चिमी भाग) और पेस्ट (पूर्वी भाग)—में विभाजित करती है। दोनों हिस्सों को जोड़ने के लिए कई प्रसिद्ध पुल बने हैं, जिनमें चेन ब्रिज सबसे महत्वपूर्ण है। बुडापेस्ट को डेन्यूब की रानी भी कहा जाता है क्योंकि यह शहर नदी के दोनों किनारों के सुन्दर दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है।
कोलोन – राइन: जर्मनी का ऐतिहासिक शहर कोलोन राइन नदी के किनारे स्थित है। राइन यूरोप की प्रमुख नदियों में से एक है और जर्मनी के व्यापार एवं जल-परिवहन में केंद्रीय भूमिका निभाती है। कोलोन अपने भव्य कैथेड्रल के लिए प्रसिद्ध है, जो राइन के निकट स्थित एक विश्व धरोहर स्थल है। नदी ने इस शहर के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
न्यू ऑरलियन्स – मिसौरी। सामान्य भ्रम के विपरीत, न्यू ऑरलियन्स मिसौरी नदी पर नहीं, बल्कि मिसिसिपी नदी पर स्थित है। मिसिसिपी उत्तर अमेरिका की दूसरी सबसे लंबी नदी है, जो मैक्सिको की खाड़ी में गिरती है। न्यू ऑरलियन्स इस नदी पर स्थित होने के कारण एक प्रमुख बंदरगाह शहर, जैज़ संगीत का केंद्र और बहुसांस्कृतिक विरासत वाला नगर बना। मिसौरी नदी, जो मिसिसिपी की सबसे बड़ी सहायक नदी है, न्यू ऑरलियन्स से होकर नहीं बहती।
हैदराबाद (भारत) – पलेरू। हैदराबाद शहर मूसी नदी के किनारे बसा है, जो कृष्णा नदी की सहायक नदी है। मूसी नदी ने ऐतिहासिक रूप से शहर की बसावट, जल-आपूर्ति और शहरी विकास को प्रभावित किया है। वहीं पलेरू नदी तेलंगाना के खम्मम ज़िले में बहती है और इसका हैदराबाद से सीधा संबंध नहीं है।
प्रश्न 132. निम्नलिखित में से कौन-सा/से खाद्य सुरक्षा का आयाम नहीं है/हैं ?
- उपलब्धता
- पहुँच
- सामर्थ्य
- जवाबदेही
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
कूट:
(a) केवल 4
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 2, 3 और 4
उत्तर: A
व्याख्या : खाद्य सुरक्षा को समझने के लिए उसके चार मूलभूत आयाम-उपलब्धता, पहुँच, उपयोग और स्थिरता-अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ये स्तंभ यह सुनिश्चित करते हैं कि हर व्यक्ति को हर समय पर्याप्त, सुरक्षित और पोषक भोजन प्राप्त हो सके। कुछ विश्लेषणों में सामर्थ्य को पहुँच का भाग और स्थिरता व एजेंसी (खाद्य चुनने व नियंत्रित करने की क्षमता) को पूरक आयाम माना जाता है।
- उपलब्धता: इसका अर्थ है भोजन की वास्तविक भौतिक उपस्थिति-जो कृषि उत्पादन, खाद्यान्न भंडारण, आयात, निर्यात-नीतियों और खाद्य सहायता पर निर्भर करती है। उपलब्धता यह सुनिश्चित करती है कि बाज़ार और समुदायों में भोजन पर्याप्त मात्रा में मौजूद हो।
- पहुँच: यह आयाम व्यक्तियों की भोजन प्राप्त करने की आर्थिक, सामाजिक और भौतिक क्षमता से जुड़ा है। इसमें दो प्रमुख पहलू शामिल हैं-
- सामर्थ्य: क्या व्यक्ति भोजन खरीदने में सक्षम है?
- भौतिक पहुँच: क्या वह भोजन के स्रोत तक पहुँच सकता है?
गरीबी, असमानता और बाज़ार ढाँचा इस आयाम को अत्यधिक प्रभावित करते हैं।
- उपयोग: यह भोजन के सही उपयोग और शरीर द्वारा पोषक तत्वों के अवशोषण की क्षमता से संबंधित है। इसमें शामिल हैं-
- भोजन की पोषण गुणवत्ता
- स्वच्छ पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएँ
- खाद्य सुरक्षा
अर्थात पर्याप्त भोजन होना ही पर्याप्त नहीं, उसका पौष्टिक, सुरक्षित और स्वास्थ्यप्रद होना भी आवश्यक है।
- स्थिरता: स्थिरता का अर्थ है कि भोजन तक उपलब्धता, पहुँच और उपयोग-समय के साथ बिना व्यवधान के जारी रहे। यह निम्न कारकों से प्रभावित हो सकती है-
- जलवायु परिवर्तन
- प्राकृतिक आपदाएँ
- आर्थिक मंदी
- संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता
यदि कोई भी संकट भोजन की उपलब्धता या पहुँच को बाधित करे, तो खाद्य सुरक्षा अस्थिर हो जाती है।
इन चार आयामों के संतुलित और समन्वित रूप से कार्य करने से ही किसी देश या समुदाय में वास्तविक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। अतः स्पष्ट है जवाबदेही खाद्य सुरक्षा के आयामों में शामिल नहीं है।
प्रश्न 133. चार बौद्ध संगीतियाँ निम्नलिखित स्थानों पर सम्पन्न हुई थी। इन्हें सही कालक्रमानुसार क्रम में व्यवस्थित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
(a) वैशाली
(b) राजगृह
(c) कुंडलवन
(d) पाटलिपुत्र
कूट:
(a) 2, 1, 3, 4
(b) 1, 2, 3, 4
(c) 1, 2, 4, 3
(d) 2, 1, 4, 3
उत्तर: D
व्याख्या:
बौद्ध परिषदों का आयोजन भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनकी शिक्षाओं को संरक्षित करने, संकलित करने और व्याख्या करने के लिए किया गया था ।
- प्रथम बौद्ध संगीति – राजगृह (राजगीर)
○ वर्ष: 483 ईसा पूर्व (बुद्ध की मृत्यु के तुरंत बाद)
○ संरक्षक: राजा अजातशत्रु (हर्यंक वंश)
○ अध्यक्षता: महाकस्सप
○ उद्देश्य: बुद्ध की शिक्षाओं का संकलन – विनय पिटक और सुत्त पिटक ।
- द्वितीय बौद्ध संगीति – वैशाली
○ वर्ष: लगभग 383 ईसा पूर्व
○ संरक्षक: राजा कालाशोक (शिशुनाग वंश)
○ अध्यक्षता: सबकामी थेरा
○ उद्देश्य: मठवासी अनुशासन (विनय नियम) से संबंधित विवादों को सुलझाना ।
- तृतीय बौद्ध संगीति – पाटलिपुत्र
○ वर्ष: लगभग 250 ईसा पूर्व
○ संरक्षक: सम्राट अशोक (मौर्य वंश)
○ अध्यक्षता: मोग्गलिपुत्त तिस्स
○ उद्देश्य: भ्रष्ट भिक्षुओं को निष्कासित करके संघ को शुद्ध करना और अभिधम्म पिटक का संकलन करना ।
- चतुर्थ बौद्ध संगीति – कुंडलवन (कश्मीर)
○ वर्ष: पहली शताब्दी ई.
○ संरक्षक: राजा कनिष्क (कुषाण वंश)
○ अध्यक्षता: वसुमित्र और अश्वघोष
○ उद्देश्य: महायान शास्त्रों का संकलन ।
इसलिए, कालानुक्रमिक क्रम है: राजगृह → वैशाली → पाटलिपुत्र → कुंडलवन
आधुनिक काल की बौद्ध संगीतियां-
|
प्रश्न 134. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): हिमालय अनेक बड़ी सततवाहिनी नदियों का उद्गम स्थल है।
कारण (R): हिमालय की ऊँची श्रेणियाँ सदा हिमाच्छादित रहती हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: B
व्याख्या
अभिकथन (A): हिमालय कई बड़ी सततवाहिनी नदियों, जैसे गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, यमुना और सतलुज, का उद्गम स्थल है। ये नदियाँ वर्ष भर बहती रहती हैं और कृषि, पेयजल और जलविद्युत उत्पादन के लिए जल की निरंतर आपूर्ति प्रदान करती हैं। अतः, (A) सत्य है।
कारण (R): हिमालय की ऊँची श्रेणियाँ—विशेषकर हिमाद्रि और हिमाचल पर्वतमालाएँ—वर्ष भर बर्फ से ढकी रहती हैं। गर्म महीनों में ग्लेशियरों और हिमखंडों के पिघलने से इन बारहमासी नदियों को पानी का एक स्थिर स्रोत मिलता है। अतः, (R) सत्य है, और यह सीधे तौर पर (A) के कारण की व्याख्या करता है।
| हिमालयी नदियाँ अपनी संरचना, स्रोतों और प्रवाह की निरंतरता के कारण भारत तथा दक्षिण एशिया की जीवनरेखा मानी जाती हैं। वे हिमनदों के पिघलने और मानसूनी वर्षा—दोनों से जल प्राप्त करती हैं, जिससे इनमें गर्मियों, बारिश और सर्दियों—तीनों ऋतुओं में स्थिर प्रवाह बना रहता है। हिमालय को एशिया का जल-टॉवर कहा जाता है क्योंकि यहाँ 15,000 से अधिक हिमनद हैं और यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा हिमनदीय भंडार है। हिमालयी नदियाँ विशाल अपरदन करके उपजाऊ जलोढ़ मैदानी क्षेत्रों का निर्माण करती हैं, विशेषकर गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन में। |
प्रश्न 135. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): सतत विकास लक्ष्यों की वैश्विक सफलता के लिए भारत की सफलता महत्वपूर्ण है।
कारण (R): भारत में विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग छठा हिस्सा निवास करता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: B
व्याख्या:
अभिकथन (A): सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) का उद्देश्य 2030 तक गरीबी उन्मूलन, ग्रह की रक्षा और सभी के लिए समृद्धि सुनिश्चित करना है । इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में भारत की सफलता वैश्विक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह देश विश्व की जनसंख्या, अर्थव्यवस्था और जैव विविधता के एक महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है । अतः, (A) सत्य है ।
कारण (R): भारत वैश्विक जनसंख्या का लगभग छठा हिस्सा (लगभग 17-18%) निवास करता है , जो इसे 2023 तक दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बनाता है । इसलिए, वैश्विक सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) लक्ष्य – चाहे गरीबी उन्मूलन, स्वच्छ ऊर्जा, लैंगिक समानता या जलवायु कार्रवाई पर हों – भारत की सक्रिय भागीदारी और सफलता के बिना प्राप्त नहीं किए जा सकते । अतः, (R) सत्य है और यह (A) की सही व्याख्या करता है ।
अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य:
भारत ने एसडीजी के अनुरूप स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, उज्ज्वला योजना, पोषण अभियान, आयुष्मान भारत जैसी कई प्रमुख पहलें शुरू की हैं। नीति आयोग एसडीजी कार्यान्वयन की राष्ट्रीय निगरानी करता है और एसडीजी इंडिया इंडेक्स जारी कर राज्यों की प्रगति आँकता है।
भारत वैश्विक जलवायु लक्ष्यों (एसडीजी -13) में भी निर्णायक भूमिका निभाता है, क्योंकि यह नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में अग्रणी देशों में शामिल है। साथ ही, ग्लोबल साउथ की आवाज बनकर भारत विकासशील देशों के हितों को भी मजबूत करता है।
प्रश्न 136. मई 2025 में पुष्कर कुंभ मेला 2025 का आयोजन निम्नलिखित में से किन राज्य/राज्यों में किया गया था?
- राजस्थान
- उत्तर प्रदेश
- उत्तराखंड
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 2 और 3
उत्तर: A
व्याख्या:
पुष्कर कुंभ मेला 2025 एक पवित्र हिंदू तीर्थयात्रा थी जो 15 मई से 26 मई, 2025 तक, भारत का पहला गांव कहे जाने वाले, उत्तराखंड के माणा गाँव के केशव प्रयाग में आयोजित हुई। अलकनंदा और सरस्वती नदियों के संगम, केशव प्रयाग में आयोजित इस मेले में हज़ारों वैष्णव श्रद्धालु, विशेष रूप से दक्षिण भारत से, आध्यात्मिक शुद्धि और मुक्ति की तलाश में आए। बृहस्पति-मिथुन युति के दौरान यह आयोजन अपने आध्यात्मिक महत्व और उत्तर तथा दक्षिण भारतीय परंपराओं के बीच संबंधों को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका के लिए उल्लेखनीय था।
हिंदू धार्मिक परंपरा के अनुसार केशव प्रयाग अत्यंत पवित्र तपोभूमि माना जाता है। मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास ने इसी स्थल पर कठोर तपस्या करते हुए महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना की थी। ऐसा भी विश्वास किया जाता है कि यहाँ देवी सरस्वती का दिव्य सान्निध्य प्राप्त होता है। परंपरा के अनुसार, महान वैष्णव आचार्य, रामानुजाचार्य और माधवाचार्य, दोनों को इसी पवित्र स्थल पर देवी सरस्वती से दिव्य ज्ञान एवं दैवी प्रेरणा प्राप्त हुई थी।
प्रश्न 137. भारत में पंचायती राज संस्थाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होगा।
- पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षित स्थानों में से 1/4 स्थान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: B
व्याख्या:
कथन 1 सही है: अनुच्छेद 243E के अनुसार—
- प्रत्येक पंचायत का कार्यकाल पाँच वर्ष का होगा, जिसे उसकी पहली बैठक की तिथि से गिना जाता है।
- यदि कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही पंचायत भंग कर दी जाती है, तो राज्य चुनाव आयोग को छः माह के भीतर नए चुनाव कराना अनिवार्य है। किसी पंचायत के कार्यकाल की समाप्ति से पूर्व उसके विघटन पर गठित पंचायत केवल उस अवधि के शेष भाग के लिए बनी रहेगी
- विघटन की स्थिति में चुनाव में देरी नहीं की जा सकती; पाँच वर्ष का कार्यकाल पंचायतों की स्थायित्व, सहभागिता और विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया को सुनिश्चित करने हेतु अनिवार्य प्रावधान है।
- यह प्रावधान 73वें संशोधन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू है, क्योंकि इससे पहले राज्यों के विवेक पर पंचायती संस्थाएँ कभी भी भंग कर दी जाती थीं या चुनावों में अनावश्यक देरी की जाती थी।
कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 243D (3) के अनुसार-
- पंचायतों में कुल सीटों का कम-से-कम एक तिहाई (1/3 = 33.3%) हिस्सा महिलाओं के लिए आरक्षित होगा।
- इसमें सामान्य महिला, अनुसूचित जाति की महिला और अनुसूचित जनजाति की महिला, सभी शामिल हैं।
- अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति श्रेणी में जो सीटें आरक्षित होती हैं, उनमें से भी न्यूनतम एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
73वें संशोधन के संदर्भ में अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
- पंचायतों की त्रि-स्तरीय संरचना—ग्राम पंचायत, मध्यवर्ती पंचायत (ब्लॉक/तालुका), जिला पंचायत (243B)।
- प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा सीटों का चुनाव (243C)।
- अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण उनकी जनसंख्या के अनुपात में।
- महिलाओं के लिए 1/3 आरक्षण, सभी स्तरों पर (243D)।
- अध्यक्ष पदों में भी 1/3 आरक्षण महिलाओं के लिए।
- राज्य चुनाव आयोग की स्थापना, जो पंचायत चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण हेतु होता है (243K)।
- पंचायतों के लिये 11वीं अनुसूची के 29 विषय—जैसे ग्रामीण विकास, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि—राज्यों द्वारा पंचायतों को शक्ति हस्तांतरण हेतु (243G)।
- राज्य वित्त आयोग (243(I)) — पंचायतों के वित्तीय संसाधनों की अनुशंसा के लिए।
प्रश्न 138. निम्नलिखित में से कौन निर्धनता का सामाजिक संकेतक नहीं है?
- निरक्षरता
- सुरक्षित पेयजल
- रोजगार के अवसर
- घर का आकार
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 4
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 3 और 4
उत्तर: (a) केवल 4
व्याख्या:
निर्धनता का मूल्यांकन केवल आय या खपत के आधार पर नहीं किया जाता, बल्कि सामाजिक संकेतकों के माध्यम से भी किया जाता है। सामाजिक संकेतक वे परिस्थितियाँ हैं जिनसे व्यक्ति या परिवार की जीवन-गुणवत्ता, अवसरों तक पहुँच, और सामाजिक स्थिति का आकलन किया जाता है। सामाजिक वैज्ञानिक निर्धनता के प्रमुख सामाजिक संकेतक के रूप में निम्न कारकों को मानते हैं—
- निरक्षरता
- कुपोषण
- स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव
- रोजगार अवसरों की कमी
- सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता सुविधाओं का अभाव
- सामाजिक बहिष्करण
- खराब आवास और असुरक्षित जीवन स्थितियाँ
इनमें समान विशेषता यह है कि ये सभी किसी आवश्यक सुविधा या अवसर के अभाव को दर्शाते हैं, जो निर्धनता की स्थिति को प्रत्यक्ष रूप से उजागर करते हैं।
निरक्षरता- शिक्षा की कमी व्यक्ति को बेहतर नौकरी, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक अवसरों से वंचित करती है। इसलिए यह निर्धनता का एक मान्य सामाजिक संकेतक है।
सुरक्षित पेयजल – सुरक्षित पेयजल की कमी (न कि सुरक्षित पेयजल) स्पष्ट रूप से निर्धनता का संकेत मानी जाती है, क्योंकि इसका प्रत्यक्ष प्रभाव स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका, तीनों पर पड़ता है।
रोजगार के अवसर – रोजगार अवसरों का अभाव निर्धनता (गरीबी) का एक प्रमुख और महत्वपूर्ण संकेतक है (न कि रोजगार के अवसर), क्योंकि जब लोगों को आय अर्जित करने और अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए काम नहीं मिलता, तो वे गरीबी के दुष्चक्र में फंस जाते हैं
घर का आकार – सामाजिक संकेतकों में आवास की गुणवत्ता, सुरक्षा, भीड़भाड़, स्वच्छता आदि देखे जाते हैं, न कि घर का आकार छोटा है या बड़ा। घर का आकार निर्धनता मापने का कोई मानक संकेतक नहीं है। इसलिए यह स्पष्ट रूप से निर्धनता का सामाजिक संकेतक नहीं है।
हालाँकि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने इस प्रश्न का उत्तर, केवल 4. घर का आकार माना है।
प्रश्न 139. निम्नलिखित में से कौन-सी ठंडी महासागरीय धारा नहीं है/हैं?
- अगुलहास धारा
- ब्राज़ील धारा
- हम्बोल्ट धारा
- कैलिफोर्निया धारा
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 3 और 4
(b) 1 और 2
(c) 1 और 3
(d) 2 और 3
उत्तर: B
व्याख्या:
महासागरीय धाराएँ समुद्रों में बहने वाली निरंतर जलधाराएँ होती हैं, जिन्हें उनके तापमान के आधार पर दो श्रेणियों में बाँटा जाता है-
- गर्म महासागरीय धाराएँ
- ठंडी महासागरीय धाराएँ
गर्म धारा अपने मूल में स्थित गर्म क्षेत्रों से (आमतौर पर भूमध्यरेखीय क्षेत्रों से) ठंडी ओर बहती हैं और तटीय क्षेत्रों का तापमान बढ़ाती हैं।
ठंडी धारा ध्रुवीय या उच्च अक्षांशीय क्षेत्रों से निकलकर निम्न अक्षांशीय गर्म क्षेत्रों की ओर बहती हैं और तटीय जलवायु को ठंडा बनाती हैं।
अगुलहास धारा — गर्म धारा
- यह अफ्रीका के दक्षिण-पूर्वी तट (मोज़ाम्बिक से केप ऑफ गुड होप) के साथ दक्षिण दिशा की ओर बहती है।
- इसका उद्गम भारतीय महासागर के गर्म जल क्षेत्रों से होता है।
- यह विश्व की सबसे तेज और गर्म पश्चिमी सीमा धाराओं में से एक है।
- यह पूर्वी अफ्रीका के तटीय जलवायु को गर्म और आर्द्र बनाती है।
ब्राज़ील धारा — गर्म धारा
- यह दक्षिण अमेरिका के पूर्वी तट के साथ दक्षिण की ओर बहती है।
- इसका उद्गम दक्षिण भूमध्यरेखीय धारा से होता है, जो स्वयं गर्म धारा है।
- यह उपोष्णकटिबंधीय अटलांटिक को गर्म बनाती है और ब्राज़ील तट पर तापमान वृद्धि में योगदान देती है।
हम्बोल्ट / पेरू धारा — ठंडी धारा
- यह दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट (चिली–पेरू) के साथ उत्तर की ओर बहती है।
- यह अंटार्कटिक क्षेत्र से अत्यधिक ठंडा जल लाती है।
- विश्व के सबसे समृद्ध मत्स्य संसाधन इसी के कारण विकसित हुए हैं।
- यह निकटवर्ती तटीय क्षेत्रों को ठंडा, शुष्क और मरुस्थलीय बनाती है (जैसे— अटाकामा मरुस्थल)।
कैलिफ़ोर्निया धारा — ठंडी धारा
- यह उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट के साथ दक्षिण की ओर बहती है।
- इसका स्रोत उत्तरी प्रशांत महासागर के ठंडे ध्रुवीय जल में है।
- यह संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चिमी तट को अपेक्षाकृत ठंडा बनाती है और समुद्री जैव विविधता को प्रभावित करती है।
- अपवेलिंग (उपरिकर्षण) के कारण यहाँ मत्स्य संसाधन अत्यधिक समृद्ध हैं।
प्रश्न 140. निम्नलिखित में से कौन सा/से युग्म सही सुमेलित नहीं है/हैं?
(अम्ल) (अम्ल पाया जाता है)
- लैक्टिक अम्ल दही
- टार्टरिक अम्ल अंगूर
- एसिटिक अम्ल आलू
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 2 और 3
उत्तर: A
व्याख्या:
प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में विभिन्न कार्बनिक अम्ल पाए जाते हैं। ये अम्ल खाद्य पदार्थों के स्वाद, संरचना, संरक्षण और pH को प्रभावित करते हैं।
लैक्टिक अम्ल — दही (सही सुमेलित): दही का निर्माण लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया द्वारा दूध में उपस्थित लैक्टोज़ (दूध की शर्करा) को किण्वित करने से होता है। इस किण्वन प्रक्रिया में लैक्टोज़ लैक्टिक अम्ल में परिवर्तित हो जाता है। इसी अम्ल के कारण दही में खट्टापन आता है, इसका pH कम हो जाता है और विशिष्ट गाढ़ापन व बनावट प्राप्त होती है। दही, छाछ, क्रीम और योगर्ट जैसे दुग्ध उत्पादों में लैक्टिक अम्ल स्वाभाविक रूप से पाया जाता है। इसलिए यह युग्म पूर्णतः सही है।
टार्टरिक अम्ल — अंगूर (सही सुमेलित): टार्टरिक अम्ल एक प्राकृतिक कार्बनिक अम्ल है जो मुख्यतः फलों में पाया जाता है। अंगूर इस अम्ल का सबसे प्रमुख स्रोत हैं। इसके अतिरिक्त इमली, केला तथा अंगूरी वाइन में भी इसकी पर्याप्त मात्रा मिलती है। यह अम्ल फलों के खट्टे तथा चटपटे स्वाद के लिए उत्तरदायी होता है। टार्टरिक अम्ल का उपयोग बेकिंग पाउडर (क्रीम ऑफ टार्टर), खाद्य संरक्षक तथा पेय पदार्थों में एसिडिटी रेगुलेटर के रूप में किया जाता है। अतः यह युग्म भी सही है।
एसिटिक अम्ल — आलू (गलत सुमेलित): एसिटिक अम्ल का मुख्य स्रोत सिरका है, जिसमें लगभग 5–8% एसिटिक अम्ल पाया जाता है। सिरका बनने की प्रक्रिया में शराब या चीनी का एसीटोबैक्टर बैक्टीरिया द्वारा ऑक्सीकरण होता है, और अंतिम उत्पाद के रूप में एसिटिक अम्ल प्राप्त होता है। दूसरी ओर, आलू में प्रमुख रूप से स्टार्च होता है तथा इसके साथ थोड़ी मात्रा में साइट्रिक और ऑक्सैलिक अम्ल पाए जाते हैं। प्राकृतिक रूप से आलू में एसिटिक अम्ल नहीं मिलता, इसलिए दिया गया युग्म गलत है।
प्रश्न 141. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): सल्तनत के क्षेत्रों को मोटे तौर पर दो भागों में विभाजित किया जा सकता है – खालसा और जागीरें।
कारण (R): जागीरों में राज्य के नियंत्रण में आने वाली भूमि शामिल थी।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: D
व्याख्या:
अभिकथन (A) सत्य है। सल्तनत काल में भूमि और राजस्व व्यवस्था को मोटे तौर पर तीन प्रमुख श्रेणियों—खालसा, जागीर (इक्ता) और इनाम—में विभाजित किया जाता था। इन श्रेणियों ने प्रशासनिक नियंत्रण, राजस्व संग्रह और स्थानीय शासन की संरचना को व्यवस्थित करने में केंद्रीय भूमिका निभाई। मुगल काल तक पहुँचते-पहुंचते ये विभाजन और भी स्पष्ट और सुव्यवस्थित हो गए।
खालसा: खालसा वे क्षेत्र थे जो सीधे सुल्तान के नियंत्रण में रहते थे। इनसे प्राप्त समस्त आय शाही खजाने (दार-उल-खिलाफत) में जमा होती थी। खालसा भूमि से होने वाला राजस्व केंद्रीय प्रशासन, सेना, राजदरबार तथा सुल्तान की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करता था। यह व्यवस्था सुल्तान की शक्ति और आर्थिक आधार को मजबूत बनाती थी।
जागीरें / इक्ता: जागीरें वे भूमि-क्षेत्र थे जिन्हें योग्य अधिकारियों और सैन्य सरदारों (इकतेदार या मुक्ति) को उनकी सेवाओं के प्रतिफल के रूप में प्रदान किया जाता था। इकतेदार इन क्षेत्रों से राजस्व वसूल करते थे और बदले में प्रशासनिक तथा सैन्य दायित्व निभाते थे—जैसे सैनिकों की व्यवस्था, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और आवश्यकता पड़ने पर सुल्तान को सैन्य सहायता देना। इक्ता प्रणाली सल्तनत प्रशासन की आधारशिला थी।
इनाम: इनाम वे कर-मुक्त भूमि-दान थे जो धार्मिक व्यक्तियों, विद्वानों, सूफियों या अन्य सम्मानित व्यक्तियों को प्रदान किए जाते थे। इन भूमि-दानों पर राज्य कोई लगान नहीं लेता था। इनाम व्यवस्था का उद्देश्य धर्म, शिक्षा और विद्वत्ता को संरक्षण देना था।
हालाँकि यह कथन कि ” जागीरें राज्य के नियंत्रण में आने वाली भूमि होती हैं ” गलत है । वास्तव में, खालसा सीधे राज्य के नियंत्रण में आने वाली भूमि थी , न कि जागीर। जागीर की भूमि अस्थायी रूप से अधिकारियों को दी जाती थी, जो किसानों से राजस्व वसूलते थे और सेना रखते थे, लेकिन सुल्तान के पास भूमि का स्वामित्व बना रहता था । अतः, कारण (R) गलत है।
प्रश्न 142. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य में आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक कार्यों हेतु निदेशक सिद्धांत महत्वपूर्ण हैं।
कारण (R): आर्थिक और सामाजिक लोकतंत्र की स्थापना करना ही निदेशक सिद्धांतों का मूल उद्देश्य है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: (b)
व्याख्या:
अभिकथन (A) सत्य है। क्योंकि भारतीय संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36 से 51) में निहित नीति निदेशक सिद्धांत राज्य को कल्याणकारी शासन स्थापित करने का मार्ग दिखाते हैं। ये सिद्धांत आर्थिक समानता, सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, तथा कमजोर वर्गों के संरक्षण जैसी आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा प्रदान करते हैं। किसी भी आधुनिक लोकतंत्र का लक्ष्य केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह नागरिकों के सामाजिक व आर्थिक उत्थान का भी प्रयास करता है, जिसे निदेशक सिद्धांत सुनिश्चित करते हैं।
कारण (R) भी पूर्णतः सही है क्योंकि संविधान सभा की बहसों और डॉ. बी. आर. अंबेडकर के दृष्टिकोण में सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र ही वास्तविक लोकतंत्र का आधार माना गया है। मौलिक अधिकार नागरिकों को राजनीतिक स्वतंत्रता और संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करते हैं, जबकि निदेशक सिद्धांत गरीबी, असमानता, अशिक्षा, स्वास्थ्य-सुविधाओं की कमी, श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा तथा सामाजिक कल्याण जैसे विषयों को संबोधित कर आर्थिक और सामाजिक न्याय स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य में निदेशक सिद्धांतों का महत्व इसलिए है क्योंकि उनका मूल उद्देश्य ही आर्थिक और सामाजिक लोकतंत्र की स्थापना है। यदि राज्य को सामाजिक एवं आर्थिक न्याय सुनिश्चित करना है, तो निदेशक सिद्धांत उसके लिए मार्गदर्शक सिद्ध होते हैं। अभिकथन में दिए गए सिद्धांतों के महत्व का आधार वही उद्देश्य है जिसे कारण स्पष्ट करता है। इसलिए (R), (A) की तार्किक और उपयुक्त व्याख्या करता है।
प्रश्न 143. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): सतत विकास पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना होना चाहिये और वर्तमान के विकास को भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों के साथ समझौता नहीं करना चाहिये ।
कारण (R): एजेंडा 21 पर विश्व नेताओं द्वारा 1995 में हस्ताक्षर किए गए थे।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: D
व्याख्या
सतत विकास का अर्थ है ऐसा विकास जो प्रकृति को क्षति पहुँचाए बिना हो तथा वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते समय आने वाली पीढ़ियों की ज़रूरतों से समझौता न किया जाए। यह परिभाषा विश्व स्तर पर स्वीकृत है और इसे वर्ष 1987 में ब्रुंडलैंड आयोग की प्रसिद्ध रिपोर्ट हमारा साझा भविष्य में प्रस्तुत किया गया था। सतत विकास का मूल विचार यह है कि आर्थिक प्रगति, पर्यावरण की सुरक्षा और सामाजिक समानता—इन तीनों को साथ लेकर ही आगे बढ़ा जाए। आज की पीढ़ी को प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग इस प्रकार करना चाहिए कि उनकी गुणवत्ता और मात्रा भविष्य में भी सुरक्षित बनी रहे। इसलिए अभिकथन (A) पूरी तरह सही है।
कारण (R) में दिया गया यह कथन कि विश्व नेताओं ने एजेंडा 21 पर वर्ष 1995 में हस्ताक्षर किए थे, वस्तुतः गलत है। वास्तविकता यह है कि एजेंडा 21 एक वैश्विक कार्य-योजना है जिसे वर्ष 1992 में ब्राज़ील के रियो डी जेनेरो शहर में आयोजित पृथ्वी शिखर सम्मेलन में अपनाया गया था। इस सम्मेलन में देशों को पर्यावरण संरक्षण, गरीबी हटाने, प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, प्रदूषण नियंत्रण तथा सतत विकास की दिशा में मार्गदर्शन देने वाली विस्तृत योजना स्वीकार की गई थी। एजेंडा 21 में “21” का तात्पर्य इक्कीसवीं सदी के विकास कार्यक्रम से है।
प्रश्न 144. सूची -Ⅰ को सूची – ⅠⅠ से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
सूची Ⅰ सूची ⅠⅠ
(मिशन) (प्रक्षेपण तिथि)
- चंद्रयान-3 1. 02 सितंबर 2023
- आदित्य L1 2. 17 फरवरी 2024
- INSAT-3DS 3. 14 जुलाई 2023
- RLV-LEX-01 4. 02 अप्रैल 2023
कूट:
A B C D
(a) 3 1 2 4
(b) 1 3 2 4
(c) 1 3 4 2
(d) 3 1 4 2
उत्तर: A
व्याख्या:
(A) चंद्रयान-3 — 14 जुलाई 2023
प्रक्षेपण तिथि: 14 जुलाई 2023
प्रक्षेपण स्थल: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (श्रीहरिकोटा), आंध्र प्रदेश
रॉकेट: एलवीएम3 एम4 (पूर्व नाम – जीएसएलवी एमके-III)
उद्देश्य:
- चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग क्षमता का प्रदर्शन
- रोवर (प्रज्ञान) के माध्यम से चंद्र सतह की रासायनिक एवं खनिज संरचना का अध्ययन
- चंद्रयान-2 की असफल लैंडिंग के बाद तकनीकी खामियों को दूर करना और विश्वसनीयता प्रदर्शित करना
महत्त्वपूर्ण उपलब्धि:
- 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग।
- भारत चंद्र सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश (यूएस, यूएसएसआर, चीन के बाद)
- चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सफलतापूर्वक उतरने वाला दुनिया का पहला देश।
वैज्ञानिक प्रयोग:
- लैंडर पर: RAMBHA-LP (प्लाज़्मा घनत्व माप), ChaSTE (तापीय चालकता), ILSA (भूकंपीय गतिविधि)
- रोवर पर: APXS और LIBS के माध्यम से मिट्टी व चट्टानों की संरचना का विश्लेषण
(B) आदित्य-एल1 — 02 सितंबर 2023
प्रक्षेपण तिथि: 02 सितंबर 2023
प्रक्षेपण स्थल: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा
रॉकेट: पीएसएलवी-सी57
मिशन का स्वरूप:
- यह भारत का पहला सौर मिशन है।
- इसका उद्देश्य सूर्य के बाह्य वायुमंडल, सौर पवन, चुंबकीय क्षेत्र, सौर धब्बों और सौर गतिविधियों का अध्ययन करना है।
कक्षा और स्थान:
- यह अंतरिक्ष यान पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर लैग्रेंज बिंदु-1 (एल1) के आसपास एक हेलो (प्रभामंडल) कक्षा में स्थापित किया गया।
- एल1 पर स्थित होने के कारण यह सूर्य को बिना ग्रहण या ग्रहों की छाया के लगातार देख सकता है, जो निरंतर सौर अवलोकन के लिए आदर्श स्थिति है।
उपकरण :
- सूर्य के दृश्यमान, परा-बैंगनी एवं एक्स-रे विकिरण का अध्ययन करने वाले उपकरण
- सौर पवन एवं कणों के फ्लक्स और संरचना की जाँच
महत्त्व:
- सौर तूफानों, कोरोना मास इजेक्शन, अंतरिक्ष मौसम की भविष्यवाणी में मदद
- उपग्रह संचार, विद्युत ग्रिड, जीपीएस आदि पर पड़ने वाले सौर प्रभावों को समझने में सहायक
(C) इनसेट-3डीएस — 17 फरवरी 2024
प्रक्षेपण तिथि: 17 फरवरी 2024
रॉकेट: जीएसएलवी-एफ14
श्रेणी: मौसम विज्ञान एवं पर्यावरण निगरानी उपग्रह
इनसेट श्रृंखला का हिस्सा:
- यह इनसेट-3डी और इनसेट-3डीआर की कड़ी में अगला उन्नत मौसम उपग्रह है।
मुख्य उद्देश्य:
- मौसम पूर्वानुमान में सुधार
- चक्रवातों, तूफानों, भारी वर्षा, आंधी, लू आदि की सटीक और समय रहते चेतावनी
- आपदा जोखिम न्यूनीकरण में सहयोग
- बादलों, समुद्र सतह तापमान, आर्द्रता, वायुमंडलीय प्रोफाइल आदि का अध्ययन
उपयोग:
- भारतीय मौसम विभाग को उच्च-रिज़ोल्यूशन डेटा उपलब्ध कराना
- कृषि, मत्स्य, वायु तथा समुद्री यातायात, रक्षा आदि क्षेत्रों में उपयोगी सूचना उपलब्ध कराना
(D) आरएलवी-लेक्स-01 — 02 अप्रैल 2023
पूरा नाम: आरएलवी-लेक्स-01 (पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान – लैंडिंग प्रयोग-01)
तिथि: 02 अप्रैल 2023
स्थान: चैलकेरे (चित्रदुर्ग, कर्नाटक) – एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज
मिशन की प्रकृति:
- यह एक प्रयोगात्मक प्रक्षेपण व लैंडिंग परीक्षण था, जिसमें इसरो ने पुनः प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (आरएलवी) की स्वायत्त रनवे लैंडिंग क्षमता का प्रदर्शन किया।
क्या किया गया?
- एक विमान से आरएलवी-टीडी (टेक्नोलॉजी डेमॉनस्ट्रेटर) को ऊँचाई से छोड़ा गया।
- इसके बाद उसने स्वतः नेविगेट करते हुए रनवे पर विमान की तरह लैंडिंग की।
महत्त्व:
- भविष्य में कम लागत वाले अंतरिक्ष प्रक्षेपण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।
- पुनः प्रयोज्य रॉकेट तकनीक विकसित कर के प्रति प्रक्षेपण लागत घटाना।
- स्पेस-एक्स जैसी निजी कंपनियों द्वारा विकसित रीयूज़ेबल टेक्नोलॉजी के समान भारतीय संस्करण की ओर अग्रसर प्रयास।
प्रश्न 145. ‘हिंद महासागर‘ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- इसे प्राचीन यूनानियों ने इरिथ्रियन सागर कहा था।
- यह भूमध्य रेखा के दोनों तरफ फैला हुआ है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) केवल 2
(d) 1 और 2 दोनों
उत्तर: D
व्याख्या:
कथन 1 सही है: प्राचीन यूनानी भूपर्यटक और व्यापारी हिंद महासागर के उत्तर-पश्चिमी भाग (विशेष रूप से लाल सागर, अदन की खाड़ी, अरब सागर तक के क्षेत्र) को एरिथ्रियन सागर कहते थे। यूनानी भाषा में एरिथ्रोस का अर्थ होता है – लाल। यह नाम उस समय के एक प्रसिद्ध नौवहन-वृत्तांत पेरिप्लस ऑफ़ द एरिथ्रियन सी में मिलता है, जिसमें लाल सागर से अरब तट, भारत के पश्चिमी तट (विशेष रूप से भरुच, बारबारिकम, मुज़िरिस आदि बंदरगाहों) तक के समुद्री व्यापार मार्गों का वर्णन है। उस ग्रंथ में जिस एरिथ्रियन सागर का उल्लेख है, वह केवल आज का लाल सागर ही नहीं, बल्कि अरब सागर और उत्तर-पश्चिमी हिंद महासागर का व्यापक क्षेत्र है।
कथन 2 सही है: हिंद महासागर का भौगोलिक विस्तार इस प्रकार है:
- उत्तर में – एशिया (भारत, अरब प्रायद्वीप, ईरान, पाकिस्तान आदि)
- पश्चिम में – अफ्रीका का पूर्वी तट
- पूर्व में – मलय प्रायद्वीप, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया
- दक्षिण में – अंटार्कटिक महासागर के समीप तक इसका विस्तार
भूमध्य रेखा इस महासागर के लगभग मध्य भाग से होकर गुजरती है, अर्थात्, हिंद महासागर का एक भाग भूमध्य रेखा के उत्तर में (उत्तरी गोलार्ध में) और एक भाग भूमध्य रेखा के दक्षिण में (दक्षिणी गोलार्ध में) स्थित है। इसी कारण यह उष्ण कटिबंधीय, उपोष्ण कटिबंधीय और आंशिक रूप से समशीतोष्ण जलवायु क्षेत्रों को स्पर्श करता है। उत्तर में अरब सागर, बंगाल की खाड़ी आदि और दक्षिण में समुद्री मार्ग ऑस्ट्रेलिया, मेडागास्कर, दक्षिण अफ्रीका आदि की ओर जाते हैं। इस प्रकार हिंद महासागर का विस्तार स्पष्ट रूप से भूमध्य रेखा के दोनों ओर फैला हुआ है, इसलिए कथन 2 भी सही है।
प्रश्न 146. विश्व जल आपूर्ति के निम्नलिखित स्रोतों पर विचार कीजिए तथा इन्हे अवरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
- महासागर
- नदियाँ
- ध्रुवीय बर्फ और हिमनद
- भूगर्भ जल/भूजल
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) 1, 2, 4, 3
(b) 1, 4, 3, 2
(c) 1, 3, 4, 2
(d) 1, 2, 3, 4
उत्तर: C
व्याख्या: पृथ्वी पर जल की उपलब्धता और इसका वितरण अत्यंत असमान है। अधिकांश जल खारे रूप में महासागरों में पाया जाता है, जबकि मीठे जल का हिस्सा बहुत कम है और उसका भी अधिकांश हिस्सा मनुष्यों की पहुँच में नहीं है।
- महासागर – पृथ्वी के कुल जल का लगभग 97.2%
महासागर पृथ्वी का सबसे बड़ा जल भंडार हैं और इनमें पृथ्वी के लगभग 97.2% जल का भंडार है। यहाँ का जल खारा होता है, इसलिए सीधे मानव उपयोग के योग्य नहीं है। फिर भी महासागर पृथ्वी की जलवायु, तापमान संतुलन, पवन एवं वर्षा चक्र को नियंत्रित करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जल की मात्रा के आधार पर महासागर विश्व का प्रथम और सबसे बड़ा जल स्रोत हैं।
- ध्रुवीय बर्फ और हिमनद – लगभग 2.15%
पृथ्वी के कुल मीठे जल का सबसे बड़ा हिस्सा ध्रुवीय क्षेत्रों—अंटार्कटिका, ग्रीनलैंड—तथा हिमालय, आल्प्स जैसे पर्वतीय क्षेत्रों के ग्लेशियरों में जमा है। यह जल ठोस रूप में बर्फ के रूप में संग्रहित होता है और इसे “जमा हुआ मीठा जल भंडार” कहा जाता है। मानव उपयोग के लिए यह सीधे उपलब्ध नहीं है, लेकिन जल चक्र का एक महत्वपूर्ण घटक है। जल की मात्रा के अनुसार यह पृथ्वी का दूसरा सबसे बड़ा जल भंडार है।
- भूगर्भ जल / भूजल – लगभग 0.63%
भूजल पृथ्वी की सतह के नीचे मिट्टी, चट्टानों और जलभृतों (Aquifers) में संग्रहित रहता है। यह मानव उपयोग के लिए उपलब्ध मीठे जल का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। पीने के पानी, सिंचाई तथा औद्योगिक उपयोग में इसका अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। भले ही कुल जल में इसकी मात्रा कम है, लेकिन “उपयोग योग्य मीठे जल” के रूप में भूजल सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। कुल जल के हिसाब से यह तीसरे स्थान पर आता है।
- नदियाँ – लगभग 0.02%
नदियाँ पृथ्वी के कुल जल का अत्यंत छोटा हिस्सा—लगभग 0.02%—रखती हैं, लेकिन मानव सभ्यता के विकास में इनकी भूमिका अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है। कृषि, उद्योग, परिवहन, पेयजल, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन में नदियाँ मुख्य आधार हैं। यद्यपि मात्रा के आधार पर ये सबसे छोटे जल स्रोत हैं, फिर भी मानव जीवन और आर्थिक गतिविधियों के लिए इनका महत्व अनुपम है। जल की मात्रा के क्रम में नदियाँ चौथे स्थान पर आती हैं।
इस प्रकार, अवरोही क्रम में (अधिकतम से न्यूनतम तक): महासागर > ध्रुवीय बर्फ और ग्लेशियर > भूजल > नदियाँ
Q147. निम्नलिखित में से कौन सा/से युग्म सही सुमेलित नहीं है/हैं?
(बांध) (नदी
- बगलिहार बांध – चिनाब
- पंडोह बांध – रावी
- श्रीशैलम बांध – तुंगभद्रा
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 2 और 3
उत्तर: D
व्याख्या:
बगलिहार बाँध – चिनाब नदी: बगलिहार बाँध जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में चिनाब नदी पर निर्मित एक प्रमुख जलविद्युत परियोजना है, जिसे बगलिहार जलविद्युत परियोजना भी कहा जाता है। यह परियोजना भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि के अंतर्गत चिनाब नदी पर भारतीय निर्माणों को लेकर हुए विवादों के कारण भी विशेष रूप से चर्चित रही। बाँध का उद्देश्य जलविद्युत उत्पादन के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करना है।
पंडोह बाँध – व्यास नदी (रावी नहीं): पंडोह बाँध हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित है और यह व्यास नदी पर बनाया गया है, न कि रावी नदी पर। इस बाँध का मुख्य उद्देश्य व्यास–सतलुज लिंक परियोजना के माध्यम से व्यास नदी के जल को एक सुरंग द्वारा सतलुज नदी की ओर मोड़ना है। इस जल को आगे चलकर नाथपा झाकड़ी और भाखड़ा–नांगल जैसी महत्त्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाओं में उपयोग किया जाता है।
श्रीशैलम बाँध – कृष्णा नदी (तुंगभद्रा नहीं): श्रीशैलम बाँध दक्षिण भारत का एक विशाल और बहुद्देशीय बाँध है, जो कृष्णा नदी पर स्थित है। यह बाँध आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले और तेलंगाना की सीमा क्षेत्र में बनाया गया है। श्रीशैलम बाँध जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई सुविधा और बाढ़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि तुंगभद्रा नदी कृष्णा की एक सहायक नदी है, लेकिन श्रीशैलम बाँध सीधे कृष्णा नदी पर ही निर्मित है।
भारत के प्रमुख बाँध और संबंधित नदियाँ:
| बाँध / परियोजना | नदी | राज्य / स्थान | विशेष टिप्पणी |
| भाखड़ा बाँध | सतलुज | हिमाचल/पंजाब | विश्व के सबसे ऊँचे ग्रैविटी बाँधों में |
| नांगल बाँध | सतलुज | पंजाब | भाखड़ा–नांगल परियोजना का हिस्सा |
| टीहरी बाँध | भागीरथी | उत्तराखंड | भारत का सबसे ऊँचा बाँध (हाइड्रो प्रोजेक्ट) |
| रिहंद बाँध (गोविंद बल्लभ पंत सागर) | रिहंद (सोन की सहायक) | उत्तर प्रदेश | उत्तरी भारत का बड़ा जलाशय |
| रतले बाँध | चिनाब | जम्मू-कश्मीर | विवादास्पद हाइड्रो प्रोजेक्ट |
| बगलिहार बाँध | चिनाब | जम्मू-कश्मीर | सिंधु जल संधि से संबंधित |
| सलाल बाँध | चिनाब | जम्मू-कश्मीर | जलविद्युत परियोजना |
| पोंग बाँध | ब्यास | हिमाचल प्रदेश | महाराणा प्रताप सागर जलाशय |
| पंडोह बाँध | ब्यास | हिमाचल प्रदेश | व्यास–सतलुज लिंक |
| हीराकुंड बाँध | महानदी | ओडिशा | एशिया का सबसे लंबा मिट्टी का बाँध |
| रणजीत सागर बाँध | रावी | पंजाब | जलविद्युत व सिंचाई परियोजना |
| नवगुंडा बाँध | तुंगभद्रा | कर्नाटक | सिंचाई परियोजना |
| तुंगभद्रा बाँध | तुंगभद्रा | कर्नाटक | प्रतिष्ठित दक्षिण भारतीय परियोजना |
| श्रीशैलम बाँध | कृष्णा | आंध्र/तेलंगाना | बड़ा जलाशय व हाइड्रो पावर |
| नागार्जुनसागर बाँध | कृष्णा | आंध्र/तेलंगाना | एशिया का सबसे बड़ा ईंट-मिट्टी बाँध |
| अलमट्टी बाँध | कृष्णा | कर्नाटक | जलविद्युत व सिंचाई |
| सरदार सरोवर बाँध | नर्मदा | गुजरात | नर्मदा घाटी परियोजना |
| इंदिरा सागर बाँध | नर्मदा | मध्य प्रदेश | भारत का सबसे बड़ा जलाशय क्षमता अनुसार |
| ओंकारेश्वर बाँध | नर्मदा | मध्य प्रदेश | हाइड्रो पावर परियोजना |
| माताटिला बाँध | बेटवा | उत्तर प्रदेश | बुंदेलखंड क्षेत्र की सिंचाई परियोजना |
| बरगी बाँध | नर्मदा | मध्य प्रदेश | मिशन बरगी परियोजना |
| पंचेश्वर बाँध | सरयू (काली) | भारत–नेपाल | पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना |
| फरक्का बैराज | गंगा | पश्चिम बंगाल | गंगा जल विभाजन (भारत–बांग्लादेश) |
| कोसी बैराज | कोसी | बिहार/नेपाल | बाढ़ नियंत्रण |
| कोयना बाँध | कोयना | महाराष्ट्र | भारत की सबसे शक्तिशाली हाइड्रो परियोजना |
| उकाई बाँध | ताप्ती | गुजरात | जलविद्युत व सिंचाई |
| मेट्टूर बाँध (स्टैनली जलाशय) | कावेरी | तमिलनाडु | तमिलनाडु का सबसे बड़ा बाँध |
| कृष्णराज सागर बाँध | कावेरी | कर्नाटक | मैसूर के पास स्थित |
| इडुक्की बाँध | पेरियार | केरल | आर्क बाँध, हाइड्रो पावर |
| मुल्लापेरियार बाँध | पेरियार | केरल/तमिलनाडु विवाद | भारत का पुराना बाँध |
| पोलावरम परियोजना | गोदावरी | आंध्र प्रदेश | राष्ट्रीय परियोजना |
| जायकवाड़ी बाँध | गोदावरी | महाराष्ट्र | बड़ा जलाशय |
| भामा-अस्केड बाँध | भामा | महाराष्ट्र | पुणे क्षेत्र जल आपूर्ति |
| धनकुशी बाँध | सोन | बिहार | सिंचाई परियोजना |
| रंगित बाँध | रंगित (तिस्ता की सहायक) | सिक्किम | हाइड्रो पावर |
| तिस्ता-III/IV/V परियोजनाएँ | तिस्ता | सिक्किम/बंगाल | शक्तिशाली हाइड्रो परियोजनाएँ |
| मैथन बाँध | बराकर | झारखंड/बंगाल | दामोदर घाटी निगम |
प्रश्न 148. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल गेमिंग बाजार है।
कारण (R): भारत में 950 मिलियन से ज्यादा इंटरनेट के उपयोगकर्ता हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) (A) गलत है, किन्तु (R) सही है
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(d) (A) सही है, किन्तु (R) गलत है
उत्तर: B
व्याख्या:
अभिकथन (A) सही है क्योंकि भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल गेमिंग बाजार माना जाता है, विशेष रूप से डाउनलोड की संख्या और मोबाइल गेमर्स की कुल आबादी के आधार पर। देश में लगभग 590 मिलियन से अधिक सक्रिय मोबाइल गेमर्स हैं, जो सस्ते स्मार्टफोन, किफायती इंटरनेट डेटा, और फ्री-टू-प्ले गेम्स की उपलब्धता के कारण तेजी से बढ़े हैं। हालांकि राजस्व के मामले में भारत अमेरिका, चीन और जापान जैसे देशों से काफी पीछे है, फिर भी उपयोगकर्ताओं की संख्या और ऐप डाउनलोड के आधार पर भारत वैश्विक गेमिंग बाजार में शीर्ष स्थान रखता है। इस प्रकार अभिकथन तथ्यात्मक रूप से बिल्कुल सही है।
कारण (R) भी सही है क्योंकि भारत में 950 मिलियन से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता मौजूद हैं, और यह संख्या हर वर्ष निरंतर बढ़ रही है। इंटरनेट की इस व्यापक पहुँच के पीछे सस्ते 4G डेटा, Jio द्वारा किए गए डिजिटल क्रांति, किफायती स्मार्टफोन, और ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में तेज़ी से बढ़ते डिजिटलीकरण जैसी वजहें प्रमुख हैं। इतने बड़े इंटरनेट उपयोगकर्ता आधार के कारण मोबाइल गेमिंग ऐप्स की पहुँच अत्यधिक बढ़ गई है, जिससे लाखों नए लोग हर वर्ष गेमिंग से जुड़ रहे हैं।
कारण (R), अभिकथन (A) की उचित व्याख्या भी करता है, क्योंकि मोबाइल गेमिंग का विस्तार सीधे-सीधे इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या पर निर्भर करता है। यदि इंटरनेट उपलब्धता व्यापक न होती, तो भारत में 590 मिलियन से अधिक गेमर्स का विशाल बाजार संभव ही नहीं होता। इसलिए (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) को समुचित रूप से स्पष्ट करता है।
प्रश्न 149. निम्नलिखित में से किसने 2025 में अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीता है?
- बानू मुश्ताक
- दीपा भस्थी
- संजय चौहान
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) केवल 3
(b) केवल 1
(c) 1 और 2
(d) 2 और 3
उत्तर: (c)
व्याख्या
अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विश्व के सर्वाधिक प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक है। यह हर वर्ष ऐसी पुस्तक को प्रदान किया जाता है जो मूल रूप से अंग्रेज़ी के अतिरिक्त किसी अन्य भाषा में लिखी गई हो और जिसका उत्कृष्ट अंग्रेज़ी अनुवाद प्रकाशित हुआ हो। यह पुरस्कार लेखक तथा अनुवादक—दोनों को समान रूप से सम्मानित करता है, जिससे वैश्विक साहित्य और अनुवाद के महत्व को प्रोत्साहन मिलता है। इसकी स्थापना 2005 में हुई थी, और 2016 से यह पुरस्कार प्रतिवर्ष एक विशिष्ट पुस्तक को प्रदान किया जा रहा है। वर्ष 2025 में यह पुरस्कार भारतीय मूल की लेखिकाओं बानू मुश्ताक(कर्नाटक की एक उभरती हुई लेखिका) और दीपा भष्ठी (अनुवादक, लेखिका और शोधार्थी) को उनकी उत्कृष्ट कृति हर्ट लैम्प के लिए प्रदान किया गया। हर्ट लैम्प अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने वाला पहला लघु कथा संग्रह है, जिसमें समाज, व्यक्तित्व, स्मृति, स्त्री अनुभव और सांस्कृतिक विविधताओं को कथा के माध्यम से अत्यंत संवेदनशील और कलात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है।
- ‘भारत के उप-राष्ट्रपति’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- उप-राष्ट्रपति, राज्य सभा के पदेन सभापति होते हैं।
- उप-राष्ट्रपति राज्य सभा के सदस्य होते हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) न तो 1 और न ही 2
(b) केवल 1
(c) 1 और 2 दोनों
(d) केवल 2
उत्तर: (b)
व्याख्या:
कथन 1 सही है: अनुच्छेद 64 के अनुसार भारत का उपराष्ट्रपति पदेन राज्य सभा का सभापति होता है, अर्थात उपराष्ट्रपति बनते ही वह स्वतः ही राज्य सभा की अध्यक्षता करता है और इसके लिए अलग नियुक्ति या चुनाव की आवश्यकता नहीं होती। उपराष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान किसी लाभ के पद को धारण नहीं कर सकता, ताकि पद की निष्पक्षता बनी रहे। यदि उपराष्ट्रपति अनुच्छेद 65 के तहत राष्ट्रपति का कार्यभार संभालता है—चाहे राष्ट्रपति पद रिक्त हो या राष्ट्रपति अक्षम—तो उस अवधि में वह राज्य सभा के सभापति के रूप में कार्य नहीं करता। इसका उद्देश्य कार्यपालिका और विधायिका के बीच शक्तियों का स्पष्ट पृथक्करण बनाए रखना है। ऐसी स्थिति में उपराष्ट्रपति को अनुच्छेद 97 के अनुसार राज्य सभा के सभापति के रूप में मिलने वाले वेतन/भत्ते नहीं मिलते; वह केवल राष्ट्रपति पद के लिए निर्धारित वेतन और सुविधाएँ प्राप्त करता है।
कथन 2 गलत है: उपराष्ट्रपति के पद को संविधान में एक स्वतंत्र और गैर-राजनीतिक पद के रूप में स्थापित किया गया है। उपराष्ट्रपति न तो लोकसभा और न ही राज्यसभा के सदस्य होते हैं (अनुच्छेद 66(2)), और यदि कोई व्यक्ति पद ग्रहण करते समय संसद का सदस्य हो तो उसे अपनी सदस्यता छोड़नी पड़ती है। हालाँकि उपराष्ट्रपति स्वयं संसद सदस्य नहीं होते, परंतु उन्हें राज्यसभा का सदस्य चुने जाने की योग्यता अवश्य होनी चाहिए—जैसे भारत का नागरिक होना, न्यूनतम 35 वर्ष आयु, राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने की क्षमता, तथा लाभ के पद से मुक्त होना। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपराष्ट्रपति, जो राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं, सदन की कार्यवाही, संसदीय नियमों और विधायी प्रक्रियाओं को समझने की योग्यता रखते हों।

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